विश्व रेड क्रॉस दिवस 2025 पर जानिए एक ऐसी मानवसेवी संस्था को जिसके लाखो कार्यकर्ता देश विदेश में कर रहे है काम

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विश्व रेड क्रॉस दिवस प्रत्येक वर्ष 8 मई को मनाया जाता है।  रेड क्रॉस सोसाइटी को रेड क्रेसेन्ट (Red Crescent Society) सोसाइटी के नाम से भी जाना जाता है। अंतर केवल इतना है कि जो संगठन मुस्लिम देशों में लोगों की मदद करते हैं उनको रेड क्रेसेन्ट सोसाइटी (Red Crescent Society) तथा अन्य देशों में यहीं संगठन रेडक्रॉस सोसाइटी (Red Cross Society) के नाम से जाना जाता है।

Table of Contents

रेडक्रॉस क्या है?

रेडक्रॉस संस्था (Red Cross Society) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो आपातकालीन स्तिथियों जैसे युद्ध में सैनिकों की सहायता हेतु  गठित की गई थी। इसकी शुरुआत जीन हेनरी ड्यूनेन्टन ने की थी पन्तु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी स्थापना 1863 में स्विट्ज़रलैंड में जेनेवा में हुई थी। 

विश्व रेड क्रॉस दिवस का इतिहास (History of World Red Cross)  

ये वर्ष 1859 की बात है जब इटली के सोल्फेरिनो और ऑस्ट्रिया के बीच युद्ध हुआ जिसमे बड़ी संख्या में सैनिक मारे गए और कई दयनीय अधमरी दशा में गिरे रहे। उनकी मदद करने वाला कोई नही था। इस दृश्य ने जीन हेनरी को हिला दिया।  इटली में युद्ध के वक्त जीन हेनरी ड्यूरेंट बैंक में कार्यरत थे परंतु घायल सैनिकों की दयनीय दशा देख कर उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ किसी भी तरीके से उनकी सहायता करने की सोची। 

जीन हेनरी ने दोनों देशों से संपर्क कर युद्ध में घायलों को चिकित्सा सुविधा देने का प्रस्ताव दिया। इस पर दोनों देश सहमत भी हो गए। इस प्रकार एक छोटी सी सहायता आगे होने वाले युद्ध मे घायलों के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुई। उस दिन से जीन हेनरी ड्यूरेंट के इस प्रयास को उनकी जन्म तिथि के दिन 8 मई को उनके सम्मान में मनाया जाने लगा। इस युद्ध की स्मृति के आधार पर उन्होंने एक किताब भी लिखी जिसका नाम था “अन स्मारिका डी सोलफेरिनो ( ए मेमोरी ऑफ सोलफेरिनो )”।

रेडक्रॉस संस्था (Red Cross Society) के मुख्य उद्देश्य :-

प्राथमिक तौर पर इस संस्था की स्थापना 1863 में युद्ध मे घायल सैनिकों की मदद के लिए की गई थी। परंतु धीरे धीरे इस संस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा तथा प्रोत्साहन मिला जिससे इनके मुख्य उद्देश्यों में भी वृद्धि हो गई जो इस प्रकार हैं:-

  • युद्ध, अकाल, बाढ़ आदि आपदाओं में घिरे लोगों की मदद करना।
  • जरूरतमन्दों को खाना पहुँचाना।
  • विपरीत परिस्थियों में लोगों तक निःशुल्क चिकित्सा, निःशुल्क रहने की व्यवस्था करना।
  • जरूरत पड़ने पर सरकार की मदद कर लोगों को रेस्क्यू कर निकलना।
  • मानवीय कारणों के सिद्धांतों और आदर्शों की वकालत करना।
  • आपदाओं की प्रतिक्रिया करना।
  • आपदा की तैयारी और समाज में सुरक्षा के लिए तत्पर रहना।

भारत में रेड क्रॉस की स्थापना 1920 में हुई थी। इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (IRCS) स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

प्रमुख सेवाएं:

  • रक्तदान शिविरों का आयोजन
  • प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण
  • वृद्ध और अनाथ बच्चों की देखभाल
  • कोविड-19 में राहत कार्य (ऑक्सीजन, दवाएं, किट्स)
  • आपदा राहत सामग्री वितरण (बाढ़, भूकंप, चक्रवात)
  • युद्धबंदियों और जेल में बंद कैदियों के लिए सहायता

