उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का उमरी गांव, जो ब्रज क्षेत्र का हिस्सा है, लंबे समय से एक ऐसी समस्या से जूझ रहा था जिसने यहां की खेती को लगभग समाप्त कर दिया था। करीब 50 वर्षों से गांव की लगभग 500 बीघा जमीन जलभराव के कारण अनुपयोगी पड़ी थी।
खेतों में हर समय पानी भरा रहता था, जिससे किसान चाहकर भी फसल की बुवाई नहीं कर पाते थे। जहां हरियाली होनी चाहिए थी, वहां केवल ठहरा हुआ पानी और सूनी जमीन दिखाई देती थी। यह स्थिति धीरे-धीरे सामान्य बन गई थी, लेकिन किसानों के लिए हर साल नई चिंता लेकर आता था।
वर्षों से गहराती समस्या
गांव के बुजुर्गों के अनुसार यह समस्या दशकों पुरानी थी। कई पीढ़ियों ने इस स्थिति को झेला था। खेतों में पानी जमा रहता था और निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी।
किसानों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। समस्या जस की तस बनी रही और किसानों की आजीविका पर संकट गहराता गया।
जब गांव ने लिया निर्णय
जब सभी प्रयास असफल होते दिखाई दिए, तब ग्राम पंचायत उमरी ने समाधान के लिए आगे बढ़ने का निर्णय लिया। गांव के लोगों ने मिलकर समस्या को उठाया और सहायता के लिए प्रयास किए।
इसी दौरान संत रामपाल जी महाराज के सामाजिक सेवा कार्यों की जानकारी मिलने पर गांव की ओर से सहायता के लिए निवेदन किया गया।
संत रामपाल जी महाराज के निर्देशानुसार मिली सहायता
जैसे ही उमरी गांव की समस्या संत रामपाल जी महाराज तक पहुंची, उन्होंने तुरंत सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया। उनके मार्गदर्शन में चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत जलनिकासी के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कर गांव तक पहुंचाई गई।

गांव को निम्नलिखित सहायता उपलब्ध कराई गई:
- लगभग 8000 फुट लंबी 8 इंच की पाइपलाइन
- दो शक्तिशाली 10 हॉर्सपावर मोटरें
- स्टार्टर, केबल और पाइप जोड़ने के उपकरण
- अन्य आवश्यक सामग्री
संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार यह सुनिश्चित किया गया कि किसानों को किसी भी प्रकार का अतिरिक्त खर्च न करना पड़े और कार्य तुरंत प्रारंभ किया जा सके।
मथुरा के उमरी गांव में मात्र 4 दिन के भीतर दोबारा पहुंचा संत रामपाल जी का सेवा काफिला
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के उमरी गांव की यह कहानी केवल एक गांव की नहीं, बल्कि हजारों किसानों की है। वे किसान पिछले कई वर्षों से प्रकृति और व्यवस्था की दोहरी मार झेलते हुए धीरे-धीरे टूटते जा रहे थे। गांव की गलियों में चलते हुए ऐसा महसूस होता है जैसे हर घर ने कोई न कोई दर्द अपने अंदर दबा रखा हो। कभी ओलावृष्टि, तो कभी अतिवृष्टि ने किसानों की मेहनत को बार-बार मिट्टी में मिला दिया। खेत जो कभी हरे-भरे रहते थे, वहां लंबे समय तक पानी भरा रहा और फसलें सड़कर खत्म हो गईं।
एक किसान रामस्वरूप से जब बात हुई तो उसकी आंखों में नमी साफ दिखाई दी। उसने धीमी आवाज में कहा, “साहब, हम तो बस आसमान को देखते रह गए। कभी पानी नहीं चाहिए था तब नहीं आया, और जब आया तो सब कुछ बहा ले गया। हमारे पास खाने को भी नहीं बचा था।” वहीं पास खड़ी उनकी पत्नी बोली, “बच्चों की पढ़ाई रुक गई और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था।” ऐसे हालात में जब गांव के लोगों ने प्रशासन के चक्कर काटे तो उन्हें केवल आश्वासन मिला, मदद नहीं मिली। तभी गांव के कुछ लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाने का निर्णय लिया और यहीं से कहानी ने नया मोड़ लिया।
