छठ पूजा 2025 (Chhath Puja 2025) | छठ पूजा नहीं है शास्त्रानुकूल साधना, प्रमाण सहित जानिए क्या है सत साधना?

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Last Updated on 21 October 2025 IST | छठ पूजा 2025 (Chhath Puja in Hindi): वैसे तो भारत में बहुत से पर्व मनाये जाते हैं, उनमें छठ पूजा सूर्योपासना का एक लोकपर्व है। इन पर्वों से भारत के लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी होती हैं। छठ पूजा एक ऐसा पर्व है, जो मुख्यरूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तरप्रदेश, नेपाल के निवासियों तथा विश्व के अन्य हिस्सों में फैले हुए प्रवासी भारतीयों के द्वारा विश्वभर में मनाया जाता है।

यह पर्व कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक पावन त्योहार है। शुक्ल पक्ष के षष्ठी को शुरू होने वाले इस पर्व को छठ पूजा, सूर्य षष्ठी और डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। प्रमाण सहित जानिए गीतानुसार छठ पूजा (Chhath Puja) क्यों नही है शास्त्रानुकूल साधना।

छठ पूजा 2025 कब है?

यह चार दिवसीय पर्व कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाता है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की आराधना की जाती है।

दिनांकपर्व
25 अक्टूबरनहाय खाय (सूर्य षष्ठी व्रत प्रारंभ)
26 अक्टूबरखरना या लोहंडा
27 अक्टूबरसंध्या अर्घ्य (मुख्य पूजन)
28 अक्टूबरउषा अर्घ्य (व्रत समापन)

यह पर्व वैदिक काल से मनाया जा रहा है, यह पर्व बिहार के वैदिक आर्य संस्कृति को दर्शाता है। लेकिन वेदों मे ऐसे त्योहार की कहीं गवाही नहीं है।

छठ पूजा के प्रकार (Types of Chhath Puja in Hindi)

समाज में दो प्रकार के छठ पर्व की मान्यता है, जिसमें एक शक संवत के कैलेंडर के पहले मास के चैत्र में मनाई जाती है जिसे चैती छठ के नाम से जाना जाता है तथा दूसरी कार्तिक मास के दिवाली के छह दिन बाद मनाने की परंपरा है, जिसे कार्तिक छठ के नाम से जाना जाता है। इन चार दिनों में व्रती (उपवास रखने वाले) को कड़े नियमों का पालन करना होता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार छठ पूजा

पुराणों के अनुसार छठ पूजा (Chhath Puja) की शुरुआत त्रेतायुग में रामायण के दौरान हुई थी जब राम रावण का वध करके सीता को वापस लेकर लौटे थे। तब मुद्गल ऋषि ने राम को सीता के साथ जल में खड़ा होकर सूर्य देवता को अर्घ्य (जल अर्पण) देने की सलाह देकर इस व्रत को कराया तथा जल छिड़ककर सीता को पवित्र किया था।

नोट: पुराण ऋषियों का अपना मत है। इनका ज्ञान परमात्मा के ज्ञान के बिल्कुल विरुद्ध होने से व्यर्थ है। 

छठ पूजा से जुड़ी कथा (Chhath Puja Story in Hindi)

छठ पूजा 2025 (Chhath Puja in Hindi) | प्रियव्रत नामक एक प्रतापी राजा राज्य करते थे। विवाह के कई वर्षों पश्चात भी उनकी रानी मालिनी को कोई सन्तानोत्पत्ति नहीं हुई, राजा ने अपने राजगुरु से सलाह मशवरा किया। उनके राजगुरु ने यज्ञ अनुष्ठान करने की सलाह दी। राजन ने पूरे विधि-विधान से यज्ञ सम्पन्न किया। ऋषि ने रानी मालिनी को खीर खाने के लिए दी, कुछ समय पश्चात रानी गर्भवती हुई।

छठ पूजा 2025 (Chhath Puja in Hindi): गर्भधारण की अवधि पूरी होने पर रानी को मृत पुत्र की प्राप्ति हुई, राजा दुःखी मन से अकेले ही अपने मृत पुत्र के शव को लेकर शमशान पहुँचा, पुत्र वियोग में व्याकुल राजा ने आत्महत्या करने की सोची, तभी वहाँ भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुई और राजा को संतानोत्पत्ति का मार्ग बताते हुए देवी ने अपनी पूजा पूरे विधि-विधान से करने की सलाह देकर संतान प्राप्ति का आश्वासन देकर अंतर्ध्यान हो गई। परंतु आपको बता दें की यह सब लोक मान्यताए है जिनका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं है। 

कौन है छठी मईया?

