प्राकृतिक आपदाएं केवल खेतों में खड़ी फसल को ही नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि किसानों की वर्षों की मेहनत, उनके परिवारों की आजीविका और भविष्य की उम्मीदों को भी गहरा आघात पहुंचाती हैं। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई गांव वर्षों तक जलभराव की गंभीर समस्या से जूझते रहे। कहीं हजारों बीघा कृषि भूमि दलदल में बदल गई, तो कहीं तीन से चार दशक तक खेतों में पानी भरने के कारण खेती लगभग समाप्त हो गई। जिन खेतों से कभी पूरे परिवार का पालन-पोषण होता था, वहीं किसान बाजार से अनाज खरीदने को मजबूर हो गए। सरकारी स्तर पर अनेक प्रयासों और गुहार के बावजूद जब स्थायी समाधान नहीं मिला, तब किसानों की उम्मीदें टूटने लगीं और पूरा कृषि चक्र प्रभावित होने लगा।
ऐसे कठिन समय में संत रामपाल जी महाराज किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आए। गांवों की आवश्यकता के अनुसार मोटरें, ट्रैक्टर कपलिंग सेट, पाइपलाइन, इंजन, डीजल और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए। इस सहायता का उद्देश्य केवल खेतों से पानी निकालना नहीं था, बल्कि किसानों की आजीविका को बचाना और उन्हें दोबारा आत्मनिर्भर बनाना भी था।
जब जलभराव ने किसानों की जिंदगी रोक दी
लगातार जलभराव ने इन गांवों की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया था। कई वर्षों तक खेतों में फसल नहीं हो सकी, पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो गया और किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई। कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया, जबकि अगली फसल की बुवाई भी खतरे में पड़ गई।
किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि यदि समय रहते पानी नहीं निकला तो केवल एक फसल नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की खेती भी प्रभावित हो जाएगी। गांवों के लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से कई बार सहायता की मांग की, लेकिन जब कोई ठोस समाधान नहीं मिला तो उन्होंने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की प्रार्थना की।
जब गांव वालों ने संत रामपाल जी महाराज से लगाई उम्मीद
लगातार असफल प्रयासों के बाद ग्राम पंचायतों और किसानों ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी समस्या रखी। उन्होंने जलभराव से प्रभावित भूमि, फसलों के नुकसान और किसानों की आर्थिक कठिनाइयों की जानकारी देते हुए खेतों से पानी निकालने के लिए सहायता का निवेदन किया।
संत रामपाल जी महाराज ने प्रत्येक गांव की आवश्यकता को गंभीरता से समझते हुए तुरंत सर्वे और राहत व्यवस्था के निर्देश दिए। कुछ ही समय में आवश्यक संसाधन गांवों तक पहुंचा दिए गए। किसानों के अनुसार उन्हें इतनी शीघ्र और व्यवस्थित सहायता मिलने की उम्मीद नहीं थी। यही वह क्षण था, जब निराशा के बीच नई उम्मीद का संचार हुआ।
लखन (डीग, राजस्थान): 3000 बीघा जलमग्न भूमि पर फिर लौटी खेती
राजस्थान के डीग जिले की कुम्हेर तहसील स्थित ग्राम पंचायत लखन लगातार हुई बारिश के बाद गंभीर जलभराव की समस्या से जूझ रही थी। पंचायत की लगभग 3000 बीघा कृषि भूमि बाढ़ के पानी में डूब गई थी। खेतों में कई-कई फुट पानी जमा था और किसानों को डर था कि यदि समय रहते पानी नहीं निकला तो गेहूं की बुवाई पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी।
किसानों ने प्रशासन से कई बार सहायता मांगी, लेकिन कोई प्रभावी समाधान नहीं मिला। धीरे-धीरे गांव के लोगों की उम्मीदें खत्म होने लगीं। आखिरकार ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की प्रार्थना की।
गांव की आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध कराई गई सहायता
संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के तहत गांव के लिए तत्काल राहत उपलब्ध कराई। लखन गांव को—
- 2 शक्तिशाली ट्रैक्टर कपलिंग सेट
- ट्रैक्टर संचालन के लिए आवश्यक डीजल की पूरी व्यवस्था
उपलब्ध कराई गई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि किसानों को इस पूरी व्यवस्था पर अपनी जेब से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ा।
