राजस्थान के भटकी गांव को 4 साल बाद मिली बड़ी राहत, जलभराव से जूझ रहे किसानों तक पहुंची पाइपलाइन, मोटर और जनरेटर सहायता

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करीब चार वर्षों से राजस्थान के डीग जिले की कामां तहसील स्थित भटकी गांव जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। गांव के खेत, सार्वजनिक स्थान और कई रिहायशी हिस्से गंदे पानी से घिरे हुए थे, जिससे खेती पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद उन्हें कोई स्थायी राहत नहीं मिली। स्थिति तब बदली जब ग्राम पंचायत ने तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की समिति से सहायता की प्रार्थना की। इसके बाद अन्नपूर्णा मुहिम के तहत गांव में पाइपलाइन, मोटर, जनरेटर और डीजल सहित बड़ी राहत सामग्री पहुंचाई गई।

ग्रामीणों ने बताया कि वे स्वयं धनाना धाम पहुंचे थे, जहां उन्होंने संत रामपाल जी महाराज जी की टीम के सामने गांव की स्थिति रखी। ग्रामीणों ने खेतों और रिहायशी इलाकों से पानी निकालने के लिए तत्काल सहायता मांगी ताकि गेहूं की बुवाई का समय निकलने से पहले खेती दोबारा शुरू हो सके।

भटकी बाढ़ राहत अभियान : प्रमुख बिंदु

  • राजस्थान के डीग जिले की कामां तहसील स्थित भटकी गांव लगभग चार वर्षों तक जलभराव से प्रभावित रहा।
  • हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि, सार्वजनिक स्थल और गांव का बुनियादी ढांचा पानी में डूबा रहा।
  • ग्रामीणों के अनुसार करीब 15–20 प्रतिशत आबादी मजदूरी के लिए पलायन कर चुकी थी।
  • ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से बाढ़ राहत सहायता की प्रार्थना की।
  • अन्नपूर्णा मुहिम के तहत गांव को उपलब्ध कराई गई सामग्री:
    • 1100 फीट 8 इंच पाइपलाइन
    • दो 20 एचपी मोटर
    • दो जनरेटर
    • डीजल सहायता
    • मोटर संचालन से जुड़ी फिटिंग सामग्री
  • ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें स्थापना सामग्री पर कोई खर्च नहीं करना पड़ा।
  • एचवाड़ा, पतवारी और लोहागढ़ गांवों में भी राहत कार्य चलने की जानकारी दी गई।

चार वर्षों तक जलभराव से जूझता रहा भटकी गांव

ग्रामीणों ने भटकी गांव की स्थिति को किसी टापू जैसी बताया। उनके अनुसार गांव का श्मशान घाट, जलघर, स्कूल, कृषि भूमि और रिहायशी इलाके वर्षों तक गंदे पानी से घिरे रहे।

यह भी पढ़ें:  संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से लाडवी गाँव को बाढ़ से उबारा

किसानों ने बताया कि उपजाऊ जमीन होने के बावजूद उन्हें परिवार का पालन-पोषण करने के लिए बाजार से अनाज खरीदना पड़ रहा था। पशुओं के लिए चारे की भी भारी कमी हो गई थी, जिसके कारण कई परिवारों को अपने पशु बेचने पड़े।

ग्रामीणों द्वारा बताए गए प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:

प्रभावित क्षेत्रग्रामीणों द्वारा दी गई जानकारी
कृषि नुकसानहजारों बीघा भूमि जलमग्न रही
पशुधन संकटचारे की कमी के कारण पशु बेचने पड़े
पलायनलगभग 15–20% आबादी पलायन कर गई
शिक्षा प्रभावितबच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे थे
स्वास्थ्य सेवाएंडिस्पेंसरी बंद होने की बात कही गई
जलभराव अवधिलगभग 3–4 वर्ष

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने विधायक, मंत्री, कलेक्टर और अन्य अधिकारियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

संत रामपाल जी महाराज से लगाई गई सहायता की प्रार्थना

ग्राम पंचायत के अनुसार ग्रामीणों को पड़ोसी गांव ऐंचवाड़ा में चल रहे राहत कार्यों की जानकारी मिली थी। इसके बाद भटकी गांव के प्रतिनिधि रोहतक जिले स्थित धनाना आश्रम पहुंचे और अपनी समस्या रखी।

पंचायत की ओर से संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों को बताया गया कि गांव को तत्काल आवश्यकता है:

  • दो 20 एचपी मोटर
  • 1100 फीट पाइपलाइन
  • जनरेटर
  • डीजल सहायता

ग्रामीणों ने बताया कि उनकी प्रार्थना स्वीकार किए जाने के बाद कुछ ही दिनों में गांव तक राहत सामग्री पहुंच गई।

