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गुरु नानक जयंती 2020: Guru Nanak Jayanti पर जानिए नानक देव जी को ज़िंदा रूप में कौन मिले थे?

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Guru Nanak Jayanti: भारत सन्तों, ऋषियों और मुनियों की भूमि रही है। भारत के इतिहास का मध्यकाल जिसमें भक्तिकाल का हिस्सा इसी कारण से स्वर्ण युग कहा जाता रहा है क्योंकि यह काल भक्ति की लहर से ओतप्रोत था। यहाँ उन्हीं सन्तों में से एक गुरु नानक जी की जीवनी के बारे में जानेंगे और ऐसे तथ्यों से परिचित होंगे जो अब तक रहस्य रहे हैं। नानक जयंती एक महत्वूर्ण और पवित्र त्यौहार है। श्री गुरू नानक जी सिख धर्म के पहले प्रवर्तक थे, इन्होंने ही सिख धर्म की स्थापना की। गुरू नानक जयंती को गुरुपर्व कहा जाता है। गुरू नानक देव जी के जन्मदिन को गुरु नानक जयंती (गुरुपर्व) के रूप में मनाया जाता है। गुरू नानक देव जी सिख समुदाय के पहले गुरु थे।

गुरु नानक देव जी का जन्म विक्रमी संवत् 1526 (सन् 1469) को कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को हिन्दू परिवार में श्री कालू राम मेहता के घर माता श्रीमती तृप्ता देवी से पश्चिमी पाकिस्तान के जिला लाहौर के तलवंडी नामक गांव में हुआ। यह हिस्सा अविभाजित भारत का हिस्सा था। इसे ननकाना साहिब नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान में यह स्थान पाकिस्तान में है। श्री गुरू नानक देव को फारसी, पंजाबी, संस्कृत भाषा का ज्ञान था। प्रत्येक वर्ष गुरुनानक जी का जन्मदिवस गुरुपर्व के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष दिन सोमवार तारीख 30 नवम्बर 2020 गुरु नानक जयंती (Guru Nanak Jayanti) (गुरुपर्व) के दिन को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है।

Guru Nanak Jayanti: गुरुपर्व 2020

गुरू नानक देव जी की जयंती (Guru Nanak Jayanti) को सिख धर्म में गुरुपर्व के रूप में मनाते हैं। इस साल 30 नवम्बर 2020 को श्री गुरु नानक देव जी का 551वाँ (1469 – 2020) प्रकाश गुरुपर्व है।

Guru Nanak Jayanti पर जानिए नानक जी की जीवनी

उन दिनों नानक जी अपनी बहन नानकी के घर सुल्तानपुर में रहते थे और मोदीखाने में नौकरी करते थे। वे नियमानुसार बेई नदी में स्नान करने जाते थे। नानक जी की परमात्मा में गहन आस्था थी किन्तु वे सच्चे पातशाह की भक्ति नहीं कर रहे थे। उन्हें पूर्ण परमात्मा के दर्शन तब हुए जब वे बेई नदी में नियमानुसार स्नान हेतु गए। पूर्व जन्म में नानक जी सतयुग में राजा अम्बरीष थे जो विष्णु जी के उपासक थे। त्रेता युग में यही आत्मा राजा जनक बने जो सीता जी के पिता हुए।

राजा जनक जी भी विष्णु जी के उपासक हुए। उस समय सुखदेव ऋषि जो महर्षि वेदव्यास के पुत्र थे वे राजा जनक के शिष्य बनने आये थे। पूर्व जन्मों में गुरु नानक देव जी राजा थे सैकड़ों, हजारों नौकर हुआ करते थे। किन्तु अपने पुण्य स्वर्ग आदि में भोगने के कारण पुनश्च साधारण मनुष्य के जीवन में आये और मोदीखाने में नौकरी करने लगे।

