नारायणपुरा में दिखी सेवा, स्वच्छता और जनभागीदारी की अनोखी मिसाल, संत रामपाल जी महाराज के हजारों शिष्यों ने मिलकर पूरे गांव को साफ करने का उठाया बीड़ा

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फाजिल्का जिले की तहसील अबोहर के अंतर्गत आने वाला पंजाब-राजस्थान सीमा पर स्थित गांव नारायणपुरा रविवार सुबह एक अलग ही माहौल में नजर आया। आम दिनों की तरह यहां सिर्फ ग्रामीणों की चहल-पहल नहीं थी, बल्कि गांव की गलियों में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की लंबी कतारें हाथों में झाड़ू, कस्सी और सफाई का सामान लेकर दिखाई दे रही थीं। गांव की पंचायत की अपील पर संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी बड़ी संख्या में यहां पहुंचे और पूरे गांव को स्वच्छ बनाने का अभियान शुरू किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण के साथ हुई। पंचायत के प्रतिनिधियों ने मौजूद लोगों का स्वागत किया और इसके बाद गांव की मुख्य सड़क से सफाई अभियान का काफिला आगे बढ़ा। जिस रास्ते से यह काफिला गुजरता गया, वहां सफाई का ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे देखकर गांव के बुजुर्ग भी भावुक हो उठे।

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पंचायत की एक अपील और पूरे गांव में पहुंच गई सेवा की बड़ी टोली

गांव के सरपंच गुरलाभ सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले वे स्वयं संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों से मिले और गांव में सफाई अभियान चलाने की प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि पंचायत की ओर से केवल एक आवेदन दिया गया था। इसके बाद कुछ ही दिनों में सेवा के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवक गांव पहुंच गए।

सरपंच ने बातचीत के दौरान कहा, “हमने किसी प्रकार का चंदा नहीं दिया। गांव से एक भी रुपये की मांग नहीं हुई। यहां तक कि हमें भी चाय और भोजन सेवा के रूप में मिला। यह पूरी तरह निःस्वार्थ सेवा है। हर गांव में ऐसा अभियान होना चाहिए ताकि लोग अपने गांव की सफाई के प्रति जागरूक हों।”

उन्होंने आगे कहा कि अगर हर व्यक्ति अपने घर और गली की जिम्मेदारी समझ ले तो पूरा गांव अपने आप साफ-सुथरा रह सकता है।

सुबह से शुरू हुआ अभियान, गांव की हर गली और हर कोने तक पहुंची सफाई

सफाई अभियान केवल मुख्य सड़क तक सीमित नहीं रहा। संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों की अलग-अलग टोलियां बनाई गईं जो गांव की छोटी गलियों, नालियों, सार्वजनिक स्थानों और खाली पड़े हिस्सों तक पहुंचीं। जहां-जहां कूड़ा जमा था, उसे झाड़ू लगाकर इकट्ठा किया गया। फिर उसे बड़े-बड़े बर्तनों और टोकरी में भरकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों तक पहुंचाया गया। पंचायत की सलाह के अनुसार पूरे कचरे को गांव से बाहर निर्धारित स्थान पर ले जाने की व्यवस्था की गई। यह साफ दिखाई दिया कि कई स्थानों पर एक बार नहीं बल्कि दो-दो और तीन-तीन बार झाड़ू लगाई गई ताकि कोई भी कचरा पीछे न रह जाए। संत रामपाल जी महाराज के शिष्य सड़क किनारे उगी झाड़ियों, मिट्टी और कूड़े को भी हटाते दिखाई दिए।

महिलाओं, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने मिलकर दिया सेवा का संदेश

इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग ने भाग लिया। छोटे-छोटे बच्चे भी बड़े उत्साह से झाड़ू लगाते दिखाई दिए। महिलाएं सफाई में बराबरी से हिस्सा ले रही थीं। बुजुर्ग स्वयं अपने हाथों से कचरा उठाकर ट्रॉलियों तक पहुंचा रहे थे। कई ग्रामीण यह देखकर हैरान थे कि आज के समय में, जब लोग अपने निजी कामों से मुश्किल से समय निकाल पाते हैं, तब सैकड़ों लोग बिना किसी स्वार्थ के दूसरे गांव की सफाई करने पहुंचे हैं।

