हिसार, हरियाणा – संत रामपाल जी महाराज ने हिसार जिले के सरसोद गांव के किसानों को एक बड़े आर्थिक संकट से उबार लिया है। उन्होंने गांव में जलभराव की गंभीर समस्या का तत्काल समाधान कर न केवल फसलों को नष्ट होने से बचाया, बल्कि क्षेत्र में ऐतिहासिक बम्पर पैदावार भी सुनिश्चित की।
संकट में डूबा सरसोद गांव
सरसोद गांव में जलभराव के कारण कृषि व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की कगार पर थी। खेतों में पानी भरे होने के कारण किसानों को डर था कि इस बार गेहूं की पैदावार घटकर मात्र 35 से 50 मन (प्रति एकड़) रह जाएगी। लाखों रुपये के नुकसान और कर्ज के डर से पूरा गांव बेहद निराश था। किसानों को इस संकट से निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था।
पंचायत ने लगाई मदद की गुहार
इस विकट परिस्थिति में गांव के गणमान्य व्यक्तियों ने संत रामपाल जी महाराज की जनकल्याणकारी मुहिम के बारे में जाना। इसके बाद, 55 वर्षीय श्री सुरेश कुमार के नेतृत्व में 7-8 ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल सीधे संत रामपाल जी महाराज से मिलने पहुंचा। उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए खेतों से पानी निकालने के लिए आवश्यक संसाधनों की गुहार लगाई।
संत रामपाल जी महाराज का त्वरित और ठोस निर्णय
ग्रामीणों की प्रार्थना पर संत रामपाल जी महाराज ने बिना किसी देरी के तुरंत सहायता भेजने का आदेश दिया। उन्होंने गांव के संकट को दूर करने के लिए निम्नलिखित बुनियादी ढांचा प्रदान किया:
- शक्तिशाली वॉटर मोटर: खेतों से भारी मात्रा में पानी खींचने के लिए।
- ड्रेनेज पाइप: पानी को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए।
- निर्बाध बिजली आपूर्ति: उन्होंने मशीनों को बिना रुके चलाने के लिए पूरी बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित की।
उन्होंने बिना किसी प्रशासनिक देरी के यह सारी मदद इतनी तेजी से गांव पहुंचाई कि किसानों ने तुरंत जल निकासी का काम शुरू कर दिया।
“मैंने अपनी 55 साल की उम्र में ऐसा संत कभी नहीं देखा, जो गरीब किसानों को इतना गले लगाए और इस स्तर पर उतरकर व्यावहारिक मदद करे।” – श्री सुरेश कुमार, ग्रामीण, सरसोद
परिणाम: 40 मन की जगह 70 मन रिकॉर्ड पैदावार
संत रामपाल जी महाराज के इस प्रयास का असर बेहद चमत्कारी रहा। खेतों से पानी पूरी तरह साफ हो गया, जिससे किसानों की दोनों फसलें सुरक्षित हो गईं। जिस जमीन पर किसान उम्मीद खो चुके थे, वहां प्रति एकड़ 70 मन गेहूं की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार हुई। किसानों की आर्थिक स्थिति सुधर गई और पूरे गांव का नुकसान मुनाफे में बदल गया।
ग्रामीणों को मिला आत्मीय स्नेह और आश्वासन
मुलाकात के दौरान संत रामपाल जी महाराज ने गांव से आए प्रत्येक व्यक्ति को गले लगाकर अपने बच्चों जैसा आत्मीय प्यार दिया। ग्रामीणों ने उनके चरणों में पुष्प अर्पित कर गहरी कृतज्ञता जताई।
उन्होंने ग्रामीणों को आशीर्वाद देते हुए कहा, “आगे भी कोई समस्या आए, तो हमें बताना, हम सेवा करेंगे।” इस अपनत्व को पाकर लौट रहे ग्रामीणों के चेहरों पर एक अलग ही रौनक और खुशी थी।
संत रामपाल जी द्वारा संचालित अन्नपूर्णा मुहिम
आज सरसोद गांव का बच्चा-बच्चा संत रामपाल जी महाराज का जयघोष कर रहा है। उन्होंने संकट के समय सीधे कमान संभालकर, त्वरित संसाधन उपलब्ध कराकर और किसानों को संबल देकर यह साबित कर दिया है कि वे समाज के सच्चे संरक्षक और मसीहा हैं। यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह उस बड़ी मुहिम का हिस्सा है जिसे संत रामपाल जी महाराज अपने मार्गदर्शन में चला रहे हैं!



