हरियाणा प्रदेश के जिला चरखी दादरी की तहसील चरखी दादरी के अंतर्गत स्थित गांव नौसवा के निवासी लंबे समय से दो गंभीर जल समस्याओं से जूझ रहे थे। गांव की कुल 700 एकड़ कृषि भूमि में से लगभग 200 एकड़ भूमि पिछले 3 से 4 वर्षों से निरंतर बरसाती जल भराव की चपेट में थी। खेतों में पानी जमा रहने के कारण कपास सहित अन्य फसलें पूरी तरह से नष्ट हो रही थीं। पूर्व में गांव नौसवा की पहचान दादरी मंडी में प्रति एकड़ 14 क्विंटल तक कपास उत्पादन के लिए थी, परंतु जल भराव के कारण यह उत्पादन शून्य पर पहुंच गया।
गांव के चारों तरफ 6 नई लिंक सड़कों के निर्माण के उपरांत बरसाती पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया और आसपास के क्षेत्रों का जल सीधे खेतों में एकत्र होने लगा। इसके कारण गांव का मुख्य तालाब सूखा रहता था और पानी खेतों में रुककर फसलों को जला देता था। दो फसलें न होने से किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई तथा पशुधन के चारे व रखरखाव पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
पेजजल की स्थिति भी अत्यंत विकट थी। गांव का भूमिगत जल अत्यधिक खारा था, जिसका टीडीएस (TDS) स्तर 550 से 850 तक दर्ज किया गया। गांव के जलघर में बने दो बोरवेलों का पानी हरे रंग का और बदबूदार था, जो इंसानों और पशुओं दोनों के पीने, नहाने या कपड़े धोने के योग्य नहीं था। जलघर की डिग्गी 10 से 12 वर्ष पूर्व निर्मित की गई थी, परंतु नहरी पानी की आपूर्ति न होने से वह अनुपयोगी सिद्ध हो रही थी। खारे पानी के सेवन से 2 से 3 वर्ष पूर्व गांव में पीलिया फैलने के कारण 3 से 4 ग्रामीणों की मृत्यु हो गई थी तथा लोग त्वचा संबंधी बीमारियों से ग्रस्त थे।
घरों में लगाए गए आरओ (RO) सिस्टम का फिल्टर खारे पानी के कारण वर्ष में तीन बार खराब हो जाता था, जिसकी प्रत्येक सर्विस पर 4,000 रुपये का व्यय आता था। वार्षिक 12,000 रुपये का खर्च नए आरओ की 10,000 रुपये की कीमत से अधिक था। पेयजल के लिए गांव की महिलाएं रात के समय पड़ोसी गांव मकड़ाना की ओर जाने वाली 11 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से मटके लेकर पानी भरने को मजबूर थीं।
सरकारी विफलता और ग्रामीणों के प्रयास
- ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने जल निकासी के लिए ड्रेन बनवाने और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने हेतु 3 से 3.5 वर्षों तक निरंतर प्रयास किए।
- सरपंच प्रतिनिधि नसीब कुमार ने प्रशासनिक अधिकारियों, विधायकों, मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक 50 से अधिक बार प्रार्थना पत्र भेजे, परंतु कोई समाधान नहीं हुआ।
संत रामपाल जी महाराज की त्वरित कार्रवाई और तकनीकी सर्वेक्षण
प्रशासनिक स्तर पर समाधान न होने पर ग्राम पंचायत नौसवा के प्रतिनिधि मंडल ने सायं 4:00 बजे संत रामपाल जी महाराज के समक्ष उपस्थित होकर आवेदन प्रस्तुत किया। संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज़ 2, शुद्ध पेयजल सेवा अभियान और पशुधन बचाओ शुद्ध जल पिलाओ अभियान के तहत तत्काल सर्वेक्षण टीम भेजने का आदेश जारी किया।
