हरियाणा के रोहतक जिले की लाखन माजरा तहसील के अंतर्गत आने वाले गाँव चांदी में दशकों से पसरा जल संकट अब इतिहास बन चुका है। करीब 3,000 लोगों की आबादी वाला यह गाँव कई दशकों से खारे पानी और भीषण जल संकट की त्रासदी झेल रहा था। महिलाओं के सिर पर रखे मटके, 2 से 2.5 किलोमीटर दूर से पानी ढोते युवा, और खारे पानी से बीमार होते बुजुर्ग—यह इस गाँव की रोजमर्रा की नियति बन चुकी थी।
लेकिन जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के द्वारा चलाई गई अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत ‘शुद्ध पेयजल सेवा अभियान’ के तहत गाँव चांदी को न सिर्फ मीठा पानी मिला, बल्कि गाँव का सदियों पुराना दर्द भी हमेशा- हमेशा के लिए मिट गया।
25–30 सालों का दर्द, खारा पानी और दर-दर भटकते ग्रामीण
गाँव चांदी में भूजल का टीडीएस (TDS) इतना अधिक था कि गाँव का पानी पीने लायक नहीं था। सरकारी सप्लाई का पानी भी खारा आता था और कई बार तो 3 से 4 दिनों के अंतराल पर ही पानी पहुँच पाता था। गाँव के पुराने कुँए और नलकूप सूख चुके थे या खराब हो चुके थे।
पीने के मीठे पानी के लिए ग्रामीणों को पास के गाँव जैसे घरौठी, सीढ़ी और इंद्रगढ़ जाना पड़ता था। जिसके घर में मोटरसाइकिल, साइकिल या गाड़ी होती, वह तो किसी तरह 2-3 किलोमीटर दूर से पानी ले आता, लेकिन गरीब परिवारों की माताओं और बहनों को तपती धूप में सिर पर बर्तन रखकर मीलों पैदल चलना पड़ता था।
खारे पानी के इस्तेमाल से लोगों को पेट, त्वचा और शरीर में गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा था। घर-घर में पानी लाने को लेकर कलह और तनाव का माहौल रहता था। बच्चे स्कूल जाने से लेट हो जाते थे और जलसंकट के चलते उनकी शिक्षा भी प्रभावित होती थी। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों के कई चक्कर लगाए, लेकिन कहीं से कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।
24 घंटे में सुनी गई पुकार: संत रामपाल जी महाराज जी के आश्रम में अर्जी और त्वरित कार्रवाई
जब चारों तरफ से निराशा हाथ लगी, तब गाँव चांदी की सरपंच श्रीमती संतोष देवी और अन्य वरिष्ठ ग्रामीण संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा संचालित सतलोक आश्रम श्री धनाना धाम पहुँचे। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज जी के चरणों में अपनी व्यथा रखी और बताया कि किस प्रकार पूरा गाँव पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहा है। सरपंच संतोष देवी ने खुले दिल से पहल करते हुए नहर के समीप अपनी निजी कृषि भूमि बोरवेल लगाने के लिए समर्पित कर दी।
ग्रामीणों की इस अर्जी पर संत रामपाल जी महाराज ने अपने शिष्यों को गाँव वालों की सहायता करने का आदेश किया। अर्जी लगने के मात्र 22 से 24 घंटों के भीतर संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशानुसार सर्वे टीम, खुदाई की भारी मशीनें, बोरिंग उपकरण और सेवादारों का पूरा काफिला गाँव चांदी पहुँच गया ।
राहत कार्य का तकनीकी और धरातलीय विवरण
संत रामपाल जी महाराज के आदेशानुसार युद्धस्तर पर निर्माण कार्य शुरू हुआ:
- 120 फुट गहरा और 10 इंची बोरवेल: नहर के समीप सरपंच की जमीन पर 120 फीट गहराई वाला मजबूत 10 इंची बोरवेल तैयार किया गया।