भारत में रेड क्रॉस की कई शाखाएं जिला स्तर तक सक्रिय हैं, जो स्थानीय स्तर पर सेवा कार्यों में जुटी रहती हैं।

विश्व रेड क्रॉस दिवस 2025 की थीम! (Theme for Red Cross Day 2025)

प्रत्येक वर्ष रेड क्रॉस की थीम बदलती रहती है। विश्व रेड क्रॉस एवं रेड क्रेसेंट दिवस 2025 की थीम है ‘मानवता को जीवित रखना’ (Keeping Humanity Alive)। यह उन सभी स्वयंसेवकों और कर्मचारियों को सम्मानित करने का आह्वान है, जो मानवता की सेवा में समर्पित होकर कठिन परिस्थितियों में भी जीवन रक्षा एवं गरिमा की रक्षा करते हैं।

रेडक्रॉस संस्था (Red Cross Society) की उपलब्धियां

आज लगभग 191 से भी ज्यादा देशों में रेडक्रॉस संस्थाएं स्थापित हैं जो मानव जीवन के स्वास्थ्य तथा अन्य कई मुख्य उद्देश्यों हेतु कार्यरत हैं। अपने कार्यों के लिए इस संस्था को तीन बार, वर्ष 1917, 1944 और 1963 में नोबेल शान्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष 1948 में पहली बार इस दिन को औपचारिक रूप से मनाया गया था, और वर्ष 1984 में इसका नाम बदलकर ‘विश्व रेड क्रॉस और रेड क्रेसेंट दिवस’ रखा गया। आज भी ये संस्था राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सेवा करने के लिए हमेशा तत्पर रहती है।

विश्व रेड क्रॉस मुख्यालय कहां है?

रेड क्रॉस संस्था का मुख्यालय जेनेवा स्विट्जरलैंड में स्थापित है जो विभिन्न देशों में स्थापित इसकी शाखाओं के साथ तथा देशों की सरकारों में सामंजस्य बिठाकर चलता है। देश में कहीं भी, कभी भी, किसी भी तरह की आपदा हो यह संस्थाएं पीड़ितों को हमेशा निःशुल्क सहायता प्रदान करती हैं।

विश्व रेड क्रॉस दिवस के मूल सिद्धांत क्या है?

रेड क्रॉस संस्था का मुख्य उद्देश्य बिन किसी से पैसे लिए सहायता करना है चाहे कैसी भी परिस्थिति हो। जहां सरकार भी कई बार कुछ नहीं कर सकतीं वहां रेड क्रॉस संस्था है जो मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी लोगों की सहायता करती है। रेड क्रॉस संस्था के मूल सिद्धांत कुछ इस प्रकार हैं

  1. मानवता (Humanity)
  2. निष्पक्षता (Impartiality)
  3. तटस्थता (Neutrality)
  4. स्वायत्तता/स्वतंत्रता (Independence)
  5. स्वैच्छिक सेवा (Voluntary Service)
  6. एकता (Unity)
  7. सार्वभौमिकता (Universality)

 इन आदर्शों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न देशों में ये संस्थाएं अपने पथ की और अग्रसर हैं।

विश्व रेड क्रॉस दिवस से पहले मार्च महीने में कई उल्लेखनीय गतिविधियाँ हुईं।  

  • रेड क्रॉस गिविंग डे (Red Cross Giving Day): 25 मार्च 2026 को 12वाँ वार्षिक रेड क्रॉस गिविंग डे आयोजित किया गया, जिसमें आपदा प्रभावित परिवारों को आश्रय, भोजन, राहत सामग्री, भावनात्मक सहयोग और आर्थिक सहायता दी गई।  
  • A1C स्वास्थ्य जाँच (A1C Health Screenings): मार्च 2026 में रक्तदाताओं को मधुमेह और प्री-डायबिटीज के लिए मुफ्त A1C जाँच की सुविधा दी गई।  
  • गिफ्ट कार्ड प्रोत्साहन: 1 से 31 मार्च 2026 के बीच रक्तदान करने वालों को 15 डॉलर का Amazon गिफ्ट कार्ड दिया गया।  
  • बहु-पीढ़ी स्वयंसेवी डेटा (लॉस एंजेलिस): नए आँकड़ों से सामने आया कि LA काउंटी में जेन Z (Gen Z) अब रेड क्रॉस स्वयंसेवकों का सबसे बड़ा और तेज़ी से बढ़ता समूह बन गया है। कुल स्वयंसेवकों में इनकी हिस्सेदारी 48 प्रतिशत है। इसके पीछे छात्रों द्वारा चलाए जा रहे रेड क्रॉस क्लबों की बड़ी भूमिका है।