छठ पूजा 2025 (Chhath Puja in Hindi): लोक मान्यता के अनुसार सृष्टि के मूल की उत्पत्ति के छठे दिन इनके जन्म के कारण इन्हें छठी मईया कहा जाता है। इस घटना के बाद राजा ने वापस अपने महल लौटकर पूरा वृतांत अपनी पत्नी को सुनाया और देवी द्वारा बताये गए नियमों और विधि-विधान से देवी द्वारा बताये गयी तिथि को पूरे अनुष्ठान के साथ छठी मईया की पूजा-अर्चना की। कुछ समय पश्चात रानी ने फिर से गर्भधारण किया। गर्भावधि पूरी होने के पश्चात रानी ने एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया।

राजा के संतान की इच्छा पूरा होने के कारण ही इस पर्व की मान्यता है कि छठी मईया का व्रत पूरे नियम और विधि-विधान से करने पर निःसंतान को संतान की प्राप्ति होती है। इसी अवधारणा के कारण छठ व्रत की परम्परा चली आ रही है। लेकिन वास्तव मे यहां किसी को संतान प्राप्ति पिछले संस्कार से ही होती है। इसमें देवी देवता आदि की कोई भूमिका नहीं है।

छठ पूजा पर जानिए यथार्थ ज्ञान के बारे में

छठ पूजा (Chhath Puja) का विधान इतिहास के अलावा हमारे किसी भी धर्म के प्रमाणित पवित्र सद्ग्रंथों गीता, चारों वेद में नहीं हैं, हिन्दू धर्म के पवित्र धर्मग्रन्थ श्रीमद्भगवद्गीता गीता अध्याय 6 श्लोक 16 में गीता ज्ञानदाता का कहना है कि हे अर्जुन! यह योग (भक्ति) न तो अधिक खाने वाले का और न ही बिल्कुल न खाने वाले का अर्थात् ये भक्ति न ही व्रत रखने वाले, न अधिक सोने वाले की तथा ना अधिक जागने वाले की सफल होती है। इस श्लोक से यह स्पष्ट है कि व्रत रखना पूर्ण रूप से मनमाना आचरण है और श्रीमद्भगवद्गीता गीता अध्याय 16 के श्लोक 23 अनुसार शास्त्र विरुद्ध मनमाने आचरण से कोई लाभ नहीं होता।

■ यह भी पढ़ें: दीवाली पर अवश्य जानिए क्या दीपावली का पर्व मानने से कोई लाभ संभव है? 

क्या भाग्य से अधिक देवी-देवता दे सकते हैं?

जहाँ तक सवाल है पुत्र प्राप्ति की तो परम संत सतगुरु रामपाल जी महाराज जी हमारे शास्त्रों से प्रमाणित कर बताते हैं कि यहाँ सभी जीव उतना ही पाते हैं, जितना उनकी किस्मत यानि भाग्य में लिखा हुआ है, अगर प्रारब्ध में कोई लेन-देन बाकी नहीं है तो संतान प्राप्ति नहीं होती है। भाग्य से अधिक कोई अगर दे सकता है तो वो पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं। छठ व्रत जैसी मनमानी पूजा को लेकर कबीर परमेश्वर जी ने कहा है :-

आपे लीपे आपे पोते, आपे बनावे होइ |

उसपर बुढिया पोते मांगे, अकल कहां पर खोई ||

अंधभक्ति पर कटाक्ष करते हुए कबीर परमेश्वर बंदीछोड़ जी कहते हैं एक बुढिया माई चार ईंट जोड़ कर उसे खुद ही लीप-पोत के देवी का दर्जा देती है और उससे परिवार की सलामती की कामना करती है। फिर उसके वहां से जाते ही उस पत्थर के ऊपर कुत्ता पेशाब कर के जाता है, यहाँ कबीर परमात्मा समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि जो पत्थर की मूर्ति अपनी रक्षा स्वयं नहीं कर सकती उससे आप स्वयं और अपने परिवार के सलामती की दुआ कर रहे हैं, तुम्हारी अक्ल काम नहीं कर रही है।

छठ पूजा में जिस मानस देव की पुत्री देवसेना का जिक्र है, वो देवी दुर्गा (माया) की ही अंश हैं, माया के बारे में कबीर साहेब जी ने कहा है –

माया काली नागिनी, अपने जाए खात।

कुंडली में छोड़े नहीं, सौ बातों की बात।।

माया स्वयं काल की अर्धांगिनी है जो हम सभी जीवों को इस चौरासी लाख योनियों में फंसाए रखने में काल की मदद करती है। अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा लिखित पुस्तक “अंध श्रध्दा भक्ति खतरा-ए-जान” अवश्य पढ़ें

गीता अध्याय न. 16 के मंत्र 24 में गीता ज्ञान दाता ने साफ़-साफ कहा है कि अर्जुन भक्ति करने के लिए शास्त्र ही प्रमाणित हैं अर्थात शास्त्र अनुसार भक्ति ही करनी चाहिए। और गीता अनुसार शास्त्रों के अनुकूल भक्ति तो पूर्ण संत (तत्वदर्शी संत) ही बता सकते हैं।

पूर्ण संत की पहचान हमारे पवित्र सद्ग्रंथों में

गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 में पूर्ण परमात्मा द्वारा दिए गए ज्ञान को समझने के लिए गीता ज्ञान दाता ने तत्वदर्शी संत की तलाश करने की बात कही है, अब बात यहाँ अटकती है संसार में इतने संतों की भीड़ में हम तत्वदर्शी संत की तलाश कैसे करेंगे, जहाँ आए दिन किसी ना किसी संत के ऊपर उँगली उठ रही है, ऐसे में हम कैसे तय करेंगे कि वो सच्चे तत्वदर्शी संत कौन हैं? इसका समाधान भी गीता ज्ञानदाता ने गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में बताया है कि जो भी संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभागों के बारे में वेदों अनुसार बता देगा वही तत्वदर्शी संत यानि पूर्णसंत होगा।

