विश्व प्रसिद्ध संतों की वाणियों में परमेश्वर कबीर जी की महिमा

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पवित्र वेदों में लिखा है कि हर युग में पूर्ण परमात्मा जिसके एक रोम कूप में करोड़ सूर्य तथा करोड़ चंद्रमा की मिली जुली रोशनी से भी अधिक प्रकाश है, अपने निजधाम सतलोक से स:शरीर आते हैं और आकर अच्छी आत्माओ को मिलते हैं। आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी किन किन आत्माओं को आकर मिले और फिर उन्होंने अपनी वाणियों में कैसे परमात्मा की गवाही दी। जिन-जिन पुण्यात्माओं ने परमात्मा को प्राप्त किया है उन्होंने बताया कि कुल का मालिक एक है। परमेश्वर का वास्तविक नाम अपनी-अपनी भाषाओं में कवि र्देव (वेदों में संस्कृत भाषा में) तथा हक्का कबीर (श्री गुरु ग्रन्थ साहेब में पृष्ठ 721 पर) तथा सत् कबीर (श्री धर्मदास जी की वाणी में क्षेत्रीय भाषा में) तथा बन्दी छोड़ कबीर (सन्त गरीबदास जी के सद्ग्रन्थ में क्षेत्रीय भाषा में) कबीरा, कबीरन, खबीरा या खबीरन् (श्री कुरान शरीफ़ सूरत फुरकानी 25, आयत 19, 21, 52, 58, 59 में अरबी भाषा में) बताया गया है।

Table of Contents

जिन पूर्ण संतो ने पूर्ण परमात्मा को देखा उनमे से कुछ के नाम हैं:-

  1. आदरणीय गरीबदास साहेब जी
  2. आदरणीय धर्मदास साहेब जी
  3. आदणीय दादू साहेब जी
  4. आदरणीय मलूक दास साहेब जी
  5. आदरणीय नानक साहेब जी
  6. आदरणीय घीसा दास साहेब जी आदि ।

आदरणीय गरीबदास साहेब जी (छुड़ानी जिला-झज्जर, हरियाणा) की अमृतवाणी में परमेश्वर कबीर जी की महिमा 

अजब नगर में ले गया, हमकुं सतगुरु आन। 

झिलके बिम्ब अगाध गति , सूते चादर तान।।

अनन्त कोटि ब्रह्मण्ड का एक रति नहीं भार। 

सतगुरु पुरुष कबीर हैं कुल के सृजनहार।।

सतं गरीबदास जी बताते हैं कि मुझे सतगुरु रूप में मिलने वाले कबीर परमात्मा ही सर्व ब्रह्मांडो को रचने वाले कुल के मालिक अर्थात सब के मालिक है। सतं गरीबदास जी महाराज बताते हैं कि वह अविनाशी कबीर परमेश्वर ऊपर के लोक से सतभक्ति बताने के लिए सतगुरु रूप में स:शरीर प्रकट होता है।

गैबी ख्याल विशाल सतगुरु, अचल दिगम्बर थीर है।

भक्ति हेत काया धर आये, अविगत सत कबीर हैं।।

हरदम खोज हनोज हाजर, त्रिवेणी के तीर हैं। 

दास गरीब तबीब सतगुरु, बन्दी छोड़ कबीर हैं।।

आदरणीय संत गरीबदास जी कहते हैं कि तबीब अर्थात सर्व रोग नाशक वैद्य सतगुरु बन्दीछोड़ कबीर जी हैं। आदरणीय गरीबदास जी महाराज को गांव छुड़ानी में नला नामक खेत में पूर्ण परमात्मा कबीर जी जिंदा महात्मा के रुप में मिले और गरीब दास जी को ऊपर सतलोक के दर्शन कराकर वापस छोड़ा। तब गरीबदास जी ने बताया कि मुझे अधम सुलतान, नानक जी, दादूजी आदि को जो मिले अर्थात हमारा उद्धार करने वाले कोई और नहीं बल्कि काशी में जुलाहे की भूमिका करने वाले स्वयं कबीर परमेश्वर है।