पेन्सिलवेनिया रेड क्रॉस एडवोकेसी डे (Pennsylvania Red Cross Advocacy Day)

26 मार्च 2026 को स्वयंसेवक और कर्मचारी हैरिसबर्ग स्थित पेन्सिलवेनिया राज्य विधानसभा भवन में एकत्रित हुए। CEO जेनिफर ग्राहम (Jennifer Graham) ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, “आपातकाल में मदद इंतज़ार नहीं कर सकती” (Help can’t wait), जो उस दिन की मुख्य भावना थी। उन्होंने राज्य के 7,000 स्वयंसेवकों का आभार भी जताया।  

फिलिपींस रेड क्रॉस ब्लड समिट 2026 (Philippine Red Cross Blood Summit 2026)

फिलिपींस रेड क्रॉस ने 6 और 7 फरवरी 2026 को PRC ब्लड समिट 2026 का उद्घाटन किया, जिसका मकसद रक्त सेवाओं को और मजबूत व आधुनिक बनाना था। इसमें रक्त सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और सहयोगात्मक योजना निर्माण जैसे विषयों पर चर्चा हुई।  

इस समिट में बायोरिस्क एसोसिएशन ऑफ फिलिपींस (Biorisk Association of the Philippines) और इंडोनेशियाई रेड क्रॉस भी शामिल हुए।  

त्रिनिदाद और टोबैगो रेड क्रॉस बाल कार्निवाल का 70वाँ वर्ष

TT रेड क्रॉस सोसायटी के बाल कार्निवाल ने 7 फरवरी 2026 को क्वींस पार्क सवाना में अपनी 70वीं वर्षगाँठ मनाई। 2026 की थीम थी “De Real Mas, before De Big Mas. Mas with a purpose.” इस फंडरेज़र का लक्ष्य एक पूरी तरह सुसज्जित एम्बुलेंस खरीदना है।  

लाइफ इज़ गुड और रेड क्रॉस रक्तदान अभियान (Life is Good and Red Cross Blood Drive) अप्रैल 2026

रेड क्रॉस ने लाइफस्टाइल ब्रांड “लाइफ इज़ गुड” (Life is Good) के साथ साझेदारी की। 30 मार्च से 12 अप्रैल 2026 के बीच रक्त या प्लेटलेट्स दान करने वालों को एक्सक्लूसिव Red Cross x Life is Good टी-शर्ट दी गई।  

8 मई तक जारी मानवीय अभियान

रेड क्रॉस आंदोलन विश्व रेड क्रॉस दिवस 2026 में कई बड़े अभियानों के बीच कदम रख रहा है।  

  • यूक्रेन संकट (पाँचवाँ वर्ष): संघर्ष के पाँचवें साल में मानवीय ज़रूरतें और भी गहरी हो गई हैं। ऊर्जा संकट और धन की कमी स्थिति को और कठिन बना रही है।  
  • लेबनान: मार्च 2026 तक राष्ट्रीय आपदा जोखिम प्रबंधन इकाई के अनुसार 567 सामूहिक आश्रयों में 1,19,700 विस्थापित लोग हैं। महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।  
  • चाड अभियान: चाड रेड क्रॉस के स्वयंसेवक पूर्वी सीमा पर घर-घर जाकर पानी, स्वच्छता और साफ-सफाई सुधारने का काम कर रहे हैं।

 संत रामपाल जी महाराज का मानवीय कार्य

विश्व रेड क्रॉस दिवस की असली भावना के अनुरूप, संत रामपाल जी महाराज दुनियाभर में लाखों अनुयायियों को निःस्वार्थ मानवीय सेवा के लिए प्रेरित करते आ रहे हैं। उनकी शिक्षा का सार है “जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा”। उनके शिष्य भारत और विदेशों में अनेक जनकल्याण कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।  