दिन-रात चला जल निकासी अभियान
राहत सामग्री मिलने के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जल निकासी का कार्य शुरू किया। कई दिनों तक लगातार ट्रैक्टर कपलिंग सेट चलाकर खेतों से पानी बाहर निकाला गया। गांव के लोगों ने भी इस कार्य में पूरा सहयोग दिया क्योंकि वे जानते थे कि यह केवल फसल नहीं, बल्कि पूरे गांव के भविष्य को बचाने का प्रयास है।
धीरे-धीरे खेतों से पानी निकलने लगा और जो भूमि कुछ समय पहले दलदल बन चुकी थी, वह दोबारा खेती योग्य बनने लगी। किसानों ने बिना देर किए गेहूं की बुवाई शुरू कर दी।
लौट आई हरियाली और किसानों का आत्मविश्वास
कुछ महीनों बाद गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी। जहां पहले तीन से चार फुट तक पानी भरा था, वहीं अब गेहूं की फसल लहलहा रही थी। किसान अपने खेतों में सिंचाई और फसल की देखभाल करते दिखाई देने लगे।
ग्रामीणों ने बताया कि जिस भूमि से इस वर्ष एक दाना उगने की भी उम्मीद नहीं थी, वहीं आज पूरी फसल तैयार हो रही है। किसानों के अनुसार लगभग पूरे 3000 बीघा प्रभावित क्षेत्र में खेती दोबारा शुरू हो चुकी है।
किसान बलजीत सहित अनेक ग्रामीणों ने बताया कि समय पर मिली सहायता ने केवल खेतों का पानी ही नहीं निकाला, बल्कि किसानों के टूटते आत्मविश्वास को भी फिर से जीवित कर दिया।
नगला कुंदन (डीग, राजस्थान): 30 वर्षों पुरानी जलभराव समस्या के समाधान की दिशा में बड़ी पहल
राजस्थान के डीग जिले की कामा तहसील स्थित नगला कुंदन ग्राम पंचायत लगभग 30 वर्षों से जलभराव की समस्या से जूझ रही थी। हर वर्ष बरसात के बाद खेतों में पानी भर जाता था और महीनों तक निकासी नहीं हो पाती थी। लगभग 500 से 600 बीघा कृषि भूमि लगातार प्रभावित होती थी। कई परिवार वर्षों तक अपनी ही जमीन पर फसल उगते हुए नहीं देख पाए।
जब ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की प्रार्थना की, तब गांव की स्थिति को समझते हुए पहले चरण में पाइपलाइन, मोटरें और दो कपलिंग सेट उपलब्ध कराए गए। इन संसाधनों की सहायता से किसानों ने पहली बार बड़े स्तर पर खेतों से पानी निकालना शुरू किया और लगभग 90 प्रतिशत प्रभावित क्षेत्र से जलभराव समाप्त करने में सफलता मिली।
आवश्यकता के अनुसार बढ़ाई गई सहायता
जलभराव का क्षेत्र बड़ा होने के कारण पंचायत ने अतिरिक्त सहायता का अनुरोध किया। ग्रामीणों ने दो 25 HP इंजनों की आवश्यकता बताई ताकि ट्रैक्टरों पर निर्भरता कम हो और जल निकासी व्यवस्था अधिक स्थायी बन सके।
संत रामपाल जी महाराज के निर्देश पर गांव का विस्तृत सर्वे कराया गया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि पहले उपलब्ध कराए गए संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो रहा है और अधिकांश पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद तुरंत अतिरिक्त सहायता स्वीकृत कर दी गई।
नए इंजन और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए
दूसरे चरण में गांव को उपलब्ध कराए गए—
- 26 HP के 2 नए ईचर इंजन
- स्टार्टर
- टूल किट
- साइलेंसर
- आवश्यक फिटिंग
- अन्य सभी उपकरण
ग्रामीणों ने पहले सेकंड हैंड इंजन की मांग की थी, लेकिन निरीक्षण के दौरान नए इंजन अधिक उपयुक्त पाए गए। संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी देरी के नए इंजन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।
इसके अतिरिक्त पहले चरण में डीजल और जनरेटर का पूरा खर्च भी संत रामपाल जी महाराज की ओर से वहन किया गया, जिससे किसानों पर किसी प्रकार का आर्थिक भार नहीं पड़ा।
वर्षों बाद खेतों में लौटी खेती
ग्रामीणों ने बताया कि जहां पहले चारों ओर केवल पानी दिखाई देता था, वहीं अब खेतों में फसलें लहलहा रही हैं। लगभग तीन दशकों बाद गांव के किसानों ने अपनी जमीन पर सफल खेती होते देखी। पंचायत ने यह भी बताया कि उपयोग के बाद अतिरिक्त पाइपों को सुरक्षित रखा गया है ताकि भविष्य में जलभराव की स्थिति बनने पर तुरंत उनका उपयोग किया जा सके।
