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Surya Grahan 2022: 25 अक्टूबर को लग गया है पूर्ण सूर्य ग्रहण, कैसे पाएं जन्म मरण रूपी ग्रहण से मुक्ति?

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Last Updated on 25 October 2022, 4:00 PM IST | आपको बता दें कि इस वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर (Surya Grahan in Hindi 2022) को लगने जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार ये ग्रहण मार्गशीर्ष मास की अमावस्या को लगने जा रहा है। यह बात जान लें कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा एवं  इसका प्रभाव सभी लोगों पर पड़ेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले ही सूतक शुरू हो जाता है। जोकि सुबह 4 बजे से ही शुरू हो गया है। कहा जाता है कि सूतक में कुछ भी कार्य नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ये मान्यताएं गलत है। आइए जानते हैं इस वर्ष के आखिरी सूर्य ग्रहण से संबंधित पूर्ण जानकारी ।

Surya Grahan 2022 (सूर्य ग्रहण): मुख्य बिंदु

  • 2022 का आखिरी सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर यानि आज मंगलवार के दिन लग रहा है।
  • ग्रहण का सूतक काल सुबह 4 बजे से लग चुका है। 
  • ये सूर्य ग्रहण शाम 4 बजे शुरू हो जाएगा, जिसकी कुल अवधि 1 घंटे 19 मिनट की होगी।
  • ये सूर्य ग्रहण शाम 4:22 बजे से 5:42 मिनट पर समाप्त हो जाएगा।
  • इस वर्ष का यह आखिरी सूर्य ग्रहण भारत के अलग अलग हिस्सों से देखा जा सकेगा। 

4 दिसंबर को कहाँ और कब दिखेगा सूर्य ग्रहण (Surya Grahan in Hindi)?

दिवाली के बाद होने वाले सूर्य ग्रहण के कारण आज मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा कल मनाई जाएगी यथा लोकवेद के अनुसार ग्रहण पर पूजा पाठ वर्जित बताए जाते है। इस सूर्य ग्रहण को भारत के कई हिस्सों में रखा जा सकता है। भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे से 5 बजकर 42 मिनट तक देश के अलग अलग हिस्सों जैसे दिल्ली, जयपुर, भोपाल, रायपुर, इंदौर, उदयपुर, लखनऊ, कोलकाता, शिमला, देहरादून, मुंबई आदि जगहों पर देखा जा सकता है। हालांकि 4 बजने के बाद से सूर्य ग्रहण दिखने की अवधि किसी हिस्से में 5 बजकर 44 मिनट, कहीं 5 बजकर 55 मिनट, कहीं 5 बजकर 23 मिनट यानि अलग अलग समय पर होगी।

  • राजधानी दिल्ली में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 29 मिनट से शाम 5 बजकर 42 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • अमृतसर में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 19 मिनट से शाम 5 बजकर 48 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • भोपाल में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 49 मिनट से शाम 5 बजकर 46 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • जयपुर में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 31 मिनट से शाम 5 बजकर 49 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • मुंबई में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 49 मिनट से शाम 5 बजकर 09 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • रायपुर में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 51 मिनट से शाम 5 बजकर 31 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • इंदौर में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 42 मिनट से शाम 5 बजकर 52 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • उदयपुर में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 35 मिनट से शाम 6 बजकर 00 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • लुधियाना में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 22 मिनट से शाम 5 बजकर 44 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • शिमला में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 23 मिनट से शाम 5 बजकर 39 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • लखनऊ में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 36 मिनट से शाम 5 बजकर 29 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • कोलकाता में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 52 मिनट से शाम 5 बजकर 03 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • चेन्नई में सूर्यग्रहण शाम 5 बजकर 14 मिनट से शाम 5 बजकर 44 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • बैंगलुरु में सूर्यग्रहण शाम 5 बजकर 12 मिनट से शाम 5 बजकर 55 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • पटना में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 42 मिनट से शाम 5 बजकर 23 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • गांधीनगर में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 137 मिनट से शाम 6 बजकर 05 मिनट तक देखा जा सकेगा।
  • देहरादून में सूर्यग्रहण शाम 4 बजकर 26 मिनट से शाम 5 बजकर 36 मिनट तक देखा जा सकेगा।

सूर्यग्रहण (Solar Eclipse 2022) पर बरतें ये सावधानियां

सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है इसे आध्यात्मिक/ धार्मिक नहीं वैज्ञानिक तरीके से देखना चाहिए। 

  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सूर्य ग्रहण को सीधा नग्न आंखों से न देखें। सूर्य से निकलती हुई हानिकारक किरणें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
  • किसी भी प्रकार के अन्य चश्मे से सूर्य ग्रहण को देखने से बचें। केवल सोलर फिल्टर चश्मे का प्रयोग करें।
  • बच्चों को यदि ग्रहण दिखा रहे हैं तो उन्हें भी सोलर फिल्टर वाले चश्मे से दिखाएं क्योंकि बच्चों की आंखें नाज़ुक होती हैं।
  • यदि चश्मा उपलब्ध नहीं है तो किसी भी स्थिति में सूर्यग्रहण न देखें।

Solar Eclipse 2022 (Surya Grahan): सूर्य ग्रहण पर सूतक काल व्यर्थ परंपरा 

ऐसे समय को सूतक काल कहते हैं और गर्भवती महिलाओं को इससे बचने की सलाह दी जाती है लेकिन यह एक आम दिवस है जिसमें खगोलीय घटना हो रही है। सूतक और उसके प्रभाव आदि मानना व्यर्थ है। इन दिनों मंदिर के पट बंद कर दिए जाते है। किसी भी प्रकार की पूजा पाठ एवं देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करना भी वर्जित माना जाता है।

