जल-समाधि से जीवनदान तक: अलिका गांव के पुनर्जन्म की महागाथा

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 पलवल जिले का अलिका गांव आज एक ऐसी विजय का जश्न मना रहा है, जिसकी कल्पना प्रशासन भी नहीं कर सकता था। यह कहानी है 6 साल के लंबे अंधकार के बाद लौटी उस रोशनी की, जिसे संत रामपाल जी महाराज के निःस्वार्थ प्रयासों ने मुमकिन बनाया है।

6 साल का लंबा इंतजार और प्रशासनिक बेरुखी

अलिका गांव के करीब 1000 एकड़ खेत पिछले 5-6 सालों से ‘झील’ बने हुए थे। स्थिति इतनी भयावह थी:

 कमर तक पानी: खेतों में 5 से 6 फीट तक पानी भरा रहता था। किसान अपनी जमीन को सिर्फ दूर से देख सकते थे।

 मछलियों का डेरा: जहाँ अनाज उगना चाहिए था, वहां मछलियां तैर रही थीं।

 सरकार की नाकामी: प्रशासन ने सिर्फ एक मोटर दी, जो महीनों चलने के बाद भी पानी को एक इंच कम नहीं कर पाई। किसान कर्ज के बोझ तले दबकर आत्महत्या करने को मजबूर थे।

जब ‘मसीहा’ बनकर आए संत रामपाल जी महाराज

जब हर दरवाजा बंद हो गया, तब ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई। ग्रामीणों के अनुसार, वहां से जो मदद मिली, उसने गांव की तस्वीर ही बदल दी। 2.5 किलोमीटर लंबा राहत सामग्री का काफिला जब गांव पहुंचा, तो लोगों को लगा जैसे साक्षात् भगवान ने उनकी सुन ली है।

अलिका की अनोखी जीत: 6 साल की तबाही को संत रामपाल जी महाराज ने खुशहाली में बदला

संत जी ने प्रदान किया:

  •  10,000 फुट 8-इंची पाइप।
  •  7 शक्तिशाली मोटरें (5, 7 और 10 HP की)।
  •   पूर्ण किट: नट-बोल्ट से लेकर स्टार्टर तक, सब कुछ मुफ्त और उच्च गुणवत्ता का।

चमत्कार: जब पानी ‘जादू’ की तरह गायब हो गया

ग्रामीण बताते हैं कि सरकारी मोटर एक महीने चली पर असर शून्य रहा, लेकिन संत जी की मोटरों ने कुछ ही हफ्तों में हजारों टन पानी को खेतों से बाहर खदेड़ दिया।

  •  पहली फसल का स्वागत: 6 साल बाद आज अलिका के खेतों में गेहूं की फसल बड़ी बड़ी हो गई है। किसान अपनी पहली सिंचाई (irrigation) खुशी-खुशी कर रहे हैं।
  •  स्थायी समाधान: ग्रामीणों ने दूरदर्शिता दिखाते हुए इन पाइपों को जमीन के नीचे स्थाई रूप से दबा दिया है, ताकि भविष्य में कभी भी जलभराव की समस्या न आए।

यह भी पढ़ें: 80% डूबे जींद जिले के देवरड़ गांव को मिली संजीवनी: संत रामपाल जी महाराज ने पहुंचाई 10,000 फुट पाइप और भारी मोटर

ग्रामीणों की आपबीती: “परमात्मा ही ऐसा कर सकते हैं”

पंचायत सदस्य धन सिंह कहते हैं, “संत जी ने हमारे गांव में जैसे फैक्ट्री ही लगा दी थी। उनके आशीर्वाद से आज हमारे घर में अनाज आएगा, वरना हम कर्ज में डूब जाते।”

एक अन्य किसान धर्म सिंह भावुक होकर बताते हैं, “सरकारी मोटर से एक अंगुल पानी कम नहीं हुआ, लेकिन महाराज जी की शक्ति से पानी ऐसे खत्म हो गया जैसे उसे कोई खींच रहा हो। वे हमारे लिए साक्षात परमात्मा हैं।”

जश्न और नई शुरुआत

बाढ़ से मुक्ति मिलने पर गांव में दिवाली जैसा माहौल था। डीजे बजाए गए, पटाखे फोड़े गए और पूरा गांव झूम उठा। यह सिर्फ पानी निकलने की खुशी नहीं थी, बल्कि उजड़ चुके भविष्य के फिर से बसने की खुशी थी। अलिका गांव आज संत रामपाल जी महाराज की दया और शक्ति का जीता-जागता प्रमाण है।

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