प्रार्थना प्रस्तुत करने के 24 घंटे के भीतर सर्वेक्षण टीम गांव नौसवा पहुंची। टीम ने गूगल मैप्स (Google Maps) और जमीनी निरीक्षण के माध्यम से खेतों के जल भराव और पेयजल आपूर्ति का विस्तृत सर्वेक्षण किया।
सर्वेक्षण टीम द्वारा निर्धारित तकनीकी मानक
- कृषि जल निकासी हेतु आवश्यकता: 200 एकड़ जलमग्न भूमि से पानी को गांव के सूखे तालाब तक पहुंचाने के लिए 6,000 फुट 8 इंची पाइपलाइन और 10 एचपी क्षमता की 3 मोटरों की आवश्यकता निर्धारित की गई।
- शुद्ध पेयजल हेतु आवश्यकता: गांव नौसवा से लगभग 4 किलोमीटर दूर जिला रेवाड़ी के गांव भाला के पास सरनाली फीडर (बड़ी नहर) के समीप 140 से 150 फीट की गहराई पर मीठा पानी चिन्हित किया गया। वहां से नौसवा जलघर तक पानी लाने के लिए 11,000 फुट 6 इंची पाइपलाइन, 150 फुट 10 इंची ट्यूबवेल बोर पाइप और 10 एचपी की 1 सबमर्सिबल मोटर की आवश्यकता तय हुई।
गांव नौसवा में उपलब्ध कराई गई सहायता सामग्री का विवरण
संत रामपाल जी महाराज ने सर्वेक्षण रिपोर्ट स्वीकृत करते हुए 48 घंटे के भीतर सभी आवश्यक उपकरण और सामग्री गांव नौसवा भिजवाने के निर्देश दिए। 8 से 10 ट्रकों के माध्यम से बिना किसी परिवहन शुल्क के संपूर्ण सामग्री गांव पहुंचाई गई।
वितरित सामग्री की सूची
- जल निकासी पाइपलाइन: कास्ता (Kasta) ब्रांड के 6,000 फुट 8 इंची पीवीसी पाइप।
- पेजजल आपूर्ति पाइपलाइन: कास्ता ब्रांड के 11,000 फुट 6 इंची पीवीसी पाइप।
- कुल पाइपलाइन लंबाई: 17,000 फुट।
- ट्यूबवेल बोर पाइप: 160 फुट (20-20 फीट के 8 पाइप) 10 इंची आकार के बोरवेल पाइप।
- विद्युत मोटरें: खेतों से जल निकासी के लिए 10 एचपी की 3 मोटरें तथा बोरवेल हेतु टैक्सो (Texmo) कंपनी की 10 एचपी सबमर्सिबल मोटर (ऑटोमैटिक स्टार्टर सहित)।
- सहायक सामग्री (एक्सेसरीज): एयर वाल्व, पीवीसी बैंड, पीवीसी पाइप, फेविकोल/सोल्यूशन, नट-बोल्ट, लोहे की जॉइंट प्लेटें, रबर पैकिंग, मोटर बांधने हेतु रस्सा, केबल तार और सुरक्षा टेप।
तकनीकी एवं संस्थागत निर्देश
- पाइपलाइन को भूमिगत दबाया जाएगा।
- पाइप बिछाते समय प्रत्येक जोड़ की तकनीकी जांच की जाएगी और पानी छोड़कर लीकेज का परीक्षण किया जाएगा।
- निर्धारित स्थानों पर एयर वाल्व लगाए जाएंगे।
- लीकेज न होने की पुष्टि के उपरांत ही पाइपों पर मिट्टी डाली जाएगी।
राहत सामग्री का आगमन, ग्रामीणों का अभिनंदन और प्रतिक्रियाएं
सहायता सामग्री से भरे ट्रकों का काफिला गांव नौसवा की सीमा पर पहुंचते ही उत्सव का माहौल बन गया। 100 से 200 की संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे एकत्रित हुए। सेवादारों और ग्रामीणों द्वारा मंगलाचरण किया गया। ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर काफिले का स्वागत किया और संत रामपाल जी महाराज के स्वरूप को आदरपूर्वक शीश पर धारण कर गांव में प्रवेश कराया। इस अवसर पर ग्रामीणों द्वारा मिठाइयां बांटी गईं।
ग्रामवासियों एवं प्रतिनिधियों के वक्तव्य
- सरपंच प्रतिनिधि नसीब कुमार: उन्होंने बताया कि 3.5 साल तक सरकार के चक्कर काटने के बाद भी जो काम नहीं हुआ, उसे संत रामपाल जी महाराज ने 48 घंटे के भीतर पूरा कर दिया।
- दीपक (सरकारी कर्मचारी व ग्रामीण): उन्होंने कहा कि इस पहल से गांव की 36 बिरादरी को लाभ मिलेगा और वर्षों पुरानी खारे पानी की समस्या समाप्त होगी।
