सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2020 HIndi): सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। सूर्य के चारों ओर ग्रह घूर्णन करते हैं। पृथ्वी का उपग्रह चन्द्रमा है। लगातार और अलग-अलग गति से घूर्णन के कारण आकाशीय खगोलीय घटना होतीं हैं। 21 जून वर्ष का सबसे बड़ा दिन होता है। आज 87 साल बाद वलयाकार सूर्यग्रहण है यानी चन्द्रमा सूर्य के 98 प्रतिशत भाग को ढक रहा है।

Solar Eclipse 2020: मुख्य बिंदु

  • वलयाकार सूर्य ग्रहण आज
  • सदी का दूसरा सबसे बड़ा ग्रहण
  • 87 साल बाद पड़ा यह सूर्यग्रहण
  • भारत के उत्तरी राज्य सूर्य ग्रहण का बेहतर नज़ारा देख पा रहे हैं
  • सोलर फिल्टर वाले चश्मे का प्रयोग उचित
  • सूर्यग्रहण से जुड़े सूतक काल पर विशेष विवेचना

21 जून सबसे बड़ा दिन क्यों?

पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने के साथ-साथ अपनी धुरी पर भी घूमती है। अपने अक्ष पर 23.5° झुके होने के कारण सूर्य की किरणें पृथ्वी पर हमेशा एक जैसी नहीं पड़ती हैं। 21 जून को सूर्य उत्तरी गोलार्ध से भारत के मध्य कर्क रेखा पर आता है और सूर्य की किरणें अधिक समय तक पृथ्वी पर पड़ती हैं। इस कारण 21 जून का दिन लम्बा दिन माना जाता है।

Solar Eclipse 2020 Hindi-सूर्य ग्रहण आज

आज वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण है। सूर्य एक चमकती अंगूठी की तरह लगता है जिसे रिंग ऑफ फायर भी कहते हैं। यह पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं है बल्कि आंशिक सूर्य ग्रहण है। इसे भारत के उत्तरी राज्यों में देखा गया। 21 जून यानी साल के सबसे बड़े दिन यह ग्रहण लग गया है। ग्रहण के कारण सूतक की मान्यता लोक वेद के अनुसार शाम तक मंदिर आदि बंद रहेंगे।

Solar Eclipse Hindi: किन स्थानों से दर्शन?

यह सूर्य ग्रहण भारत के उत्तरी राज्यों में विशेष रूप से और अन्य राज्यों में आंशिक रूप से दिखा। भारत समेत नेपाल, पाकिस्तान, चीन, अफ्रीका, कांगो, इथोपिया आदि देशों में दिखाई दे रहा है।

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6 घण्टे लम्बा ग्रहणकाल

आज का सूर्य ग्रहण जो 9 बजे से प्रारंभ हो चुका है वह लगभग 3 बजे तक प्रभाव में रहेगा। दोपहर 12 बजे पूर्ण सूर्यग्रहण दिखने की संभावना है। यह काफी लंबे समय तक शाम यानी 6 बजे तक रहेगा अतएव चर्चा का विषय है।

इससे पहले कब हुआ था वलयाकार सूर्य ग्रहण?

इस तरह का वलयाकार सूर्य ग्रहण 21 अगस्त 1933 को लगा था। इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 21 जून, 2020 को दिखाई दे रहा है। 21वीं सदी में 3 और सूर्यग्रहण लगेंगे जो क्रमशः 20 मार्च 2034, 17 फरवरी 2064 और 22 जून 2085 को आएगा।

Solar Eclipse 2020 Hindi-सूर्यग्रहण पर सावधानीयां

  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सूर्य ग्रहण को सीधा नग्न आंखों से न देखें। सूर्य से निकलती हुई हानिकारक किरणें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
  • किसी भी प्रकार के अन्य चश्मे से सूर्य ग्रहण को देखने से बचें। केवल सोलर फिल्टर चश्मे का प्रयोग करें।
  • बच्चों को यदि ग्रहण दिखा रहे हैं तो उन्हें भी सोलर फिल्टर वाले चश्मे से दिखाएं क्योंकि बच्चों की आंखें नाज़ुक होती हैं।
  • यदि चश्मा उपलब्ध नहीं है तो किसी भी स्थिति में सूर्यग्रहण न देखें।

Solar Eclipse 2020 Special-सूर्यग्रहण विशेष

ऐसे समय को सूतक काल कहते हैं और गर्भवती महिलाओं को इससे बचने की सलाह दी जाती है लेकिन यह एक आम दिवस है जिसमें खगोलीय घटना हो रही है। यह सूतक और उसके प्रभाव आदि मानना व्यर्थ है। क्यों व्यर्थ है? भगवान सदैव सबसे शक्तिशाली होते हैं। पर मंदिरों के पट बंद करके क्या वे कैद हो गए? क्या वे बाहर नहीं निकल पाएंगे? क्या वे केवल मंदिर में ही रहते हैं? नहीं। वास्तव में हमें बताया गया कि सभी भगवान बराबर हैं। स्वयं नकली धार्मिक गुरुओं ने ज्ञान न होने के कारण वास्तविक ज्ञान से अनजान रखा और ग्रहण के साथ अन्य अंध श्रद्धा वाली भक्ति जोड़ दी।

गीता अध्याय 15 के श्लोक 1 से 2 में उल्टे वृक्ष के माध्यम से बताया गया है कि अविनाशी परमात्मा अलग है जो विवश नहीं है, किसी के आश्रित नहीं है, किसी विधि विधान से बंधा नहीं है, सारी चीजें बदलने की सामर्थ्य रखता है। वे हैं कबीर साहेब। उसके बाद इस लोक का स्वामी क्षर पुरुष फिर अक्षर ब्रह्म, और फिर आते हैं तीन देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश। इस प्रकार की सृष्टि रचना है जो ग्रहण जैसी घटनाओं से पूरी तरह अप्रभावित है।

ग्रहण के कारण लोग सूतक और अशुभ समय मानते हैं। सनातन धर्म के आदि ग्रन्थ वेदों में कहीं भी इस अंध श्रद्धा का उल्लेख नहीं है। न ही भागवत गीता में है। गीता अध्याय 16 श्लोक 23 के अनुसार शास्त्र विरुद्ध आचरण करने वाले किसी गति को प्राप्त नहीं होते हैं। ग्रहण एक खगोलीय घटना है इसका भक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है। शास्त्रों को गहराई से समझने के लिए सन्त रामपाल जी महाराज के सत्संग साधना TV पर रात 7:30pm से अवश्य सुनें तथा “अंधश्रद्धा भक्ति खतरा ए जान” पुस्तक वेबसाइट से डाउनलोड करके पढ़ें।