राजस्थान के डीग जिले के अभौरा गाँव में वर्षों पुराना जलभराव संकट समाप्त, संत रामपाल जी महाराज ने बचाई किसानों की लाज

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​राजस्थान राज्य के डीग जिले के अंतर्गत आने वाली कुमेर तहसील की ग्राम पंचायत अभौरा पिछले कई वर्षों से एक गंभीर प्राकृतिक और प्रशासनिक आपदा का दंश झेल रही थी। इस गाँव के खेतों में लगातार पानी भरा रहने के कारण रब्बी और खरीफ दोनों ही मुख्य फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी थीं। स्थिति इतनी भयावह थी कि लगभग 350 से 400 बीघे जमीन बिना बुवाई के पानी के नीचे डूबी हुई थी। स्थानीय किसानों की रोजी-रोटी पूरी तरह छिन चुकी थी, जिसके कारण बच्चों की शिक्षा, डिस्पेंसरी की सुविधाएं और परिवारों का भरण-पोषण अत्यधिक संकट में आ गया था। फसलों के अभाव में पशुओं के चारे की भी विकट समस्या उत्पन्न हो गई थी। ग्रामीण जनता और किसान यूनियन ने शासन और प्रशासन के हर स्तर पर अपनी गुहार लगाई, अधिकारियों के दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटे, परंतु प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्रामीणों के आंसुओं की कोई कदर नहीं की गई। चारों तरफ से निराश हो चुके ग्रामीणों के बच्चों के पेट पालने का एकमात्र सहारा सरकारी राशन कार्ड से मिलने वाला गेहूं ही बचा था।

​समाचार मुख्य अंश 

  • अभूतपूर्व संकट: राजस्थान के डीग जिले के ग्राम पंचायत अभौरा में पिछले 4 वर्षों से लगातार जलभराव के कारण 350 से 400 बीघे कृषि भूमि बिना बुवाई के बंजर पड़ी थी।
  • त्वरित ईश्वरीय सहायता: सरकारी प्रशासन द्वारा कोई सुनवाई न होने के बाद ग्रामीणों की लिखित प्रार्थना पर संत रामपाल जी महाराज ने मात्र 5 दिनों के भीतर विशाल राहत काफिला भेजा।
  • विशाल तकनीकी मशीनरी: जल निकासी को सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा 8600 फुट लंबा 8 इंची पाइप और 10 HP की दो शक्तिशाली मोटरें प्रदान की गईं।
  • पूर्ण वित्तीय एवं तकनीकी भार: जनरेटर, डीजल, स्टार्टर, पाइप जोड़ने वाले फेविकोल और नट-बोल्ट समेत हर छोटे-बड़े उपकरण का पूरा खर्च संत रामपाल जी महाराज ने खुद वहन किया है।
  • भविष्य की सुरक्षा और चेतावनी: संत रामपाल जी महाराज ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस सामग्री का उपयोग कर निर्धारित समय पर पानी निकाला जाए ताकि 36 बिरादरी की आजीविका सुरक्षित हो सके।

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​गाँव अभौरा के पीड़ित ग्रामीणों ने त्वरित सहायता हेतु संत रामपाल जी महाराज के समक्ष लगाई अर्जी

​जब सरकारी तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ और किसानों को अपनी उपजाऊ भूमि हमेशा के लिए नष्ट होती दिखी, तब अभौरा गाँव की ग्राम पंचायत और प्रबुद्ध नागरिकों ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। पास के ही गाँव तालफरा में संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही राहत गतिविधियों से प्रभावित होकर ग्राम पंचायत अभौरा के सरपंच और किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने संत जी की शरण में जाने का मन बनाया। ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के भरतपुर स्थित संत रामपाल जी महाराज के कार्यालय में जाकर अपने लेटरपैड पर एक विधिवत लिखित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत की। इस अर्जी में गाँव की भौगोलिक विकटता और जलभराव को दूर करने के लिए आवश्यक उपकरणों की मांग की गई थी।

​पाँच दिनों के भीतर अभौरा की धरती पर पहुँचा संत रामपाल जी महाराज का विशाल राहत काफिला

