सोनीपत के खेड़ी दहिया गांव में संत रामपाल जी महाराज ने 36 साल पुराना रिश्ता निभाया: बाढ़ पीड़ितों के लिए बने मसीहा

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हरियाणा के जिला सोनीपत की खरखौदा तहसील में स्थित गांव खेड़ी दहिया की यह कहानी केवल एक आपदा की नहीं, बल्कि एक अटूट विश्वास और 36 साल पुराने उस पावन रिश्ते की है जो आज फिर से जीवंत हो उठा है। खेतों में लहलहाती फसलें जब बाढ़ के पानी में समा गईं और किसानों की मेहनत आँखों के सामने बर्बाद होने लगी, तब प्रशासन की उदासीनता के बीच एक मसीहा का उदय हुआ। यह मसीहा कोई और नहीं, बल्कि जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं, जिन्होंने न केवल राहत सामग्री भेजी, बल्कि गांव के बुजुर्गों की उन यादों को भी हरा कर दिया जब उन्होंने दशकों पहले एक इंजीनियर के रूप में इस गांव की सेवा की थी। संत रामपाल जी महाराज की विशेष कृपा से खेड़ी दहिया का दुख अब उत्सव में बदल चुका है।

गांव की वर्तमान स्थिति

खेड़ी दहिया गांव वर्तमान में भीषण जलभराव के संकट से जूझ रहा था। खरीफ की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी थीं और आने वाली गेहूं की बुआई पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे थे। खेतों में कई फीट पानी जमा होने के कारण न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा था, बल्कि पशुओं के चारे का संकट और घरों में आती दरारें ग्रामीणों के लिए मानसिक प्रताड़ना का कारण बन गई थीं। सरकारी स्तर पर ठोस सहायता के अभाव में किसान बेबस थे और अपनी आजीविका को डूबते देख रहे थे।

ग्रामीणों की मार्मिक मांग

जब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते हुए ग्रामीणों की उम्मीदें टूट गईं, तब गांव की पंचायत ने अंतिम आस के रूप में संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना भेजी। उनकी मांगें निम्नलिखित थीं:

  • 15 HP की एक मोटर
  • 6000 फीट 8-इंच ड्रेनेज पाइप

संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सहायता

जैसे ही यह प्रार्थना बरवाला स्थित ट्रस्ट कार्यालय पहुँची, संत रामपाल जी महाराज के दिव्य आदेश से मात्र 3 दिनों के भीतर राहत का विशाल काफिला गांव पहुँच गया। संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत निम्नलिखित सामग्री पूर्णतः निःशुल्क और स्थायी रूप से प्रदान की गई:

  • 15 HP की हैवी-ड्यूटी मोटर: जल निकासी को तेज करने के लिए।
  • 6000 फीट 8-इंच पाइप: खेतों से पानी को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने के लिए।
  • संपूर्ण फिटिंग सेट: जिसमें स्टार्टर, केबल और अन्य सहायक एक्सेसरीज़ शामिल थीं, ताकि ग्रामीणों को एक कील भी बाहर से न खरीदनी पड़े।

36 साल पुराना रिश्ता: जब ‘जेई’ बने ‘संत’ मसीहा

खेड़ी दहिया के लिए यह सहायता केवल उपकरण नहीं थे, बल्कि 36 साल पुराने एक अहसान की वापसी थी। गांव के बुजुर्गों ने भावुक होकर खुलासा किया कि जब संत रामपाल जी महाराज सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर कार्यरत थे, तब उन्होंने इस गांव के सूखे खेतों की प्यास बुझाने के लिए नहर का निर्माण करवाया था। आज नियति का चक्र देखिए, 36 साल पहले जो शख्स सूखे खेतों को बचाने आया था, आज वही पूर्ण संत के रूप में डूबते हुए खेतों को बचाने के लिए मसीहा बनकर लौटा है। ग्रामीणों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि उनका पुराना रक्षक आज अवतार के रूप में उनकी पुकार सुन रहा है।

यह भी पढ़ें: 30 वर्षों का इंतज़ार सिर्फ 3 दिनों में समाप्त: संत रामपाल जी महाराज ने बहादुरगढ़ के बीर बरकताबाद में किया असंभव को संभव

भव्य स्वागत: ढोल-नगाड़ों और पुष्प वर्षा से अभिनंदन

जैसे ही राहत सामग्री से भरे ट्रक गांव की सीमा में दाखिल हुए, पूरा गांव दिवाली जैसा उत्सव मनाने लगा। ग्रामीणों ने हाथों में मालाएं लेकर और ढोल-नगाड़ों के साथ संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप का स्वागत किया। माताओं और बहनों ने छतों से पुष्प वर्षा की, मानो कोई देवता स्वयं उनके दुखों का निवारण करने आया हो।

ग्रामीणों की आवाज़

गांव के लोगों ने अपनी भावनाओं को इन शब्दों में व्यक्त किया:

रिटायर्ड एसआई महावीर सिंह दहिया जी का मानना था कि ‘संत रामपाल जी ने जो हमारे गांव के लिए 6000 फुट पाइप और 15 एचपी की मोटर दी है, उसके लिए हम उनका बहुत धन्यवाद करते हैं। इतना तो सरकार ने भी हमारी सहायता नहीं करी जितनी संत रामपाल जी ने की है।’

ग्रामीण बुजुर्ग का मानना था कि ‘36 साल पहले ये यहाँ जेई थे, इन्होंने सूखे खेतों में पानी पहुँचाया था और आज हमारी डूबती फसलों को बचाया है। ये अब अवतार रूप में हमारे बीच आ गए हैं।’

कपूर प्रधान जी का मानना था कि ‘महाराज जी की दया से मिली इस सहायता का हम सदुपयोग करेंगे और एक-एक खेत बोकर दिखाएंगे। हम तहे दिल से उनका आभार व्यक्त करते हैं।’

जवाबदेही और पारदर्शिता

संत रामपाल जी महाराज ने केवल सहायता ही नहीं दी, बल्कि एक अनुशासित प्रणाली भी स्थापित की। गांव को दिए गए निर्देश पत्र में स्पष्ट किया गया कि सामग्री का सदुपयोग सामूहिक रूप से होना चाहिए ताकि अगली बिजाई समय पर हो सके। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तीन चरणों में ड्रोन वीडियोग्राफी के निर्देश दिए गए:

  • पानी निकालने से पहले
  • जल निकासी के बाद
  • फसल लहलहाने पर

ये वीडियो सतलोक आश्रमों में दिखाए जाएंगे ताकि दानदाताओं को विश्वास रहे कि उनका योगदान मानवता की सच्ची सेवा में लग रहा है।

विश्व उद्धारक और किसान मसीहा संत रामपाल जी महाराज

खेड़ी दहिया की यह घटना प्रमाणित करती है कि जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ही वर्तमान में एकमात्र तत्वदर्शी संत और विश्व उद्धारक हैं। जहाँ बड़ी-बड़ी संस्थाएं और सरकारें विफल हो जाती हैं, वहाँ संत रामपाल जी महाराज की आध्यात्मिक शक्ति और ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ असंभव को संभव कर दिखाती है। वे न केवल किसानों के मसीहा हैं, बल्कि कबीर परमेश्वर के वह प्रतिनिधि हैं जो समाज से नशा, दहेज और भ्रष्टाचार जैसी कुरीतियों को मिटाकर एक स्वर्ण युग की स्थापना कर रहे हैं। आज मानवता को बचाने वाली यह ईश्वरीय शक्ति ही विश्व शांति और मोक्ष का एकमात्र मार्ग है।

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