Guru Nanak Jayanti: नानक जी को मिले पूर्ण परमात्मा

नानक जी प्रतिदिन बेई नदी पर स्नान करने जाते थे और घण्टों प्रभु चिंतन में बैठे रहते थे। ऐसी ही एक सुबह वे बेई नदी में स्नान करने गए और वहीं उन्हें परमेश्वर कविर्देव जिंदा पीर के रूप में मिले। सबसे प्रथम वार्ता में जिंदा पीर के रूप में परमेश्वर मिले। उन्होंने नानक जी से ज्ञानचर्चा की और उन्हें प्रमाण देकर बताया कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी जन्म मरण के चक्र में हैं एवं विष्णु जी पूर्ण परमात्मा नहीं हैं। नानक जी ने उन्हें कहा कि वे नानक जी को अपना गुरु बना लें।

जिंदा पीर रूप में कबीर साहेब ने नानक जी को सर्व सृष्टि की रचना बताई और ब्रह्मा, विष्णु, महेश की स्थिति से परिचित करवाया और फिर उन्हें कुरान आदि ग्रन्थों में कबीर साहेब के परमेश्वर रूप का भान करवाया। नानक जी की रुचि नहीं बनी और उनकी अरुचि देखकर कबीर परमेश्वर वहाँ से चले गए। आस पास के लोगों ने उनसे पूछा कि वह भक्त कौन था जो आपसे ज्ञान चर्चा कर रहा था? नानक जी ने कहा वह काशी का कोई नीच जुलाहा था वह बेतुकी बातें कर रहा था और कह रहा था कि मैं गलत साधना कर रहा हूँ। जब मैंने बताना शुरू किया तो हार मानकर चला गया। (सिखों ने इस वार्ता से नानक जी को कबीर साहेब का गुरु का लिया, जोकि असत्य है।)

नानक जी को इतनी वार्ता के पश्चात इतना भान अवश्य हो गया था कि वे सत्य साधना नहीं कर रहे और गीता का ज्ञान भी उससे कुछ भिन्न है जो अब तक बताया गया था। वे हृदय से प्रार्थना करते थे कि उसी सन्त के एक बार और दर्शन हो जाएँ जिससे कुछ प्रश्नों के उत्तर अवश्य प्राप्त हो जाएं।

नानक जी की कबीर परमेश्वर से दूसरी वार्ता

कुछ समय पश्चात जिंदा पीर रूप में कबीर साहेब फिर मिले इस बार वे केवल नानक जी को दिखाई दे रहे थे। परमात्मा कबीर जी ने कहा कि आप मेरी बात पर विश्वास करें। पूर्ण परमेश्वर की राजधानी तो सतलोक है। नानक जी ने कहा कि मैं आपकी परीक्षा लेना चाहता हूँ, मैं इस दरिया में छिप जाऊंगा और आप मुझे ढूंढना। ऐसा कह नानक जी ने डुबकी लगाई और मछली का रूप धारण कर लिया। परमेश्वर कबीर जी ने मछली रूप में नानक जी को पकड़ा और उसे नानक जी के रूप में बना दिया।

God Kabir and nanak dev

Guru Nanak Jayanti Special: इस पर नानक जी करबद्ध होकर बोले कि परमेश्वर मैं मछली बन गया था आपने मुझे कैसे खोज लिया आप तो सूक्ष्म से भी सूक्ष्म को जानने वाले हो। नानक जी कबीर परमेश्वर से वार्ता सुनने के लिए तैयार हुए और तब कबीर साहेब जिंदा महात्मा के रूप में उन्हें सतलोक लेकर गए और सारी सृष्टि की स्थिति से परिचित करवाया। सचखंड ले जाने में और वहाँ वास्तविक स्थिति से परिचय करवाने में तीन दिन लग गए और तीन दिन पश्चात कबीर साहेब ने नानक जी की आत्मा को वापस शरीर में छोड़ दिया। यहां पृथ्वी पर सभी नानक जी को न पाकर मृत मान चुके थे

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जैसा कि सचखंड में कबीर साहेब ने कहा कि वे काशी में धाणक रूप में विद्यमान हैं उनसे सत्यनाम लेकर सत्यसाधना करने से कल्याण होगा। तब नानक जी सतनाम सतनाम करते हुए बनारस काशी पूर्ण परमात्मा के अवतार की तलाश में चल पड़े। सिख भाई सतनाम सतनाम का जाप करते हैं जबकि गुरुग्रन्थ साहेब में स्पष्ट लिखा है कि सत्यनाम तो अन्य ही मन्त्र है।

