दशकों से जलभराव की मार झेल रहे हनुमानगढ़ के मेहरवाला गाँव में जगी नई उम्मीद, संत रामपाल जी महाराज के किसान मजदूर बचाओ अभियान से मिली राहत

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राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील में स्थित मेहरवाला गाँव पिछले कई दशकों से एक ऐसी समस्या से जूझ रहा था, जिसने यहाँ के किसानों की जिंदगी को संघर्ष और निराशा से भर दिया था। वर्ष 1994 से शुरू हुई जलभराव की समस्या समय के साथ इतनी विकराल हो गई कि पिछले तीन वर्षों में लगभग 3000 बीघा कृषि भूमि पूरी तरह प्रभावित हो गई।

बरसात के दिनों में खेतों में चार से सात फीट तक पानी भर जाता था। धान की फसल बर्बाद हो जाती और गेहूं की बुवाई तक संभव नहीं हो पाती। जिन किसानों ने अपने जीवन की पूरी कमाई और मेहनत खेती में लगा दी थी, वे लगातार नुकसान झेल रहे थे। कई परिवारों के लिए यह केवल आर्थिक संकट नहीं था बल्कि उनके अस्तित्व का प्रश्न बन चुका था।

तीन साल तक खेतों में नहीं उगा एक भी दाना

गाँव के अनेक किसानों ने बताया कि उनकी जमीन पर पिछले तीन वर्षों से कोई ढंग की फसल नहीं हुई। खेतों में पानी लंबे समय तक भरा रहता था। जब पानी सूखता, तब तक मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो जाती और ऊपर नमक की परत जम जाती।

पूर्व सरपंच राजाराम देवग ने बताया कि गाँव के कई हिस्सों में सैकड़ों बीघा जमीन पूरी तरह बंजर हो चुकी थी। किसान धान और गेहूं जैसी मुख्य फसलें नहीं बो पा रहे थे। कुछ किसानों ने मजबूरी में मक्का बोने का प्रयास किया, लेकिन उत्पादन बहुत सीमित रहा।

एक किसान ने भावुक होकर कहा कि उसके सात किला खेत में तीन साल से एक भी दाना नहीं हुआ। लगातार नुकसान के कारण परिवार का गुजारा चलाना कठिन हो गया था।

स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी प्रभावित

जलभराव का असर केवल खेती तक सीमित नहीं था। गाँव की ढाणियों में रहने वाले लोग बरसात के समय मुख्य गाँव से कट जाते थे। बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता था। कई बार बीमार लोगों को समय पर अस्पताल तक पहुँचाना भी मुश्किल हो जाता था।

गाँव के बुजुर्ग बताते हैं कि बरसात के दिनों में पूरा इलाका किसी द्वीप जैसा बन जाता था। सड़कें पानी में डूब जाती थीं और सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता था।

वर्षों तक लगाई गई गुहार, लेकिन नहीं मिला स्थायी समाधान

ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने कई बार प्रशासन से शिकायत की, धरने दिए, आंदोलन किए और विभिन्न स्तरों पर समस्या उठाई। कुछ छोटे प्रयास हुए भी, लेकिन वे इतनी बड़ी समस्या के सामने नाकाफी साबित हुए।

गाँव वालों का कहना है कि जो सहायता मिली, वह “ऊँट के मुँह में जीरे” के समान थी। समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया और हर वर्ष हालात पहले से अधिक खराब होते गए।

किसान मजदूर बचाओ अभियान के तहत पहुँची उम्मीद की किरण

गाँव के लोगों ने बताया कि मेहरवाला ग्राम पंचायत के सरपंच पृथ्वीराज मेहड़ा जी ने गाँव की इस गंभीर समस्या को लेकर संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम के तहत बाढ़ – राहत सामग्री हेतु छः महीने पहले निवेदन किया था। जिसके बाद संत रामपाल जी महाराज जी की किसान मजदूर बचाओ सेवा अभियान के अंतर्गत पाँच दिन पहले संत रामपाल जी महाराज जी की सर्वे टीम मेहरवाला गाँव पहुँची। 

इसके बाद गाँव में संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशानुसार सर्वे कराया गया। सर्वे के दौरान सात प्रमुख जलभराव स्थलों की पहचान की गई और पाया गया कि लगभग 2850 से 3000 बीघा भूमि प्रभावित है।

ग्रामीणों ने बताया सर्वे के मात्र पाँच दिन बाद बाद संत रामपाल जी महाराज जी ने गाँव को सारी सामग्री उपलब्ध कराई। जिस तेजी से संत रामपाल जी महाराज जी के दरबार में कार्रवाई हुई, उसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। संत रामपाल जी महाराज जी ने महरावाला गाँव के लिए निम्न बाढ़-राहत सामग्री भेजी

  • 44,000 फीट 8 इंची पाइपलाइन 
  • फेविकोल
  • पाईप लगाने का अन्य सामान 

इतना है नहीं, संत रामपाल जी महाराज जी ने गाँव के लिए सात मोटर देने का भी आश्वासन दिया है। संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशानुसार जैसे ही गाँव वाले पाइपलाइन के खेतों में दबा देंगे, उसके बाद गाँव को सात मोटरें संत रामपाल जी महाराज जी की तरफ से उपलब्ध करा दी जाएंगी। 