रक्तदान शिविर (नशामुक्त रक्त)

  • संत रामपाल जी महाराज के दिव्य मार्गदर्शन में नियमित रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं, ताकि वैश्विक रक्त संकट को दूर किया जा सके, जिसके कारण हर साल दुनियाभर में 20 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु होती है।  
  • भारतभर के श्रद्धालु हजारों यूनिट रक्त निःशुल्क दान करते हैं। इस रक्त की खासियत यह है कि यह 100 प्रतिशत नशामुक्त होता है, क्योंकि शिष्य शराब, तंबाकू, नशीली दवाएँ या किसी भी हानिकारक पदार्थ का सेवन नहीं करते।  

प्रमुख उपलब्धियाँ:  

  •   फरवरी 2024 में एक समन्वित अभियान में सतलोक आश्रमों में लगभग 2,000 यूनिट रक्तदान हुआ।
  • नवंबर 2024 में दिव्य धर्म यज्ञ दिवस के अवसर पर 200 से अधिक यूनिट रक्त दान किया गया।  
  • संत रामपाल जी के 74वें अवतरण दिवस पर सैकड़ों यूनिट रक्तदान हुआ।  
  • फरवरी 2026 में सतलोक आश्रम धवलपुरी, महाराष्ट्र में संत गरीबदास जी के 300वें बोध दिवस पर एक बड़ा रक्तदान शिविर आयोजित किया गया।  
  • शिष्यों ने औपचारिक रूप से यह घोषणा भी की है कि देश को जब भी जरूरत हो, वे सैनिकों को रक्तदान करने के लिए तत्पर हैं।  

दहेज मुक्त विवाह अभियान (रमैनी)

  • संत रामपाल जी महाराज ने “रमैणी” नामक एक अनूठी पहल शुरू की है, जिसमें विवाह मात्र 17 मिनट में बिना दहेज, बिना उपहार और बिना किसी भव्य खर्च के संपन्न होते हैं।  
  • अब तक उनके मार्गदर्शन में 20,000 से अधिक दहेज मुक्त विवाह हो चुके हैं, जो उस गहरी सामाजिक बुराई से सीधे लड़ रहे हैं जिसने अनगिनत बेटियों की जानें ली हैं।  
  • यह आंदोलन भारत के सबसे सफल दहेज विरोधी अभियानों में से एक माना जाता है और शिष्यों में इसकी सफलता दर 100 प्रतिशत है।  
  • यह अभियान “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” की व्यापक सोच को भी बल देता है, क्योंकि इससे कन्या पक्ष पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।  

नशामुक्त समाज अभियान

  • तंबाकू, शराब और नशीली दवाओं के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया गया है, जिसमें अनुयायी जीवनभर के लिए सभी नशों से दूर रहने का संकल्प लेते हैं।  
  • तंबाकू और शराब उत्पादों पर पूर्ण सरकारी प्रतिबंध की माँग को लेकर कई प्रदर्शन और रैलियाँ आयोजित की गई हैं।  
  • यह आंदोलन अनगिनत परिवारों को नशे के कारण होने वाली घरेलू हिंसा, आर्थिक बर्बादी और स्वास्थ्य संबंधी मौतों से बचा रहा है।  

अंग और देह दान संकल्प

संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों ने मृत्यु के बाद अंगदान और देहदान का संकल्प लिया है, जिससे चिकित्सा विज्ञान को बढ़ावा मिलता है और प्रत्यारोपण की जरूरत वाले गंभीर रोगियों को नया जीवन मिलता है।  

आपदा राहत और सामुदायिक सेवा

  • प्राकृतिक आपदाओं और संकट के समय शिष्य प्रभावित समुदायों को भोजन, आश्रय, वस्त्र और चिकित्सा सहायता सक्रिय रूप से उपलब्ध कराते हैं।  
  • भारत के सतलोक आश्रमों में निःशुल्क भव्य लंगर या भंडारा चलाया जाता है, जहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं और आगंतुकों को बिना किसी जाति, धर्म या स्थिति के भेदभाव के भोजन दिया जाता है।  