नानक जी के गुरु कबीर साहेब जी थे

जब नानक जी बनारस गए और परमेश्वर कबीर साहेब से मिले तो देखकर सोचा यह तो वही मोहिनी सूरत है जिनके सतलोक में दर्शन हुए थे। नानक जी की खुशी का ठिकाना न रहा एवं प्रसन्नता से उनकी आंखों में अश्रु भर गए। कबीर साहेब के चरणों मे गिरकर नानक जी ने सत्यनाम प्राप्त किया और अपना कल्याण करवाया। गुरु नानक देव जी पूर्ण परमेश्वर की साधना करते थे। श्री नानकदेव जी को जो पहले एक ओंकार (ॐ) मन्त्र का जाप करते थे तथा उसी को सत मान कर कहा करते थे एक ओंकार। उन्हें बेई नदी पर कबीर साहेब ने दर्शन दे कर सतलोक (सच्चखण्ड) दिखाया तथा अपने सतपुरुष रूप को दिखाया। जब सतनाम का जाप दिया तब श्री नानक साहेब जी की काल लोक से मुक्ति हुई।

इसी का प्रमाण पंजाबी गुरु ग्रन्थ साहिब के राग ‘‘सिरी‘‘ महला 1 पृष्ठ नं. 24 पर

एक सुआन दुई सुआनी नाल, भलके भौंकही सदा बिआल।
कुड़ छुरा मुठा मुरदार, धाणक रूप रहा करतार।।1।।
मै पति की पंदि न करनी की कार। उह बिगड़ै रूप रहा बिकराल।।
तेरा एक नाम तारे संसार, मैं ऐहा आस एहो आधार।
मुख निंदा आखा दिन रात, पर घर जोही नीच मनाति।।
काम क्रोध तन वसह चंडाल, धाणक रूप रहा करतार।।2।।
फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस।।
खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार।।3।।
मैं कीता न जाता हरामखोर, उह किआ मुह देसा दुष्ट चोर।
नानक नीच कह बिचार, धाणक रूप रहा करतार।।4।।

अर्थात मन रूपी कुत्ता और उसके साथ दो आशा व तृष्णा रूपी कुतिया भौंकती रहती है तथा नित नई नई आशाएं उत्त्पन्न होती रहती हैं। इसे मारना केवल सत्यसाधना से ही सम्भव था जिसका कबीर साहेब से ज्ञान प्राप्त करके समाधान हुआ। नानक जी ने आगे कहा कि उस सत्य साधना के बिना न तो साख थी और न ही सही भक्ति कमाई थी। नानक जी कबीर परमात्मा को सम्बोधित करते हुए कहते हैं कि तुम्हारा एक नाम मन्त्र इस संसार से मुक्ति दिलाएगा मेरे पास केवल तेरा ही नाम और तू ही आधार है अन्य कुछ भी नहीं। पहले अनजाने में निंदा भी की होगी क्योंकि बहुत काम क्रोध इस चंडाल रूपी तन में रहते हैं। नानक जी कहते हैं कि मुझे धाणक रुपी परमात्मा ने आकर तार दिया और काल से छुटाया।

God kabir sahib and guru nanak dev

इस सुंदर परमात्मा की मोहिनी सूरत को कोई नहीं पहचान सकता। परमात्मा ने तो काल को भी ठग लिया है जो दिखता तो धाणक है और ज़िंदा बन जाता है। आम व्यक्ति इसे नहीं पहचान सकता इसलिए प्रेम से नानक जी ने परमात्मा की ठगवाड़ा कहा है। नानक जी जीव को अपनी भूल बताते हुए कहते हैं कि मैंने परमात्मा से वाद विवाद किया फिर भी परमात्मा ने एक सेवक रूप में मुझे दर्शन दिए और स्वामी नाम से सम्बोधित किया। नानक जी क्षमाप्रार्थी होकर पश्चाताप करते हुए कहते हैं कि मुझ जैसा नीच और हरामखोर कौन होगा। नानक जी कहते हैं कि मैं भली तरह सोच विचार कर कहता हूं कि परमात्मा यही धाणक रूप है।

