Chhath Puja 2021 [Hindi]: गीतानुसार छठ पूजा नही है शास्त्रानुकूल साधना, प्रमाण सहित जानिए क्या है सत साधना?

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Last Updated on 7 November 2021, 10: 48 PM IST: छठ पूजा 2021 (Chhath Puja) : वैसे तो भारत में बहुत से पर्व मनाये जाते हैं, उनमें छठ पूजा सूर्योपासना का एक लोकपर्व है। इन पर्वों से भारत के लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी होती हैं। छठ पूजा एक ऐसा पर्व है, जो मुख्यरूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तरप्रदेश, नेपाल के निवासियों तथा विश्व के अन्य हिस्सों में फैले हुए प्रवासी भारतीयों के द्वारा विश्वभर में मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक पावन त्योहार है। शुक्ल पक्ष के षष्ठी को शुरू होने वाले इस पर्व को छठ पूजा, सूर्य षष्ठी और डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। प्रमाण सहित जानिए गीतानुसार छठ पूजा (Chhath Puja) क्यों नही है शास्त्रानुकूल साधना

छठ पूजा 2021 कब है?

चार दिवसीय इस त्योहार की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल की सप्तमी को समाप्त हो जाती है। इस वर्ष यह त्योहार निम्न तिथियों को मनाई जाएगा-

  • सोमवार 08 नवंबर – नहाय खाय
  • मंगलवार 09 नवंबर – खरना या लोहंडा
  • बुधवार 10 नवंबर – छठ व्रत मुख्य पूजन संध्या अर्घ्य
  • बृहस्पतिवार 11 नवंबर – उषा अर्घ्य छठ व्रत समापन

यह पर्व वैदिक काल से मनाया जा रहा है, यह पर्व बिहार के वैदिक आर्य संस्कृति को दर्शाता है। लेकिन वेदों मे ऐसे त्योहार की कहीं गवाही नहीं है।

छठ पूजा के प्रकार

समाज में दो प्रकार के छठ पर्व की मान्यता है, जिसमें एक शक संवत के कैलेंडर के पहले मास के चैत्र में मनाई जाती है जिसे चैती छठ के नाम से जाना जाता है तथा दूसरी कार्तिक मास के दिवाली के छह दिन बाद मनाने की परंपरा है, जिसे कार्तिक छठ के नाम से जाना जाता है। इन चार दिनों में व्रती (उपवास रखने वाले) को कड़े नियमों का पालन करना होता है।

छठ पूजा 2021: पौराणिक कथाओं के अनुसार

पुराणों के अनुसार छठ पूजा (Chhath Puja) की शुरुवात त्रेतायुग में रामायण के दौरान हुई थी जब राम रावण का वध करके सीता को वापस लेकर लौटे थे तब मुद्गल ऋषि ने राम को सीता के साथ जल में खड़ा होकर सूर्य देवता को अर्घ्य (जल अर्पण) देने की सलाह देकर इस व्रत को कराया तथा जल छिड़ककर सीता को पवित्र किया था।

छठ पूजा से जुड़ी कथा (Chhath Puja Story in Hindi)

प्रियव्रत नामक एक प्रतापी राजा राज्य करते थे। विवाह के कई वर्षों पश्चात भी उनकी रानी मालिनी को कोई सन्तानोत्पत्ति नहीं हुई, राजा ने अपने राजगुरु से सलाह मशवरा किया। उनके राजगुरु ने यज्ञ अनुष्ठान करने की सलाह दी। राजन ने पूरे विधि-विधान से यज्ञ सम्पन्न किया ऋषि ने रानी मालिनी को खीर खाने के लिए दी, कुछ समय पश्चात रानी गर्भवती हुई।

छठ पूजा 2021: गर्भधारण की अवधि पूरी होने पर रानी को मृत पुत्र की प्राप्ति हुई, राजा दुःखी मन से अकेले ही अपने मृत पुत्र के शव को लेकर शमशान पहुँचा, पुत्र वियोग में व्याकुल राजा ने आत्महत्या करने की सोची, तभी वहाँ भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई और राजा को संतानोत्पत्ति का मार्ग बताते हुए देवी ने अपनी पूजा पूरे विधि-विधान से करने की सलाह देकर संतान प्राप्ति का आश्वासन देकर अंतर्ध्यान हो गई।

कौन है छठी मईया?