हम सुलतानी नानक तारे, दादू को उपदेश दिया।

जाति जुलाहा भेद ना पाया काशी माहीं कबीर हुआ।।

सब पदवी के मूल हैं, सकल सिद्धि हैं तीर। 

दास गरीब सतपुरुष भजो, अविगत कला कबीर।।

जिंदा जोगी जगतगुरु, मालिक मुरशद पीर। 

दहूँ दीन झगड़ा मड्ंया, पाया नहीं शरीर।।

सतं गरीबदास जी कबीर साहेब की मगहर लीला बताते हुए कहते हैं कि वह जिंदा बाबा रूप में मिलने वाले जगतगुरु सबके मालिक कबीर परमात्मा का शरीर नहीं मिला था अर्थात वे सशरीर सतलोक को गये थे। जबकि शरीर के अंतिम संस्कार के लिए हिन्दू मुस्लिम समुदाय के लोग आपस में झगड़ा करने के लिए तैयार थे। लेकिन परमेश्वर का शरीर नहीं मिला।

गरीब जिस कुं कहते कबीर जुलाहा। 

सब गति पूर्ण अगम अगाहा।।

उपरोक्त वाणी में आदरणीय गरीबदास साहेब जी महाराज ने स्पष्ट कर दिया कि काशी वाले धाणक (जलाहे) ने मुझे भी नाम दान देकर पार किया, यही काशी वाला धाणक ही (सतपरुुष) पूर्णब्रह्म है। आदरणीय सतं गरीब दास जी महाराज जी को परमेश्वर कबीर जी मिले थे, सतलोक दिखाया था। उन्होंने कहा है कि जिसे लोग कबीर जुलाहा मानते हैं वह तो स्वयं पूर्ण परमात्मा है।

अमर शरीर कबीर पुरुष का, जल रूप जगदीशं।

गरीबदास सतलोक है असतल, साहिब बिसवे बीसं।।

सतं गरीबदास जी कहते हैं कि कबीर परमेश्वर जी काशी को छोड़कर मगहर को गये, वहाँ से जब सतलोक को गए तो उनका शरीर नहीं मिला। वह जुलाहा रूपी परमात्मा अविनाशी है उसका जन्म मां से नहीं हुआ था।

मगहर देश कू किया पयाना, दोन्यौं दीन डुराया है।

घोर कफन हम काठी दीजो, चद्दरि फूल बिछाया है।।

गैबी मजिंल मारफति औढ़ीं, चादरि बीच न पाया है।

काशी वासी है अविनाशी, नाद बिंद नहीं आया है।।

बिट्ठल होकर रोटी खाई, नामदेव की कला बढ़ाई।

पंढरपुर नामा परावाना, देवल फेर छिवा दई छान।।

सतं गरीबदास जी ने परमेश्वर कबीर जी की महिमा बताई कि कबीर परमेश्वर ने ही बिट्ठल रूप में आकर नामदेव जी की रोटी खाई थी और उनकी महिमा बढ़ाई थी। फिर कबीर परमेश्वर ने ही पंढरपुर में संत नामदेव को नाम उपदेश किया था तथा संत नामदेव के लिए ही परमेश्वर कबीर जी ने मंदिर का मुख फेरा था और झोपड़ी का छप्पर छाया था।

संत गरीबदास जी जिन्हें परमेश्वर कबीर जी मिले थे उन्होंने बताया कि जुलाहे रूप में कबीर परमात्मा की लोग बेइज्जती करना चाह रहे थे लेकिन कबीर परमात्मा ने केशो बनजारे रूप में आकर तीन दिन तक काशी में 18 लाख साधु संतो को भोजन कराया था।

नाम कबीरा जाति जुलाहा, षट्दल हांसि करी रे।

हे हरि हे हरि होती आई, बालदि आनि ढुरी रे।।

केशो नाम धर कबीरा आए, बालदि आनि ढही रे।

दास गरीब कबीर पुरुष कै, उतरी सौंज नई रे।।

आदरणीय संत गरीबदास जी ने बताया कि द्वापरयुग में कबीर साहेब जी करुणामय रूप में प्रकट थे उनका एक शिष्य सुपच सुदर्शन था। जब पांडवो ने यज्ञ की तो उसमें तीन लोक के स्वामी ब्रह्मा, विष्णु, शिव, 33 करोड़ देवी-देवता, 88 हजार ऋषि भी मौजदू थे लेकिन जब कबीर परमेश्वर ने सुपच रूप धारण करके यज्ञ में आकर भोजन किया था तब पांडवों की यज्ञ सफल हुई थी।