आज नगला कुंदन में लौटती हरियाली इस बात का प्रमाण है कि समय पर मिला सहयोग, सुनियोजित कार्य और सामूहिक प्रयास वर्षों पुरानी समस्या का भी प्रभावी समाधान बन सकते हैं।
नगला आशा (मथुरा, उत्तर प्रदेश): सात वर्षों के जलभराव से मिली राहत, 500 बीघा भूमि पर फिर लौटी खेती
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील स्थित नगला आशा गांव लगभग सात वर्षों तक जलभराव की गंभीर समस्या से जूझता रहा। गांव की लगभग 500 बीघा कृषि भूमि दो से पांच फुट तक पानी में डूबी रहती थी, जिसके कारण खेती लगभग ठप हो गई थी। हर वर्ष किसानों की मेहनत पानी में बह जाती, पशुओं के लिए चारे का संकट पैदा हो जाता और परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई।
ग्रामीणों ने अनेक बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से सहायता की मांग की, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। अंततः ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता की प्रार्थना की।
गांव की आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध कराई गई सहायता
संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत नगला आशा गांव के लिए तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध करवाई। गांव को प्रदान किए गए प्रमुख संसाधन थे—
- 3000 फुट 8 इंच की पाइपलाइन
- 15 HP की 2 शक्तिशाली मोटरें
- लगभग 1640 फुट एल्यूमिनियम तार
- स्टार्टर
- केबल
- फिटिंग
- नट-बोल्ट
- अन्य सभी आवश्यक उपकरण
संपूर्ण सामग्री एक साथ उपलब्ध कराई गई ताकि ग्राम पंचायत को किसी अतिरिक्त खर्च या बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़े।
वर्षों बाद पूरी भूमि पर हुई सफल खेती
राहत सामग्री मिलने के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जल निकासी अभियान शुरू किया। लगातार मोटरें चलाकर खेतों से पानी बाहर निकाला गया। जिन खेतों में वर्षों तक केवल जलभराव दिखाई देता था, वहां पहली बार पूरे क्षेत्र में खेती की तैयारी शुरू हुई।
ग्रामीणों के अनुसार लगभग पूरी 500 बीघा भूमि पर सफलतापूर्वक बुवाई की गई और कुछ ही समय बाद खेतों में गेहूं की हरियाली लौट आई। किसानों का अनुमान था कि इस बार होने वाली कृषि उपज से गांव की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आएगा।
किसानों का लौटा आत्मविश्वास
गांव के प्रधान प्रतिनिधियों और किसानों ने बताया कि पहले हर वर्ष बड़ी मात्रा में भूमि खाली रह जाती थी, लेकिन इस बार पहली बार लगभग पूरा क्षेत्र खेती योग्य बन सका। वर्षों बाद उन्हें अपनी मेहनत का फल मिलता दिखाई दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले बच्चों की पढ़ाई और पशुओं के चारे की व्यवस्था भी प्रभावित रहती थी, लेकिन अब खेतों में लौटती हरियाली ने पूरे गांव का वातावरण बदल दिया है। किसान अपनी फसलों की देखभाल कर रहे हैं और आने वाली अच्छी पैदावार को लेकर उत्साहित हैं।
लोहागढ़ (डीग, राजस्थान): 40 वर्षों बाद जलभराव से मिली राहत और खेतों में लौटी हरियाली
राजस्थान के डीग जिले की कामा तहसील स्थित लोहागढ़ गांव लगभग 40 वर्षों से जलभराव की समस्या झेल रहा था। बरसात के बाद खेतों में पानी भर जाता और महीनों तक उसकी निकासी नहीं हो पाती थी। लगभग 900 बीघा कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा हर वर्ष प्रभावित होता था। खेतों में फसलों के स्थान पर सरकंडे उगने लगे थे और किसान अपनी जमीन को धीरे-धीरे बंजर मानने लगे थे।
वर्षों तक समाधान की तलाश करने के बाद ग्राम पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष सहायता की प्रार्थना की।
तत्काल उपलब्ध कराए गए संसाधन
गांव की आवश्यकता को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत उपलब्ध कराए—
- 20 HP की 2 शक्तिशाली मोटरें
- लगभग 200 फुट फ्लेक्सिबल पाइप
- आवश्यक फिटिंग एवं अन्य उपकरण
लेकिन सहायता केवल मशीनों तक सीमित नहीं रही। इन मोटरों को लगातार चलाने के लिए आवश्यक डीजल और जनरेटर का पूरा खर्च लगभग डेढ़ महीने तक संत रामपाल जी महाराज की ओर से वहन किया गया, जिससे किसानों पर किसी प्रकार का आर्थिक भार नहीं पड़ा।