राहत सामग्री से लौटी उम्मीद और शुरू हुई नई शुरुआत
15 नवंबर को पहली बार राहत सामग्री गांव पहुंची, जिसमें हजारों फीट पाइप और मोटर दी गई। लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई तो दोबारा प्रार्थना की गई। मात्र चार दिन बाद, 19 नवंबर को फिर से राहत का काफिला गांव में पहुंच गया। इस बार 4000 फीट 8 इंच पाइप, 850 फीट कॉपर वायर और एक 10 एचपी मोटर दी गई। कुल मिलाकर गांव को अब तक 12000 फीट पाइप और तीन मोटरें मिल चुकी हैं। यह कोई उधार नहीं, बल्कि पंचायत की स्थायी संपत्ति के रूप में दी गई, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी लाभ उठा सकें।
गांव के प्रधान राजेंद्र सिंह ने बताया कि पहले भी 8000 फीट पाइप और दो मोटरें मिली थीं, और अब दूसरी बार मिली सहायता से किसानों के चेहरों पर फिर से उम्मीद लौट आई है। राहत सामग्री मिलने के बाद गांव में काम भी तेजी से शुरू हुआ। पाइप जमीन में डाले जा रहे हैं, पानी निकालने की व्यवस्था बनाई जा रही है और लोग मिलकर खेतों को फिर से तैयार करने में जुट गए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यह केवल मदद नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है जिसने किसानों को जीने की नई राह दिखाई है और टूटे हुए परिवारों में फिर से उम्मीद जगा दी है।
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गांव में बदला माहौल
जैसे ही यह सहायता गांव में पहुंची, वहां का वातावरण बदलने लगा। लोगों के चेहरों पर लंबे समय बाद राहत और संतोष दिखाई देने लगा। यह केवल संसाधनों का पहुंचना नहीं था, बल्कि उस विश्वास का लौटना था जो वर्षों से धीरे-धीरे समाप्त हो गया था। गांव में फिर से खेती और भविष्य की बातें होने लगीं।
खेतों में शुरू हुआ परिवर्तन
पाइपलाइन और मोटरों की सहायता से खेतों से पानी निकालने का कार्य प्रारंभ किया गया। जो भूमि पिछले 50 वर्षों से जलभराव के कारण बेकार पड़ी थी, वह धीरे-धीरे सूखने लगी। जहां पहले पानी भरा रहता था, वहां अब खेती की संभावनाएं दिखाई देने लगी हैं।
किसानों के जीवन में नई शुरुआत
किसानों का कहना है कि यदि यह समस्या बनी रहती, तो उन्हें खेती छोड़ने तक की नौबत आ सकती थी। अब परिस्थितियों में बदलाव देखकर उन्हें विश्वास हुआ है कि वे फिर से अपने खेतों में काम कर सकेंगे और अपनी मेहनत का फल प्राप्त कर पाएंगे।
सोच में आया बदलाव
यह परिवर्तन केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव के लोगों की सोच में भी बदलाव आया है। जहां पहले निराशा थी, वहां अब विश्वास और उम्मीद दिखाई देती है। लोग अब समस्याओं को अपनी नियति मानने के बजाय समाधान की दिशा में सोचने लगे हैं।
एक प्रेरणादायक उदाहरण
उमरी गांव की यह कहानी यह दर्शाती है कि सही समय पर किया गया प्रयास किस प्रकार बड़े परिवर्तन का कारण बन सकता है।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से न केवल जलभराव की समस्या का समाधान हुआ, बल्कि किसानों के जीवन में नई आशा और आत्मविश्वास भी लौटा है।
आज जो जमीन वर्षों तक अनुपयोगी पड़ी थी, वह फिर से खेती के योग्य बनने की ओर बढ़ रही है—यह इस बात का प्रमाण है कि समय पर मिली सहायता किसी भी परिस्थिति को बदल सकती है।