गरीब सुपच रूप धरी आया, सतगुरु पुरुष कबीर ।

तीन लोक की मेदनी, सुर नर मुनिजन भीर ।।

सतं गरीबदासजी को कबीर परमेश्वर गाँव छुड़ानी के खेतों में मिले जब उनकी आयु 10 वर्ष की थी। सतलोक लेकर गये, सृष्टि रचना की वास्तविकता से अवगत कराया। पूर्ण परमात्मा से परिचित होने के बाद संत गरीबदास जी महाराज ने कबीर परमेश्वर की महिमा बताते हुए कहा है कि :-

गरीब, जाके अर्ध रूम पर सकल पसारा, ऐसा पूर्ण ब्रह्म हमारा।।

गरीब, हम ही अलख अल्लाह हैं, कुतुब गोस और पीर।

गरीबदास खालिक धनी, हमरा नाम कबीर।।

सतं गरीबदास जी परमेश्वर की वास्तविकता से परिचित होने के बाद बताया कि कबीर परमेश्वर स्वयं बताते थे कि मैं ही अदृश परमात्मा (अल्लाह) हूँ। मैं ही संत तथा सतगुरु हूं। मेरा नाम कबीर है। मैं (खालिक) संसार का मालिक (धनी) हूं। मैं कबीर सर्वव्यापक हूं, मैने ही सर्व ब्रह्मांडो की रचना की है।

अमर करूँ सतलोक पठाऊँ, तातै बन्दीछोड़ कहाऊँ।

बन्दीछोड़ हमारा नामं, अजर अमर है अस्थिर ठामं।।

सतं गरीबदास जी ने बताया कि परमेश्वर कबीर जी काल के कर्म बधंनों से छुड़वाकर अमर लोक सतलोक ले जाते है, उन प्राणियों को वहाँ अमर शरीर प्रदान करते है इसलिए बन्दीछोड़ के नाम से भी कबीर जी को जाना जाता है।

पवित्र जैन धर्म के प्रवर्तक श्री ऋषभदेव को भी मिले कबीर परमात्मा

सन् 1727 में जब गरीबदास जी 10 वर्ष के थे तब कबीर जी जिंदा बाबा के रूप में आकर खेतों में संत गरीबदास जी को मिले, सतलोक दिखाया और कबीर परमेश्वर ने उनका ज्ञान योग खोल दिया। तब उन्होंने बताया की जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव जी को भी कबीर परमात्मा ऋषि रुप में मिले थे और नाम पूछने पर ऋषि ने कवि नाम बताया था।

गरीब, ऋषभ देव के आइया, कबी नामे करतार ।

नौ योगेश्वर को समझाइया, जनक विदेही उद्धार ।।

पवित्र मुसलमान धर्म के प्रवर्तक हज़रत मुहम्मद जी को मिले पूर्ण परमात्मा

बन्दीछोड़ कबीर परमेश्वर ने हजरत मुहम्मद जी को भी दर्शन दिए थे। कबीर साहेब हजरत मुहम्मद जी को भी सतलोक लेकर गए, सर्व लोकों की वास्तविक स्थिति से परिचय करवाया। किन्तु हज़रत मुहम्मद जी के अनुयायियों की संख्या अधिक हो चुकी थी इस कारण वे तत्वज्ञान को नहीं समझ सके एवं मान-बड़ाई के कारण वापस यहीं पृथ्वी लोक में आकर गलत साधना/ काल ब्रह्म वाली साधना करने लगे।

कबीर सागर के मोहम्मद बोध से प्रमाण: 

हम मुहम्मद को सतलोक ले गया। इच्छा रूप वहाँ नहीं रहयो।।

उलट मुहम्मद महल पठाया, गुज बीरज एक कलमा लाया ।।

रोजा, बंग, नमाज दई रे, बिसमिल की नहीं बात कही रे ।।

आदरणीय धर्मदास साहेब जी की अमृतवाणी में परमेश्वर कबीर जी की महिमा

आदरणीय धर्मदास साहेब जी, बांधवगढ़ मध्य प्रदेश वाले, जिनको पूर्ण परमात्मा एक जिंदा महात्मा के रूप में