धुरी से आई एक महिला अनुयायी ने बताया, “हमें बचपन से यही प्रेरणा दी गई है कि इंसान का जीवन केवल अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों की मदद के लिए भी है। जब समाज साफ होगा, तभी आने वाली पीढ़ियां स्वस्थ रहेंगी।”

ग्रामीणों ने कहा – “ऐसा दृश्य हमने पहली बार देखा”

गांव के अनेक लोगों ने इस अभियान को अपने जीवन का अनोखा अनुभव बताया। महेंद्र सिंह ने कहा कि यह बहुत बड़ा और सम्मान की बात है। आज उन्हें भी सीख मिली है कि अपने गांव की सफाई हमें खुद करनी चाहिए।

हरमीत सिंह ने भावुक होकर कहा, “करीब तीस-पैंतीस साल में पहली बार ऐसा दृश्य देखा है। किसी ने गांव से पैसा नहीं लिया और इतने लोग सेवा करने आ गए।”

एक अन्य ग्रामीण सुनील कुमार ने मुस्कुराते हुए कहा कि उनकी गली तो कभी इतनी साफ नहीं हुई। अब उन्हें भी कोशिश करनी चाहिए कि आगे से गांव गंदा न होने दें। वहीं बुजुर्ग गुरमेल सिंह ने संक्षेप में कहा कि बहुत बढ़िया काम है। ऐसे काम होते रहने चाहिए। कई ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतना बड़ा सफाई अभियान अपने गांव में देखा है।

गर्मी को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों के लिए रास्ते-रास्ते पानी और शिकंजी की व्यवस्था भी की गई थी। अलग-अलग वाहन पूरे गांव में घूमकर सफाई में लगे लोगों तक पेयजल पहुंचा रहे थे। किसी भी सेवादार को सेवा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया। यह व्यवस्था अभियान के साथ-साथ लगातार चलती रही।

लोगों को मिला स्वच्छता के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

इस अभियान का उद्देश्य केवल कूड़ा उठाना नहीं था। ग्रामीणों से लगातार अपील की जा रही थी कि सफाई के बाद गांव को दोबारा गंदा न होने दें। कई ग्रामीणों ने कैमरे के सामने कहा कि अब गांव के प्रत्येक परिवार को अपने घर और गली की जिम्मेदारी स्वयं उठानी चाहिए।

एक ग्रामीण नरेंद्र कुमार ने कहा, “स्वच्छ रहेंगे तो बीमारियां दूर रहेंगी। अगर हर परिवार अपनी जिम्मेदारी समझे तो गांव हमेशा साफ रहेगा।”

दूसरे ग्रामीण राजेंद्र ने कहा, “जहां सफाई होती है, वहीं भगवान का वास होता है। इसलिए सबसे पहले सफाई जरूरी है।”

पंचायत प्रतिनिधियों ने सेवा भावना की खुलकर सराहना की

पंचायत के सदस्यों ने माना कि अभियान केवल दिखावे तक सीमित नहीं था बल्कि जमीन पर वास्तविक सफाई हो रही थी। एक पंचायत सदस्य ने कहा कि यह कदम समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे अभियान अलग-अलग गांवों में चलते रहें ताकि लोग स्वयं सफाई के प्रति जागरूक हों।

सरपंच ने दोबारा निरीक्षण करते हुए कहा, “सेवादार पूरी लगन से काम कर रहे हैं। यह केवल औपचारिकता नहीं है। गांव की हर गली को पूरी मेहनत से साफ किया जा रहा है।”

सामाजिक बदलाव की ओर बढ़ता एक कदम

इस अभियान ने गांव के लोगों के मन में यह विश्वास पैदा किया कि यदि समाज मिलकर काम करे तो बड़े से बड़ा बदलाव संभव है। कई लोगों ने कहा कि वे आगे से अपने घरों के सामने कूड़ा नहीं डालेंगे और गांव को साफ रखने का प्रयास करेंगे। बुजुर्गों ने सुझाव दिया कि ऐसे अभियान समय-समय पर होते रहने चाहिए ताकि नई पीढ़ी में भी स्वच्छता की आदत विकसित हो। ग्रामीणों का मानना था कि इस प्रकार के सामूहिक प्रयास केवल सफाई तक सीमित नहीं रहते बल्कि लोगों के बीच सहयोग, भाईचारे और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत करते हैं।

