नमस्कार दोस्तों!

26 जनवरी, 2019 को भारत का 70वां गणतंत्र दिवस (Republic day 2019) मनाया जाएगा। आज हम बात करेंगे भारत देश के संविधान के बारे में कि ये कब लागू हुआ? इसे बनने में कितना समय लगा? कितने अधिकारियों ने संविधान के अनुसार काम किया और क्या हमारा देश वर्तमान में संविधान के अनुसार चल रहा है?

डॉ भीमराव आंबेडकर जी (DR. BR Ambedkar) की अध्यक्षता में 09 दिसंबर, 1946 को संविधान बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई और अंततः 26 नवंबर, 1950 को हमारे देश का संविधान बनकर तैयार हुआ। इस तरह हमारे देश के संविधान को बनाने में 02 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन का समय लगा और इस संविधान को 26 जनवरी 1950 को सम्पूर्ण भारत में लागू किया गया। भारतीय संविधान विश्व का सबसे बड़ा संविधान है।

कुछ समय तक तो इस संविधान का पालन किया गया लेकिन वर्तमान में स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। वर्तमान में कुछ ही अधिकारी भारत के संविधान का पूर्ण रूप से पालन कर रहे हैं, बाकी सभी तो केवल औपचारिकता ही निभा रहे हैं। वर्तमान में भ्रष्टाचार (corruption), रिश्वतखोरी जैसे विकारों के वश होकर कुछ अधिकारी संविधान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

हमारे देश के संविधान को बने हुए लगभग 69 वर्ष हो चुके हैं लेकिन इसे पूर्ण रूप से नजरअंदाज किया जाता रहा है। देश के भ्रष्ट राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों ने संविधान का मजाक बना दिया है। किसी भी देश का संविधान उस देश के नागरिकों के लिए सर्वोपरि होता है और सभी के लिए बराबर भी होता है। संविधान के नियम सभी के लिए एक जैसे ही होते हैं, चाहे वह कोई भी हो।

इतने वर्षों के बाद भी ना तो देश में बलात्कार की घटनाएं (rapes incidents) रुकीं, ना भ्रष्टाचार खत्म हुआ, ना रिश्वतखोरी रुकी और ना नशाबंदी हुई। देश को भ्रष्ट लोगों ने ही अंदर से खोखला कर दिया है। भ्रष्टाचार के कारण अपराधी, अपराध करके भी बच जाते हैं और निर्दोष लोग इस भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं। जब तक किसी व्यक्ति को न्याय मिलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा तो देती है लेकिन आज भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। आये दिन उनके साथ दुष्कर्म की घटनाएं होती रहती हैं। लेकिन सरकार या राजनेता इसका समाधान करने के बजाय ऐसे संवेदनशील (sensitive) मुद्दों पर राजनीति करते हैं और एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते हैं। और तो और सबसे बड़ी दुखद बात तो ये है कि जब कोई दुष्कर्म पीड़ित महिला पुलिस थाने जाकर इसकी शिकायत करती है तो पुलिस द्वारा कार्यवाई करने के बजाय उन पर मामले को रफा दफा करने का दबाव बनाया जाता है या उन्हें डरा धमकाकर भगा दिया जाता है।

वहीं दूसरी ओर सरकार कहती है कि भारत देश को नशामुक्त (intoxication free) बनाना है लेकिन आज तक सरकार ने इसके लिए कोई कदम नहीं उठाया बल्कि इन्हें बढ़ावा ही दे रही है। यदि सरकार वास्तव में नशाबन्दी या शराब बन्दी चाहती तो शराब के ठेके खुलवाने के बजाय उन्हें बन्द करवाती। लेकिन सरकार को जनता और देश से ज्यादा अपने राजस्व (revenue) की चिंता है।

जो भी राजनेता सत्ता में आते हैं, वह यही कहते हैं कि हम पूर्ण निष्ठा से संविधान (Indian constitution) का पालन करेंगे और इसकी गरिमा बनाये रखेंगे। देश व जनता का विकास करेंगे लेकिन ऐसा करने के बजाय देश को भ्रष्टाचार के दलदल में धकेल देते हैं। उन्हें केवल यही चिंता रहती है कि देश को कैसे लूटा जाए। आज देश का हर नागरिक बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, रिश्वत खोरी से परेशान है लेकिन सरकार या राजनेताओं को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, उन्हें तो केवल अपनी कुर्सी, पद ही चाहिए।

वाकई में भ्रष्टाचार नामक कीड़ा हमारे देश को खोखला करता जा रहा है जो हमारे देश के लिए तो घातक है ही, साथ ही वैश्विक स्तर पर भी हमारे देश की छवि को भी नुकसान पहुंचा रहा है।

संविधान के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है और कैसे इनकी अवमानना की जा रही है? इस प्रश्न का जवाब देने के लिए आपको कुछ प्रमाण देते हैं।