मथुरा में मिले थे और उन्हें सतलोक दिखाया था। आदरणीय धर्मदास साहेब जी ने पवित्र कबीर सागर, कबीर साखी, और कबीर बीजक नामक सद्ग्रन्थों की रचना में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। इन महाग्रंथों में पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी के मुख कमल से उच्चारित वाणियों का संग्रह है तथा धर्मदास जी की आंखो देखी स्थिति को भी दर्शाया गया है। 

पवित्र कबीर सागर की अमृत वाणी में प्रमाण:

आज मोहे दर्शन दियो जी कबीर।। 

सत्यलोक से चल कर आए, काटन जम की जंजीर ।।1।।

थारे दर्शन से म्हारे पाप कटत हैं, निर्मल होवै जी शरीर ।।2।।

अमृत भोजन म्हारे सतगुरु जीमैं, शब्द दूध की खीर ।।3।।

हिन्दू के तुम देव कहाये, मुसलमान के पीर ।।4।।

दोनों दीन का झगड़ा छिड़ गया, टोहे ना पाये शरीर ।।5।।

धर्मदास की अर्ज गोसांई, बेड़ा लंघाइयो परले तीर ।।6।।

आदरणीय संत धर्मदास जी को परमेश्वर कबीर जी मिले, सत्यज्ञान से परिचित कराया और सतलोक दिखाया। उन्होंने परमेश्वर कबीर जी की महिमा करते हुए कहा कि मुझे कबीर जी ने दर्शन दिया, जोकि सत्यलोक से चलकर आते हैं, काल के बधंनों से छुड़वाने के लिए।

बाजा बाजा रहित का, परा नगर में शोर।

सतगुरु खसम कबीर है, नजर न आवै और॥

आदरणीय दादूसाहेब जी की अमृतवाणी में कबीर परमेश्वर की महिमा 

आदरणीय दादूसाहेब जी जब सात वर्ष के बालक थे तब पूर्ण परमात्मा जिंदा महात्मा के रूप में मिले तथा सत्यलोक ले गए। तीन दिन तक दादूजी बेहोश रहे। होश में आने के पश्चात परमेश्वर की महिमा की आंखों देखी बहुत सी अमृतवाणी के माध्यम से उच्चारण की।

पवित्र दादू साहेब जी की अमृतवाणी से प्रमाण:

जिन मोकूं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार। 

दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार।।

दादू नाम कबीर की, जै कोई लेवे ओट।

उनको कबहू लागे नहीं, काल वज्र की चोट।।

दादू नाम कबीर का, सुन कर कांपे काल।

नाम भरोसे जो नर चले, होवे न बांका बाल।।

जो जो शरण कबीर के, तरगए अनन्त अपार। 

दादू गुण कीता कहे, कहत न आवैपार।।

कबीर कर्ता आप है, दूजा नाहि कोय। 

दादू पूरन जगत को, भक्ति दृढावत सोय।।

सतं दादूजी को भी परमेश्वर कबीर जी मिले थे, उन्हें भी सतलोक दिखाकर छोड़ा था। संत दादूजी बताते हैं कि सृष्टि की रचना करने वाले स्वयं कबीर परमेश्वर हैं और किसी ने सृष्टि की रचना नहीं की है। तथा कबीर परमेश्वर ही पूरे विश्व को सतभक्ति बताते हैं। संत दादूजी बताते हैं कि जो व्यक्ति सतगुरु से कबीर परमेश्वर का नाम लेकर सुमिरन करता है, उनका काल भी कुछ नहीं कर सकता।