गुरु नानक जयंती (Guru Nanak Jayanti) 2020 पर सन्देश

नानक जी परमेश्वर की प्यारी आत्मा थे। परमात्मा ने नानक जी को दर्शन दिये और उन्हें सचखंड लेकर गए और अपनी वास्तविक स्थिति से परिचित करवाया। नानक जी ने सबको बताया कि यह “धाणक रूप रहा करतार” अर्थात परमेश्वर केवल कबीर है जो जुलाहे के रूप में आये थे। नानक जी ने परमात्मा कबीर को गुरु बनाया और फिर भक्ति पूरी करने के पश्चात सतलोक गए। नानक जी ने गुरु की महिमा स्पष्ट की है और बताया है कि गुरु से नामदीक्षा लेकर भक्ति करना चाहिए। तत्वदर्शी सन्त से दीक्षा लेकर भक्ति करनी चाहिए।

नानक देव जी के गुरु कबीर साहेब थे

नानक जी के गुरु परमात्मा कबीर साहेब थे। गुरु ग्रन्थ साहेब में कई स्थानों पर धाणक रूपी कबीर परमेश्वर की महिमा गाई गई है। गुरु ग्रन्थ साहेब आदरणीय ग्रन्थ है और इसी तरह कबीर सागर भी एक परम् आदरणीय ग्रन्थ है। कबीर सागर में स्पष्ट प्रमाण है कि कबीर साहेब ने जिंदा पीर के रूप में गुरु नानक जी को दर्शन दिए थे। इसके अतिरिक्त कुछ लोगों की मान्यता है नानक जी का कोई गुरु नहीं था किंतु इस बात का कई कई स्थानों पर प्रमाण है।

साखी कंधार देश की चली” के पेज 470-471 में एक मुगल पठान ने नानक जी से पूछा कि आपका गुरु कौन है? तब नानक ने कहा जी वह जिंदा पीर है। वह परमेश्वर गुरु रूप में आया था। उसका शिष्य सारा जहाँ है।

“साखी रुकनदीन काजी के साथ होई” में पृष्ठ 183 में निम्न वाणी दी है।

नानके आखे रुकनदीन सच्चा सुणहू जवाब |
खालक आदम सिरजिया आलम बड़ा कबीर ||
कायम दायम कुदरती सिर पीरां दे पीर |
सजदे करे खुदाई नू आलम बड़ज्ञ कबीर ||
यहां कबीर को पूर्ण परमेश्वर कहा है।

कबीर ही पूर्ण परमात्मा हैं

जब नानक जी बनारस में कबीर परमेश्वर से मिले तब नानक जी प्रसन्नता से भर गए क्योंकि जिस मोहिनी सूरत को नानक जी ने सचखंड में देखा था वही मोहिनी सूरत में कबीर परमेश्वर जुलाहे रूप में उनके सामने थे और यह देखकर उन्होंने कहा था “खरा सिआंणा बहुता भार, ये धाणक रूप रहा करतार” अर्थात ये जुलाहे रूप में कबीर साहेब ही पूर्ण परमेश्वर हैं।

‘‘राग तिलंग महला 1‘‘ के पृष्ठ नं. 721 में निम्न वाणी है

यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार |
हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार ||
दूनियाँ मुकामे फानी तहकीक दिलदानी |
मम सर मुई अजराईल गिरफ्त दिल हेच न दानी ||
जन पिसर पदर बिरादराँ कस नेस्त दस्तं गीर |
आखिर बयफ्तम कस नदारद चूँ शब्द तकबीर ||
शबरोज गशतम दरहवा करदेम बदी ख्याल |
गाहे न नेकी कार करदम मम ई चिनी अहवाल ||
बदबख्त हम चु बखील गाफिल बेनजर बेबाक |
नानक बुगोयद जनु तुरा तेरे चाकरा पाखाक |

