संत रामपाल जी महाराज ने घिराय गांव के किसानों को 25 साल पुराने बाढ़ के दंश से दिलाई मुक्ति

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हरियाणा के हिसार जिले में स्थित घिराय गांव पिछले ढाई दशकों से एक ऐसी प्राकृतिक और प्रशासनिक त्रासदी झेल रहा था जिसने वहां के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया था। पिछले 25 वर्षों से गांव की हजारों एकड़ भूमि बाढ़ के पानी में डूबी हुई थी, जिसके कारण न केवल कृषि ठप हो गई थी, बल्कि ग्रामीणों का अस्तित्व भी संकट में था।

इस घोर निराशा के बीच संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया, जिसने न केवल गांव की भूमि को जलमुक्त किया, बल्कि 400 एकड़ जमीन पर 20 साल बाद फसलों की हरियाली वापस लौटाई।

ऐतिहासिक संकट और सरकारी तंत्र की विफलता

घिराय गांव के किसानों के लिए बाढ़ का पानी कोई नई समस्या नहीं थी, बल्कि यह 25 साल पुराना एक गहरा जख्म बन चुका था। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले ढाई दशकों से लगभग 2000 एकड़ भूमि जलमग्न रहती थी। हालात इतने विकट हो गए थे कि गांव के करीब 20 से 25 परिवार अपनी आजीविका के साधन छिन जाने के कारण अपनी पुश्तैनी जमीनें बेचने को मजबूर हो गए थे।

संत रामपाल जी महाराज अन्नपूर्णा मुहिम: 25 साल से बाढ़ पीड़ित घिराय गांव को राहत

सरकारी आंकड़ों और आश्वासनों के बावजूद प्रशासन इस समस्या का कोई ठोस समाधान निकालने में विफल रहा। ग्रामीणों ने बताया कि दशकों तक सरकारों के चक्कर काटने और अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी उनके खेतों से पानी नहीं निकला। जलभराव के कारण गांव का भूजल स्तर इतना बढ़ गया था कि घरों के फर्श बैठने लगे थे और पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया था।

बरवाला में लगाई गई मानवता की अर्जी

जब हर तरफ से रास्ते बंद हो गए, तब घिराय गांव के निवासियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे परोपकारी कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसी उम्मीद के साथ सरपंच प्रतिनिधि संदीप के नेतृत्व में 100 से अधिक ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल बरवाला पहुंचा।

ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी 25 साल पुरानी व्यथा रखी और प्रार्थना की कि यदि उनके खेतों से पानी नहीं निकला, तो वे पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। ग्रामीणों की इस करुण पुकार पर संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत संज्ञान लिया और अपनी सेवा समिति को युद्ध स्तर पर राहत कार्य शुरू करने का आदेश दिया।

अन्नपूर्णा मुहिम के तहत अभूतपूर्व राहत सामग्री

संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत घिराय गांव की मदद के लिए संसाधनों का एक विशाल काफिला रवाना किया। गांव में पहुंचे 11 ट्रकों और ट्रैक्टरों के काफिले ने ग्रामीणों को अचंभित कर दिया।

संत रामपाल जी महाराज ने इस सेवा कार्य के लिए 25,000 फीट उच्च गुणवत्ता वाले 8 इंच के भारी पाइप और 15 हॉर्स पावर की पांच बड़ी विद्युत मोटरें उपलब्ध कराईं। सहायता की विशिष्टता यह थी कि संत रामपाल जी महाराज ने केवल मशीनें ही नहीं भेजीं, बल्कि उनके साथ आवश्यक स्टार्टर, केबल, बैंड, पीवीसी सॉल्यूशन और यहां तक कि छोटे से छोटे नट-बोल्ट भी भेजे, ताकि किसानों को किसी भी सामग्री के लिए बाजार न भागना पड़े।

इस पूरी राहत सामग्री की लागत लाखों में थी, जिसे संत रामपाल जी महाराज ने पूरी तरह निःशुल्क और बिना किसी चंदे के उपलब्ध कराया।

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चमत्कारिक परिणाम: 20 साल बाद खेतों में लौटी फसल

राहत सामग्री पहुंचने के बाद, संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में दिन-रात जल निकासी का कार्य किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि जिस जमीन पर पिछले 20 वर्षों से एक दाना भी पैदा नहीं हुआ था, आज वहां गेहूं और सरसों की फसलें लहलहा रही हैं।

संत रामपाल जी महाराज अन्नपूर्णा मुहिम: 25 साल से बाढ़ पीड़ित घिराय गांव को राहत

किसान सतीश और जोगिंदर ने बताया कि गांव के एक विशेष क्षेत्र, जिसे पखवाड़ा कहा जाता है, की 400 एकड़ जमीन पर दो दशकों के बाद पहली बार बिजाई संभव हो पाई है। वर्तमान में गांव की 99 प्रतिशत भूमि पर बिजाई हो चुकी है। जहां कुछ समय पहले तक 4 से 5 फीट गहरा पानी खड़ा था और आवागमन के लिए चारपाई के नीचे प्लास्टिक के ड्रम बांधकर जुगाड़ बनाना पड़ता था, आज वहां ट्रैक्टर चल रहे हैं और हरियाली दिखाई दे रही है।

जल निकासी का स्थाई और वैज्ञानिक समाधान

संत रामपाल जी महाराज ने केवल तात्कालिक राहत ही नहीं दी, बल्कि ग्रामीणों को भविष्य के लिए एक स्थाई समाधान भी प्रदान किया। ग्रामीणों ने संत जी द्वारा दिए गए पाइपों को जमीन के नीचे स्थाई रूप से दबाने का निर्णय लिया है, ताकि भविष्य में होने वाली भारी बारिश के दौरान भी पानी को तुरंत ड्रेन (नहर) तक पहुंचाया जा सके।

इन 15 एचपी की मोटरों का उपयोग अब न केवल बाढ़ राहत के लिए किया जा रहा है, बल्कि किसान इनका उपयोग बिजाई के बाद जमीन के जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए भी कर रहे हैं। इस स्थाई प्रबंध ने किसानों के मन से भविष्य की चिंता को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है।

ग्रामीणों का आभार और सामाजिक प्रभाव

गांव के निवासी सुमित और विनोद ने भावुक होकर बताया कि संत रामपाल जी महाराज की इस मदद ने उनके उजड़ते हुए घरों को बचा लिया है। पहले बाढ़ के कारण बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया था और महिलाओं को पानी के बीच से गुजरने में भारी परेशानी होती थी।

संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी भेदभाव और स्वार्थ के जिस प्रकार से एक पूरे गांव की अर्थव्यवस्था और जनजीवन को पुनर्जीवित किया है, वह आधुनिक युग में परोपकार की एक दुर्लभ मिसाल है। ग्रामीणों का कहना है कि जहां सत्ता और प्रशासन फेल हो गया, वहां संत रामपाल जी महाराज ने अपने निस्वार्थ सेवा भाव से मानवता की जीत सुनिश्चित की है।

आज घिराय गांव का हर किसान और मजदूर संत रामपाल जी महाराज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है, क्योंकि उन्होंने उनके जीवन में खुशहाली की एक नई सुबह का संचार किया है।

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