ठेका पूरन होय जब, सब कोई तजै शरीर। 

दादू काल गँजे नही, जपै जो नाम कबीर।।

आदमी की आयु घटै, तब यम घेरे आय। 

सुमिरन किया कबीर का, दादू लिया बचाय।।

मेटि दिया अपराध सब, आय मिले छन माँह। 

दादू संग ले चले, कबीर चरण की छांह।।

सेवक देव निज चरण का, दादू अपना जान। 

भृंगी सत्य कबीर ने, कीन्हा आप समान।।

दादू अन्तरगत सदा, छिन-छिन समिरन ध्यान। 

वारु नाम कबीर पर, पल-पल मेरा प्रान।।

सुन -2 साखी कबीर की, काल नवावै माथ। 

धन्य-धन्य हो तिन लोक में, दादू जोड़े हाथ।।

केहरि नाम कबीर का, विषम काल गज राज। 

दादू भजन प्रताप ते, भागे सुनत आवाज।।

संत दादूजी ने तुलनात्मक रूप से बताया कि कबीर जी को बब्बर शेर जानो और काल को हाथियों का राजा गजराज जानो। जिस तरह शेर की दहाड़ सुनते ही हाथी भाग खड़ा होता है उसी तरह कबीर साहेब के नाम (मत्रं) में वह ताकत है कि काल भी कुछ नहीं कर पाता।

पल एक नाम कबीर का, दादू मन चित लाय।

हस्ती के अश्वार को, श्वान काल नहीं खाय।।

सुमरत नाम कबीर का, कटे काल की पीर। 

दादू दिन दिन ऊँचे, परमानन्द सुख सीर।।

दादूनाम कबीर की, जो कोई लेवे ओट। 

तिनको कबहुं ना लगई, काल बज्र की चोट।।

और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर। 

दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर।।

अबही तेरी सब मिटै, जन्म मरन की पीर। 

स्वांस उस्वांस सुमिरले, दादू नाम कबीर।।

कोई सर्गुन में रीझ रहा, कोई निर्गुण ठहराय। 

दादू गति कबीर की, मोते कही न जाय।।

जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगरुु हमार। 

दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजनहार।।

दादू जी की ये वाणियां कई बातों का संकेत देती है। हालांकि दादूजी कबीर जी के समकालीन नहीं थे लेकिन उन्होंने साखियों में जिक्र किया है कि बूढ़े बाबा के रूप में उन्हें कबीर जी मिले थे, जिन्हे उन्होंने अपना सतगुरु माना है। उनकी साखियां यह भी संकेत देती है कि कबीर नाम स्वयं परमात्मा का है जिनके नाम के सहारे संसार सागर से पार हुआ जा सकता है। उन्होंने कबीर जी को ही सृजनहार अर्थात दुनिया का उत्पत्ति कर्ता कहा है। 

आदरणीय मलुक दास साहेब जी की अमृतवाणी में परमेश्वर कबीर जी की महिमा 

42 वर्ष की आयु में श्री मलूक दास साहेब जी को पूर्ण परमात्मा मिले तथा दो दिन तक श्री मलूक दास जी अचेत रहे फिर उन्होंने निम्न वाणियों के माध्यम से पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी की महिमा बताई।

Also Read | कलयुग में किस किस को मिले कबीर परमेश्वर?

आदरणीय मलूक दास साहेब जी की अमृतवाणी में प्रमाण:

जपो रे मन सतगुरु नाम कबीर।।

जपो रे मन परमेश्वर नाम कबीर।।

एक समय गुरु बंसी बजाई कालंद्री के तीर।

सुर-नर मुनिजन थक गए, रूक गया दरिया नीर।।

काँशी तज गुरु मगहर आये, दोनों दीन के पीर।

कोई गाढ़े कोई अग्नि जरावै, ढूंडा न पाया शरीर।

चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर।

दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर।।

आदरणीय नानक साहेब जी की अमृतवाणी में परमेश्वर कबीर जी की महिमा

परमेश्वर कबीर जी सिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव जी को बेई नदी पर जिंदा बाबा के रूप में मिले और उन्हें सतलोक (सच्चखंड) दिखाया।

गुरुग्रन्थ साहेब पृष्ठ 721 पर अपनी अमृतवाणी महला 1 में श्री नानक जी ने कहा है कि:

“हक्का कबीर करीम तू, बेएब परवरदीगार।

नानक बुगोयद जनु तुरा, तेरे चाकरा पाखाक”

गुरुनानक जी एक काजी का जवाब देते हुए कबीर साहेब की महिमा बताते हैं कि जिस परमेश्वर ने आदम की