सच्चे सद्गुरु का अर्थ सच्चा ज्ञान प्रदान करने वाला होता है यानी परमात्मा द्वारा भेजा गया वो अधिकारी हंस जो नाम दीक्षा देने का अधिकारी हो। यही प्रमाण कबीर साहेब जी की वाणी में भी मिलता है।

सतगुरु के लक्षण कहूँ, मधुरे बैन विनोद।

चार वेद छः शास्त्र, कह अठारह बोध।।

कबीर साहेब जी वाणी में सतगुरु के लक्षण को बताते हुए कहते हैं, जिसकी वाणी अत्यन्त मीठी हो तथा चार वेद, छह शास्त्र, अठारह बोध (एक बोध = 18 पुराण) का ज्ञाता हो। पवित्र श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 17 श्लोक 23 के अनुसार पूर्णसंत (सच्चा सद्गुरु) तीन बार में नाम जाप की दीक्षा देता है।

गुरुनानक देव जी की वाणी में प्रमाण:-

चहुँ का संग, चहूँ का मीत जामै चारि हटा हटावे नित।

मन पवन को राखे बंद, लहे त्रिकुटी त्रिवेणी संध।।

अखंड मंडल में सुन्न समाना, मन पवन सच्च खंड टिकाना।

अर्थात् पूर्ण सतगुरु वही है जो तीन बार में नाम दें और स्वांस की क्रिया के साथ सुमिरन का तरीका बताए। जिससे जीव का मोक्ष संभव हो सके। सच्चा सतगुरु तीन प्रकार के मन्त्रों को तीन बार में उपदेश करेगा। इसका वर्णन कबीर सागर ग्रन्थ पृष्ठ संख्या 265 बोध सागर में मिलता है।

वर्तमान के लगभग सभी सुप्रसिद्ध गद्दी नसीन सन्तों का मानना है कि मनुष्य को अपने द्वारा किये गए पापों का फल भोगना ही होगा। प्रारब्ध में किये गए पापों को भोगने के अलावा व्यक्ति के पास और कोई समाधान नहीं है। लेकिन अगर हम अपने सद्ग्रन्थों के संदर्भ से बात करें तो संत रामपाल जी महाराज जी प्रमाण दिखाते हुए बताते हैं कि पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13, ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 में वर्णित है कि पूर्ण परमात्मा अपने साधक के घोर से घोर पाप का भी नाश कर उसकी आयु बढ़ा सकता है। जिससे साफ जाहिर है कि अभी के गद्दीधारी इन सभी आदरणीय सन्तों के पास सद्ग्रन्थों के आधार से कोई ज्ञान नहीं है। इस घोर कलियुग में पूरे ब्रह्माण्ड में अगर कोई परमात्मा द्वारा चयनित अधिकारी संत हैं, जो इन सभी शर्तों पर खरे उतरते हों तो वो एकमात्र संत रामपाल जी महाराज जी हैं। जीवन आपका है और बेशक चुनाव भी आपका होना चाहिये।

मानव जीवन अनमोल है

कबीर मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले ना बारम्बार।

जैसे तरुवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर ना लगता डार ||

हम आपको बता दें कि इस पूरे विश्व में संत रामपाल जी महाराज ही एक मात्र वो तत्वदर्शी संत हैं, जिन्होंने सभी शास्त्रों के अनुकूल ज्ञान बताया है। इसलिए अपना वक़्त गवाएँ बिना पूर्ण संत सतगुरु रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लें । जिसकी गवाही सभी धर्म की पवित्र पुस्तकें दे रही हैं। अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना चैनल रात्रि 7:30 से 8:30 तक और Satlok Ashram यूट्यूब चैनल पर सत्संग श्रवण करें या आप गूगल प्ले स्टोर से Sant Rampal Ji Maharaj App डाऊनलोड करें।

FAQ About Chhath Puja 2025 in Hindi

प्रश्न – छठ पर्व प्रतिवर्ष कब मनाया जाता है?

उत्तर- प्रतिवर्ष चार दिवसीय छठ पर्व कार्तिक मास की शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक मनाया जाता है।

प्रश्न – इस साल छठ पर्व कब मनाया जाएगा?

उत्तर – छठ पर्व 25 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2025 तक मनाया जाएगा।

प्रश्न – छठ त्यौहार में किसकी पूजा की जाती है?

उत्तर- छठ पर्व में सूर्य उपासना और छठ मईया की पूजा की जाती है।

प्रश्न – क्या छठ पूजा करने से संतान प्राप्ति होती है?

उत्तर – छठ पूजा द्वारा संतान प्राप्ति वाली मान्यता केवल लोक मान्यता ही है। क्योंकि गीता अनुसार शास्त्रविरुद्ध साधना से कोई लाभ नहीं होता है।

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