झज्जर के कबलाना में वर्षों बाद फिर शुरू हुई खेती, जलभराव से उबरते दिखे किसान

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हरियाणा के झज्जर जिले का कबलाना गांव, जो अपनी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान के लिए जाना जाता है, अब लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या से उबरता नज़र आ रहा है। पिछले तीन से चार वर्षों से करीब 150 से 200 एकड़ उपजाऊ भूमि पानी में डूबी हुई थी, जिससे किसानों की खेती पूरी तरह प्रभावित हो गई थी और उनकी आजीविका पर गहरा संकट मंडरा रहा था।

जिन खेतों में पहले बदबूदार और ठहरा हुआ पानी भरा रहता था, वहां अब फिर से गेहूं की फसल लहलहाने लगी है और पौधे भी उग चुके हैं। ग्रामीण इस बदलाव का श्रेय हाल ही में हुई उस पहल को दे रहे हैं, जिसके तहत जमा पानी को तेज़ी से बाहर निकाला गया और खेती को पुनः शुरू करने का रास्ता साफ हुआ।

लगातार परेशानियों का सामना कर रहे ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना की और इस संकट से राहत की मांग की, जिसने वर्षों से उनकी कृषि व्यवस्था को बाधित कर रखा था।

मुख्य बिंदु: कबलाना जलभराव संकट और समाधान

  • कबलाना में लगभग 150–200 एकड़ भूमि 3–4 वर्षों से जलभराव की चपेट में रही
  • कुछ क्षेत्रों में 7–10 वर्षों तक पानी जमा रहने से खेती पूरी तरह बंद रही
  • किसानों ने कई बार प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ
  • सामूहिक अपील के बाद 10–15 दिनों के भीतर जलनिकासी की व्यवस्था की गई

उपलब्ध कराए गए संसाधन:

कबलाना में जलभराव के बाद किसानों ने फिर संजोई खेती की उम्मीद
  • 15,000 फीट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन
  • दो 10 हॉर्सपावर मोटर
  • स्थापना के लिए सभी आवश्यक उपकरण
  • लगभग 90% खेतों में गेहूं की बुवाई हो चुकी है और फसल उगने लगी है
  • किसानों के अनुसार 70–80% तक सुधार दर्ज किया गया है
  • सभी उपकरणों को गांव की स्थायी साझा संपत्ति घोषित किया गया है

ऐतिहासिक गांव में गहराया कृषि संकट

झज्जर जिले का कबलाना गांव ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह स्थान संत गरीब दास जी महाराज से जुड़ा हुआ माना जाता है, जहां उन्होंने कबीर साहिब जी से साक्षात्कार किया था। इस गौरवशाली विरासत के बावजूद, हाल के वर्षों में गांव गंभीर कृषि संकट से जूझ रहा था।

कबलाना में जलभराव के बाद किसानों ने फिर संजोई खेती की उम्मीद

कबलाना जलभराव राहत: तीसरी सहायता से स्थायी समाधान की ओर बढ़ा गांव

हरियाणा के झज्जर जिले के कबलाना गांव में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या के समाधान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ग्राम पंचायत की प्रार्थना पर किसान मज़दूर बचाओ अभियान फेज़ 2 के तहत जगन्नाथ महाप्रभु संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार सर्वे के बाद गांव को 6,000 फीट 8 इंच पाइपलाइन तथा पाइपलाइन बिछाने के लिए आवश्यक जॉइंटिंग सामग्री उपलब्ध करवाई गई। यह गांव को मिली तीसरी बड़ी सहायता है। 

इससे पहले वर्ष 2025 में 15,000 फीट पाइपलाइन व 2 मोटर तथा अगले चरण में 2026 में 15,000 फीट पाइपलाइन व 3 मोटर उपलब्ध करवाई जा चुकी थीं। नवीनतम सहायता के बाद कबलाना गांव को अब तक कुल 36,000 फीट 8 इंच पाइपलाइन और 5 मोटर प्राप्त हो चुकी हैं। ग्राम पंचायत के अनुसार शेष पाइपलाइन बिछने के बाद गांव की जल निकासी व्यवस्था लगभग पूर्ण हो जाएगी, जिससे बरसात के दौरान खेतों में जलभराव की समस्या काफी हद तक समाप्त होगी और किसानों को समय पर खेती व बुवाई करने में स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।

