सेम की मार से जूझते जनाचौली-आलुका गांव को मिली नई उम्मीद, अन्नपूर्णा मुहिम फेज 2 से पहुंची बड़ी राहत

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हरियाणा के पलवल जिले की तहसील हथीन के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जनाचौली-आलुका लंबे समय से सेम यानी जलभराव की गंभीर समस्या से परेशान थी। ग्रामीणों के अनुसार गांव की करीब 550 एकड़ जमीन पानी में डूब जाती थी। कई किसानों के पास अपनी उपजाऊ जमीन होते हुए भी स्थिति ऐसी बन गई थी कि उन्हें बच्चों के भोजन और पशुओं के चारे के लिए अनाज मोल (पैसे देकर) खरीदना पड़ता था। अन्नपूर्णा मुहिम के पहले चरण में राहत मिलने के बाद अब दूसरे चरण में संत रामपाल जी महाराज के किसान मजदूर बचाओ अभियान के तहत गांव में 11,000 फीट 8 इंच पाइप पहुंचाए गए हैं।

मुख्य बातें

  • जनाचौली-आलुका गांव में लंबे समय से सेम और जलभराव की समस्या बनी हुई थी।
  • ग्रामीणों के अनुसार करीब 550 एकड़ भूमि प्रभावित थी।
  • पहले चरण में 10,000 फीट पाइप और 3 मोटरें उपलब्ध करवाई गई थीं।
  • पहली मदद से लगभग 250 एकड़ जमीन को राहत मिली और बिजाई संभव हुई।
  • दूसरे चरण में गांव ने 11,000 फीट पाइप और 20 HP मोटर की प्रार्थना रखी।
  • सर्वे के बाद 11,000 फीट 8 इंच पाइप गांव में पहुंचाए गए।
  • पाइपलाइन दबने के तुरंत बाद मोटर उपलब्ध करवा दी जाएंगी। 
  • कुल मिलाकर गांव को अब तक 21,000 फीट पाइप सहायता मिल चुकी है।
  • पानी को गौंछी ड्रेन में डालकर स्थायी निकासी की योजना बनाई गई है।

550 एकड़ जमीन पर सेम की मार

जनाचौली-आलुका गांव के किसानों ने बताया कि सेम और जलभराव के कारण उनकी जमीन कई सालों से पूरी तरह प्रभावित थी। खेतों में पानी भरने से फसलें खराब हो जाती थीं और कई जगह तो खेती करना असंभव हो गया था।

ग्रामीणों की पीड़ा यह थी कि जिनके पास 20-20 एकड़ जमीन थी, वे भी अपने परिवार के लिए अनाज और पशुओं के लिए चारा खरीदने को मजबूर थे। एक किसान ने कहा कि “हमारे खेतों में कई साल से कुछ पैदा नहीं हो रहा था, अब उम्मीद है कि फसल फिर लहराएगी।”

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पहले चरण में मिली राहत से 250 एकड़ जमीन बची

गांव वालों ने बताया कि नवंबर 2025 में उन्होंने पहली बार संत रामपाल जी महाराज के चरणों में प्रार्थना रखी थी। उस समय गांव को 10,000 फीट पाइप और 3 मोटरें उपलब्ध करवाई गई थीं। इस सहायता के बाद किसानों ने कुछ पाइपलाइन दबाई और पानी निकासी शुरू की।

ग्रामीणों के अनुसार इस पहले चरण से लगभग 250 एकड़ जमीन को राहत मिली और वहां बिजाई भी हो पाई। इससे गांव वालों में विश्वास जगा कि अगर बची हुई जमीन के लिए भी व्यवस्था हो जाए, तो पूरा क्षेत्र फिर खेती योग्य बन सकता है।

दूसरे चरण में फिर लगाई प्रार्थना

पहले चरण से राहत मिलने के बाद गांव वालों ने बची हुई जमीन के लिए दोबारा प्रार्थना रखी। इस बार 11,000 फीट पाइप और 20 HP मोटर की मांग की गई, ताकि शेष खेतों का पानी गौंछी ड्रेन में निकाला जा सके।

गांव वालों के अनुसार प्रार्थना के बाद बहुत तेजी से कार्रवाई हुई। ग्रामीणों ने बताया कि वे दोपहर में प्रार्थना देकर लौटे और कुछ ही देर बाद सर्वे टीम का फोन आ गया। सर्वे टीम ने गांव पहुंचकर स्थिति देखी और अगले ही दिन राहत सामग्री गांव में पहुंच गई।

16 घंटे में पहुंची राहत, गांव में खुशी की लहर

जनाचौली-आलुका गांव के लोगों ने इस सहायता को “मन की गति जैसी सेवा” बताया। कई ग्रामीणों ने कहा कि वे अभी गाँव में लौटे भी नहीं थे कि सर्वे टीम गांव पहुंच गई। अगले दिन सुबह जब लोगों ने देखा तो पाइपों से भरी गाड़ियां गांव में पहुंच चुकी थीं।

गांव वालों ने ढोल-नगाड़ों, ट्रैक्टरों और फूल मालाओं के साथ राहत सामग्री का स्वागत किया। ग्रामीणों के शब्दों में, “होली-दिवाली से भी ज्यादा खुशी है, क्योंकि अब खेत बचेंगे और बच्चों का भविष्य बचेगा।”

