Eid e Milad India 2020 [Hindi]: प्रत्येक मजहब और धर्म में अलग-अलग तरह से अल्लाह की इबादत और पूजा की जाती है । उसकी इबादत और पूजा को शुरू करने वाले अवतार पैगंबर पीर फकीर होते हैं। प्रत्येक धर्म में उन अवतारों, पैगंबरों, फकीरों, संतो के जन्मदिन को उस धर्म के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। उन महापुरुषों से जुड़ी हुई कुछ घटनाएं एक याद के स्वरूप में स्थापित हो जाती है जो एक त्यौहार के स्वरूप ले लेती है।

इसी प्रकार मुस्लिम धर्म जिसे इस्लाम धर्म भी कहा जाता है उनका एक महत्वपूर्ण त्यौहार है ईद उल मिलाद। यह मुसलमानों का दूसरा सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। विश्व के इस्लामिक देशो में इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मिलाद उन नबी इस्लाम धर्म के मानने वालों के कई वर्गों में एक प्रमुख त्यौहार है। इस शब्द का मूल मौलिद ( mawlid ) है जिसका अर्थ अरबी भाषा मे “जन्म” होता है। अरबी भाषा में ‘मौलिद-उन-नबी’ का मतलब है हज़रत मुहम्मद का जन्म दिन है।

ईद उल मिलाद कब मनाई जाती है?

ईद उल मिलाद का त्यौहार इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार रबी अव्वल के तीसरे महीने की 12 तारीख को मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर के मुसलमान हजरत मुहम्मद जी के जन्म का जश्न मनाते है ईद उल मिलाद के दिन सभी मुस्लिम धर्म के लोग अपने घर और मस्जिद में अल्लाह की इबादत करते है।

ईद उल मिलाद या मौलिद का अर्थ ह.मुहम्मद के जन्म दिन का भी है, और इस शुभ अवसर पर संकीर्तन पठन या गायन को भी “मौलिद” कहा जाता है, जिसमें सीरत और नात भी पढ़ी जाती हैं। इस पर्व को इन नामों से भी पुकारा और पहचाना जाता है।

Eid e Milad India 2020 [Hindi]: इस्लाम धर्म के अनुसार ईद उल मिलाद क्यों मनाई जाती है?

इतिहासकारों के अनुसार हज़रत मुहम्मद जी के जन्म की सही तारीख अज्ञात है, पर मुस्लिमों का मानना है कि उनका जन्म वर्ष 570 ईस्वी में हुआ था। मुस्लिम समुदायों शिया ओर सुन्नी में हमेशा ईद उल मिलाद त्यौहार को मनाने में अपना अलग अलग मतभेद है जो आज भी बना हुआ है। शिया मुस्लिम समुदाय के लोग इस त्यौहार को इसलिए मनाते है क्योंकि इस दिन पैगंबर मुहम्मद ने हज़रत अली को अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। जिसके कारण उनका ज्ञान पीड़ियों से चलता हुआ आया है।

परन्तु दूसरी ओर सुन्नी समुदाय इसको एक मातम के रूप में मनाते है। क्योकि उनका मानना था कि इस्लाम धर्म नबी हजरत मोहम्मद खुदा के रसूल थे। जिन्होंने तरह-तरह की मनमुखी साधना अर्थात इबादत को बंद कराकर एक खुदा की बंदगी करने के लिए सभी को प्रेरित किया। उन्होंने अपने अनुयायियों को कलमा रोजा और बंग अजान आदि बंदगी के लिए प्रेरित किया।
पैगंबर मोहम्मद मुस्लिम धर्म के एक आखिरी अध्यात्मिक गुरु थे तथा उनकी उस दिन मृत्यु हुई थी। जिस कारण से सुन्नी समुदाय ईद उल मिलाद को अपने अंतिम नबी की मृत्यु की याद में मनाया जाता है। ऐसा मुस्लिम धर्म गुरुओं का मानना है।

Eid e Milad India 2020 [Hindi]: कुरान शरीफ में ईद उल मिलाद अल्लाह का आदेश नहीं

पैगंबर हजरत मोहम्मद जी, खुदा के सच्चे ज्ञान को अपने अनुयायियों तक पहुचाने वाले एक पाक नबी थे। जिन्होंने इस्लाम धर्म को एक नया आयाम दिया। उन्होंने खुदा की इबादत करने के लिए लोगो को प्रेरित किया। क्योकि खुदा ने अपना अध्यात्मिक ज्ञान हजरत मोहम्मद साहब के जरिए कुरान के माध्यम से दिया है कुरान में अल्लाह की बंदगी के लिए एक ऐसा इशारा किया गया है जिसे समझे बिना आप कुरान शरीफ में अल्लाह की प्राप्ति नही कर सकते।

गौर करने वाली बात यह है कि आज हम जिस कुरान शरीफ को सर्वोपरी मानते है क्या उनके आदेशो का पालन कर रहे है?

  • क्या हम सभी हज़रत मुहम्मद जी द्वारा दिये इस्लाम धर्म का पालन कर रहे है ?
  • वर्तमान में हम जो इबादत कर रहे है क्या उससे अल्लाह की प्राप्ति हो सकती है?

