नगला बाघा, डीग (RJ) में बाढ़ राहत: वर्षों के जलभराव के बाद किसानों को मिली सहायता

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राजस्थान के डीग जिले की कुमेर तहसील स्थित नगला बाघा गांव में पिछले करीब पांच वर्षों से गंभीर जलभराव की समस्या बनी हुई थी। ग्रामीणों के अनुसार गांव की लगभग 200–250 बीघा उपजाऊ कृषि भूमि लगातार पानी में डूबी रहने के कारण खेती योग्य नहीं रह गई थी। किसानों का कहना है कि इस दौरान न खरीफ की फसल हो पाई और न ही रबी की बुवाई संभव हो सकी। इसका असर ग्रामीणों की आजीविका, पलायन, पशुपालन और खाद्य सुरक्षा पर पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की प्रार्थना की। इसके बाद उनकी अन्नपूर्णा मुहिम के तहत 24 घंटे के भीतर गांव में राहत सामग्री और तकनीकी सहायता पहुंचाई गई।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने फेसबुक और यूट्यूब पर संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे बाढ़ राहत कार्यों के बारे में देखा था। इसके बाद ग्राम पंचायत की ओर से व्हाट्सएप के माध्यम से आधिकारिक लेटरपैड पर सहायता के लिए आवेदन भेजा गया। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार आवेदन को तुरंत स्वीकृति मिली और अगले ही दिन आवश्यक सामग्री गांव पहुंच गई।

नगला बाघा बाढ़ राहत अभियान: प्रमुख बिंदु

  • नगला बाघा गांव की लगभग 200–250 बीघा कृषि भूमि करीब पांच वर्षों से जलभराव की चपेट में थी
  • किसानों के अनुसार इस दौरान खरीफ और रबी दोनों फसलें प्रभावित रहीं
  • ग्राम पंचायत ने ऑनलाइन राहत कार्य देखने के बाद संत रामपाल जी महाराज से सहायता मांगी
  • राहत सामग्री आवेदन के 24 घंटे के भीतर गांव पहुंच गई
  • गांव को 2100 फुट 8 इंची पाइप, 10 एचपी किरलोस्कर मोटर, केबल और अन्य उपकरण उपलब्ध कराए गए
  • मोटर संचालन के लिए जनरेटर और डीजल सहायता भी दी गई
  • ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें बाजार से कोई अतिरिक्त सामान खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी

वर्षों से जलभराव के कारण प्रभावित थी खेती और आजीविका

डीग जिले की कुमेर तहसील के ग्राम पंचायत तालफरा के अंतर्गत आने वाले नगला बाघा गांव में लंबे समय से खेतों में पानी भरा हुआ था। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार लगभग 250 बीघा उपजाऊ भूमि स्थायी जलभराव के कारण बेकार पड़ी रही, जिससे खेती पूरी तरह प्रभावित हो गई।

ग्रामीणों ने बताया कि समस्या केवल कृषि तक सीमित नहीं रही। कई मकानों को नुकसान पहुंचा, पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया और खेती बंद होने से कई परिवार कर्ज और पलायन जैसी परिस्थितियों से जूझने लगे। ग्रामीणों के अनुसार गांव के स्कूलों में भी पानी भर गया था, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, जबकि डिस्पेंसरी सेवाएं भी बाधित रहीं।

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ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि इस समस्या को लेकर एसडीएम, कलेक्टर, जिला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिल सका।

सोशल मीडिया के ज़रिए पहुंची मदद की उम्मीद

ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने फेसबुक और यूट्यूब पर संत रामपाल जी महाराज द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में चलाए जा रहे बाढ़ राहत कार्यों के वीडियो देखे। इसके बाद ग्राम पंचायत ने राहत सामग्री के लिए आवेदन भेजने का निर्णय लिया।

सरपंच के अनुसार पंचायत की ओर से व्हाट्सएप के माध्यम से आधिकारिक लेटरपैड पर आवेदन भेजा गया। ग्रामीणों ने कहा कि किसी प्रकार की लंबी कागजी प्रक्रिया नहीं हुई और राहत स्वीकृति तुरंत मिल गई।

इसके बाद राहत सामग्री से भरा काफिला नगला बाघा गांव पहुंचा, जहां खेतों से पानी निकालने के लिए आवश्यक उपकरण ग्राम पंचायत को सौंपे गए।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री

तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत गांव को खेतों से पानी निकालने के लिए व्यापक राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई।

