​जब 3 साल से डूबा था कुम्हा (राजस्थान), तब सतगुरु रामपाल जी महाराज बने जीवनदाता

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​राजस्थान के डीग जिले की कुम्हेर तहसील का गाँव कुम्हा सरकारी तंत्र की नाकामी और एक संत की दया का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। पिछले 3-4 सालों से इस गाँव की करीब 400 से 500 बीघा उपजाऊ जमीन पानी में डूबी हुई थी। हालात इतने बदतर थे कि गाँव के युवा खेती छोड़कर शहरों में मजदूरी करने को मजबूर हो गए थे। बुजुर्गों का कहना था, “आज तक हमें सिर्फ नेताओं के हवाई वादे मिले, धरातल पर हमें विनाश के सिवा कुछ नहीं मिला।”

​सतगुरु के दरबार में आखिरी उम्मीद

​पड़ोसी गाँव ऐचवाड़ा में मिली मदद को देखकर कुम्हा के ग्रामीणों ने सतगुरु रामपाल जी महाराज के चरणों में अर्जी लगाई। उन्हें उम्मीद थी कि शायद यहाँ उनकी सुनवाई हो जाए। और हुआ भी वही—जो सरकारें सालों में नहीं कर सकीं, वो सतगुरु के दरबार में पलों में हो गया।

​3 दिन में ऐतिहासिक राहत: 23,000 फीट पाइप

​प्रार्थना पत्र देने के मात्र 3 दिन के भीतर राहत सामग्री का एक विशाल काफिला कुम्हा पहुंचा। यह मदद सामान्य नहीं थी, यह एक सम्पूर्ण पैकेज था:

  • ​23,000 फीट पाइप: ताकि पानी को दूर नहर में डाला जा सके।
  • ​8 विशाल मोटरें (10 एचपी): जो सालों से जमा पानी को खींच सकें।
  • ​जनरेटर और डीजल: खेतों में बिजली नहीं थी, इसलिए सतगुरु जी ने जनरेटर भी भेजे। इतना ही नहीं, यह भी आदेश दिया कि जनरेटर का किराया और डीजल का पूरा खर्च भी संस्था ही उठाएगी।

​ग्रामीणों के आँसू और कृतज्ञता

​गाँव के एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा:

​”नेताओं के चक्कर काट-काटकर हम थक गए थे। लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने 3 दिन में वो कर दिखाया जो 3 साल में नहीं हुआ। वे हमारे लिए भगवान से कम नहीं हैं।”

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​एक अन्य किसान ने कहा:

​”मुसीबत में जो हाथ थाम ले, वही असली भगवान है। नेता वोट के लिए आते हैं, लेकिन महाराज जी जीवन देने आए हैं।”

​अनुशासन और अन्नपूर्णा मुहिम

​राहत सामग्री के साथ अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया गया। सतलोक आश्रम की ओर से निवेदन किया गया कि 8-10 दिन के अंदर पानी निकालकर रबी की फसल की बुवाई की जाए। पंचायत ने लिखित में यह जिम्मेदारी ली। यह मदद संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है कि कलयुग में सतयुग जैसी व्यवस्था लाई जाए, जहाँ कोई दुखी न हो, कोई भूखा न रहे।

​मानवता की सच्ची सेवा

​कुम्हा की यह घटना साबित करती है कि संत रामपाल जी महाराज केवल सत्संग नहीं करते, वे मानवता का उद्धार करते हैं। जहाँ प्रशासन के हाथ खड़े हो गए थे, वहाँ सतगुरु जी का आशीर्वाद ढाल बनकर खड़ा हो गया। आज गाँव में मशीनें चल रही हैं और पानी घट रहा है।

​हर धड़कन में बसी सतगुरु की दया: एक अमिट छाप

​कुम्हा गाँव का यह कायाकल्प केवल सूखी ज़मीन की कहानी नहीं है, यह विश्वास की वापसी की कहानी है। संत रामपाल जी महाराज ने न केवल खेतों से पानी निकाला है, बल्कि सैकड़ों परिवारों के दिलों से निराशा को भी निकाल फेंका है। आज गाँव का बच्चा-बच्चा एक ही बात कह रहा है, “दुनिया हमें भूल गई थी, लेकिन हमारे परमपिता ने हमें नहीं भुलाया।” जल्द ही यहाँ लहलहाने वाली फसलें सतगुरु रामपाल जी महाराज की असीम कृपा की गवाही देंगी।

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