अंधविश्वास और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध अभियान

  • संत रामपाल जी महाराज शास्त्रविरुद्ध भक्ति, अंधविश्वासों, कर्मकांडी शोषण, पशु बलि और ठगी की प्रथाओं को मिटाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करते हैं, जो आम लोगों पर आर्थिक और मानसिक बोझ डालती हैं।  
  • उनकी शिक्षाएँ प्रामाणिक शास्त्रों पर आधारित तर्कसंगत सोच को बढ़ावा देती हैं, जिससे परिवार झूठे गुरुओं और महंगे कर्मकांडों के चंगुल से बाहर निकल पाते हैं।  

पर्यावरण और वृक्षारोपण अभियान

  • जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से लड़ने के लिए सतलोक आश्रमों और उनके आसपास बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।  
  • श्रद्धालु पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वच्छता अभियानों और जागरूकता कार्यक्रमों में भी भाग लेते हैं।  

सार्वभौमिक भाईचारे का संदेश

  • अपने आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज मानवीय विचारों की पुनः स्थापना करते हैं। वे सिखाते हैं कि हिंदू, इस्लाम, सिख और ईसाई कोई अलग-अलग धर्म नहीं हैं, और सभी आत्माएँ परमात्मा की समान संतान हैं।  
  • यह दर्शन रेड क्रॉस के मूल सिद्धांतों मानवता, निष्पक्षता और सार्वभौमिकता (Humanity, Impartiality, and Universality) से पूरी तरह मेल खाता है।

1. रक्तदान शिविर

रेड क्रॉस दिवस पर देशभर में रक्तदान शिविर आयोजित होते हैं। ये शिविर न केवल रक्त की आवश्यकता को पूरा करते हैं, बल्कि जन-मानस में सेवा की भावना को भी मजबूत करते हैं।

2. स्वास्थ्य जांच शिविर

गांवों और शहरी इलाकों में मुफ्त स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और दवा वितरण के कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

3. जागरूकता रैलियाँ और सेमिनार

स्कूल, कॉलेज और संस्थानों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें मानवता, सेवा और स्वेच्छा सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला जाता है।

4. सोशल मीडिया अभियानों का आयोजन

Red Cross का संदेश डिजिटल माध्यम से भी फैलाया जाता है। हैशटैग्स जैसे #WorldRedCrossDay2025, #HumanityInEveryAction, #RedCrossIndia ट्रेंड किए जाते हैं।

यदि आप भी इस मिशन का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आप निम्नलिखित तरीकों से रेड क्रॉस से जुड़ सकते हैं:

  • रेड क्रॉस के वॉलंटियर बनें
  • रक्तदान करें
  • सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाएं
  • अपने समुदाय में रेड क्रॉस शिविर आयोजित करें

सतभगति से अवगत कराना श्रेष्ठ सेवा है!

जीन हेनरी एक नेक आत्मा थे जिन्होंने अपनी जिंदगी लोगों की सहायता करने में लगा दी। लेकिन अपने बारे में नहीं सोचा कि उनके मानव जीवन का असली उद्देश्य क्या है। उनकी उत्तम सोच के अनुसार केवल पीड़ितों की मदद करना ही उनका उद्देश्य था। 

परन्तु मानव जीवन का असली उद्देश्य मोक्ष प्राप्ति है। क्योंकि स्वांस और जीवन तो एक जानवर को भी मिलते हैं लेकिन उनमें ईश्वर ने सोचने की वो सद्बुद्धि नहीं दी जो मनुष्य को मिली है। इसका सीधा और स्पष्ट कारण है कि मनुष्य अपनी बुद्धि से अपने असली परमात्मा को पहचान सकें और मोक्ष प्राप्त कर सके। वर्तमान समय में सब जगह देवी देवताओं की भगति में श्रद्धालु मोक्ष प्राप्ति हेतु या फिर अपने कष्टों के निवारण हेतु लगे रहते हैं। पर असली घर सतलोक जहां से हम आये हैं वहां कैसे पहुचेंगे, इससे ज़्यादातर समाज अनजान है। हर जगह लोग भगवान की महिमा तो गा रहे हैं पर असली भगवान के बारे में अज्ञानतावश सद्ग्रंथों में प्रमाणित साधना के विपरीत साधना कर रहे हैं।

परमात्मा अपनी वाणी में कहते हैं:-

राम राम सब जगत बखाने, आदि राम कोई बिरला जाने।

कौन है असली राम/ भगवान/ अल्लाह/ ईश्वर?