उपलब्ध कराई गई सामग्री

सामग्रीविवरण
पाइप2100 फुट 8 इंची पाइप
मोटर10 एचपी किरलोस्कर मोटर
केबल/तारलगभग 500 फुट
जनरेटर सहायताजनरेटर किराये की व्यवस्था
डीजल सहायताईंधन खर्च की व्यवस्था
अतिरिक्त सामग्रीसक्शन पाइप, असेंबली, क्लैंप, रबर बैंड, स्टील नट-बोल्ट आदि

राहत केवल बड़े उपकरणों तक सीमित नहीं रही। जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज ने मोटर और पाइप व्यवस्था को चालू करने के लिए आवश्यक हर सामग्री उपलब्ध कराई। इसमें स्टार्टर, केबल, एल्बो, सक्शन पाइप, रबर गैस्केट, फेविकोल जैसे चिपकाने वाले पदार्थ और छोटे से छोटे स्टील नट-बोल्ट तक शामिल थे। ग्रामीणों ने कहा, “हमें व्यवस्था शुरू करने के लिए बाजार से एक नट तक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी।”

ग्रामीणों के अनुसार गांव में थ्री-फेज बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं है और बिजली आपूर्ति भी सीमित समय के लिए होती है। पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि गांव में लगभग छह घंटे ही बिजली आती है। इसी कारण मोटर को लगातार चलाने के लिए जनरेटर और डीजल सहायता भी उपलब्ध कराई गई।

ग्राम पंचायत को दिया गया विशेष निवेदन

राहत सामग्री के साथ ग्राम पंचायत को एक औपचारिक निवेदन भी सौंपा गया। इसमें कहा गया कि उपलब्ध कराए गए उपकरणों का सही उपयोग करते हुए जल्द से जल्द खेतों से पानी निकाला जाए ताकि अगली फसल की बुवाई समय पर हो सके।

पंचायत को यह भी बताया गया कि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त सामग्री भी मांगी जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान साझा किए गए संदेश के अनुसार उद्देश्य प्रभावित भूमि से पूरी तरह जल निकासी सुनिश्चित करना था।

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ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया कि खेतों से पानी निकालने और जमीन को खेती के लिए तैयार करने का कार्य तुरंत शुरू किया जाएगा।

किसानों को फिर दिखी खेती की उम्मीद

ग्रामीणों ने कहा कि अब उन्हें वर्षों बाद खेती दोबारा शुरू होने की उम्मीद दिखाई दे रही है। किसानों के अनुसार खेतों से पानी निकलने के बाद गेहूं की बुवाई संभव हो सकेगी।

कुछ ग्रामीणों ने खेती को गांव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि जब खेती प्रभावित होती है तो किसान और मजदूर दोनों प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों ने खेती बहाल होने को खाद्य सुरक्षा, पशुपालन और आर्थिक स्थिरता से भी जोड़ा।

ग्रामीणों के अनुसार नगला बाघा में कई वर्षों से नियमित बुवाई नहीं हो पा रही थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई जल निकासी व्यवस्था भविष्य में भारी बारिश के दौरान भी राहत देने में सहायक होगी।

कई राज्यों में चल रहा है राहत अभियान

कार्यक्रम के दौरान राहत कार्य से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि बाढ़ राहत अभियान के तहत अब तक 400 से अधिक गांवों में सहायता पहुंचाई जा चुकी है। इसके अंतर्गत लाखों फुट पाइप, सैकड़ों पानी की मोटरें और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।

इस दौरान हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों का भी उल्लेख किया गया, जहां बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचाई गई।

फिर खेती की ओर लौटता एक गांव

नगला बाघा के ग्रामीणों के लिए राहत सामग्री का पहुंचना केवल उपकरण उपलब्ध होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वर्षों से रुकी कृषि गतिविधियों के दोबारा शुरू होने की उम्मीद भी लेकर आया। ग्रामीणों ने कहा कि जल निकासी का कार्य पूरा होने के बाद खेत दोबारा खेती योग्य बन सकेंगे और गांव की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।

ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों के अनुसार यह सहायता ऐसे समय में पहुंची, जब कई किसान अपनी जमीन वापस खेती योग्य बनने की उम्मीद लगभग छोड़ चुके थे। अब गांव के लोग अगली बुवाई की तैयारी और खेतों में फिर से फसल लहलहाने की उम्मीद कर रहे हैं।

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