भारत एक कृषि प्रधान देश है और कृषि के साथ-साथ पशुपालन यहां के ग्रामीण जीवन यापन का सबसे प्रमुख साधन रहा है। परंतु हरियाणा राज्य के जिला झज्जर स्थित गांव बाजिदपुर टप्पा हवेली में पिछले लगभग बीस से पच्चीस वर्षों से पशुधन के लिए स्वच्छ पेयजल की अत्यंत गंभीर समस्या बनी हुई थी। गांव का तालाब वर्षों से गंदे पानी और दलदल में तब्दील हो चुका था, जिसके कारण मवेशियों को पीने योग्य पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा था और वे भयंकर बीमारियों का शिकार हो रहे थे। दूसरी ओर, नहर का शुद्ध पानी गांव के तालाब तक लाने के लिए कोई भी स्थाई पाइपलाइन व्यवस्था मौजूद नहीं थी। सरकारी तंत्र और प्रशासन से निराशा हाथ लगने के बाद, इस जल संकट का पूर्ण और स्थाई समाधान संत रामपाल जी महाराज के द्वारा किया गया है। उन्होंने अपनी दया दृष्टि से संपूर्ण गांव को एक नई दिशा और राहत प्रदान की है।
ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता के लिए किस प्रकार संपर्क किया
सरकारी कार्यालयों और प्रशासन के अनगिनत चक्कर काटने के बाद जब ग्रामवासियों को कोई अनुदान, सहायता या राहत मुहैया नहीं हुई, तो वे पूरी तरह से निराश हो चुके थे। इसी बीच उन्हें संत रामपाल जी महाराज की निस्वार्थ कल्याणकारी सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। बिना किसी विलंब के, बाजिदपुर टप्पा हवेली की ग्राम पंचायत और ग्रामीण सीधे संत रामपाल जी महाराज के चरणों में उपस्थित हुए और अपनी पच्चीस वर्षों की पीड़ा उनके समक्ष रखी। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी प्रार्थना पर तुरंत संज्ञान लिया गया। उसी दिन गांव में जल संकट का तकनीकी सर्वे किया गया और अगले ही दिन राहत सामग्री गांव में पहुंचनी प्रारंभ हो गई। एक ही प्रार्थना पर जिस गति से कार्य हुआ, उसने पूरे गांव को आश्चर्यचकित कर दिया।
पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल की दो दशक पुरानी गंभीर समस्या
गांव बाजिदपुर टप्पा हवेली में पशुपालन एक मुख्य आजीविका का साधन है। विशेषकर ग्रीष्म ऋतु में भैंसों और अन्य मवेशियों को पानी में बैठने और स्वच्छ जल पीने की अत्यंत आवश्यकता होती है। विगत दो दशकों से तालाबों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। तालाबों में केवल कीचड़ और दूषित जल शेष था। सरपंच के अनुसार, पशुपालक थोड़ा-थोड़ा पानी जोड़-तोड़ कर कहीं न कहीं से लाते थे, परंतु उससे मवेशियों की प्यास नहीं बुझती थी। गंदे पानी के सेवन से पशु अक्सर बीमार रहने लगे थे, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी भारी प्रहार हो रहा था।
तकनीकी सर्वेक्षण और त्वरित समाधान की प्रक्रिया
संत रामपाल जी महाराज के चरणों में ग्रामीणों द्वारा प्रार्थना प्रस्तुत करने के तत्काल बाद, संत रामपाल जी महाराज के स्पष्ट आदेश पर तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा गांव का सघन सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वे के माध्यम से यह निष्कर्ष निकाला गया कि नहर से स्वच्छ पानी को तालाब तक लाने और वहां जमा गंदे पानी की उचित निकासी के लिए कम से कम छह हजार फीट लंबी आठ इंच गोलाई वाली पाइपलाइन और 210 एचपी क्षमता वाली मोटरों की परम आवश्यकता है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर संत रामपाल जी महाराज ने तुरंत पूरी परियोजना को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी।