श्री गुरु नानक देव जी कह रहे हैं कि हे हक्का कबीर (सत कबीर) आप निर्विकार दयालु परमेश्वर हो आप से मेरी एक अर्ज है कि मैं तो सत्य ज्ञान वाली नजर रहित तथा आपके सत्य ज्ञान के सामने तो निरुत्तर अर्थात जुबान रहित हो गया हूं। हे कुल मालिक, मैं तो आपके दासो के चरणों की धूल हूं। मुझे शरण में रखना।

गुरुनानक जयंती 2020 पर विशेष

इस गुरुनानक जंयती सुधारें अपना जन्म, लें तत्वदर्शी सन्त से नामदीक्षा और जानें सत्यनाम का असली मन्त्र। सत्यनाम तो एक विशेष मन्त्र है जो केवल पूर्ण गुरु से नामदीक्षा लेने से ही सफल होता है। क्या आप जानते हैं उस तत्वदर्शी सन्त के विषय में पहले ही भविष्यवाणी की जा चुकी है। वर्तमान में वह मौजूद है। अपना अनमोल मानव जन्म व्यर्थ न गंवाते हुए तत्वदर्शी सन्त से नामदीक्षा लें।

भाई बाले वाली जन्म साखी में प्रह्लाद भक्त की भविष्यवाणी

व्यापक अर्थ में किसी भी महापुरुष के आध्यात्मिक जीवन वृत्तान्त को जनमसाखी कहते हैं, जैसे ‘कबीर जी की जनमसाखी’, रैदास जनमसाखी आदि। भाई बाले वाली जन्म साखी में लिखा गया विवरण स्पष्ट करता है कि सन्त रामपाल जी महाराज जी ही वह अवतार हैं जिन्हें परमेश्वर कबीर साहेब जी तथा सन्त गुरु नानक देव जी के पश्चात पंजाब की धरती पर अवतरित होना था।
इस विषय में “जन्म साखी भाई बाले वाली” जिसके प्रकाशक हैं भाई जवाहर सिंह कृपाल सिंह पुस्तकां वाले गली- 8 बाग रामानंद अमृतसर पंजाब उसमें भक्त प्रह्लाद ने कहा है कि गुरु नानक जी के सचखंड जाने के सैकड़ों वर्ष पश्चात पंजाब की ही धरती पर जाट वर्ण में जन्म लेगा तथा उसका प्रचार क्षेत्र शहर बरवाला होगा।

यदि कोई यह सोचे कि दस गुरु सहिबानो में से भी किसी की ओर संकेत हो सकता हैं। इससे स्मरण रहे कि दस सिख गुरू सहिबानों में से कोइ भी जाट वर्ण से नहीं थे। दूसरे सिख गुरू श्री अंगद देव जी खत्री थे। तीसरे गुरु जी श्री अमर दास जी भी खत्री थे। चौथे गुरु जी श्री रामदास जी भी खत्री थे तथा पांचवे गुरु जी श्री अर्जुन देव जी से लेकर दसवें तथा अंतिम श्री गुरु गोबिंद सिंह जी तक श्री गुरु रामदास जी की संतान अर्थात खत्री थे।

भाई वाली वाली जन्म साखी में लिखा गया विवरण स्पष्ट करता कि सन्त रामपाल जी महाराज ही वे अवतार है जिन्हें परमेश्वर कबीर जी तथा गुरु नानक देव जी के पश्चात पंजाब की धरती पर अवतरित होना था। संत रामपाल जी महाराज 8 सितंबर सन 1951 को गांव धनाना जिला सोनीपत हरियाणा प्रांत (तत्कालीन पंजाब) में अवतरित हुए। सन्त रामपाल जी महाराज वही अवतार हैं जो अन्य प्रमाणों के साथ-साथ जन्म साखी में लिखें वर्णन पर खरे उतरते हैं। इसके अलावा भी अन्य विभिन्न देशों भविष्यवक्ताओं भविष्यवाणियां हैं जो पर सन्त रामपाल की महाराज पर सही उतरती हैं। अधिक जानकारी के लिए विज़िट करें सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल

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