पूर्ण संचालन सामग्री के साथ गांव पहुंचा राहत काफिला

राहत सामग्री लेकर पहुंचा काफिला जब भटकी गांव पहुंचा, तब संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने गांव के बाहर मंगलाचरण किया और गुरु वाणी का जाप किया। इसके बाद सामग्री ग्राम पंचायत को सौंपी गई।

सहायता केवल बड़ी मशीनों तक सीमित नहीं रही। संत रामपाल जी महाराज के एक निर्देश पर अनुयायियों ने मोटर संचालन के लिए जरूरी हर सामान उपलब्ध कराया। इसमें स्टार्टर, केबल, एल्बो, सक्शन पाइप, रबर गैस्केट, फेवीकोल और एसआर-998 जैसे एडहेसिव के साथ छोटे स्टील नट-बोल्ट तक शामिल थे। ग्रामीणों ने कहा कि “उन्हें सिस्टम चालू करने के लिए बाजार से एक नट तक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी।”

उपलब्ध कराई गई सामग्री में शामिल हैं:

राहत सामग्रीमात्रा
8 इंच पाइपलाइन1100 फीट
पानी की मोटरदो 20 एचपी मोटर
जनरेटरदो
डीजल सहायताअनुयायियों द्वारा उपलब्ध
अतिरिक्त फिटिंग सामग्रीनिशुल्क उपलब्ध

ग्रामीणों के अनुसार जब तक पानी पूरी तरह नहीं निकल जाता, तब तक डीजल सहायता जारी रखने की बात कही गई है।

बिजली समस्या के कारण उपलब्ध कराए गए अतिरिक्त जनरेटर

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में केवल सिंगल फेज बिजली उपलब्ध है, जबकि 20 एचपी मोटर चलाने के लिए थ्री फेज बिजली की आवश्यकता होती है। इसी समस्या को देखते हुए अन्नपूर्णा मुहिम के तहत अतिरिक्त जनरेटर उपलब्ध कराए गए, ताकि मोटर लगातार संचालित हो सकें।

राहत काफिले के साथ पहुंचे अनुयायियों ने बताया कि जनरेटर किराया और डीजल खर्च भी उपलब्ध कराया गया, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

जल्द दोबारा शुरू होने की उम्मीद जता रहे किसान

ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि 10 से 20 दिनों के भीतर खेतों और गांव से पानी निकाला जा सकता है, जिसके बाद गेहूं की बुवाई दोबारा शुरू हो सकेगी।

यह भी पढ़ें:  बरहाना: खंडहर में जीने को मजबूर राजेंद्र जी के लिए संत रामपालजी महाराज ने नया घर बनाया  

ग्रामीणों ने इस राहत कार्य को गांव के लिए एक बड़ा बदलाव बताया। उनका कहना है कि यदि खेती दोबारा शुरू हो गई तो पलायन रुक सकता है और मजदूरी के लिए बाहर गए परिवार वापस गांव में रह सकेंगे।

एक ग्रामीण ने कहा कि कृषि गांव की मुख्य आजीविका है और लगातार जलभराव के कारण बच्चे तथा पशुधन दोनों प्रभावित हो रहे थे। पंचायत की ओर से यह भी कहा गया कि उपकरणों के रखरखाव के लिए समितियां बनाई जाएंगी, ताकि भविष्य में भी वर्षा के दौरान इनका उपयोग किया जा सके।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत कई गांवों में चल रहा राहत कार्य

संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने बताया कि अन्नपूर्णा मुहिम के तहत 400 से अधिक गांवों में राहत कार्य किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ऐंचवाड़ा, पतवारी और लोहागढ़ जैसे गांवों में भी इसी प्रकार की सहायता पहुंचाई गई है।

कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयानों में कहा गया कि संत रामपाल जी महाराज ने अपने अनुयायियों को बाढ़ प्रभावित किसानों और गांवों की सहायता को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। अनुयायियों के अनुसार आश्रमों में चल रहे निर्माण कार्यों को भी अस्थायी रूप से रोककर संसाधनों को राहत कार्यों में लगाया गया।

ग्रामीणों के लिए उम्मीद का प्रतीक बना राहत अभियान

ग्राम पंचायत को राहत सामग्री सौंपे जाने के बाद ग्रामीणों ने इसे वर्षों की परेशानी के बाद मिली बड़ी राहत बताया। ग्रामीणों का कहना है कि पानी निकलने के बाद गांव में खेती धीरे-धीरे फिर से शुरू हो सकेगी।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि इस सहायता से उन परिवारों में नया भरोसा पैदा हुआ है, जो लंबे समय से आर्थिक नुकसान, पलायन और जलभराव की समस्या से जूझ रहे थे।

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