छठ पूजा 2021 (Chhath Puja): लोक मान्यता के अनुसार सृष्टी के मूल की उत्पत्ति के छठे दिन इनके जन्म के कारण इन्हें छठी मईया कहा जाता है। इस घटना के बाद राजा ने वापस अपने महल लौटकर पूरा वृतांत अपनी पत्नी को सुनाया और देवी द्वारा बताये गए नियमों और विधि-विधान से देवी द्वारा बताये गयी तिथि को पूरे अनुष्ठान के साथ छठी मईया की पूजा-अर्चना की। कुछ समय पश्चात रानी ने फिर से गर्भधारण किया। गर्भावधि पूरी होने के पश्चात रानी ने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया।

राजा के संतान की इच्छा पूरा होने के कारण ही इस पर्व की मान्यता है कि छठी मईया का व्रत पूरे नियम और विधि-विधान से करने पर निःसंतान को संतान की प्राप्ति होती है। इसी अवधारणा के कारण छठ व्रत की परम्परा चली आ रही है। लेकिन वास्तव मे यहां किसी को संतान प्राप्ति पिछले संस्कार से ही होती है। इसमें देवी देवता आदि की कोई भूमिका नहीं है।

छठ पूजा 2021 पर जानिए यथार्थ ज्ञान के बारे में

छठ पूजा (Chhath Puja) का विधान इतिहास के अलावा हमारे किसी भी धर्म के प्रमाणित पवित्र सद्ग्रंथों में नहीं हैं, हिन्दू धर्म के पवित्र धर्मग्रन्थ श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में गीता ज्ञानदाता का कहना है कि हे अर्जुन! यह योग (भक्ति) न तो अधिक खाने वाले का और न ही बिल्कुल न खाने वाले का अर्थात् ये भक्ति न ही व्रत रखने वाले, न अधिक सोने वाले की तथा ना अधिक जागने वाले की सफल होती है। जैसा कि आप सभी देख पा रहे हैं कि इस श्लोक में व्रत रखना पूर्ण रूप से मना किया गया है।

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जहाँ तक सवाल है पुत्र प्राप्ति की तो परम संत सतगुरु रामपाल जी महाराज जी हमारे शास्त्रों से प्रमाणित कर बताते हैं कि यहाँ सभी जीव उतना ही पाते हैं, जितना उनकी किस्मत में लिखा हुआ है, अगर प्रारब्ध में कोई लेन-देन बाकी नहीं है तो संतान प्राप्ति नहीं होती है, भाग्य से अधिक कोई अगर दे सकता है तो वो पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं। छठ व्रत जैसी मनमानी पूजा को लेकर परमात्मा कबीर साहेब जी ने एक वाणी कही है -:

आपे लीपे आपे पोते, आपे बनावे होइ |
उसपर बुढिया पोते मांगे, अकल कहां पर खोई ||

अंधभक्ति पर कटाक्ष करते हुए कबीर साहेब जी कहते हैं एक बुढिया माई चार ईंट जोड़ कर उसे खुद ही लीप-पोत के देवी का दर्जा देती है और उससे परिवार की सलामती की कामना करती है, फिर उसके वहां से जाते ही उस पत्थर के ऊपर कुत्ता पेशाब कर के जाता है, यहाँ कबीर परमात्मा समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि जो पत्थर की मूर्ति अपनी रक्षा स्वयं नहीं कर सकती उससे आप स्वयं और अपने परिवार के सलामती की दुआ कर रहे हैं, तुम्हारी अक्ल काम नहीं कर रही है।

छठ पूजा में जिस मानस देव की पुत्री देवसेना का जिक्र है, वो देवी दुर्गा (माया) की ही अंश हैं, माया के बारे में कबीर साहेब जी ने कहा है

माया काली नागिनी, अपने जाए खात।

कुंडली में छोड़े नहीं, सौ बातों की बात।।

माया स्वयं काल की अर्धांगिनी है जो हम सभी जीवों को इस चौरासी लाख योनियों में फंसाए रखने में काल की मदद करती है। अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पुस्तक “अंध श्रध्दा भक्ति खतरा-ए-जान” अवश्य पढ़ें

गीता अध्याय न. 16 के मंत्र 23 में गीता ज्ञान दाता ने साफ़-साफ कहा है कि शास्त्रविरुद्ध साधना करने वाले को ना ही इस लोक में सुख होता है और ना ही परलोक में। शास्त्रों के अनुकूल भक्ति तो पूर्ण संत ही बता सकता है।