90 प्रतिशत क्षेत्र से निकला पानी
लगातार जल निकासी अभियान के परिणामस्वरूप गांव के लगभग 90 प्रतिशत क्षेत्र से पानी बाहर निकाल दिया गया। वर्षों से जलमग्न खेतों में पहली बार बड़े स्तर पर गेहूं की बुवाई संभव हुई।
ग्राम पंचायत के अनुसार लगभग 10 प्रतिशत भूमि पर नहर से लगातार हो रहे सीपेज तथा कार्य देर से शुरू होने के कारण इस बार खेती नहीं हो सकी, लेकिन शेष अधिकांश भूमि पर सफलतापूर्वक फसल तैयार हुई।
भविष्य के लिए भी बनी व्यवस्था
ग्रामीणों ने बताया कि उपलब्ध कराई गई मोटरें, पाइप और अन्य उपकरण अब गांव की स्थायी संपत्ति हैं। भविष्य में यदि जलभराव की स्थिति दोबारा उत्पन्न होती है तो इन्हीं संसाधनों की सहायता से समय रहते पानी निकाला जा सकेगा।
लगभग चार दशकों बाद खेतों में लौटती हरियाली ने किसानों को केवल फसल ही नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति नया विश्वास भी दिया है।
चारों गांवों में उपलब्ध कराई गई सहायता एक नजर में
| गांव | प्रभावित क्षेत्र | प्रमुख सहायता | प्रमुख उपलब्धि |
| लखन (राजस्थान) | लगभग 3000 बीघा | 2 ट्रैक्टर कपलिंग सेट, डीजल व्यवस्था | 100% जल निकासी के बाद सफल गेहूं की बुवाई |
| नगला कुंदन (राजस्थान) | लगभग 500–600 बीघा | पाइपलाइन, मोटरें, 2 कपलिंग सेट, 2 नए 26 HP ईचर इंजन, डीजल व जनरेटर | लगभग 90% क्षेत्र से जल निकासी और वर्षों बाद खेती |
| नगला आशा (उत्तर प्रदेश) | लगभग 500 बीघा | 3000 फुट पाइपलाइन, 2×15 HP मोटरें, 1640 फुट एल्यूमिनियम तार | सात वर्षों बाद लगभग पूरे क्षेत्र में सफल खेती |
| लोहागढ़ (राजस्थान) | लगभग 900 बीघा | 2×20 HP मोटरें, फ्लेक्सिबल पाइप, डीजल व जनरेटर व्यवस्था | 40 वर्षों बाद लगभग 90% क्षेत्र में खेती संभव |
किसानों की जिंदगी में आया सकारात्मक बदलाव
चारों गांवों की परिस्थितियां अलग-अलग थीं, लेकिन किसानों का दर्द एक जैसा था। कहीं दो वर्षों तक खेती बंद रही, कहीं सात वर्षों तक खेत जलमग्न रहे, कहीं तीन दशक और कहीं चार दशक तक जलभराव किसानों की आजीविका पर भारी पड़ा। समय पर उपलब्ध कराए गए संसाधनों ने इन गांवों में जल निकासी का कार्य तेज किया और हजारों बीघा भूमि को दोबारा खेती योग्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप किसानों ने समय पर गेहूं की बुवाई की, खेतों में हरियाली लौटी और परिवारों को आर्थिक राहत मिली। कई गांवों ने उपलब्ध कराए गए संसाधनों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय भी लिया, ताकि जलभराव जैसी परिस्थितियों से समय रहते निपटा जा सके।
संत रामपाल जी महाराज के अन्य मानवता सेवा कार्य
संत रामपाल जी महाराज के मार्गदर्शन में अन्नपूर्णा मुहिम के अतिरिक्त अनेक समाजसेवी कार्य भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य
- जरूरतमंद परिवारों को राशन सहायता
- रक्तदान शिविर
- निःशुल्क दहेजरहित विवाह
- गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों की सहायता
- पर्यावरण संरक्षण अभियान
- नशामुक्ति जागरूकता अभियान
- जरूरतमंद किसानों की सहायता
इन सेवाओं का उद्देश्य केवल तत्काल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को आत्मनिर्भर बनाना और कठिन परिस्थितियों से बाहर निकालना भी है।
खेतों में लौटी हरियाली, किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
लखन, नगला कुंदन, नगला आशा और लोहागढ़ की कहानियां इस बात का प्रमाण हैं कि समय पर मिला सहयोग और सामूहिक प्रयास वर्षों पुरानी समस्याओं का भी समाधान बन सकते हैं। जिन खेतों में कभी जलभराव, दलदल और निराशा दिखाई देती थी, वहीं आज गेहूं की लहलहाती फसलें किसानों की मेहनत और नई उम्मीद का प्रतीक बन चुकी हैं।
अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत उपलब्ध कराए गए संसाधनों ने केवल खेतों से पानी नहीं निकाला, बल्कि हजारों किसान परिवारों को फिर से आत्मविश्वास के साथ खेती करने का अवसर भी दिया। आज इन गांवों में लौटती हरियाली, मजबूत होती कृषि व्यवस्था और किसानों के चेहरों पर दिखाई देने वाली मुस्कान इस परिवर्तन की सबसे बड़ी पहचान है।