सेवा, करुणा और समाजहित के कार्यों को लेकर संत रामपाल जी महाराज की सराहना

अभियान के दौरान अनेक ग्रामीणों और स्वयंसेवकों ने संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों की सराहना की। उनका कहना था कि समाजहित के लिए चलाए जा रहे विभिन्न सेवा अभियानों ने अनेक जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाई है। लोगों के अनुसार स्वच्छता अभियान, जरूरतमंदों की सहायता, राहत कार्य और जनकल्याण की भावना समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देती है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समाज में सेवा, करुणा और सहयोग की ऐसी भावना लगातार बनी रहे तो अनेक सामाजिक समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयासों से संभव हो सकता है।

गांव में छोड़ी एक नई सोच और एक स्थायी संदेश

जब सफाई अभियान आगे बढ़ता गया तो पीछे छूटती गलियां पहले से कहीं अधिक साफ दिखाई देने लगीं। सड़कें चमक रही थीं, कूड़ा ट्रॉलियों में भरकर गांव से बाहर भेजा जा रहा था और ग्रामीण अपने घरों के बाहर खड़े होकर इस पूरे अभियान को देख रहे थे। नारायणपुरा में यह दिन केवल सफाई का दिन नहीं रहा, बल्कि लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझाने वाला दिन बन गया। गांव के लोगों ने माना कि यदि वे स्वयं भी इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते रहें तो गांव लंबे समय तक स्वच्छ और सुंदर बना रहेगा। अभियान समाप्त होने तक गांव में एक ही चर्चा थी—स्वच्छता केवल किसी एक संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। जब समाज एकजुट होकर सेवा के लिए आगे आता है, तब बदलाव केवल दिखाई ही नहीं देता बल्कि लंबे समय तक महसूस भी किया जाता है।

पूरे अभियान में अनुशासन, शांति और सेवा का अद्भुत संगम

जैसे-जैसे सफाई अभियान आगे बढ़ता गया, गांव के पंचायत सदस्य भी लगातार सेवादारों के साथ हर गली और हर मोहल्ले का निरीक्षण करते रहे। पंचायत सदस्यों का कहना था कि यह केवल औपचारिक सफाई नहीं थी, बल्कि हर सेवादार पूरे मन से काम कर रहा था। जहां कहीं भी कूड़ा दिखाई देता, उसे पूरी तरह हटाकर ही आगे बढ़ा जाता।

एक पंचायत सदस्य ने कहा, “जो व्यक्ति अपने गांव से कई किलोमीटर दूर केवल सेवा करने आता है, वह केवल औपचारिकता निभाने नहीं आता। वह अपने गुरु की प्रेरणा से सेवा करता है। आज हमने यही भावना अपनी आंखों से देखी है।”

उन्होंने यह भी बताया कि पूरे कार्यक्रम में कहीं भी अव्यवस्था, शोर-शराबा या हड़बड़ी देखने को नहीं मिली। हजारों लोग मौजूद होने के बावजूद पूरा अभियान अनुशासन और शांति के साथ चलता रहा।

बिना किसी चंदे के हुआ पूरा आयोजन

इस अभियान की सबसे अधिक चर्चा जिस बात को लेकर हुई, वह थी इसकी पूरी तरह निःस्वार्थ व्यवस्था। गांव के पंचायत प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि गांव से किसी भी प्रकार का चंदा नहीं लिया गया। न पंचायत से कोई आर्थिक सहयोग मांगा गया और न ही ग्रामीणों पर किसी प्रकार का खर्च डाला गया।

पंचायत सदस्य ने कहा, “एक गिलास पानी तक गांव से नहीं लिया गया। भोजन, चाय, पानी, शिकंजी, सफाई का सामान और पूरी व्यवस्था स्वयं संस्था की ओर से की गई। यह सेवा सचमुच नि:स्वार्थ भावना से की गई।”

सफाई अभियान के दौरान गांव के दुकानदारों और राहगीरों से भी बातचीत की गई। एक दुकानदार ने बताया कि वे तो अपनी दुकान पर बैठे थे, लेकिन ये लोग हमारे पास आए, पानी पिलाया और बड़े सम्मान से बात की। किसी तरह का शोर नहीं, किसी तरह की बदतमीजी नहीं। ऐसा व्यवहार पहली बार देखने को मिला। दूसरे दुकानदार ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने घर और दुकान के सामने सफाई रखने की आदत डालनी चाहिए, तभी ऐसे अभियानों का उद्देश्य पूरा होगा।