पूर्ण संत की पहचान हमारे पवित्र सद्ग्रंथों में

गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 में पूर्ण परमात्मा द्वारा दिए गए ज्ञान को समझने के लिए गीता ज्ञान दाता ने तत्वदर्शी संत की तलाश करने की बात कही है, अब बात यहाँ अटकती है संसार में इतने सन्तों की भीड़ में हम तत्वदर्शी संत की तलाश कैसे करेंगे जहाँ आए दिन किसी ना किसी संत के ऊपर उँगली उठ रही हैं, ऐसे में हम कैसे तय करेंगे कि वो सच्चे तत्वदर्शी संत कौन हैं? इसका समाधान भी गीता ज्ञानदाता ने गीता अध्याय न. 15 श्लोक 1 से 4 में संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के बारे में बताकर किया है कि जो भी संत या महंत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभागों के बारे में बता देगा वही तत्वदर्शी संत होगा।

सच्चे सद्गुरु का अर्थ सच्चा ज्ञान प्रदान करने वाला होता है। परमात्मा द्वारा भेजा गया वो अधिकारी हंस जो नाम दीक्षा देने का अधिकारी हो। यही प्रमाण कबीर साहेब जी की वाणी में भी मिलता है।

सतगुरु के लक्षण कहूँ, मधुरे बैन विनोद।

चार वेद छः शास्त्र कह अठारह बोध।।

कबीर साहेब जी इस वाणी में सतगुरु के लक्षण को बताते हुए कहते हैं, जिसकी वाणी अत्यन्त मीठी हो तथा चार वेद छह शास्त्र अठारह पुराणों का ज्ञाता हो। पवित्र श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 17 के श्लोक 23 में प्रमाण है कि सच्चे सद्गुरु तीन बार में नाम जाप की दीक्षा देते हैं।

गुरुनानक देव जी की वाणी में प्रमाण:-

चहुँ का संग, चहूँ का मीत जामै चारि हटा हटावे नित।

मन पवन को राखे बंद, लहे त्रिकुटी त्रिवेणी संध।।

अखंड मंडल में सुन्न समाना, मन पवन सच्च खंड टिकाना।

अथार्त् पूर्ण सतगुरु वही है जो तीन बार में नाम दें और स्वांस की क्रिया के साथ सुमिरन का तरीका बताएं जिससे जीव का मोक्ष संभव हो सके। सच्चा सतगुरु तीन प्रकार के मन्त्रों को तीन बार में उपदेश करेगा। इसका वर्णन कबीर सागर ग्रन्थ पृष्ठ संख्या 265 बोध सागर में मिलता है।

वर्तमान के लगभग सभी सुप्रसिद्ध गद्दी नसीन सन्तों का मानना है कि मनुष्य को अपने द्वारा किये गए पापों का फल भोगना ही होगा। प्रारब्ध में किये गए पापों को भोगने के अलावा व्यक्ति के पास और कोई समाधान नहीं है, लेकिन अगर हम अपने सद्ग्रन्थों के संदर्भ से बात करें तो संत रामपाल जी महाराज जी प्रमाण दिखाते हुए बताते हैं कि पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में वर्णित है कि पूर्ण परमात्मा अपने साधक के घोर पाप का भी नाश कर उसकी आयु बढ़ा सकता है जिससे साफ जाहिर है कि अभी के गद्दीधारी इन सभी आदरणीय सन्तों के पास वेद ग्रंथों के आधार से कोई ज्ञान नहीं है। इस घोर कलियुग में पूरे ब्रह्माण्ड में अगर कोई परमात्मा द्वारा चयनित अधिकारी संत हैं, जो इन सभी शर्तों पर खरे उतरते हों तो वो एकमात्र संत रामपाल जी महाराज जी हैं। जीवन आपका है और बेशक चुनाव भी आपका होना चाहिये।

  • संतों की वाणी में कहा गया है कि

कबीर मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले ना बारम्बार।

जैसे तरुर से पत्ता टूट गिरे, बहुर ना लगता डार ||

जैसे तरुवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर न लगता डारि।।हम आपको बता दें कि इस पूरे विश्व में संत रामपाल जी महाराज ही एक मात्र वो तत्वदर्शी संत हैं, जिन्होंने सभी शास्त्रों के अनुकूल ज्ञान बताया है। इसलिए अपना वक़्त गवाएँ बिना और पूर्ण संत सतगुरु रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लें जिसकी गवाही सभी धर्म की पवित्र पुस्तकें दे रही हैं। अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना चैनल संध्या 7:30 से 8:30 तक और सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर सत्संग श्रवण करें।

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