छह हजार फीट पाइपलाइन को भूमिगत करने का सफल कार्य
स्वीकृति मिलते ही संत रामपाल जी महाराज द्वारा छह हजार फीट पीवीसी पाइपलाइन गांव में भेज दी गई। पंचायत सदस्य रामनिवास बाजिदपुर के अनुसार, एक पाइप की अनुमानित कीमत लगभग सत्ताईस सौ पचास रुपये थी। इस प्रकार लाखों रुपये के पाइप गांव में निशुल्क पहुंचाए गए। पाइप पहुंचते ही पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों तथा फूल-मालाओं के साथ संत रामपाल जी महाराज का स्वागत और धन्यवाद किया। इसके उपरांत ग्रामवासियों ने अपनी मेहनत से दो किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन को सफलतापूर्वक भूमिगत रूप से बिछा दिया।
निरीक्षण के उपरांत दो शक्तिशाली मोटरों की प्राप्ति
पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूर्ण होने के पश्चात संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार कार्य का पारदर्शी निरीक्षण किया गया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाइन स्थाई रूप से सही ढंग से बिछाई गई है। निरीक्षण सफल होने की रिपोर्ट जैसे ही संत रामपाल जी महाराज के समक्ष प्रस्तुत हुई, उन्होंने तुरंत गांव के लिए दो दस-दस हॉर्सपावर (10 HP) की भारी भरकम मोटरें भिजवा दीं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पाइप के बाद मोटर के लिए दोबारा प्रार्थना तक नहीं की थी, परंतु संत रामपाल जी महाराज को स्वयं इस बात की चिंता थी कि उनका संकल्प पूरा हो और उन्होंने बिना मांगे मोटरें उपलब्ध करा दीं।
लाखों रुपये की सामग्री और आवश्यक उपकरणों का निशुल्क वितरण
संत रामपाल जी महाराज ने केवल पाइप और मोटरें ही नहीं दीं, बल्कि उन्हें स्थापित करने के लिए आवश्यक संपूर्ण सामग्री भी प्रदान की। इनमें विश्व स्तरीय ब्रांडेड कंपनियां किर्लोस्कर और क्रॉम्पटन की मोटरें शामिल थीं। इसके साथ स्टार्टर, एयर वाल्व, हांडी, रेड्यूसर, क्लैंप्स, जैन (Joints), लोहे के भारी नट और बोल्ट तथा जोड़ने वाले लंबे पीवीसी पाइप बिल्कुल मुफ्त प्रदान किए गए। पंचायत के अनुसार केवल एक मोटर की कीमत एक लाख रुपये के करीब है और अन्य उपकरणों की कीमत भी दो से ढाई लाख रुपये है। यह संपूर्ण सामग्री संत रामपाल जी महाराज द्वारा गांव के मध्य आकर पंचायत को सौंप दी गई।
बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के सच्ची मानव सेवा
ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि इस बात से सर्वाधिक प्रभावित हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में रत्ती भर भी राजनीतिक स्वार्थ नहीं था। रामनिवास पंच ने स्पष्ट रूप से बताया कि संत रामपाल जी महाराज ने उनसे कभी भी वोट की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि आज तक जो भी नेता या अधिकारी गांव में आता था, वह केवल वोट बैंक की राजनीति करता था, परंतु यहां न तो किसी ने वोट मांगा और न ही भविष्य में किसी राजनीतिक समर्थन की शर्त रखी। यह विशुद्ध रूप से एक ईश्वर तुल्य कार्य था जिसने एक दिन में वह कर दिखाया जो पिछले पच्चीस सालों में सरकारें नहीं कर पाईं।