पहला प्रमाण

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान पर आरोप था कि उन्होंने फुटपाथ पर सो रहे लोगों को नशे में कार से बेरहमी से कुचलकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। जिला अदालत (District Court) उन्हें इस मुकदमे में दोषी करार देती है और पांच साल की सजा के साथ जुर्माना भी लगाती है। अगले ही दिन अभिनेता सलमान खान को हाइकोर्ट द्वारा बाइज्जत बरी कर दिया जाता है। क्या यह गलत नहीं है कि एक कोर्ट सजा सुना रही है और दूसरी कोर्ट बाइज्जत बरी कर रही है? या तो निचली अदालत का फैसला गलत था या हाइकोर्ट का फैसला गलत था। लेकिन फिर भी किसी का ध्यान इस तरफ नहीं गया कि ऐसा क्यों हुआ क्योंकि, चारों तरफ भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी ही छाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट, जिसे देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था कहा जाता है, वह भी भ्रष्टाचार की चपेट में है जिसका खुलासा खुद सुप्रीम कोर्ट के जजों ने सार्वजनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया था। ऐसे में आम इंसान न्याय के लिए कहाँ जाए!

दूसरा प्रमाण

सतगुरु रामपाल जी महाराज के ऊपर हरियाणा सरकार व प्रशासन द्वारा कुछ झूठे मुकदमे लगाए गए जिसके कारण हमारे संविधान की धज्जियां उड़ीं। सतगुरु रामपाल जी महाराज का एक आश्रम जो कि हरियाणा के रोहतक जिले के करौंथा गांव में सतलोक आश्रम के नाम से है। उस आश्रम का उद्घाटन सन 1999 में हुआ। सतगुरु रामपाल जी महाराज सन 1999 से 2006 तक वहीं सत्संग किया करते थे। वह अपने सत्संगों में बताया करते थे कि मनुष्य जीवन अनमोल है, यह बार-बार नहीं मिलता। उन्होंने सभी पवित्र शास्त्रों से अन्य धर्मगुरुओं के ज्ञान की तुलना करके समाज को बताया कि ये जितने भी धर्म गुरु हैं, वो आपके मनुष्य जीवन को बर्बाद कर रहे हैं। इनके पास कोई ज्ञान नहीं है, कोई सतभक्ति नहीं है। सतगुरु रामपाल जी महाराज सभी पवित्र शास्त्रों से हर बात प्रमाणित कर के बताते थे। सतगुरु रामपाल जी महाराज की इन बातों से अन्य धर्मगुरुओं की दुकान (जो धर्म को धंधा बनाए बैठे थे, जो भगवान के नाम पर लोगों को ठग रहे थे) बन्द हो रही थी। इसलिए उन्होंने (आर्य समाज के समर्थकों ने) सतगुरु रामपाल जी महाराज को मारने के उद्देश्य से सतलोक आश्रम, करौंथा (हरियाणा) पर हमला करवा दिया। हमलावरों को रोकने के लिए पुलिस ने I.P. C की धारा 145 के तहत आश्रम को कब्जे में ले लिया और सन्त रामपाल जी के ऊपर एक झूठा मुकदमा 302 का बनाकर जेल में डाल दिया। सन 2008 में सतगुरु रामपाल जी महाराज को हाईकोर्ट से जमानत मिली। सन्त रामपाल जी और उनके अनुयायियों ने हाईकोर्ट में याचिका डाली कि हमारा आश्रम हमें वापस मिलना चाहिए। सन 2009 में हाईकोर्ट ने सन्त रामपाल जी को उनका आश्रम सौंपने के आदेश दिये लेकिन हरियाणा सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सन 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही करार देते हुए सन्त रामपाल जी को उनका आश्रम वापस देने के आदेश दिए। हरियाणा सरकार ने संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की फिर से अनदेखी की और सतगुरु रामपाल जी महाराज को उनका आश्रम 2 महीने तक वापस नहीं दिया। अप्रैल 2013 में सतगुरु रामपाल जी महाराज को अपना आश्रम मिल गया। आश्रम मिलने के 2 दिन बाद ही फिर आश्रम पर उन्हीं नकली धर्मगुरुओं (आर्य समाज के समर्थक) ने सतगुरु रामपाल जी महाराज के सतलोक आश्रम करौंथा पर ये कह कर आत्मघाती हमला कर दिया कि हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नही मानेंगे। सरेआम संविधान की अनुपालना से इंकार कर दिया गया। इतना सबकुछ देख कर भी हरियाणा सरकार ने उन लोगों पर कोई कार्यवाही नही की, बल्कि उन लोगों को, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश और संविधान की अवमानना की, उन्हीं लोगों को 5-5 लाख रुपये इनाम में दिए। आक्रमणकारियों के साथ हरियाणा सरकार ने भी संविधान के नियमों को ताक में रख दिया। क्या के देश के संविधान के साथ खिलवाड़ नहीं है?