ये कुछ ऐसे सवाल है जिसके जवाब देने में हमे हमेशा से बचते रहे है। क्योकि कुरान शरीफ में कही ईद उल मिलाद मनाने का अल्लाह का आदेश नही। कुरान शरीफ की किसी भी आयतों में ईद उल मिलाद मनाने का प्रमाण नही है। इसमें हमे रुड़ीवादी नही, अपितु विचारशील होना चाहिये। हज़रत मुहम्मद जी स्वयं बोल रहे है कि जिस अल्लाह की तुम भक्ति कर रहे हो वह वास्तव में अल्लाह हु अकबर है या नही। क्योकि पवित्र कुरान शरीफ से पहले तीन आसमानी किताब और थी तौरात ,ज़बूर ओर इंजील। इसी प्रकार पवित्र कुरान शरीफ सूरत इखलास में स्पष्ट है कि उस अल्लाह का न तो जन्म होता है और ना ही उसकी मृत्यु होती है वो तो अमर है। फिर हम सभी किस आधार से ईद उल मिलाद मानते है और अल्लाह को बेचून मानते है।

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वह परमात्मा लगभग 14 शताब्दी में काशी में 120 वर्ष तक लीला करने सशरीर आये थे और सशरीर गये थे। वह अविनाशी अल्लाह हु अकबर और कोई नही कबीर परमात्मा है। उन्होंने किसी भी माता के गर्भ से जन्म नही लिया। इसी का प्रमाण हिन्दू धर्म के सभी पवित्र चारों वेदों और पुराणों में वर्णित है।

खुदा ने अपना अध्यात्मिक ज्ञान हजरत मोहम्मद साहब के जरिए कुरान के माध्यम से दिया है कुरान शरीफ सूरत फुरकान 25 आयत 52 से 59 मे कहा है कि खुदा की इबादत की सही विधि किसी बाखबर अर्थात इल्म वाले जो खुदा की जानकारी रखता हो तथा सभी धर्मों के पवित्र सदग्रंथों के आधार से ज्ञान प्रदान करता हो उससे पूछो।

खुदा की इसी वास्तविकता को एक महान पुरुष संत गरीब दास जी महाराज ने अपनी अमृत वाणी में कहा है

अर्श कुर्स पर अलह तखत है, खालिक बिन नहीं खाली।
वह पैगंबर पाक पुरुष थे, साहिब के अब्दाली।।

हम ही अलख अल्लाह है,कुतुब गौस और पीर।
गरीबदास खालिक धनी, हमारा नाम कबीर।।

जिसको हिन्दू धर्म में तत्वदर्शी संत कहा है, जिसका प्रमाण गीता ज्ञान दाता ने अध्याय 4 के श्लोक 34 में दिया गया है।

जिसका अर्थ यह है कि उस ज्ञान को तू तत्वदर्शी संत के पास जाकर समझ, उसको दण्डवत प्रणाम करने से कपट छोड़ कर सरलतापूर्वक प्रसन्न करने से वह संत तुझे परमात्म ज्ञान का उपदेश करेंगे। इनका सभी का तात्पर्य यह है कि तत्वदर्शी संत और बाख़बर एक ही है, जो ख़ुदा के पाने का सही रास्ता प्रमाण सहित बताता है।

वर्तमान समय में वह कौन बाख़बर व अंतिम पैगंबर है?

वर्तमान समय मे वेदों तथा सभी शास्त्रों के अनुसार वो बाख़बर व अंतिम पैगंबर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज है। जिनकी गवाही बहुत से भविष्यवक्ताओ ने अपनी भविष्यवाणियो तथा कुछ महान संतो ने अपनी वाणियो में बताया है। ऐसा इसलिए क्योकि विश्व के सभी भविष्यवक्ताओ ओर इतिहास के प्रसिद्ध महान संतो ओर सभी धर्मों के पवित्र सदग्रंथ आदि संत रामपाल जी महाराज जी पर सटीकता से फिट होती है।

जैसे प्रकार पवित्र कुरान शरीफ आयात 25:52 से 59 में कहा गया है कि उस अल्लाह की जानकारी उस बाख़बर से पूछो जो ब्रह्मांड रहस्य विस्तार की जानकारी पूरी तरह से जानता हो। वह विश्व ऐसा महापुरुष होगा जो अल्लाह की स्थिति से पूर्णरूप से अवगत होगा। इसकी जानकारी संत रामपाल जी महाराज जी ने अपने ज्ञान द्वारा तथा उनकी लिखी पुस्तकों आदि ने मानव कल्याण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे एक मात्र संत है जिसने परमात्मा प्राप्ति सरलता पूर्वक बताते है।

उन्होंने सभी धर्म गुरुओं से भिन्न ज्ञान हमारे सभी ग्रंथो को दिखा कर बताते है जो आज तक किसी भी धर्म गुरुओं तथा मुल्ला काज़ी के मुख से नही सुना। उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान के आधार से बताते है कि हम एक पिता की संतान है। हम सभी जीव एक बहुत भयंकर गलती के कारण अपने भगवान अर्थात कबीर परमात्मा से दूर हो गये है। हम एक ऐसे स्थान से आये है जहाँ की वस्तुएं कभी भी समाप्त नही होती । वहाँ सभी चीज़ अमर होती है। जिसे सतलोक भी कहा जाता है जो हमारा मूल स्थान है।

संत रामपाल जी महाराज कहते है कि सभी धर्मों के ग्रंथ एक ही परमात्मा अर्थात अल्लाह की ओर संकेत कर रहे है, जो हम सब का पिता है। वह केवल एक अविनाशी भगवान कबीर परमात्मा है। हम सभी विभिन्न धर्मों में होने के कारण आपस मे विभाजित है। परंतु संत रामपाल जी महाराज जी के आध्यात्मिक ज्ञान से हम सभी पुनः एक होंगे , जिससे हम कबीर जी की सतभक्ति करके एक सभ्य समाज का निर्माण करने में अहम सहयोगी बनेंगे तथा विभिन्न धर्मों की मन मुखी कुरीतियों का त्याग करेंगे।