सफाई पूरी होने के बाद कई और गांवों की पंचायतों ने भी भेजे प्रार्थना पत्र

नारायणपुरा में अभियान पूरा होने के बाद कार्यक्रम स्थल पर आसपास के गांवों की पंचायतें भी पहुंचीं। गांव खूबां और गांव कंदवाला अमरकोट सहित कई पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने गांवों में भी इसी प्रकार का सफाई अभियान चलाने के लिए प्रार्थना पत्र सौंपे। पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि नारायणपुरा में जो कार्य उन्होंने अपनी आंखों से देखा, वही सेवा अब उनके गांवों तक भी पहुंचे, ताकि वहां के लोग भी स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश सीख सकें।

मंच से अन्नपूर्णा मुहिम के सेवा कार्यों की जानकारी साझा की गई

कार्यक्रम के समापन पर वक्ताओं ने अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत किए जा रहे विभिन्न सामाजिक कार्यों की जानकारी भी ग्रामीणों के साथ साझा की। बताया गया कि इस अभियान के माध्यम से कई जरूरतमंद परिवारों को नियमित राशन उपलब्ध कराया जा रहा है, गरीब परिवारों के लिए घर बनाए जा रहे हैं, जरूरतमंद मरीजों के इलाज में सहयोग किया जा रहा है, रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं तथा प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्य भी किए जाते हैं। वक्ताओं ने कहा कि समाज सेवा तभी सार्थक होती है जब वह बिना किसी स्वार्थ और बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद तक पहुंचे।

पंचायत ने पूरे गांव की ओर से जताया आभार

कार्यक्रम के अंत में नारायणपुरा के सरपंच और पंचायत सदस्यों ने सार्वजनिक रूप से धन्यवाद व्यक्त किया। सरपंच ने कहा कि उन्होंने केवल गांव की सफाई के लिए एक प्रार्थना की थी, लेकिन जिस प्रकार बड़ी संख्या में सेवादार गांव पहुंचे और पूरे दिन सेवा करते रहे, वह उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहेगा। उन्होंने कहा कि उनके पास धन्यवाद देने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। पूरे गांव की ओर से वे सभी सेवादारों और इस सेवा कार्य से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का आभार व्यक्त करते हैं।

गांव में छूटी केवल साफ सड़कें नहीं, बल्कि नई सोच और नई जिम्मेदारी भी

शाम ढलने लगी थी और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां गांव से अंतिम कचरा लेकर बाहर जा चुकी थीं। गलियां चमक रही थीं। गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे अपने घरों के बाहर खड़े होकर इस बदले हुए दृश्य को देख रहे थे। कई लोगों ने कहा कि आज उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि यदि पूरा समाज मिलकर काम करे तो कोई भी गांव स्वच्छ और सुंदर बन सकता है। सिर्फ सड़कें साफ नहीं हुई थीं, बल्कि लोगों के मन में भी स्वच्छता, सहयोग और जिम्मेदारी की एक नई सोच जन्म ले चुकी थी।

जब समाज चुप हो जाता है, तब सच्ची सेवा ही उम्मीद बनकर सामने आती है

नारायणपुरा का यह दिन केवल सफाई अभियान की कहानी नहीं था। यह उस विश्वास की कहानी थी जिसमें बिना किसी स्वार्थ के सैकड़ों लोग दूसरे गांव की सेवा करने पहुंचे। यह उस भावना की कहानी थी जिसमें किसी ने पैसे की बात नहीं की, किसी ने पहचान नहीं पूछी और किसी ने अपने लिए कुछ नहीं चाहा। जब समाज कई बार समस्याओं को देखकर भी चुप रह जाता है, तब कुछ हाथ झाड़ू उठाकर बदलाव की शुरुआत करते हैं। जब लोग उम्मीद छोड़ने लगते हैं, तब संत रामपाल जी महाराज जैसी निःस्वार्थ सेवा फिर से भरोसा जगाती है और जब इंसान इंसान के काम आने लगता है, तब यही एहसास होता है कि सच्ची सेवा ही ईश्वर की सबसे सुंदर पूजा है। नारायणपुरा की गलियों में उस दिन सिर्फ कूड़ा नहीं हटाया गया, बल्कि लोगों के मन में यह विश्वास भी जगाया गया कि यदि पूर्ण गुरु का साथ मिल जाए, तो बदलाव असंभव नहीं रहता। यही इस पूरे अभियान का सबसे बड़ा संदेश बनकर सामने आया। अधिक जानकारी के लिए आप Jagatguru Sant Rampal Ji Maharaj App डाउनलोड करें।

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