अविलंब राहत कार्य   

जैसे ही गाँव के गणमान्य लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में 12 बजे प्रार्थना की, फिर तो मानों चमत्कार ही हो गया। अगले ही दिन, सुबह 6 बजे, जब मेहरवाला गाँव पूरी तरह से नींद से जाग भी न था, उस समय पाइप से लदे ट्रकों का काफिला गाँव मेहरवाला पहुँच गया। जैसे ही पाइपों से लदे ट्रक महरवाला पहुँचे, तब तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। एक दर्जन से अधिक ट्रकों में भरकर आए पाइप गाँव के लिए किसी वरदान से कम नहीं थे।

ग्रामीणों का विश्वास है कि इन पाइपों के माध्यम से खेतों में जमा पानी की निकासी आसान होगी और वर्षों से बंजर पड़ी भूमि फिर से खेती योग्य बन सकेगी।

गाँव में छाया उत्सव जैसा माहौल

राहत सामग्री पहुँचने की खबर फैलते ही पूरे गाँव में उत्सव जैसा वातावरण बन गया। गाँव के बाहर से लेकर पंचायत क्षेत्र तक लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।  

ट्रैक्टरों की रैली निकाली गई, डीजे बजाए गए और बड़ी संख्या में ग्रामीण स्वागत के लिए पहुँचे। गाँव के सरपंच सहित सभी लोग बारी बारी से संत रामपाल जी महाराज जी के स्वरूप को सर पर बैठाकर गाँव लेकर आए। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चे, सभी ने भाव विभोर होकर संत रामपाल जी महाराज जी के स्वरूप पर पुष्प वर्षा की। गाँव में ऐसा उत्सव था, जैसे मानों संत रामपाल जी की अलख सारे मेहरवाला गाँव में जग चुकी थी। 

कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार किसी सहायता कार्य के लिए इतना बड़ा जनसमर्थन और उत्साह देखा है।

किसानों की जुबानी: “अब हमारे खेतों में फिर से फसल लहराएगी”

किसानों का कहना है कि संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा भेजी गई राहत सामग्री से जल निकासी की व्यवस्था होगी, जिससे उनकी सबसे बड़ी समस्या का समाधान संभव होगा।

एक किसान ने बताया कि वह लंबे समय से ऐसी सहायता की प्रतीक्षा कर रहा था। उसका कहना था कि अब संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा दी गई राहत सामग्री से पानी की निकासी हो जाएगी और आने वाले वर्षों में खेतों में फिर से धान और गेहूं की अच्छी पैदावार होगी।

दूसरे किसान ने कहा कि अब केवल उसके परिवार को ही नहीं बल्कि पूरे गाँव को लाभ मिलेगा। इससे हजारों लोगों की आजीविका मजबूत होगी।

संत रामपाल जी महाराज के सेवा कार्यों की चर्चा

ग्रामीणों ने इस अवसर पर संत रामपाल जी महाराज के विभिन्न समाजहित कार्यों का भी उल्लेख किया। लोगों का कहना है कि संत रामपाल जी महाराज जी जरूरतमंद परिवारों की सहायता कर रहे है, वे गरीबों के लिए रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा और मकान, जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रहे है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव आ रहा हैं।

मेहरवाला गाँव के अनेक ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक अपनी समस्या के समाधान की प्रतीक्षा की, लेकिन जब संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा सहायता मिली तो उसने उनके मन में नई आशा का संचार हुआ। गाँव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से हजारों किसानों और मजदूरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने की संभावना बनी है।आज मेहरवाला के लोगों की आँखों में केवल खुशी ही नहीं बल्कि भविष्य के सपने भी दिखाई दे रहे हैं। वे उस दिन की कल्पना कर रहे हैं जब वर्षों से पानी में डूबे खेतों में फिर से हरियाली लहराएगी।

किसानों को उम्मीद है कि संत रामपाल जी महाराज जी की असीम कृपा से, किसानों की आने वाली पीढ़ियां अब बाढ़ संबंधी कठिनाइयों का सामना नहीं करेंगी, जिनसे किसान दशकों तक गुजरते रहे हैं।

जलभराव से जूझते किसानों को मिला नई जिंदगी का सहारा

मेहरवाला गाँव की कहानी केवल जलभराव की समस्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, धैर्य और उम्मीद की कहानी भी है। वर्षों तक कठिन परिस्थितियों का सामना करने वाले किसानों को अब संत रामपाल जी महाराज जी की दया से एक ऐसा समाधान मिला है, जिससे उनकी बंजर होती जमीन फिर से उपजाऊ बन सकेगी।

गाँव के लोगों का मानना है संत रामपाल जी महाराज जी के आशीर्वाद से अब यह परियोजना सफलतापूर्वक पूरी होगी और हजारों बीघा भूमि दोबारा खेती के योग्य हो जाएगी। इससे सैकड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। आज मेहरवाला गाँव में जो खुशी दिखाई दे रही है, वह केवल राहत सामग्री मिलने की खुशी नहीं, बल्कि यह एक संत के आशीर्वाद से एक बेहतर भविष्य की उम्मीद की खुशी है।

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