संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम: दिल्ली के कैर गांव में बाढ़ राहत के लिए करोड़ों की सामग्री भेंट

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नई दिल्ली/नजफगढ़: देश की राजधानी दिल्ली के नजफगढ़ स्थित कैर गांव में पिछले छह महीनों से व्याप्त जलभराव की समस्या का समाधान प्रशासन द्वारा न किए जाने के बाद, जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज ने ऐतिहासिक पहल की है। अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के अंतर्गत संत रामपाल जी महाराज ने कैर गांव के किसानों और निवासियों के लिए करोड़ों रुपये की बाढ़ राहत सामग्री नि:शुल्क उपलब्ध कराई है। इस सामग्री में अत्याधुनिक पनडुब्बी मोटरें और हजारों फीट पाइप शामिल हैं। गांव के नंबरदार और प्रधान द्वारा लगाई गई अर्जी पर मात्र चार दिनों के भीतर यह सहायता गांव पहुंच गई, जिससे क्षेत्र के 80 प्रतिशत जलमग्न हिस्से को फिर से कृषि योग्य बनाने की उम्मीद जगी है।

प्रशासनिक विफलता के बीच ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का उदय

कैर गांव, जो दिल्ली जैसे महानगर का हिस्सा है, पिछले आधे वर्ष से जलप्रलय जैसी स्थिति का सामना कर रहा था। गांव की 80% कृषि भूमि पानी में डूबी हुई थी और जलस्तर लोगों के घरों तक पहुंच चुका था। ग्रामीणों के अनुसार, स्थानीय विधायकों और नेताओं ने केवल चुनाव के समय दर्शन दिए, लेकिन आपदा के समय कोई सुध नहीं ली। 

Kair Village latter head

जब सरकारी सिस्टम पूरी तरह विफल हो गया, तब गांव की पंचायत और नंबरदार ने मुंडका स्थित आश्रम जाकर संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता की अर्जी लगाई। 

महाराज जी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए इस प्रार्थना को न केवल स्वीकार किया, बल्कि ‘सुपरफास्ट’ गति से राहत सामग्री रवाना करने का आदेश दिया।

अत्याधुनिक तकनीकी उपकरण और करोड़ों की राहत सामग्री

संत रामपाल जी महाराज द्वारा कैर गांव भेजी गई राहत सामग्री सामान्य नहीं, बल्कि विशेष भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखकर चुनी गई है। इसमें 7 हॉर्स पावर (HP) की 4 विशेष ‘पनडुब्बी मोटरें’ (Submersible Pumps) शामिल हैं। ये मोटरें पानी के भीतर डूबकर कार्य करने में सक्षम हैं, जो सामान्य पंप सेटों की तुलना में अधिक प्रभावी होती हैं।

इसके साथ ही, पानी को दूर फेंकने के लिए 25,000 फुट लंबा 8 इंच व्यास वाला पाइप और 1,000 फुट बिजली के तारों का जखीरा भेजा गया है। राहत अभियान के सेवादारों ने स्पष्ट किया कि ये मशीनें अच्छी कंपनियों (किर्लोस्कर या क्रॉम्पटन) की हैं और इनकी गुणवत्ता ऐसी है कि ये आगामी 100 वर्षों तक गांव के काम आ सकती हैं।

गांव में उत्सव सा माहौल और भव्य स्वागत

जैसे ही संत रामपाल जी महाराज की राहत सामग्री का विशाल काफिला कैर गांव की सीमा में दाखिल हुआ, पूरा गांव उमड़ पड़ा। ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों, ढोल-नगाड़ों और पुष्प वर्षा के साथ सेवादारों और सामग्री का स्वागत किया। गांव की महिलाओं और बुजुर्गों ने संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप पर मालाएं अर्पित कीं और उन्हें ‘भगवान’ का दर्जा देते हुए आभार प्रकट किया। गांव के नंबरदार ने महाराज के सम्मान में पगड़ी, शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट किया। ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि जो काम प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या प्रशासन 6 महीने में नहीं कर सका, वह एक संत ने मात्र 4 दिनों में कर दिखाया।

सेवा के साथ शर्त: अगली फसल की बिजाई अनिवार्य

संत रामपाल जी महाराज ने राहत सामग्री सौंपने के साथ-साथ एक सख्त निर्देश पत्र (Letter of Instruction) भी भेजा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि सामग्री देने का उद्देश्य केवल दिखावा नहीं, बल्कि परिणाम प्राप्त करना है। महाराज ने आदेश दिया है कि गांव वाले मिलकर निर्धारित समय में पानी निकालें ताकि अगली फसल (गेहूं) की बिजाई सुनिश्चित हो सके। सेवादारों ने बताया कि गांव की वर्तमान स्थिति की ‘ड्रोन’ से वीडियोग्राफी की गई है।

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अगली वीडियो पानी निकलने के बाद और तीसरी वीडियो लहलहाती फसल की बनाई जाएगी, ताकि दानदाताओं के पैसे की सार्थकता सिद्ध हो सके। महाराज ने चेतावनी भी दी कि यदि लापरवाही के कारण फसल नहीं बोई गई, तो भविष्य में ट्रस्ट किसी भी आपदा में सहायता नहीं करेगा।

निस्वार्थ सेवा और राजनीति से दूरी

संत रामपाल जी महाराज द्वारा संचालित यह अभियान पूर्णतः नि:शुल्क है। सेवादारों ने स्पष्ट किया कि संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य न तो राजनीति में जाना है और न ही वोट बैंक बनाना। वे स्वयं एक किसान परिवार से हैं, इसलिए वे किसानों का दर्द समझते हैं। वर्तमान में यह मुहिम केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 300 से अधिक गांवों में सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। जहां अन्य कथावाचक और धार्मिक संस्थान दान के नाम पर धन संचय करते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज दान का शत-प्रतिशत पैसा समाज सेवा, चिकित्सा, और शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं।

मानवीय संवेदना की मिसाल

कैर गांव में पहुंची यह राहत केवल मशीनी सहायता नहीं, बल्कि उन किसानों के लिए ‘जीवनदान’ है जिनकी फसलें बर्बाद हो चुकी थीं और बच्चे स्कूलों तक नहीं जा पा रहे थे। 25,000 फीट पाइप और उच्च क्षमता वाली मोटरों के माध्यम से अब कैर गांव को स्थायी समाधान मिल गया है। यह घटना दर्शाती है कि समाज में जब प्रशासनिक व्यवस्थाएं मौन हो जाती हैं, तब आध्यात्मिक संस्थाएं ही वास्तविक संबल बनकर उभरती हैं।

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