हाल ही में पंजाब और हरियाणा के कुछ ग्रामीण अंचलों को एक भीषण प्राकृतिक आपदा और जलभराव का सामना करना पड़ा। इस संकट ने हज़ारों किसानों और मज़दूरों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा कर दिया था। जब सरकारी तंत्र और प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में विफल साबित हुए, तब संत रामपाल जी महाराज द्वारा ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत चलाए गए एक व्यापक राहत अभियान ने पंजाब के दूजोवाल व बेदी छन्ना (अमृतसर) तथा हरियाणा के ढाणी कुम्हारान (हिसार) के किसानों को इस भारी तबाही से बचा लिया।
दो राज्यों के गांवों में तबाही की ज़मीनी हकीकत
इन दोनों क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव का संकट अत्यंत गंभीर था:
सीमावर्ती गांवों का जलमग्न होना (दूजोवाल और बेदी छन्ना, अमृतसर, पंजाब):
माधोपुर डैम टूटने के कारण अमृतसर के सीमावर्ती गांवों दूजोवाल और बेदी छन्ना की 5700 एकड़ ज़मीन 10 फुट गहरे पानी में डूब गई थी। धान की तैयार फसल पूरी तरह नष्ट हो गई और किसान कर्ज़े के बोझ तले दब गए। इस गंभीर आपदा से निपटने के लिए संत रामपाल जी महाराज की ओर से ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के अंतर्गत दो 15 हॉर्सपावर की शक्तिशाली मोटरें तथा 4,500 फीट लंबी 8-इंच की पाइपलाइन तत्काल प्रभाव से निशुल्क उपलब्ध कराई गई, जिससे पानी निकालने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू हुआ।
ढाणी कुम्हारान का गंभीर आर्थिक संकट (हिसार, हरियाणा):
हिसार के ढाणी कुम्हारान में जलभराव के कारण सैकड़ों एकड़ उपजाऊ ज़मीन बेकार हो गई थी। मवेशियों का चारा पूरी तरह नष्ट हो गया था। गांव की अर्थव्यवस्था पर इतना बुरा प्रभाव पड़ा कि स्थानीय दिहाड़ी मज़दूरों को आजीविका के लिए रोज़ाना 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा था। इस संकट के समाधान के लिए संत रामपाल जी महाराज के निर्देश पर ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत पहले चरण में 15 हॉर्सपावर की एक शक्तिशाली मोटर और 12,000 फीट पाइप उपलब्ध कराए गए। राहत कार्यों में तेज़ी लाने के लिए पुनः 15 हॉर्सपावर की एक और मोटर तथा 4,000 फीट लंबी पाइपें भेजी गईं।
हफ्तों तक इन गांवों के किसान सरकारी दफ्तरों से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस प्रशासनिक सहायता नहीं पहुंच सकी।
‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का आगाज़
जब रबी (गेहूं) की बिजाई का समय तेज़ी से निकलने लगा और सरकारी मदद की उम्मीद खत्म हो गई, तब दोनों राज्यों की प्रभावित पंचायतों ने मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट ऑफिस में अपनी अर्जियां जमा कीं। इसके बाद जो राहत कार्य शुरू हुआ, वह अपने आप में आपदा प्रबंधन की एक बड़ी मिसाल है।
बिना भेदभाव, बिना देरी: सेवा का जीवंत उदाहरण
मुनिंद्र धर्मार्थ ट्रस्ट ऑफिस ने अर्जियां मिलते ही बिना किसी लालफीताशाही के तुरंत कार्रवाई की। संत रामपाल जी महाराज की अपार कृपा से और उनकी विशेष ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत दोनों राज्यों के इन गांवों में कुल मिलाकर 16,500 फुट से अधिक लंबी उच्च-गुणवत्ता वाली पाइपलाइन और 15-15 HP की अति शक्तिशाली मोटरें स्थापित की गईं। इसके साथ आवश्यक स्टार्टर, भारी केबल, और नट-बोल्ट भी पूर्णतः निशुल्क प्रदान किए गए।
यह निस्वार्थ सेवा अभियान “संत रामपाल जी महाराज के आशीर्वाद” का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अक्सर दुनियावी व्यवस्थाएं वोट बैंक या राजनीतिक लाभ देखकर सहायता का निर्धारण करती हैं। परंतु परमेश्वर हमे यह सिखाते है कि परमात्मा के लिए सभी समान हैं और संकट के समय हर बेबस की मदद करना ही सच्चा धर्म है। संत रामपाल जी महाराज ने अपनी ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के ज़रिए इसी ईश्वरीय विधान का पालन करते हुए बिना किसी भेदभाव के मानवता की रक्षा की।
जल निकासी से 100% बिजाई तक का सफर
संत रामपाल जी महाराज द्वारा ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत स्थापित की गई भारी मोटरों ने लगातार काम करते हुए 6000 एकड़ से अधिक क्षेत्र का पानी गांवों की सीमाओं से बाहर निकाल दिया।
आज पंजाब और हरियाणा के इन गांवों की स्थिति पूरी तरह से सामान्य हो चुकी है। दूजोवाल, बेदी छन्ना और ढाणी कुम्हारान की ज़मीन सूख चुकी है। मज़दूरों का पलायन रुक गया है और मवेशियों के चारे की समस्या का समाधान हो गया है। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इन सभी क्षेत्रों में गेहूं की बिजाई सफलतापूर्वक संपन्न हो रही है।
दोनों राज्यों के ग्रामीण और किसान स्पष्ट रूप से मानते हैं कि यदि समय रहते संत रामपाल जी महाराज को अर्जी देने पर यह सहायता न मिलती, तो उनकी कृषि और आजीविका पूरी तरह नष्ट हो जाती। उनके लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत किया गया यह महान परोपकार किसी ईश्वरीय चमत्कार और नवजीवन से कम नहीं है।



