राजस्थान के सुरौता गांव के लिए मसीहा बने संत रामपाल जी महाराज: जलमग्न खेतों को दी नई जिंदगी

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डीग, राजस्थान – यह कहानी राजस्थान के डीग जिले की कुमेर तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव सुरौता की है। यह कहानी उस धरती की है जो पिछले कई महीनों से पानी में समाई हुई थी, लेकिन एक महापुरुष के परोपकार ने वहां की किस्मत बदल दी। आज सुरौता गांव की बंजर हो चुकी उस धरती पर फिर से हरियाली का राज है।

दो साल का दंश और प्रशासन की बेरुखी

सुरौता गांव पिछले दो वर्षों से एक भीषण आपदा का सामना कर रहा था। गांव की करीब 1500 से 2000 बीघा (और कुल मिलाकर लगभग 3000 बीघा) उपजाऊ जमीन पूरी तरह से जलमग्न थी। खेतों में 5 से 6 फीट तक पानी भरा हुआ था, जिसके कारण 50% से ज्यादा खेत खाली पड़े थे। बुवाई का समय लगातार निकलता जा रहा था और किसान पूरी तरह हताश हो चुके थे।

ग्रामीणों और पंचायत ने स्थानीय नेताओं और सरकार से मदद की बड़ी उम्मीदें लगाई थीं। लेकिन उन्हें धरातल पर कुछ नहीं मिला, मिले तो सिर्फ खोखले वादे और कागजी कार्रवाई। सरकार और प्रशासन ने इस संकट के समय में अपने हाथ खड़े कर दिए थे।

“सरकार ₹10 देती है तो पहले 100 जगह साइन लेती है। इस कागज को वहां ले जाओ, उस कागज को वहां ले जाओ। सरकार भी ऐसा काम नहीं कर सकती जो बाबा ने किया है।” — ग्राम सरपंच प्रतिनिधि

संत रामपाल जी महाराज से गुहार और त्वरित सहायता

जब हर तरफ से निराशा मिली, तब ग्रामीणों को उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दी। ग्रामीणों ने पड़ोसी गांव में संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाए जा रहे लोक-कल्याणकारी कार्यों और सेवा को देखा था। इससे प्रेरित होकर सुरौता गांव के लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के समक्ष अपनी अर्जी लगाई।

संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी देरी के गांव की इस विकट भौगोलिक स्थिति को समझा और वहां बिजली की भारी समस्या को देखते हुए तुरंत अभूतपूर्व सहायता सामग्री भिजवाई। उन्होंने ग्रामीणों की मांग से भी बढ़कर संसाधन उपलब्ध कराए।

राहत सामग्री और वित्तीय सहायता का विवरण

विवरणसंत रामपाल जी महाराज द्वारा प्रदान की गई सहायता
मुख्य मशीनरी3 ट्रैक्टर कपलिंग सेट, 2 बड़ी मोटरें (15 एचपी और 20 एचपी)
पाइपलाइन14,100 फुट लंबे और 8 इंच चौड़े पाइप
अतिरिक्त खर्चजनरेटर का पूरा किराया और ट्रैक्टर-जनरेटर में लगने वाला सारा डीजल


सबसे बड़ी और संवेदनशील बात यह थी कि संत रामपाल जी महाराज ने आदेश दिया कि इस पूरे कार्य में लगने वाले जनरेटर का किराया और डीजल का पूरा खर्च वह खुद वहन करेंगे। उन्होंने किसानों के हर वित्तीय खर्च को अपने सिर ले लिया, ताकि गरीब किसानों पर एक रुपये का भी बोझ न पड़े।

धरातल पर चमत्कारिक बदलाव और आर्थिक प्रभाव

संत रामपाल जी महाराज ने इन मशीनों और संसाधनों के माध्यम से दिन-रात काम करवाकर सुरौता गांव की जमीन को जलभराव से 100% मुक्त करने का मार्ग प्रशस्त किया।

  • 70% भूमि पर सफल बुवाई: उनके इस महान सहयोग से गांव की लगभग 70% से अधिक जलमग्न भूमि पूरी तरह सूख गई और वहां खेती संभव हो सकी।
  • लहलहाती फसलें: आज उन खेतों में गेहूं की शानदार फसल लहलहा रही है, जहां कभी 6 फीट तक पानी भरा रहता था।
  • करोड़ों का मुनाफा: ग्रामीणों और ग्राम पंचायत का आकलन है कि इस बार सुरौता के खेतों से 5 से 6 करोड़ रुपये की भारी पैदावार होगी, जो कुछ समय पहले तक एक असंभव सपना लग रहा था।

गदगद ग्रामवासी: “हमारे लिए तो वह भगवान हैं”

मदद मिलने के बाद पूरे सुरौता गांव में आज खुशी और उत्सव का माहौल है। गांव के कोने-कोने से संत रामपाल जी महाराज के लिए दुआएं और जयकारे गूंज रहे हैं। सुरौता गांव के किसानों के लिए संत रामपाल जी महाराज आज किसी मसीहा या साक्षात भगवान से कम नहीं हैं। जिस प्रशासन ने कागजी कार्यवाहियों में किसानों को उलझाए रखा, वहीं संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी स्वार्थ के करोड़ों रुपये की मदद सीधे धरातल पर उतार दी।

इस असीम कृपा से भावविभोर होकर ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज के पावन स्वरूप का फूल-मालाओं और अपनी पारंपरिक राजस्थानी शान ‘पगड़ी’ भेंट करके ऐतिहासिक स्वागत किया। सुरौता गांव के लहलहाते खेत आज पूरी दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि निस्वार्थ सेवा केवल भाषणों में नहीं, बल्कि संकट के समय किसान के आंसू पोंछने में होती है।

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