भारत को आजादी 15 अगस्त 1947 में मिली पर भारत एक गणराज्य 26 जनवरी 1950 को बना जब भारतीय संविधान लागू किया गया । उस दिन से लगातार हर वर्ष भारत में गणतंत्र दिवस मनाया जाता है । देश भर में इस दिन अनेकों समारोह होते हैं । परन्तु मुख्य समारोह राजधानी दिल्ली के राजपथ पर आयोजित होता है जिसमें भारत के राष्ट्रपति तीनों सेनाओं और अन्य सुरक्षा बलों की परेड को सलामी देते हैं इस वर्ष भी हर वर्ष की तरह 26 जनवरी 2021 को भारत का गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है परंतु इस वर्ष कोविड-19 के कारण इसकी चमक कुछ फीकी रहेगी और हर बार से इस बार कुछ भिन्नता नजर आएगी

गणतंत्र दिवस 2021 के मुख्य अतिथि

हर वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसी ना किसी विदेशी मेहमान को गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित किया जाता है। गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रुप में भाग लेने वाले आमतौर पर किसी राष्ट्र के राष्ट्र अध्यक्ष जा किसी राष्ट्र के कोई अन्य गणमान्य व्यक्ति होते हैं परंतु इस वर्ष कोविड-19 के कारण किसी भी मुख्य अतिथि को गणतंत्र दिवस के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। भारत के विदेश मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बार कोई भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल नहीं होंगे।

गणतंत्र दिवस 2021 टिकट

गणतंत्र दिवस की परेड देखने के लिए कई टिकट जारी किए जाते हैं इन सब टिकट में बहुत सी श्रेणियां होती है। इसमें सामान्य, विशेष, अति विशेष श्रेणी के टिकट होते हैं परंतु इस वर्ष कोविड के कारण आम तौर पर जारी किए जाने वाले टिकटों की संख्या बहुत कम कर दी गई है। इस बार बहुत नियंत्रित संख्या में टिकट जारी किए जाएंगे

गणतंत्र दिवस 2021 का समारोह

गणतंत्र दिवस समारोह के बारे में जैसा कि पहले बताया गया है कि मुख्य समारोह राजपथ पर होता है परंतु इसके अलावा भी राष्ट्रपति भवन में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं राज्यों के स्तर पर राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्री गण भी शहरों में और राज्यों की राजधानियों में गणतंत्र दिवस से जुड़े हुए समारोह में भाग लेते हैं और सब जगह भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जाता है और साथ में परेड सलामी भी दी जाती है। राजपथ पर भारत की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया जाता है और इसके अलावा बहुत सी सांस्कृतिक वैज्ञानिक समाजिक झांकियां भी प्रस्तुत की जाती है। भारत के सभी राज्यों की संस्कृति को दर्शाने वाली झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती हैं

गणतंत्र दिवस 2021 में अभिवादन

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम संदेश जारी करते हैं जिसमें भारत की आजादी के संघर्ष व इतिहास से जुड़ी बातों के साथ-साथ वर्तमान समय तक देश की उपलब्धियों का जिक्र होता है। साथ ही सरकार द्वारा भविष्य के लिए देश के विकास के लिए बनाई जा रही परियोजनाओं से राष्ट्रपति देश को अवगत करवाते हैं

भारत में गणतंत्र दिवस 2021

2021 में होने वाला गणतंत्र दिवस पिछले गणतंत्र दिवस की अपेक्षा में थोड़ा अलग होने वाला है क्योंकि इस बार कोविड-19 महामारी के कारण बहुत ही सावधानियों और पाबंदियों के साथ यह समारोह मनाया जा रहा है। इस दिवस पर शामिल होने वाले आम मेहमानों की संख्या में कटौती की गई है और भी बहुत से परिवर्तन इस बार किए गए हैं।

गणतंत्र दिवस 2021 पास

गणतंत्र दिवस समारोह के लिए टिकटों के साथ-साथ पास भी जारी किए जाते हैं इनमें अधिकतर पास कर्मचारियों व मीडिया कर्मियों और इस अवसर पर तैनात कर्मचारियों के लिए होते हैं इसके अलावा कुछ गणमान्य व्यक्तियों के लिए भी पास जारी किए जाते हैं

गणतंत्र दिवस 2021 की ऑनलाइन टिकट

अगर आप गणतंत्र दिवस के लिए टिकट लेना चाहते हैं तो ऑफलाइन काउंटर से ही लें क्योंकि ऑनलाइन टिकट के नाम पर बहुत बार धोखा होता है जिसमें कुछ जालसाज लोग गणतंत्र दिवस की टिकटों के नाम पर लोगों के साथ धोखा करते हैं इसलिए हम आपको यह मशवरा देते हैं कि यदि आप गणतंत्र दिवस की टिकट लेना चाहते हैं तो सरकार द्वारा स्थापित ऑफलाइन काउंटरों से ही इसे प्राप्त करें।

गणतंत्र दिवस की परेड

इस साल गणतंत्र दिवस की परेड में लाल किले के बजाय इंडिया गेट सी-हेक्सागॉन पर मार्चिंग कंटेस्टेंट्स को देखा जाएगा।

पहले परेड लगभग 8 किमी की दूरी तय करती थी लेकिन इस साल यह दूरी लगभग 3 किमी तक कम कर दी गई है। परेड अब नेशनल स्टेडियम में समाप्त होगी। सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए दूरी में कटौती की गई है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि परेड क्षेत्र को पुलिस द्वारा साफ किया जाएगा और फिर रक्षा मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा।