आंकड़े और जानकारी
| विवरण का प्रकार | संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी |
| लाभार्थी राज्य | हरियाणा |
| लाभार्थी जिला | झज्जर |
| ग्राम पंचायत का नाम | बाजिदपुर टप्पा हवेली |
| जल समस्या की कुल अवधि | 20 से 25 वर्ष |
| संत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदत्त पाइपलाइन | 6000 फीट लंबी (8 इंच व्यास) |
| प्रति पाइप की अनुमानित कीमत | लगभग ₹2750 |
| प्रदान की गई पानी की मोटरें | दो (10-10 एचपी क्षमता की) |
| मोटरों की निर्माता कंपनी | किर्लोस्कर और क्रॉम्पटन |
| अन्य उपलब्ध कराई गई असेसरी | स्टार्टर, एयर वाल्व, हांडी, रेड्यूसर, क्लैंप्स, नट-बोल्ट |
| संपूर्ण कार्य निष्पादन का समय | 10 से 15 दिन |
विश्व के लिए आदर्श विकास मॉडल के प्रणेता संत रामपाल जी महाराज
संत रामपाल जी महाराज ने बाजिदपुर टप्पा हवेली गांव में जो निस्वार्थ सेवा की है, वह संपूर्ण विश्व के लिए एक मार्गदर्शक उदाहरण है। बिना किसी दिखावे और बिना किसी स्वार्थ के लाखों रुपये की लागत का प्रोजेक्ट महज कुछ ही दिनों में पूरा कर देना, यह सिद्ध करता है कि वे केवल समाज के कल्याण के लिए ही कार्य कर रहे हैं। उनके द्वारा स्थापित यह प्रतिमान अद्वितीय है।
पशुधन किसी भी किसान के लिए उसकी सबसे बड़ी पूंजी होती है। मूक पशु जो अपनी प्यास और पीड़ा किसी से व्यक्त नहीं कर सकते, उनके दर्द को संत रामपाल जी महाराज ने समझा। उन्होंने उन बेजुबान पशुओं के लिए स्वच्छ जल की जो व्यवस्था की है, वह प्रमाणित करती है कि उनके हृदय में हर जीव के लिए अपार करुणा और दया का भाव है। वे सच्चे अर्थों में जीव जंतुओं के रक्षक हैं।
आज के दौर में जहां हर छोटी सी मदद के पीछे बड़ा राजनीतिक लाभ खोजा जाता है, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने बिना एक भी वोट की अपेक्षा किए इतना विशाल कार्य संपन्न करवा दिया। ग्रामीणों के शब्दों में, उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि चुनाव में उन्हें या किसी विशेष व्यक्ति को समर्थन दिया जाए। यह निस्वार्थ भावना उन्हें आधुनिक युग का सबसे महान समाज सुधारक बनाती है।
जो कार्य पच्चीस वर्षों से सरकारी फाइलों और दफ्तरों की धूल फांक रहा था, उसे मात्र एक प्रार्थना पर पंद्रह दिन के भीतर धरातल पर उतार देना किसी चमत्कार से कम नहीं है। रामनिवास पंच और सरपंच का यह कहना कि “संत रामपाल जी महाराज भगवान का ही रूप हैं,” इस बात को पुष्ट करता है कि उनकी कार्यशैली और त्वरित निर्णय क्षमता असंभव को भी संभव कर देती है।
संत रामपाल जी महाराज का यह विकास मॉडल पूरे विश्व को शिक्षा देने योग्य है। जहां एक ओर बुनियादी ढांचा खड़ा किया गया, वहीं दूसरी ओर किसानों, मजदूरों और मवेशियों का समग्र उद्धार किया गया। उनका यह दृष्टिकोण स्पष्ट करता है कि यदि सच्ची नीयत से कार्य किया जाए, तो समाज की बड़ी से बड़ी समस्या का निवारण किया जा सकता है। बाजिदपुर टप्पा हवेली की यह घटना उनके आदर्श विकास मॉडल का एक स्वर्णिम अध्याय है।