​ग्राम पंचायत अभौरा की करुण पुकार को सुनते ही जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी विलंब के तत्परता दिखाई। बिना किसी कानूनी व कागजी औपचारिकता या राजनीतिक दृष्टिकोण के, प्रार्थना पत्र मिलने के महज पांच दिनों के भीतर संत रामपाल जी महाराज ने राहत सामग्री से लदे ट्रकों के एक विशाल काफिले को अभौरा गाँव के लिए रवाना कर दिया। कुमेर तहसील के इस सुदूर गाँव में जैसे ही ट्रकों की लंबी कतारें पहुँचीं, पूरे गाँव का माहौल बदल गया। संत रामपाल जी महाराज के सेवादारों ने गाँव की सीमा पर पहुँचकर गुरु वाणी का जाप, मंगलाचरण और गुरु स्तुति की। इस अद्भुत दृश्य को देखकर ग्राम पंचायत के सदस्यों सहित समस्त ग्रामीणों की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। पूरे गाँव ने एकत्रित होकर फूल-मालाओं और गगनभेदी जयकारों के साथ संत रामपाल जी महाराज के इस परोपकारी काफिले का ऐतिहासिक स्वागत किया।

​संत रामपाल जी महाराज द्वारा ग्राम पंचायत को सौंपी गई पूर्ण राहत सामग्री का विवरण

​संत रामपाल जी महाराज ने न केवल किसानों की मांग को पूरा किया, बल्कि आवश्यकता को देखते हुए मांग से भी अधिक अत्याधुनिक सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराई। जल निकासी के इस व्यापक अभियान को पूरा करने के लिए संत जी की ओर से प्रदान की गई राहत सामग्री का पूरा डेटा नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से अंकित है:

क्र. सं.सामग्री / उपकरण का नामनिर्दिष्ट क्षमता / आकारप्रदान की गई मात्रावित्तीय वहनकर्ता
1हेवी-ड्यूटी डिलीवरी पाइप8 इंची व्यास8600 फुटसंत रामपाल जी महाराज
2शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर10 HP (हॉर्स पावर)02 नगसंत रामपाल जी महाराज
3ऑटोमैटिक मोटर स्टार्टरमानक क्षमता02 नगसंत रामपाल जी महाराज
4हैवी जनरेटर सेट (पावर बैकअप)उच्च क्षमताआवश्यकतानुसारसंत रामपाल जी महाराज
5संचालन हेतु ईंधन (डीजल व पेट्रोल)पूर्ण खर्चसंत रामपाल जी महाराज
6कनेक्टिंग केबल (तार)40 फुट और वाइंडिंगपूर्ण सेटसंत रामपाल जी महाराज
7सहायक उपकरण (बैंड असेंबली, सुंडिया, निप्पल, फुटबॉल)स्टील नट-बोल्ट सहितपूर्ण सेटसंत रामपाल जी महाराज
8पाइप जॉइनिंग फेविकोल (चिपकाने का विलायक)औद्योगिक ग्रेडआवश्यकतानुसारसंत रामपाल जी महाराज

इस संपूर्ण व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सरपंच अथवा किसी भी ग्रामीण को अपनी जेब से ₹10 भी खर्च करने की आवश्यकता नहीं है; जनरेटर के किराए से लेकर डीजल के पैसे तक का पूरा वित्तीय भार स्वयं संत रामपाल जी महाराज उठा रहे हैं।

​संत रामपाल जी महाराज का अभौरा ग्राम पंचायत के नाम विशेष लिखित संदेश और कड़े निर्देश

​राहत सामग्री सौंपने के साथ ही संत रामपाल जी महाराज की ओर से उनके शिष्यों द्वारा ग्राम पंचायत के समक्ष एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधिकारिक पत्र पढ़कर सुनाया गया और उसे पंचायत को हैंडओवर किया गया। इस पत्र के माध्यम से संत जी ने ग्रामीणों को सचेत करते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:

  1. समयबद्ध जल निकासी: संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई इस अमूल्य सामग्री का सदुपयोग करके ग्रामीणों को आपसी तालमेल के साथ दिन-रात एक करके जल्द से जल्द गाँव का पानी बाहर निकालना होगा।
  2. लापरवाही पर भविष्य की सहायता बंद: यदि इस बार भी ग्रामीणों की आपसी सुस्ती या लापरवाही के कारण पानी नहीं निकला और फसल की बिजाई नहीं हो सकी, तो भविष्य में संत रामपाल जी महाराज का ट्रस्ट इस गाँव को किसी भी आपदा में कोई सहायता प्रदान नहीं करेगा।
  3. सामग्री की असीमित उपलब्धता: यदि कार्य के दौरान 8600 फुट पाइप या दो मोटरों के अलावा भी किसी अन्य सामान की जरूरत महसूस होती है, तो ग्रामीण तुरंत संत जी से प्रार्थना कर और सामान मंगा सकते हैं। सामान चाहे कितना भी लगे, लेकिन खेतों से पानी निकलना अनिवार्य है।
  4. ड्रोन विजुअल द्वारा पारदर्शिता: संत जी के ट्रस्ट द्वारा पानी भरे हुए गाँव की ड्रोन से पहली वीडियो बनाई जा चुकी है। जल निकासी के बाद दूसरी वीडियो बनाई जाएगी और जब फसलें लहलहाएंगी तब तीसरी वीडियो बनाई जाएगी। इन तीनों वीडियो को सतलोक आश्रमों के समागमों में प्रोजेक्टर्स पर दिखाया जाएगा ताकि दानकर्ताओं को पूर्ण विश्वास रहे कि उनके दान का एक-एक पैसा जनकल्याण में लग रहा है।

​अभौरा ग्राम पंचायत के सरपंच और उपस्थित मौजिज लोगों ने इस निवेदन पत्र की शर्तों को सहर्ष स्वीकार करते हुए इस पर सामूहिक हस्ताक्षर करके अपनी आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की।

​संत रामपाल जी महाराज के अद्वितीय सामाजिक कार्यों एवं अन्नपूर्णा मुहिम का विस्तार

​संत रामपाल जी महाराज का उद्देश्य किसी भी प्रकार की राजनीति करना या चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि उनका एकमात्र लक्ष्य निस्वार्थ भाव से पीड़ित समाज की सेवा करना है। संत जी ने समाज में व्याप्त भुखमरी और गरीबी को मिटाने के लिए ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ की शुरुआत की है। इस ऐतिहासिक योजना के अंतर्गत देश के किसी भी हिस्से में यदि कोई व्यक्ति संकट में है, तो उसे रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान की सुविधा पूर्णतः निशुल्क प्रदान की जाती है। यदि किसी गरीब परिवार की बेटियों की पढ़ाई कॉलेज की फीस न भर पाने के कारण छूट जाती है, तो संत रामपाल जी महाराज खुद फीस भरकर उनकी शिक्षा सुचारू करवाते हैं। इसके साथ ही, गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों का सरकारी अस्पतालों में इलाज और बेघर लोगों को पक्के मकान बनवाने का कार्य भी संत जी के माध्यम से निरंतर किया जा रहा है। वर्तमान में देश के 400 से अधिक बाढ़ प्रभावित गाँवों में संत जी की यह राहत सेवा सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है और निरंतर जारी है।

समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण के प्रणेता संत रामपाल जी महाराज

​वर्तमान युग में जहाँ बड़े-बड़े कथावाचक समाज से लाखों रुपये ऐंठकर धर्म के नाम पर पाखंड फैलाते हैं और आपदा के समय अपने कदम पीछे खींच लेते हैं, वहीं संत रामपाल जी महाराज सच्चे परमार्थ का साक्षात उदाहरण पेश कर रहे हैं। अभौरा गाँव के युवाओं, बुजुर्गों और किसान यूनियन के पदाधिकारियों के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज उनके लिए कोई साधारण मानव नहीं बल्कि साक्षात भगवान का रूप हैं। जिस प्रकार 15 अगस्त 1947 को भारत देश अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ था, ठीक उसी प्रकार अभौरा गाँव को इस जानलेवा जलभराव की गुलामी से आजाद कराने का श्रेय केवल और केवल संत रामपाल जी महाराज को जाता है। संत जी द्वारा प्रदान की गई यह सामग्री इस गाँव की ३६ बिरादरी के लिए एक अनमोल दैवीय उपहार और वरदान सिद्ध हुई है, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार से बाहर निकालकर खुशहाली के मार्ग पर अग्रसर करेगी। संपूर्ण राष्ट्र संत रामपाल जी महाराज के इस अप्रतिम, निस्वार्थ और करुणामयी परोपकार के लिए सदा उनका ऋणी रहेगा।

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