हाल ही में सतलोक आश्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए जनप्रतिनिधियों, किसानों, और आम नागरिकों का तांता लगा रहा। हरियाणा के विभिन्न गांवों से लेकर महाराष्ट्र तक के लोगों ने आश्रम पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से विशेष मुलाकात की। इन मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य संत जी द्वारा समाज सेवा, किसान कल्याण, गौ-रक्षा और असहायों की मदद के लिए किए जा रहे अभूतपूर्व कार्यों की सराहना करना और संकट के समय उनसे मदद प्राप्त करना था।
संकट की घड़ी में बने बेसहारा का सहारा
सतलोक आश्रम में दो अत्यंत हृदय विदारक मामले सामने आए, जहाँ संत रामपाल जी महाराज ने भारी संकट से जूझ रहे परिवारों के लिए तारणहार की भूमिका निभाई।
गोहाना के अनाथ बच्चों की ली संपूर्ण जिम्मेदारी
गोहाना से आए सेवादारों ने तीन अनाथ बच्चों (एक लड़का और दो लड़कियां) की मार्मिक स्थिति से संत जी को अवगत कराया। इन बच्चों के माता-पिता का देहांत हो चुका है। बड़े बेटे ने दिहाड़ी मजदूरी करने का प्रयास किया, लेकिन कमजोरी के कारण वह बीमार पड़ गया, जिससे बच्चियों की पढ़ाई भी छूट गई। यह पीड़ा सुनकर संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत बच्चों को ढांढस बंधाते हुए दृढ़ वादा किया कि जब तक वे अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते, उनके इलाज, भरण-पोषण और मकान तक की पूरी व्यवस्था संत रामपालजी महाराज करेंगे।
गोहाना के अनाथ बच्चों
गाँव धनाना के घायल बेटे के इलाज का उठाया खर्च
संत जी के पैतृक गाँव धनाना की एक गरीब माँ ने रोते हुए बताया कि वह अपने एक बेटे को खो चुकी है, और अब इकलौते जीवित बेटे का भी भयानक एक्सीडेंट हो गया है। पैसों की कमी के कारण इलाज संभव नहीं था। संत रामपाल जी ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाते हुए कहा कि पैसों की कमी के कारण उनके बेटे को कुछ नहीं होने देंगे। उन्होंने सेवादार को जमीनी स्तर पर अस्पताल में देखभाल का जिम्मा सौंपा और सारा आर्थिक खर्च स्वयं वहन करने की घोषणा की।
गाँव धनाना के पीड़ित परिवार : संत रामपाल जी महाराज की दरियादिली: गाँव धनाना से आए गरीब परिवार का उठाया पूरा ज़िम्मा!
गौ-सेवा के लिए त्वरित सहायता और खुला समर्थन
गौ-माता की सेवा और सुरक्षा के लिए संत रामपाल जी महाराज जमीनी स्तर पर व्यापक कार्य कर रहे हैं, जिसे लेकर विभिन्न गांवों के सरपंचों ने उन्हें ‘किसानों का सच्चा हितैषी’ बताया।
चांग गांव में तुरंत राहत (4 दिन में 425 क्विंटल चारा)
भिवानी के चांग गांव की ‘राधा रानी गौशाला’ का चारा जल जाने पर, आश्रम द्वारा मात्र 4 दिन के भीतर ही 425 (सवा चार सौ) क्विंटल सूखा चारा वहां पहुंचा दिया गया। इसके अलावा, ग्रामीणों द्वारा मांगे गए शेड निर्माण के लिए भी संत जी ने पक्का आश्वासन दिया। एक ग्रामीण ने भावुक होकर उन्हें ‘धरती पर ईश्वर का रूप’ बताया।
चांग (भिवानी) गांव के ग्रामीण:
टोहाना और 3 अन्य गांवों की संयुक्त गौशाला को मदद
टोहाना (फतेहाबाद) और अन्य 3 गांवों के सरपंचों, प्रधानों और गौ-सेवकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी निर्माणाधीन संयुक्त गौशाला के लिए चारदीवारी, शेड और पानी की समस्या हेतु मदद मांगी। संत जी ने बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें हर संभव सहायता का पूर्ण आश्वासन दिया। सरपंचों ने स्पष्ट किया कि जैसी योजनाएं संत रामपाल जी चला रहे हैं, वैसा कार्य कोई और कर ही नहीं सकता।
4 गांवों के सरपंच व प्रधान – Tohana :
समाज सुधार और जन-कल्याणकारी मुहिमों का बढ़ता प्रभाव
संत रामपाल जी महाराज के निस्वार्थ कार्यों का प्रभाव केवल उत्तर भारत या उनके अनुयायियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों और आम जनता तक गहराई से पहुँच रहा है।
महाराष्ट्र के धवलपुरी से आया विशेष सम्मान और आमंत्रण
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के धवलपुरी गांव के पूर्व सरपंच और अन्य सक्रिय ग्रामीणों ने संत रामपालजी से विशेष मुलाकात की। पूर्व सरपंच ने धवलपुरी में बने आश्रम और ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत जरूरतमंदों को दी जा रही सहायता की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने दहेज मुक्त शादियों (सादगीपूर्ण विवाह) की सराहना करते हुए संत जी को गांव आने का निमंत्रण दिया। सम्मान के प्रतीक के रूप में, उन्होंने संत जी को धनगर (भेड़ पालक) समुदाय की पारंपरिक शॉल भेंट की। संत जी ने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि उनके इस कदम से भविष्य में समाज सेवा का उनका हौसला और बढ़ा है।
निंदाना गांव (रोहतक) का नागरिक हुआ मुरीद
समाज सेवा का प्रभाव ऐसा है कि रोहतक के निंदाना गांव से एक आम नागरिक (जो अनुयायी नहीं हैं) 15 दिन का इंतज़ार कर काम से छुट्टी लेकर आश्रम पहुंचे। वे संत जी की भलाई की मुहिमों से इतने प्रभावित थे कि अपने पोतों को साथ लेकर दर्शनार्थ आए। संत रामपाल जी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें ‘नाम’ (दीक्षा) लेने का अनुरोध व आध्यात्मिक मार्गदर्शन भी दिया।
निंदाना (रोहतक) गांव का व्यक्ति:
सच्चा हितैषी
हरियाणा के गांवों से लेकर महाराष्ट्र तक के ग्रामीणों, सरपंचों और आम जनता की इन भावपूर्ण बातों को सुनकर संत रामपाल जी महाराज ने अत्यंत विनम्रता का परिचय देते हुए स्वयं को केवल एक ‘सेवक’ बताया। यह जन-समर्थन और श्रद्धा स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि संत रामपाल जी महाराज की निस्वार्थ सेवा, गौ-रक्षा, ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ और बेसहारा लोगों को दिया जा रहा संबल जमीनी स्तर पर समाज में एक सकारात्मक और ऐतिहासिक बदलाव ला रहा है। साथ ही उनके द्वारा प्रचारित की जा रही शास्त्रोक भक्ति अद्भुत लाभ दे रही है।



