कहते हैं जल ही जीवन है। यदि जल न हो तो कल की कल्पना भी मुश्किल है। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की तहसील प्रभात पट्टन के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत चकोरा में पिछले लगभग 20 वर्षों से ग्रामीण पेयजल के बड़े संकट से जूझ रहे थे। लेकिन संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम से पेयजल का गंभीर संकट अब दूर हो गया है। भीषण जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों और महिलाओं को रोज़ पानी के लिए मीलों दूर भटकना पड़ता था। इस विकट समस्या का समाधान जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के ‘शुद्ध पेयजल सेवा अभियान’ के माध्यम से संभव हुआ है।
7 एचपी मोटर की नाकामी, फिर लगाई गुहार
चकोरा गांव में जल स्रोत से पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन तो पहले से बिछी हुई थी, लेकिन जल स्रोत दूर होने और ऊंचाई पर पानी चढ़ाने के कारण पहले से लगी 7 एचपी (HP) की मोटर पर्याप्त दबाव के साथ पानी नहीं पहुंचा पा रही थी।
ग्राम पंचायत के सरपंच आनंद राव कुमरे, पंचायत सचिव सतीश मालवीय और गांव के प्रतिनिधियों ने सतलोक आश्रम उड़दन (बैतूल) पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज के समक्ष एक ज्ञापन सौंपकर 10 एचपी की नई हैवी-ड्यूटी सबमर्सिबल मोटर और आवश्यक केबल-स्टार्टर की गुहार लगाई थी।
तत्काल सर्वे से 20 वर्षों की मुसीबत का 2 दिन में समाधान
प्रार्थना पत्र मिलते ही संत रामपाल जी महाराज के आदेश पर आश्रम की सर्वे टीम ने चकोरा गांव पहुंचकर धरातल पर निरीक्षण किया। सर्वे रिपोर्ट में मांग जायज पाए जाने के तुरंत बाद आश्रम सेवादारों ने गांव में 10 एचपी की नई मोटर, स्टार्टर और हैवी केबल हैंडओवर कर दिए।
ग्राम पंचायत सचिव सतीश मालवीय ने कहा, “शासन-प्रशासन में कई बार आवेदन देने के बाद महीनों और सालों बीत जाते हैं, लेकिन यहां प्रार्थना के 48-72 घंटे के भीतर लाखों रुपये का उपकरण गांव को सौंप दिया गया। यह अद्भुत और अनुकरणीय पहल है।”
गांव में जश्न का माहौल, ग्रामीणों ने जताया आभार
सामग्री पहुंचते ही चकोरा गांव में उत्सव का माहौल बन गया। ग्रामीणों और पंचायत जनप्रतिनिधियों ने ढोल-नगाड़ों और पुष्पमालाओं के साथ सेवादार टीम और संत रामपाल जी महाराज का स्वागत किया। सरपंच आनंद राव कुमरे ने कहा कि इस 10 एचपी मोटर के लगने से झरिया में उपलब्ध पानी अब सीधे गांव तक पहुंचेगा और वर्षों पुरानी पानी की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
संत रामपाल जी की समाज सेवा की अनुकरणीय मिसाल
चकोरा गांव में पेयजल संकट का यह त्वरित समाधान केवल एक मोटर लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती के बीच समाज सेवा की एक नई नज़ीर पेश करता है। जिस समस्या के लिए ग्रामीण सालों तक दफ़्तरों के चक्कर काटने को मजबूर थे, उसका समाधान महज़ कुछ घंटों में धरातल पर उतरना यह साबित करता है कि अगर नीयत साफ़ हो तो दूर-दराज़ के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदली जा सकती है। 10 एचपी की नई मोटर चालू होने से न सिर्फ चकोरा के सैकड़ों परिवारों की प्यास बुझेगी, बल्कि भीषण गर्मी में रोज़मर्रा के पानी के संघर्ष से जूझने वाली महिलाओं को भी एक स्थायी राहत मिलेगी।