करीब तीन से चार वर्षों तक गांव की 150 से 200 एकड़ भूमि पानी में डूबी रही। किसानों के अनुसार, कुछ इलाकों में 7 से 10 वर्षों तक पानी जमा रहने के कारण खेती पूरी तरह असंभव हो गई थी। कपास और बाजरा जैसी फसलें नष्ट हो गईं, जबकि धान की कटाई भी जलभराव के कारण प्रभावित रही।

गांव के सरपंच प्रतिनिधि हंसराज ने बताया कि किसानों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। इसके चलते खेती लगभग ठप हो गई और किसानों की आजीविका पर संकट गहरा गया।

38,000 फीट पाइपलाइन और 5 भारी मोटरें: झज्जर के कबलाना गांव में जल निकासी का महा-अभियान पूरा, लहलहाएंगी फसलें

हरियाणा के झज्जर जिले में स्थित कबलाना गांव के किसान पिछले कई वर्षों से जलजमाव की एक विकराल समस्या से जूझ रहे थे। मानसूनी बारिश और खेतों में जल-जमाव के कारण सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि जलमग्न हो जाती थी। जहाँ खेतों में सैकड़ों मन अनाज होना चाहिए था, वहाँ पानी भरा रहने के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाती थीं।

जलभराव की वजह से संकट में था किसानों का भविष्य

कबलाना और आसपास के खेतों में जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था न होने के कारण किसानों को हर साल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था:

फसलों की बर्बादी: बुआई के बाद पानी भर जाने से बीज और फसलें गल जाती थीं।

मिट्टी का दलदल बनना: कई सालों से खेतों में पानी खड़े रहने के कारण उपजाऊ ज़मीन दलदल में बदल रही थी।

आर्थिक तंगी: लगातार फसलों का नुकसान होने से किसान कर्ज़ और निराशा के दलदल में फंस रहे थे।

तीन चरणों में चला राहत कार्य: अरदास से लेकर धरातल तक का सफर

सरकारी विभागों के चक्कर काटने के बाद जब ग्रामीणों को कोई स्थायी समाधान नहीं मिला, तब कबलाना ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज जी के ‘किसान मज़दूर बचाओ अभियान’ के तहत राहत की गुहार लगाई। सहायता की स्वीकृति के बाद इस महा-प्रोजेक्ट को तीन व्यवस्थित चरणों में पूरा किया गया:

पहला चरण: शुरुआत में गांव की ज़रूरत को देखते हुए लगभग 17,000 फीट पाइपलाइन और 2 भारी मोटरें मुहैया कराई गईं।

दूसरा चरण: अतिरिक्त जलमग्न क्षेत्रों को कवर करने के लिए 15,000 फीट पाइपलाइन स्वीकृत की गई।

तीसरा चरण: कमी को पूरा करने के लिए 6,000 फीट अतिरिक्त पाइपलाइन भेजी गई।

ग्रामीणों और पंचायत ने मिलकर कुल 38,000 फीट पाइपलाइन को ज़मीन के नीचे (Underground) दबाने का काम सफलतापूर्वक पूरा किया।

सफल निरीक्षण के बाद सौंपी गईं 3 किरलोस्कर मोटरें व ब्रांडेड उपकरण

जैसे ही 38,000 फीट पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा हुआ, संत रामपाल जी महाराज के आदेश से सर्वे टीम ने धरातल पर जाकर पाइपलाइन का बारीकी से पुनः निरीक्षण (Re-survey) किया।