Read in English | Solar Eclipse: Know the Guaranteed Solution to the Harmful Effects of Surya Grahan

लेकिन भगवान सदैव सबसे शक्तिशाली होते हैं और मंदिरों के पट बंद करके क्या वे कैद हो गए? क्या वे बाहर नहीं निकल पाएंगे? क्या वे केवल मंदिर में ही रहते हैं? नहीं। नकली धार्मिक गुरुओं ने ज्ञान न होने के कारण हमे वास्तविक ज्ञान से अनजान रखा और ग्रहण के साथ अन्य अंध श्रद्धा वाली भक्ति जोड़ दी।

शास्त्र विरुद्ध आचरण करने वाले किसी भी गति को प्राप्त नहीं होते 

गीता अध्याय 15 के श्लोक 1 से 2 में उल्टे वृक्ष के माध्यम से बताया गया है कि अविनाशी परमात्मा अलग है जो विवश नहीं है, किसी के आश्रित नहीं है, किसी विधि विधान से बंधा नहीं है, सारी चीजें बदलने का सामर्थ्य रखता है। वे अविनाशी परमात्मा कबीर परमेश्वर है। उनके बाद इस लोक का स्वामी क्षर पुरुष फिर अक्षर ब्रह्म, और फिर आते हैं तीन देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश। इस प्रकार की सृष्टि रचना है जो ग्रहण जैसी घटनाओं से पूरी तरह अप्रभावित है। ग्रहण एक खगोलीय घटना है इसका भक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है। ग्रहण के कारण लोग सूतक और अशुभ समय मानते हैं। सनातन धर्म के आदि ग्रन्थ वेदों में कहीं भी इस अंध श्रद्धा का उल्लेख नहीं है। न ही भागवत गीता में है। गीता अध्याय 16 श्लोक 23 के अनुसार शास्त्र विरुद्ध आचरण करने वाले किसी गति को प्राप्त नहीं होते हैं। 

सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2022) से जुड़ी वर्जनाएँ और सतभक्ति

सूर्य-ग्रहण (Surya Grahan 2022) से बहुत सी वर्जनाएँ जुड़ी हुई हैं जैसे कई कार्यों पर रोक लगना, सूतक मानना, बाहर न आना जाना आदि। ये सभी मान्यताएँ केवल मान्यताएँ ही हैं और ग्रहण एक खगोलीय घटना है। वास्तविक जीवन में व्यक्ति अपने कर्मफल भोगता और उसके ही कारण उसके जीवन में सुख, दुख, बीमारियाँ आतीं हैं। चूँकि ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना है, इसे ज्योतिष भिन्न भिन्न राशियों और उन पर प्रभाव से भी जोड़कर देखते हैं। सतभक्ति सभी प्रकार के ग्रहण चाहे वो जीवन में हों या भाग्य में, से बचाती है।

पूर्ण परमेश्वर सच्चे साधक की रक्षा स्वयं करता है। पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं इस बात की शास्त्र गवाही देते हैं। इस लोक में सबकुछ फना अर्थात नाशवान है। राजा, गांव, शहर, जीव-जंतु, वन, दरिया सब नाशवान है। शिवजी का कैलाश पर्वत तक नाशवान है। यह सब कृत्रिम संसार सब झूठ है। अतः तत्वदर्शी संत  रामपाल जी महाराज से नामदीक्षा लेकर श्वांसों का स्मरण करके अविनाशी परमेश्वर की भक्ति करें।

गरीब, दृष्टि पड़े सो फना है, धर अम्बर कैलाश।

कृत्रिम बाजी झूठ है, सुरति समोवो श्वास ||

संत रामपाल जी महाराज से नामदीक्षा लेकर कष्ट रूपी ग्रहणों से पाएं मुक्ति 

जीवन के सभी कष्ट तीन ताप से जुड़े होते हैं और तीन ताप एक पूर्ण परमात्मा के अतिरिक्त कोई ख़त्म नहीं कर सकता हैं। चाहे वह कष्ट अध्यात्मिक हो, भौतिक हो या शारीरिक केवल सत्य भक्ति से ही ख़त्म हो सकते हैं। वर्तमान में एकमात्र तत्वदर्शी संत जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज हैं उनसे नाम दीक्षा लेकर अपने हर तरह के असाध्य कष्टों का निवारण करवाएं एवं भक्ति करके मोक्ष का रास्ता चुनें। यह समय विनाशकारी समय है और बिना तत्वदर्शी संत की शरण के जीवन, बिना पानी के कुएं की भाँति है। इस समय तत्वदर्शी संत की शरण में रहकर मर्यादा में भक्ति करने वाले ही मोक्ष प्राप्त कर सकेंगे। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें पुस्तक “ज्ञान गंगा और देखें सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल।

FAQ about Surya Grahan 2022 [Hindi]

सूर्य ग्रहण 2022 कब है? 

सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर 2022 को है।

सूर्य ग्रहण का सूतक काल भारत में कब से प्रारंभ है।

सूर्य ग्रहण का सूतक काल लोक वेद के अनुसार  बनाई व्यर्थ मान्यता है क्योंकि इसका कोई धार्मिक या आध्यात्मिक महत्व नहीं होता है, सुबह 4 बजे से है।

सूर्य ग्रहण कितने बजे से दिखेगा?

सूर्य ग्रहण भारत में भारतीय समयानुसार शाम 4: 22 बजे से शाम 5 :42 तक रखा जा सकेगा।

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