रचना की थी वह सबसे बड़ा परमात्मा कबीर है, वहीं सब गुरुओं का भी गुरु (पीर) है।

नानक आखे रुकंदीन सच्चा सुनहु जवाब, खालक आदम सिरजिया आलम बड़ा कबीर ।।

कायम दयां कुद्रती सर पीरन दे पीर, सजदे करे खुदाई नु आलम बड़ा कबीर ।।

– जन्म साखी भाई बाला वाली, पेज 122-123

नानक जी ने कबीर परमात्मा को सत्यलोक (सच्चखण्ड) में आंखो देखा तथा फिर काशी में उसी परमात्मा को धाणक (जुलाहे) का कार्य करते हुए देखा तो निम्न वाणियो में बताया है कि वही धाणक रूप (जुलाहा) सत्यलोक में सत्यपुरुष रूप में भी रहता है तथा यहाँ भी वही है

वाह वाह कबीर गुरु पूरा है।

पूरे गुरु की मैं बलि जावाँ जाका सकल जहूरा है।।

अधर दुलिच परे है गुरुनके शिव ब्रह्मा जह शूरा है।।

श्वेत ध्वजा फहरात गुरुनकी बाजत अनहद तूरा है।।

पूर्ण कबीर सकल घट दरशै हरदम हाल हजूरा है।।

नाम कबीर जपै बड़भागी नानक चरण को धूरा है।।

परमेश्वर कबीर जी को काशी में धाणक जुलाहे रूप में देखकर नानक जी ने बताया कि यह धाणक जुलाहे की भूमिका करने वाला स्वयं पूरी सृष्टि को रचनेवाला करतार है।

एक सुआन दुई सुआनी नाल,भलके भौंकही सदा बिआल ।

कुड़ छुरा मुठा मुरदार, धाणक रूप रहा करतार ।।

मै पति की पंदि न करनी की कार, उह बिगड़ै रूप रहा बिकराल ।

तेरा एक नाम तारे संसार, मैं ऐहो आस एहो आधार ।

मुख निंदा आखा दिन रात,पर घर जोही नीच मनाति ।।

काम क्रोध तन वसह चंडाल,धाणक रूप रहा करतार ।

फाही सुरत मलूकी वेस, यह ठगवाड़ा ठगी देस ।

खरा सिआणां बहता भार, धाणक रूप रहा करतार ।।

मैं कीता न जाता हरामखोर, उह किआ मुह देसा दुष्ट चोर ।

नानक नीच कह बिचार, धाणक रूप रहा करतार ।।

 – गुरुग्रथं साहिब, राग सिरी महला 1 पृष्ठ 24

श्री विष्णु जी के वाहन श्री गरुड़ जी को भी मिले कबीर परमात्मा

कबीर परमेश्वर ने अपनी महिमा स्वयं बताई कि मैं ज्ञानी रूप में गरुड़ जी को मिला, उनको बताया कि मेरा नाम कबीर है और मैं सतलोक (अमरलोक) से मृत्यु लोक अर्थात इस संसार में तत्वज्ञान देकर जीवो को काल के जाल से छुड़वाने के लिए प्रकट होता हूँ।

कहा कबीर है नाम हमारा, तत्वज्ञान देने आए संसारा।

सत्यलोक से हम चलि आए, जीव छुडावन जग में प्रकटाए।

कबीर परमेश्वर अपनी महिमा स्वयं बताते हैं कि मैं (कबीर) ही वह मूल रूपी अव्यक्त परमात्मा, अल्लाह हूँ, मैने ही सर्व ब्रह्मांडो की रचना की है अर्थात सृष्टि रचनहार हूँ।

कबीर, हमहीं अलख अल्लाह हैं, मूल रूप करतार।

अनंत कोटि ब्रह्मांड का, मैं ही सृजनहार।।

अन्य संतों की वाणी में परमेश्वर कबीर जी की महिमा

प्रसिद्ध संत सूरदास जी की वाणी में प्रमाण

इसी प्रकार एक प्रसिद्ध कवि सूरदास जी ने भी कबीर जी की महिमा बताते हुए कहा कि कबीर जी का जन्म न तो मां के गर्भ से हुआ और न ही उनकी मृत्यु हुई तथा करोड़ों तो अवतार, पैगंबर जन्म के बाद मृत्यु को प्राप्त हुए लेकिन कबीर जी एक के एक हैं अर्थात अविनाशी हैं।