मानकों के अनुरूप कार्य सही पाए जाने पर महाराज जी के आदेशानुसार दूसरे चरण की शेष 3 हैवी-ड्यूटी किरलोस्कर मोटरें (10 HP) और पूरा फिटिंग सामान ग्राम पंचायत कबलाना को हैंडओवर कर दिया गया। इसमें शामिल हैं:

ब्रांडेड मोटर व स्टार्टर: 3 किरलोस्कर 10 HP मोटरें और L&T कंपनी के 3 स्टार्टर।

फिटिंग एक्सेसरीज़: 20-20 फीट के सुंडी सक्शन पाइप, पीवीसी पाइप, कनेक्शन केबल वायर, लोहे के बैंड, रेड्यूसर, एयर वाल्व, स्टील नट-बोल्ट और प्लेट्स का पूरा सेट।

सरपंच और ग्रामीणों ने कहा: “यह सहायता किसी चमत्कार से कम नहीं”

राहत सामग्री और मोटरें गांव पहुंचते ही कबलाना ग्राम पंचायत और किसानों में खुशी का माहौल बन गया।

गांव के सरपंच और ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा:

“हमारे गांव में पहले जहाँ 500 मन अनाज होना चाहिए था, वहाँ 5 मन भी नहीं हो पाता था। 38,000 फीट पाइपलाइन और 5 मोटरों का यह सेटअप लग जाने के बाद अब खेतों का पानी सीधा दूर मुख्य ड्रेन में चला जाएगा। दशकों पुराना जलभराव संकट अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।”

स्थायी ड्रेनेज सिस्टम से संवरेगी कृषि अर्थव्यवस्था

38,000 फीट लंबी पाइपलाइन और 5 उच्च क्षमता वाली मोटरों के चालू होने से कबलाना गांव का ड्रेनेज नेटवर्क पूरी तरह से सुदृढ़ हो गया है। खेतों से पानी की त्वरित निकासी होने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति वापस आएगी और किसान अब अपने खेतों में बेफिक्र होकर फसलें उगा सकेंगे।

सामूहिक अपील और त्वरित समाधान

लगातार बढ़ती समस्या के बीच कबलाना के ग्रामीणों ने 36 बिरादरी के साथ मिलकर संत रामपाल जी महाराज से मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट बरवाला स्थित उनके आफिस जाकर सामूहिक अपील की। इसके बाद मात्र 10 से 15 दिनों के भीतर जलनिकासी के लिए आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध करा दी गई।

संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के तहत जलनिकासी के लिए ज़रूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया गया, जिसमें 15,000 फीट लंबी 8 इंच की उच्च गुणवत्ता वाली पाइपलाइन और दो 10 हॉर्सपावर की मोटर शामिल थीं।

यह भी पढ़ें:  जब 1500 एकड़ जमीन बन गई थी झील: संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में अन्नपूर्णा मुहिम से फरेण गांव में लौटी हरियाली (जींद, हरियाणा)

सिर्फ बड़े उपकरण ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को चालू करने के लिए ज़रूरी हर छोटी-बड़ी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। इसमें स्टार्टर, केबल, एल्बो, सक्शन पाइप, रबर गैस्केट, चिपकाने के लिए फेविकोल और यहां तक कि छोटे-छोटे नट-बोल्ट तक शामिल थे। ग्रामीणों के अनुसार, “हमें एक भी सामान बाज़ार से खरीदने की ज़रूरत नहीं पड़ी।”

गांववासियों ने बताया कि इस पूरी व्यवस्था को गांव की साझा स्थायी संपत्ति घोषित किया गया है।

जलनिकासी से खेतों में दिखा बदलाव

इस पहल से पहले कबलाना के खेतों में 1 से 6 फीट तक पानी भरा रहता था और पूरा इलाका सुनसान पड़ा रहता था। पाइपलाइन और मोटरों के माध्यम से लगातार दिन-रात पानी निकाला गया और उसे गांव की सीमा से बाहर पहुंचाया गया।