राहत सामग्री का विवरण

सामग्री/कार्यविवरण
गांवआलुका/जनाचौली
प्रभावित क्षेत्रलगभग 550 एकड़
पहले चरण की सहायता10,000 फीट पाइप और 3 मोटरें
पहले चरण का लाभलगभग 250 एकड़ जमीन को राहत
दूसरे चरण की सहायता11,000 फीट 8 इंच पाइप
मोटरपाइपलाइन दबने के बाद 20 HP मोटर तुरंत दे दी जाएगी

किसानों ने कहा: “सरकार से गुहार लगाकर थक गए थे”

गांव के किसानों और बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने लंबे समय तक नेताओं, विधायकों, मंत्रियों और प्रशासन से मदद की उम्मीद रखी, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले। कई ग्रामीणों ने कहा कि रिश्तेदारी और राजनीतिक पहचान होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

एक ग्रामीण ने कहा, “हम सरकार के पास गुहार लगाते-लगाते थक चुके थे। जब संत रामपाल जी महाराज के पास विनती की, तो पहली बार में मदद मिली और अब दूसरी बार भी इतनी जल्दी सामान पहुंच गया।”

गांव की माताओं ने गीतों में सुनाई पीड़ा

जनाचौली-आलुका गांव की माताओं और बहनों ने अपनी पीड़ा गीतों के माध्यम से व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पानी भरने से घर-परिवार की जरूरतें तक प्रभावित हो गई थीं। बच्चों की पढ़ाई, खाने-पीने की व्यवस्था, पशुओं का चारा और परिवार की आजीविका सभी पर संकट था।

एक महिला ने कहा कि “बच्चों के लिए दाना भी नहीं था, आज संत रामपाल जी ने हमारी बहुत मदद की है।” यह शब्द गांव की उस वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं, जिसमें जलभराव केवल खेतों की समस्या नहीं, बल्कि पूरे परिवार के जीवन का संकट बन जाता है।

अब गौंछी ड्रेन तक जाएगा खेतों का पानी

दूसरे चरण में पहुंचाए गए पाइपों को जमीन के नीचे दबाकर गौंछी ड्रेन तक ले जाने की योजना है। पाइपलाइन पूरी तरह दबने के बाद सर्वे होगा और उसके बाद मोटर उपलब्ध करवाई जाएगी। मोटर लगने के बाद खेतों में जमा पानी पाइपलाइन के माध्यम से ड्रेन में डाला जाएगा।

इस व्यवस्था से बारिश या सेम के कारण खेतों में जमा पानी को तेजी से निकाला जा सकेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था पूरी तरह चालू होते ही बची हुई जमीन भी खेती योग्य हो जाएगी।

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किसानों के लिए यह मदद क्यों महत्वपूर्ण है?

जनाचौली-आलुका गांव के लिए यह सहायता केवल पाइप या मोटर की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह किसानों की आजीविका से जुड़ा समाधान है। जब खेत पानी में डूब जाते हैं तो किसान की पूरी आर्थिक व्यवस्था रुक जाती है।

इस सहायता से गांव को ये लाभ मिलेंगे:

  • सेम और जलभराव की समस्या खत्म होगी।
  • खेतों में समय पर बिजाई संभव होगी।
  • पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ेगी।
  • किसानों को अनाज खरीदने की मजबूरी खत्म होगी।
  • गांव की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
  • मजदूरों को खेतों में काम मिलेगा।
  • बंजर पड़ी जमीन फिर उपजाऊ बनेगी।
  • 36 बिरादरी को सामूहिक लाभ मिलेगा।

अन्नपूर्णा मुहिम और किसान मजदूर बचाओ अभियान

संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम और किसान मजदूर बचाओ अभियान के तहत बाढ़ और जलभराव प्रभावित गांवों में राहत कार्य किए जा रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत पाइप, मोटर और अन्य जरूरी सामग्री देकर गांवों में पानी निकासी की व्यवस्था बनाई जा रही है।

जनाचौली-आलुका गांव में पहले चरण और दूसरे चरण की सहायता ने ग्रामीणों में यह भरोसा जगाया है कि वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान संभव है। गांव वालों ने इसे “संकट के समय मिली संजीवनी” बताया।

ये खबर जनाचौली-आलुका गांव तक सीमित नहीं 

जनाचौली-आलुका गांव की कहानी उन किसानों की कहानी है जिनके पास जमीन थी, लेकिन जलभराव ने उनसे खेती का अधिकार छीन लिया था। 550 एकड़ तक फैली सेम की समस्या ने गांव को वर्षों तक परेशान किया। पहले चरण में 10,000 फीट पाइप और 3 मोटरों से लगभग 250 एकड़ जमीन को राहत मिली। अब दूसरे चरण में 11,000 फीट 8 इंच पाइप पहुंचने से गांव के शेष खेतों में भी हरियाली लौटने की उम्मीद जगी है।

अब गांव की पंचायत और किसानों की जिम्मेदारी है कि पाइपलाइन को जल्द से जल्द सही स्थानों पर दबाएं, ताकि मोटर लगने के बाद पानी निकासी शुरू हो सके। यह व्यवस्था सफल होते ही, आलुका गांव की डूबी हुई जमीन फिर से फसल, चारा और खुशहाली देने लगेगी।

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