कारौर गाँव का दोहरा संकट खत्म: संत रामपाल जी महाराज ने 12,800 फीट पाइप और मीठे पानी के प्लांट से दिया नया जीवन

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कृषि और पीने का शुद्ध पानी, किसी भी ग्रामीण जीवन की दो सबसे बुनियादी ज़रूरतें हैं। लेकिन हरियाणा में रोहतक जिले की सांपला तहसील के अंतर्गत आने वाले कारौर (कारोहर) गाँव में ये दोनों ही ज़रूरतें एक बड़े संकट में बदल चुकी थीं। यह गाँव एक गंभीर “दोहरे श्राप” का सामना कर रहा था।

​पहला संकट था भयानक जलभराव। जल निकासी का कोई साधन न होने के कारण, हर साल बारिश का गंदा पानी गाँव की 300 से 400 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि को अपनी चपेट में ले लेता था। खेतों का गंदा पानी गलियों और मकानों तक में घुस जाता था, जिससे किसानों की फसलें और ग्रामीणों के घर बर्बाद हो रहे थे।

​दूसरा और सबसे गंभीर संकट था खारे पानी की समस्या। गाँव की डिग्गी (जलघर) और ज़मीन का पानी इतना खारा और ज़हरीला हो चुका था कि इसके इस्तेमाल से लोगों को गंभीर बीमारियां हो रही थीं। ग्रामीणों ने बताया कि खारे पानी से नहाने पर पूरे शरीर में खुजली मचती थी और युवाओं के बाल समय से पहले सफेद हो रहे थे। मीठे पानी की एक बूंद के लिए लोगों को रोज़ाना अपनी बाइकों पर 2-2 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था।

​भ्रांतियों का टूटना और सच्चा दरबार

सरकार और प्रशासन ने इन समस्याओं का कोई हल नहीं निकाला। चंडीगढ़ तक फाइलें भेजने के बावजूद केवल निराशा ही हाथ लगी। अंततः गाँव के 20-25 मौजिज लोगों और पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज जी के सतलोक आश्रम श्री धनाना धाम का रुख किया।

​गाँव वालों ने पूरी ईमानदारी से स्वीकार किया कि करौथा कांड के समय, अज्ञानता और समाज में फैलाई गई झूठी भ्रांतियों के कारण उन्होंने गुरु जी का विरोध किया था। लेकिन जब उन्होंने देखा कि संत रामपाल जी महाराज जी पूरे हरियाणा में बिना किसी स्वार्थ के गरीबों के घर बनवा रहे हैं, राशन बाँट रहे हैं और डूबते किसानों को बचा रहे हैं, तो उनकी आँखें खुल गईं। उन्हें समझ आ गया कि वे एक सच्चे संत को पहचानने में भूल कर बैठे थे।

​आधुनिक सर्वे और बिजली की गति से मदद

ग्राम पंचायत ने ‘किसान मज़दूर बचाओ अभियान’ (फेज़-2) और ‘शुद्ध पेयजल सेवा अभियान’ के तहत मदद की गुहार लगाई। जगन्नाथ महाप्रभु संत रामपाल जी महाराज ने पुरानी बातों को दरकिनार करते हुए तुरंत अपनी तकनीकी सर्वे टीम को कारौर गाँव भेजा। टीम ने ड्रोन (Drone) और गूगल मैप (Google Maps) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके 3.5 किलोमीटर लंबी ड्रेन और पानी के स्रोतों की सटीक पैमाइश की।

​12,800 फीट पाइप, 4 बोरिंग और सारा सामान मुफ्त

अर्जी लगने के महज 2-3 दिनों के भीतर, जो मदद कारौर गाँव में पहुँची, उसने पूरे रोहतक जिले को हैरान कर दिया। जलभराव की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए 12,800 फीट लंबी 8-इंची भारी-भरकम पाइपलाइन गाँव में उतारी गई। वहीं, मीठे पानी की समस्या को सुलझाने के लिए चार डीप बोरिंग (दो 35 फुट और दो 70 फुट गहरे) का पूरा सेट भेजा गया, जिन्हें जोड़कर दो बड़े समर्सिबल पंप बनाए जाएंगे।

​इसके अलावा, खेतों का पानी बाहर फेंकने के लिए 20 HP की एक विशाल मोटर और मीठे पानी की सप्लाई के लिए 5-5 HP की दो मोनोब्लॉक मोटरें पास की गईं। सबसे बड़ी बात यह थी कि पाइप जोड़ने का सारा सामान फेविकोल, एयर वाल्व, लोहे की प्लेटें, नट-बोल्ट और लकड़ी के शिकंजे तक जगन्नाथ महाप्रभु संत रामपाल जी महाराज जी की तरफ से बिल्कुल मुफ्त भेजा गया था।

​गाँव में उत्सव और परोपकार की अनूठी मिसाल

राहत सामग्री पहुँचते ही पूरे गाँव में दीवाली जैसा जश्न शुरू हो गया। पूर्व सैनिकों (फौजियों), बुजुर्गों और युवाओं ने सिर पर गुरु जी का स्वरूप रखकर और फूल-मालाओं के साथ इस सामग्री का भव्य स्वागत किया।

​इसी बीच एक और भावुक कर देने वाली सच्चाई सामने आई। गाँव के एक अत्यंत गरीब और बेसहारा व्यक्ति (सज्जन), जो पिंजौर में रहता था, उसके लिए संत रामपाल जी महाराज ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत पहले प्लॉट खरीदा और फिर उस पर पक्का मकान भी बनवाकर दिया। कारौर गाँव की यह कहानी आज गवाही दे रही है कि सच्चा संत कभी किसी से बैर नहीं रखता; वह अपनी दया और निस्वार्थ समाज सेवा से घृणा को भी प्रेम और श्रद्धा में बदल देता है।

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