कलिमा साँचो भगत कबीर।

गर्भवास आयो नहीं, काल न ग्रस्यो शरीर।

कोटिन भये पगैम्बर, कोटि न गौस कुतेब ।

कोटिन ही अवतार भये, कबीर एक का एक।

काशी वाले स्वामी रामानंद जी की वाणी में प्रमाण

स्वामी रामानंद जी को कबीर परमेश्वर ने जब अपनी शक्ति से परिचित कराया तब स्वामी रामानंद ने कबीर साहेब की महिमा गाते हुए कहा

बोलत रामानंद जी, सुन कबीर करतार ।

गरीबदास सब रूप में, तू ही बोलनहार ।।

गरीब, ऐ स्वामी सृष्टि में, सृष्टि हमरे तीर।

दास गरीब अधर बसूं, अविगत सत्य कबीर।।

सतं गरीबदास जी ने बताया कि कबीर साहेब ने कहा कि हे स्वामी रामानन्द जी! मैं ही सर्व सृष्टि रचनहार हूँ। यह सृष्टि मेरे ही आश्रित है। मैं ऊपर सतलोक में निवास करता हूँ। मैं ही वह अमर अव्यक्त कबीर अर्थात अविनाशी परमात्मा हूँ।

संत नाभा दास जी की वाणी में प्रमाण 

वाणी अरबों खरवो, ग्रन्थ कोटी हजार ।

करता पुरुष कबीर, रहै नाभे विचार ।।

-नाभादास जी

प्रसिद्ध संत रविदास जी की वाणी में प्रमाण

साहेब कबीर समर्थ है, आदी अन्त सर्व काल।

ज्ञान गम्या से दे दिया, कहै रैदास दयाल॥

-रैदास जी

नाथ संप्रदाय के प्रसिद्ध संत श्री गोरखनाथ जी की वाणी में प्रमाण 

नौ नाथ चौरासी सिद्धा, इनका अन्धा ज्ञान।

अविचल ज्ञान कबीर का, यो गति विरला जान॥

–गोरखनाथ जी

वर्तमान समय में कैसे करें परमात्मा का दीदार?

पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी अपने विधान अनुसार प्रत्येक युग में आकर अच्छी आत्माओं को मिलते हैं। इसी विषय में आदरणीय गरीबदास जी महाराज अपनी अमृतमय वाणी में कहते है कि परमात्मा से परिचित होने के बाद संत गरीबदास जी महाराज ने परमेश्वर कबीर साहेब जी के बारे में बताया है कि वास्तव में परमेश्वर के अन्नत करोड़ अवतार है। वह परमात्मा एक दिन में सैकड़ों स्थान पर अपने निजधाम सतलोक से चलकर पृथ्वीलोक पर आते है। 

वर्तमान समय में वहीं परमात्मा हरियाणा के अंदर जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के रूप में धरती पर आए हुए है। कबीर साहेब जी ने अपने कलयुग मे पुनः अवतरण की भविष्यवाणी 600 वर्ष पूर्व ही कर दी थी।

चौथा युग जब कलियुग आई, तब हम अपना अंश पठाई ।

कलियुग बीते पांच सौ पाँचा, तब ये वचन मेरा होगा साँचा ।।

वर्तमान समय में परमेश्वर कबीर साहेब जी साक्षात संत रामपाल जी महाराज जी के चोले में विराजमान है। सभी प्रभु प्रेमी आत्माओं को चाहिए कि उनको शीघ्र अतिशीघ्र पहचानकर उनकी शरण ग्रहण करें और इस अनमोल अवसर को न गवाएं। लोगों को चाहिए कि सर्वप्रथम संत रामपाल जी महाराज जी के तत्वज्ञान को समझे। संत रामपाल जी महाराज जी के अद्वितीय तत्वज्ञान के प्राप्त करने के लिए आज ही डाउनलोड कीजिए “संत रामपाल जी महाराज” एंड्रॉयड स्मार्ट एप

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