कुछ ही दिनों में इसका असर साफ नज़र आने लगा। वर्षों से बेकार पड़े खेत फिर से खेती के लिए तैयार किए गए। अब अधिकांश खेतों में गेहूं की बुवाई पूरी हो चुकी है और फसल उगने लगी है।

किसानों के अनुसार, करीब 90% भूमि दोबारा खेती के दायरे में आ चुकी है और कृषि स्थिति में स्पष्ट सुधार देखा जा रहा है।

किसानों ने साझा किए अनुभव

गांव के कई किसानों और ग्रामीणों ने अपने अनुभव साझा किए। किसान राजकुमार ने बताया कि उनके खेतों में वर्षों से पानी भरा हुआ था और कुछ इलाकों में 7–10 वर्षों से खेती संभव नहीं थी। जलनिकासी व्यवस्था के बाद अब खेती दोबारा शुरू हो सकी है।

किसानों के अनुसार, पहले खेतों में 1 से 6 फीट तक पानी जमा रहता था, जिससे फसल उगना संभव नहीं था। अब लगभग 70–80% तक सुधार हो चुका है और खेतों में घनी व समान रूप से गेहूं की फसल दिखाई दे रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि पहले कपास और बाजरा जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो जाती थीं, जबकि धान की फसल भी आंशिक रूप से ही बच पाती थी।

एक किसान ने कहा कि यदि समय पर पानी नहीं निकाला जाता, तो इस सीज़न में भी खेती संभव नहीं हो पाती और नुकसान और बढ़ जाता।

शेष चुनौतियां और भविष्य की उम्मीदें

हालांकि अधिकांश पानी निकाला जा चुका है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में अभी भी पानी बाकी है। ग्रामीणों का अनुमान है कि अगले 20 से 30 दिनों में शेष जल भी पूरी तरह निकल जाएगा।

किसानों ने कुछ स्थानों पर अतिरिक्त मोटरों की आवश्यकता भी जताई है, ताकि बचा हुआ पानी भी जल्द निकाला जा सके। साथ ही, भविष्य में स्थायी समाधान के लिए कुछ क्षेत्रों में पाइपलाइन को स्थायी रूप से स्थापित करने की योजना भी बनाई जा रही है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि आने वाले समय में ज्वार जैसी चारे की फसलें भी आसानी से उगाई जा सकेंगी और कृषि उत्पादन में और सुधार होगा।

गांव में दिखा सामूहिक बदलाव

कबलाना के किसानों और बुजुर्गों ने गांव में आए इस बदलाव को स्पष्ट रूप से महसूस किया है। जो खेत वर्षों से खाली पड़े थे, वहां अब फिर से खेती शुरू हो चुकी है।

ग्रामीणों का कहना है कि खेती ही उनकी मुख्य आजीविका है और इसके दोबारा शुरू होने से उन्हें आर्थिक स्थिरता मिलने लगी है। पहले वे कर्ज पर निर्भर थे और फसल खराब होने के कारण परिवार चलाना मुश्किल हो गया था।

अब इस पहल के बाद खेती में नई जान आई है और गांव धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहा है।

ठहराव से फिर शुरू हुआ विकास

कबलाना की स्थिति यह दर्शाती है कि लंबे समय से चले आ रहे जलभराव और कृषि ठहराव के बाद अब गांव तेज़ी से विकास की ओर बढ़ रहा है। जो खेत वर्षों तक पानी में डूबे रहे, वहां अब गेहूं की फसल उग रही है।

हालांकि कुछ चुनौतियां अभी भी बाकी हैं, लेकिन अधिकांश भूमि फिर से खेती योग्य बन चुकी है। किसान बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं और आने वाले फसल चक्र में और सुधार की संभावना जता रहे हैं।

कबलाना का यह उदाहरण दिखाता है कि समय पर किए गए प्रयास और उचित संसाधनों की उपलब्धता से वर्षों पुरानी समस्या का समाधान संभव है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका दोनों को नई दिशा मिलती है।

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