राजस्थान के डीग जिले के सुरौता गांव में संकटमोचक बने संत रामपाल जी महाराज: 3000 बीघा भूमि को मिली बाढ़ से मुक्ति

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राजस्थान के भरतपुर संभाग में स्थित डीग जिले की कुम्हेर तहसील का सुरौता गांव हाल के महीनों में एक ऐसी त्रासदी का गवाह बना, जिसने किसानों की कमर तोड़ दी थी। लगभग 3000 बीघा उपजाऊ भूमि महीनों से जलमग्न थी, जिससे न केवल वर्तमान फसलें नष्ट हुईं, बल्कि अगली फसल की बुवाई पर भी संकट के बादल मंडराने लगे थे। जब सरकारी तंत्र और राजनेताओं के खोखले वादों से थककर ग्रामीण पूरी तरह निराश हो चुके थे, तब जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ उनके लिए जीवनदान बनकर आई।

यह केवल भौतिक सहायता नहीं थी, बल्कि एक पूर्ण संत द्वारा मानवता के प्रति निभाया गया वह उत्तरदायित्व था, जो समाज में गिरते विश्वास को पुनः जीवित करता है।

सुरौता गांव के भयावह हालात

बाढ़ के पानी ने सुरौता गांव और लखन ग्राम पंचायत की तस्वीर बदल दी थी। ग्रामीणों के अनुसार, गांव की करीब 3000 बीघा जमीन जलमग्न थी और 50% से ज्यादा खेतों में बुवाई का समय निकलता जा रहा था। किसान असहाय होकर अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत को बर्बाद होते देख रहे थे। चारे की कमी के कारण पशुधन संकट में था और ग्रामीणों के पास जीवनयापन का कोई मार्ग शेष नहीं बचा था। प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी धरातल पर कोई सहायता नहीं पहुंची, जिससे किसानों में गहरा मानसिक तनाव और हताशा व्याप्त थी।

ग्रामीणों द्वारा की गई मार्मिक पुकार

जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी, तब सुरौता गांव की पंचायत ने पड़ोसी गांवों में संत रामपाल जी महाराज द्वारा किए जा रहे परोपकारी कार्यों को देखा। उन्होंने अपनी अंतिम आशा के रूप में संत रामपाल जी महाराज के ट्रस्ट कार्यालय में एक मार्मिक प्रार्थना भेजी। ग्रामीणों की मांगें इस प्रकार थीं:

संत रामपाल जी महाराज ने डीग राजस्थान के सुरौता गांव ने दिलाई बाढ़ से राहत
  • 15 HP और 20 HP की दो शक्तिशाली मोटरें
  • 1400 फुट लंबी और 8 इंच चौड़ी पाइपलाइन
  • ट्रैक्टर कपलिंग सेट (बिजली की कमी को देखते हुए)
  • पानी निकासी के लिए आवश्यक समस्त तकनीकी उपकरण

संत रामपाल जी महाराज द्वारा अभूतपूर्व सहायता

ग्रामीणों की प्रार्थना पर संत रामपाल जी महाराज ने अपनी असीम दया दिखाते हुए बिना किसी विलंब के राहत सामग्री भेजने का आदेश दिया। मात्र कुछ ही दिनों में राहत सामग्री का काफिला गांव पहुंचा, जिसमें शामिल था:

  • 15 HP और 20 HP की दो हैवी-ड्यूटी मोटरें
  • 1400 फुट उच्च गुणवत्ता वाले 8 इंच के ड्रेनेज पाइप
  • तीन ट्रैक्टर कपलिंग सेट (4/4 पंखे)
  • स्टार्टर, केबल, सुंडिया निप्पल, नट-बोल्ट और समस्त फिटिंग सामग्री

यह समस्त सहायता पूर्णतः निःशुल्क और स्थायी रूप से ग्राम पंचायत को सौंपी गई, ताकि भविष्य में भी गांव स्वयं अपनी सुरक्षा कर सके।