- महिला ग्रामीण: एक वयोवृद्ध महिला ने बताया कि वे 45 से 70 वर्षों से खारा पानी पीने को मजबूर थीं, जिससे त्वचा रोग हो गए थे। अब मीठा पानी मिलने से गांव का स्वास्थ्य सुधरेगा।
- पप्पू एवं संजय (ग्रामीण): उन्होंने कहा कि नेताओं और अधिकारियों से केवल आश्वासन मिले थे, जबकि संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी भाड़े या शुल्क के 17,000 फीट पाइपलाइन उपलब्ध कराई।
सेवादारों का वक्तव्य एवं अन्य योजनाएं
सर्वेक्षण टीम के सेवादारों ने जानकारी दी कि संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज़ 2, शुद्ध पेयजल सेवा अभियान और पशुधन बचाओ शुद्ध जल पिलाओ अभियान के अंतर्गत अब तक हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान के चुरु जिले सहित 100 से अधिक गांवों में राहत कार्य पूर्ण कर लिया है। इसके अतिरिक्त, धनाने धाम पर फॉर्म भरने वाले किसानों को ढाई एकड़ भूमि तक के लिए खाद, बीज और दवाइयां संत रामपाल जी महाराज द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सामग्री वितरण और तकनीकी सर्वेक्षण का तुलनात्मक विवरण
| विषय / श्रेणी | जल भराव समस्या (कृषि) | शुद्ध पेयजल समस्या |
| प्रभावित क्षेत्र / दूरी | 200 एकड़ कृषि भूमि (कुल 700 एकड़ में से) | 4 किमी (गांव भाला से नौसवा तक) |
| समस्या की अवधि | 3 से 4 वर्ष | 40 से 70 वर्ष (दशकों पुराना संकट) |
| पंचायत द्वारा मांगी गई सामग्री | 5,000 फुट 8 इंची पाइप, 3 मोटरें | 13,000 फुट 6 इंची पाइप, 1 बोरवेल, 1 मोटर |
| सर्वेक्षण में निर्धारित सामग्री | 6,000 फुट 8 इंची पाइप, 3 मोटरें (10 HP) | 11,000 फुट 6 इंची पाइप, 150 फुट 10 इंची पाइप, 1 मोटर (10 HP) |
| संत रामपाल जी महाराज द्वारा स्वीकृत सामग्री | 6,000 फुट 8 इंची पाइप (कास्ता), 3 मोटरें (10 HP) | 11,000 फुट 6 इंची पाइप (कास्ता), 160 फुट 10 इंची पाइप, 1 सबमर्सिबल मोटर (टैक्सो 10 HP) |
| कुल उपलब्ध कराई गई एक्सेसरीज | एयर वाल्व, पीवीसी बैंड, फेविकोल, नट-बोल्ट, प्लेटें, रबर जैन, तार, रस्सा | ऑटोमैटिक स्टार्टर, केबल, रस्सा, टेप, नट-बोल्ट, फेविकोल, एयर वाल्व |
गांव नौसवा में जल संकट का निस्तारण और कृषि पुनर्बहाली
संत रामपाल जी महाराज ने अन्नपूर्णा मुहिम, किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज़ 2 और शुद्ध पेयजल सेवा अभियान के माध्यम से गांव नौसवा की दो प्रमुख समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया। 6,000 फुट 8 इंची पाइपलाइन और 3 विद्युत मोटरों की स्थापना से 200 एकड़ जलमग्न कृषि भूमि से पानी गांव के सूखे तालाब में पहुंचेगा, जिससे जल भराव समाप्त होगा और कपास तथा अन्य फसलों का उत्पादन पुनः प्रारंभ हो सकेगा।
वहीं, गांव भाला के पास सरनाली फीडर के समीप स्थापित बोरवेल तथा 11,000 फुट 6 इंची पाइपलाइन के माध्यम से गांव नौसवा के जलघर तक मीठा पेयजल पहुंचेगा। इससे ग्रामीणों को 850 टीडीएस वाले खारे पानी से मुक्ति मिलेगी, पीलिया व चर्म रोगों पर रोक लगेगी और पशुधन के लिए भी स्वच्छ जल सुलभ होगा। ग्राम पंचायत नौसवा को प्राप्त 17,000 फीट पाइपलाइन और संबंधित तकनीकी उपकरणों के माध्यम से गांव में जल प्रबंधन का कार्य पूर्ण किया जा रहा है।