जिस तरह से भ्रष्ट राजनेता, अधिकारी आदि संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं, उसे देखकर यही लगता है कि हमारे देश के संविधान का कोई मूल्य नहीं रह गया है। इस प्रकार के अनेकों उदाहरण हैं।

जैसे:- भारत का संविधान हमें अधिकार देता है कि आप अपने धर्म या व्यवसाय हेतु पूरे भारत मे कहीं भी जा सकते हैं लेकिन इस संविधान के नियम हरियाणा के हिसार शहर में लागू नहीं होते क्योंकि, हिसार में सतगुरु रामपाल जी महाराज के अनुयायियों का जाना निषेध है। जहां कहीं भी हिसार में सतगुरु रामपाल जी महाराज के अनुयायी पुलिस प्रशासन को दिखते हैं, वहाँ की पुलिस उन्हें डंडे, लाठियों से पीटना शुरू कर देती है। वहां की पुलिस ये भी नही देखती है कि उन लोगों में बीमार, बच्चे, बुजुर्ग और महिलायें भी हैं। वो तो बस डंडा उठाकर पीटना शुरू कर देती है। ये तो संविधान के साथ-साथ देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों का भी हनन है।

तीसरा प्रमाण

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि धारा 377 के तहत समलैंगिक विवाह (अर्थात लड़का, लड़के से और लड़की, लड़की से) कर सकते हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश भारतीय संस्कृति और सभ्यता के लिए घातक नहीं है? क्या ये सरेआम जजों की मनमानी नहीं है? लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। क्योंकि, कानून और संविधान के रक्षक ही इसके भक्षक बन गए हैं।

इसलिए सभी देशवासियों से हमारी प्रार्थना है कि सावधान हो जाइये। भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, दहेज प्रथा, नशा आदि कुरीतियों और बुराइयों को जो सन्त जड़ से उखाड़ कर फेंक रहे थे, उन्हीं गुरु को भारत सरकार ने देशद्रोही और हत्यारा बना दिया। धिक्कार है ऐसी सरकार को और कोटि कोटि प्रणाम है ऐसे सन्त को जो उपरोक्त कुरीतियों और बुराइयों को जड़ से उखाड़ रहे हैं। उन गुरु का नाम सतगुरु रामपाल जी महाराज ही है। जो काम सरकार नहीं कर पाई, वो काम सन्त रामपाल जी ने कर दिखाया। सरकार दहेज प्रथा, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, नशा आदि को रोकने का केवल दिखावा ही करती रही लेकिन सतगुरु रामपाल जी महाराज बड़ी ही आसानी से अपने अद्भुत आध्यात्मिक ज्ञान के आधार से ये कर दिखाया।

देश में ना जाने कितनी बेटियों को दहेज के लिए सताया जाता है और उन्हें यातनाएं दी जाती हैं। लेकिन सतगुरु रामपाल जी महाराज ने लाखों दहेज मुक्त शादियां करके समाज को संदेश दिया है कि वास्तव में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का सपना सरकार नहीं, बल्कि सतगुरु रामपाल जी महाराज जी ही साकार कर सकते हैं।

आज हमारे देश का बहुत बड़ा युवा वर्ग नशे का आदि है। लेकिन लेकिन सतगुरु रामपाल जी महाराज की शरण में आकर लाखों लोग पूर्ण रूप से नशा (शराब, तंबाकू, चरस, गांजा, मांस आदि) त्याग चुके हैं। सरकार नशाबंदी के नाम पर केवल दिखावा ही करती रही। लेकिन सतगुरु रामपाल जी महाराज ने अपने अद्भुत आध्यात्मिक ज्ञान से लाखों लोगों और परिवारों की नशे से आज़ादी दिला दी। वास्तव में “नशामुक्त भारत” का सपना सतगुरु रामपाल जी ही साकार कर रहे हैं।

वास्तव में सच्चाई यही है कि सतगुरु रामपाल जी एक अद्भुत गुरु तो हैं ही जो पूरे विश्व को सत्य ज्ञान व सत भक्ति बता रहे हैं, साथ ही वह एक ऐसे समाज सुधारक भी हैं जिसकी इस देश को ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को भी जरूरत है।

संविधान के रक्षक और समाज सुधारक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सतगुरु रामपाल जी महाराज के सत्संग प्रतिदिन राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के TV चैनलों पर भी आते हैं जिनकी जानकारी निम्नलिखित है:

साधना चैनल पर रात्रि 07:30 से 08:30 तक

ईश्वर TV पर रात्रि 08:30 से 09:30 तक

STV हरियाणा न्यूज़ पर सुबह 06:00 से 07:00 तक

MH One Shraddha tv पर दोपहर 02:00 बजे

कात्यायनी चैनल रात 08:00 बजे

उपरोक्त TV चैनलों पर प्रतिदिन सतगुरु रामपाल जी महाराज का सत्संग आता है। तो आइए इस गणतंत्र दिवस (republic day) पर हम सभी यह प्रण करें कि हम देश के रक्षक, देश के संविधान के रक्षक और समाज सुधारक सतगुरु रामपाल जी महाराज के सत्संग सुनकर समाज में एक नई जागरूकता लाएंगे। पाखण्डवाद, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, दहेज प्रथा, नशा आदि कुरीतियों और बुराइयों को जड़ से मिटाएंगे ताकि हमारा देश एक बार फिर से सोने की चिड़िया बन सके और विश्वगुरु बन सके।