सिख धर्म के प्रवर्तक गुरु नानक देव जी ने गुरु ग्रंथ साहिब में पृष्ट 721 पर वाणी में भगवान की महिमा का बखान किया है जो इस प्रकार है:-

“हक्का कबीर करीम तू, बेऐब परवरदिगार”

इससे स्पष्ट है कि कबीर साहिब ही पूर्ण परमात्मा है जिसकी भगति करने से मोक्ष संभव है। मानव जीवन का उद्देश्य ही ये है कि पहले स्वयं का मोक्ष करवाओ फिर औरों को उस सच्चे परमात्मा से जोड़ो।

  • गीता जी के अध्याय 16 श्लोक 23-24 में वर्णित है कि जो साधक शास्त्रविधि त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करता है, उसे न तो सुख प्राप्त होता है ना उसे सिद्धि प्राप्त होती है और तब तक उसकी गति होना असंभव है।
  • पवित्र कुरान शरीफ में सूरत फुरकनी 25 आयात 52-59 में बताया है कि अल्लाह कबीर है। उपरोक्त वाणियों से स्पष्ट है कि परमात्मा कबीर साहिब जी हैं तथा वेदों में वर्णित साधना करने से ही वो हमें प्राप्त होंगे। और हम अपने निजलोक सतलोक जा सकेंगे। उस परमात्मा को पाने की विधि तत्वदर्शी संत ही बता सकते हैं।

कबीर साहेब की वाणी है: 

कलयुग मध्य सतयुग लाऊं, ताते  बंदीछोड़  कहाऊं।। 

इस वाणी को कबीर साहेब जी ने वर्तमान समय के लिए बोला था, आज स्वयं कबीर साहेब जी ही संत रामपाल जी महाराज के रूप में धरती पर आकर अपनी वाणी को सच कर रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए visit करें Jagatgururampalji.org और नामदीक्षा के लिए फॉर्म भर कर दीक्षा लेकर अपने मानव जीवन को सफल बनायें

1. विश्व रेड क्रॉस दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

विश्व रेड क्रॉस दिवस हर साल 8 मई को मनाया जाता है, जो रेड क्रॉस संस्था के संस्थापक जीन हेनरी ड्यूरेंट की जन्मतिथि है। इस दिन का उद्देश्य उन स्वयंसेवकों, नर्सों और मेडिकल टीमों को सम्मान देना है जो पूरी दुनिया में आपदा, युद्ध, महामारी और विपरीत परिस्थितियों में मानवता की निःस्वार्थ सेवा करते हैं।


2. रेड क्रॉस संस्था क्या है?

रेड क्रॉस एक अंतरराष्ट्रीय मानवतावादी संगठन है जिसकी स्थापना युद्धग्रस्त सैनिकों की सहायता हेतु की गई थी। इसकी प्रेरणा 1859 के सोल्फेरिनो युद्ध से मिली, जहां हजारों घायल सैनिकों की मदद के लिए कोई नहीं था। 


3. रेड क्रॉस संस्था को कौन-कौन से अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं?

रेड क्रॉस संस्था को उसके अद्वितीय कार्यों के लिए अब तक तीन बार नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुके हैं —

  1. 1917: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान
  2. 1944: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान
  3. 1963: इसके 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में
    यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि रेड क्रॉस संस्था ने न केवल युद्ध में बल्कि हर प्रकार की आपदा में मानवता की सच्ची सेवा की है।

4. सेवा के अलावा मानव जीवन का क्या उद्देश्य है ?

सेवा मानवता का एक महान पक्ष है, लेकिन मानव जीवन का मुख्य उद्देश्य मोक्ष प्राप्त करना है। सेवा से पुण्य प्राप्त होता है, परंतु सच्चे परमात्मा की प्राप्ति ही एकमात्र ऐसा मार्ग है जो हमें जन्म-मरण से मुक्त करता है। आज के समय में तत्वदर्शी संत ही हमें इस सही साधना की राह दिखा सकते हैं, वर्तमान मे वह संत रामपाल जी महाराज जी हैं।

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