  • मार्चिंग दल में सदस्यों की संख्या 144 से घटाकर 96 कर दी गई है।
  • हालांकि, इस वर्ष झांकी की संख्या बढ़ाकर 32 कर दी गई है।
  • पिछले वर्षों में प्रदर्शन पर औसतन 28 झांकी होती थीं।

हमें गणतंत्र दिवस कैसे मनाना चाहिए

गणतंत्र, सरकार का वह रूप है जिसमें एक राज्य नागरिक निकाय के प्रतिनिधियों द्वारा शासित होता है। आधुनिक गणतंत्रों की स्थापना इस विचार पर की गई है कि संप्रभुता लोगों के साथ टिकी हुई हो, हालांकि किन विचारो को शामिल किया गया है और किन्हें बाहर रखा गया है, वह देश के इतिहास पर निर्भर करता है।

गणतंत्र की जो परिकल्पना है उससे वास्तविकता काफी दूर है क्योंकि वर्तमान समय में गणतंत्र सिर्फ एक मुखौटा सा बनकर रह गया है। गणतंत्र की परिकल्पना लोगों को अपना भाग्य बदलने और अपने देश के प्रारूप से प्यार करने की शक्ति प्रदान करने के लिए की गई थी परंतु ज्यादातर देशों में यह व्यवस्था चंद लोगों के हाथ में आकर रह गई है और टेक्नोलॉजी के समय में लोगों की मती को भ्रमित करके आसानी से इन सब का दुरुपयोग किया जा रहा है। भारत जैसे देश में जिस तरह से संस्थाओं का दुरुपयोग हो रहा है वह चाहे न्यायालय हो सुरक्षा एजेंसियां हो या अन्य सरकारी संस्थान हैं यह सब दिखाते हैं कि हमारा देश वास्तव में गणराज्य नहीं है।

गणतंत्र दिवस का इतिहास

1929 में, लाहौर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सत्र की मेजबानी की, जिसमें जवाहरलाल नेहरू अध्यक्ष थे। उस समय, नेहरू और सुभाष चंद्र बोस मिलकर कांग्रेस पार्टी में उन लोगों का विरोध करने के लिए काम कर रहे थे, जो ‘प्रभुत्व’ की उस स्थिति से संतुष्ट थे, जिसमें ब्रिटिश सम्राट सरकार के प्रमुख बने रहेंगे।

31 दिसंबर, 1929 को, नेहरू ने रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराया और “पूर्ण स्वराज” की मांग की, और स्वतंत्रता के लिए निर्धारित तिथि 26 जनवरी,1930 रखी गई। उस दिन को पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। 26 जुलाई, 1930 को भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर लाहौर में लोगों द्वारा जद्दोजहद भी की गई।

पूर्ण स्वराज दिवस गणतंत्र दिवस बन गया

जब 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ, तो अंग्रेजों द्वारा निर्धारित दिन 15 अगस्त था। इसलिए जब 26 नवंबर, 1949 को भारत के संविधान को अपनाया गया था तो उसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। क्योंकि कई लोगों ने राष्ट्रीय गौरव से जुड़े इस दिन को अतिमहत्वपूर्ण माना। पूर्ण स्वराज दिवस 26 जनवरी का दिन इसका सबसे अच्छा विकल्प था। तब से इसे देश के गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

काललोक मे काल तंत्र है गणतंत्र नहीं

इस पृथ्वी लोक पर हम जितना भी संविधान बना दे मनुष्य को सुखी नहीं कर सकते क्योंकि वह वास्तविक सुख यहां 21 ब्रह्मांड में नहीं है। मनुष्य अपने हिसाब से संविधान बनाता है कानून बनाता है पुलिस भी रखता है फिर भी यहां दुखी ही रहता है। कभी एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र पर हमला कर देता है, अपराधी किसी पुण्य आत्मा को परेशान करते हैं, समाज में दोस्त ही काल प्रभाव से दोस्त का दुश्मन बन जाता है। यहां हम हर तरह की परेशानियों से घिरे रहते हैं। अगर किसी तरह सुख नजर भी आए तो ढेर सारी बीमारियां और अनेकों अन्य कष्ट मनुष्य का इंतजार कर रहे होते हैं।

कभी किसी का बेटा मर जाता है, कभी भाई, कभी मां-बाप दोनों तथा मनुष्य और भी अनेकों तरह की मानसिक शारीरिक समस्याओं से जूझता रहता है। काल ब्रह्म के 21 ब्रह्मांड में इसी तरह से आग लगी हुई है। पृथ्वी लोक पर सुख कहां से होगा जब स्वर्ग के देवता भी सुखी नहीं है वह भी इसी हाहाकार में अपना जीवन व्यतीत करते हैं और वापस इस पृथ्वी पर 84 लाख योनियों में कष्ट उठाते हैं। मनुष्य जन्म में ही मानव पर कष्ट और परेशानियों का पहाड़ टूटा रहता है जीव जंतुओं के शरीरों में होने वाले दुख की तो कोई सीमा ही नहीं है।

परमात्मा का संविधान

इसका स्थाई हल परमात्मा का संविधान है जिस दिन हम परमात्मा के संविधान के अनुसार चलेंगे उस दिन हम सुखसागर सतलोक में चले जाएंगे जो शाश्वत स्थान हैं जहां कोई दुख, परेशानी, कष्ट नहीं है। उस लोक की जानकारी देने के लिए परमात्मा खुद सतलोक से चलकर आते हैं वर्तमान समय में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज सतलोक की भक्ति विधि और जानकारी बता रहे हैं इसे आप निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं और सदा सदा के लिए उस स्थाई अमर पद अर्थात सतलोक को प्राप्त कर सकते हैं जहां जाने के बाद कोई कष्ट जीव को नहीं रहता और जहां सिर्फ भगवान का संविधान चलता है।