जनरेटर और डीजल की विशेष व्यवस्था: एक अनोखा उपहार

सुरौता गांव में बिजली की भारी समस्या को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज ने एक ऐसी घोषणा की जिसने किसानों के हृदय जीत लिए। आमतौर पर संस्थाएं केवल मशीनें देती हैं, लेकिन संत जी ने आदेश दिया कि मशीनों को चलाने के लिए जनरेटर का किराया और उसमें लगने वाला समस्त डीजल भी ट्रस्ट द्वारा ही वहन किया जाएगा। यह सहायता किसी पिता द्वारा अपने बच्चों के दुख को हल्का करने के समान थी। किसानों को एक कील तक बाहर से खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जिससे उनकी आर्थिक बोझ पूरी तरह समाप्त हो गया।

यह भी पढ़ें: जब 3 साल से डूबा था कुम्हा (राजस्थान), तब सतगुरु रामपाल जी महाराज बने जीवनदाता

ग्रामीणों की आवाज़ और भावपूर्ण आभार

राहत सामग्री पाकर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के चेहरे पर खुशी और श्रद्धा के भाव साफ देखे जा सकते थे। उनके कथन निम्नलिखित हैं:

  • सरपंच प्रतिनिधि बलवान सिंह: “आप जो किसानों के हित में कार्य कर रहे हैं, वह अत्यंत सराहनीय है। सरकारें नहीं सुनतीं, लेकिन संत जी ने करोड़ों रुपये खर्च कर समाज की रक्षा की है।”
  • एक स्थानीय किसान: “यह तो किसानों के लिए भगवान की तरह उतरकर आए हैं। जो किसानों के हित में कार्य करे, उससे बड़ा भगवान कौन होगा?”
  • एक अन्य ग्रामीण: “मेरे पास 15 बीघा जमीन है, जिसमें से 12 बीघा में पानी भरा था। अब संत रामपाल जी की कृपा से हम गेहूं और चावल की बुवाई कर सकेंगे जिससे हमारे परिवार का भरण-पोषण होगा।”
  • ग्रामीण भीम सिंह: “आपत्ति में जो काम आए, वही भगवान है। संत रामपाल जी ने अंधे को दो आंखें देने जैसा काम किया है।”

जवाबदेही और पूर्ण पारदर्शिता

संत रामपाल जी महाराज की अन्नपूर्णा मुहिम केवल दान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक अनुशासित और पारदर्शी प्रणाली है। सामग्री के साथ भेजे गए पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि पानी निकासी का कार्य युद्ध स्तर पर किया जाए ताकि अगली फसल की बिजाई समय पर हो सके। पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु ड्रोन के माध्यम से तीन चरणों में रिकॉर्डिंग का नियम बनाया गया है:

  • पानी निकालने से पहले की स्थिति।
  • जल निकासी के बाद सूखे खेत।
  • फसल के लहलहाने के बाद की स्थिति।

इन वीडियो को सतलोक आश्रमों में दिखाया जाता है ताकि दानकर्ताओं को विश्वास रहे कि उनकी राशि का सदुपयोग हो रहा है।

संत रामपाल जी महाराज ही हैं सच्चे विश्व उद्धारक

आज जब पूरा विश्व आपदाओं और अनिश्चितता से घिरा है, तब जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज एक ‘किसान मसीहा’ और ‘विश्व उद्धारक’ के रूप में उभरे हैं। उनकी अन्नपूर्णा मुहिम ने अब तक 400 से अधिक गांवों को विनाश से बचाया है। वे न केवल भौतिक दुखों को दूर कर रहे हैं, बल्कि परमेश्वर कबीर साहिब का सच्चा भक्ति मार्ग प्रदान कर आत्माओं का मोक्ष मार्ग भी प्रशस्त कर रहे हैं। सुरौता गांव की यह राहत कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि एक पूर्ण संत की शक्ति और करुणा के सामने असंभव भी संभव हो जाता है।

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