- 10 HP की सबमर्सिबल मोटर: भारी क्षमता वाली 10 हॉर्स पावर की सबमर्सिबल मोटर स्थापित की गई ताकि निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके।
- 4,000 फुट लंबी 8 इंची भूमिगत पाइपलाइन: बोरवेल से गाँव तक लगभग 4,000 फीट लंबी 8 इंची मजबूत मुख्य पाइपलाइन जमीन के नीचे बिछाई गई।
- सामूहिक जल व्यवस्था: गाँव के सभी 11 वार्डों को जल वितरण प्रणाली से जोड़ते हुए लगभग 13 नल (टोंटियाँ) स्थापित किए गए हैं, ताकि ग्रामीणों को एक ही स्थान से जल उपलब्ध कराया जा सके।”
- पूर्ण सामग्री एवं एक्सेसरीज: बोरिंग पाइप, एयर वाल्व, पीवीसी बैंड, केबल, स्टार्टर, रस्सा, नट-बोल्ट और समस्त तकनीकी सामग्री संत रामपाल जी महाराज जी की ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराई गई।
इस पूरे प्रोजेक्ट में लाखों रुपये का खर्च आया, जिसे संत रामपाल जी महाराज द्वारा वहन किया गया; ग्राम पंचायत या ग्रामीणों से एक भी रुपया नहीं लिया गया। कार्य पूर्ण होने के पश्चात संत रामपाल जी महाराज जी के आदेशानुसार बोरवेल और मोटर की चाबी ग्राम पंचायत को सौंप दी गई।
गाँव-वालों की भावुक प्रतिक्रियाएँ और आँखों में खुशी के आंसू
जैसे ही बोरवेल से मीठे और शीतल जल की अविरल धारा फूटी, पूरा चांदी गाँव खुशी से झूम उठा। गाँव में ढोल-नगाड़ों और मंगल गीतों के साथ लड्डू बांटे गए।
- सरपंच संतोष देवी: “हम अपनी समस्या लेकर महाराज जी के पास गए थे। उन्होंने तुरंत हमारी पुकार सुनी और 2-3 दिन के भीतर पानी चालू करवा दिया। 3,000 लोगों की प्यास बुझी है। हमारी माताओं-बहनों का दशकों पुराना कष्ट मिट गया।”
- मास्टर बलजीत सिंह: “हम 10-12 साल से भयानक समस्या झेल रहे थे। सरकारी स्तर पर कोई समाधान नहीं हुआ, लेकिन महाराज जी की सर्वे टीम ने 24 घंटे में आकर काम शुरू किया। हम पूरी तरह संतुष्ट और आभारी हैं।”
- डॉ. लिसन सिंह (पूर्व पंच): “25-30 साल से हम दूसरे गाँवों से पानी ढो रहे थे। जब हम धनाना धाम गए, तो महाराज जी ने इतना सम्मान दिया और 22 घंटे में पूरी टीम भेजकर काम शुरू करवा दिया। हमारी आने वाली पीढ़ियां भी महाराज जी की ऋणी रहेंगी।”
- गाँव की बुजुर्ग महिलाएं व माताएं: “कुओं का पानी खराब था, गंदे नाले की बदबू आती थी। शरीर में दर्द और बीमारियां लग रही थीं। संत रामपाल जी महाराज ने हमारे लिए अमृत जैसा मीठा पानी दिया है। भगवान उनको लंबी उम्र दे।”
- महावीर जी (ग्रामीण): “हमने फिल्मों में ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ देखा था, लेकिन धरातल पर भगवान का रूप बनकर संत रामपाल जी महाराज ने पहले अन्नपूर्णा मुहिम चलाई, मकान बनवाए और अब पानी का संकट दूर करके असली सेवा करके दिखाई है।”
सामाजिक प्रभाव: जीवन में नया सवेरा
मीठे पानी की इस व्यवस्था से गाँव चांदी के सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ा है:
- मातृशक्ति को राहत: महिलाओं को अब 2-2.5 किलोमीटर दूर सिर पर मटके ढोने से मुक्ति मिल गई है, जिससे उनका शारीरिक कष्ट खत्म हुआ है।
- बच्चों की शिक्षा में सुधार: पानी लाने में समय बर्बाद न होने के कारण बच्चे अब समय पर स्कूल जा पा रहे हैं।
- स्वास्थ्य में सुधार: शुद्ध, शीतल और आरओ (RO) जैसा मीठा पानी मिलने से पेट और चर्म रोगों से मुक्ति मिलेगी।
- पारिवारिक शांति: पानी लाने को लेकर घरों में होने वाले रोजमर्रा के तनाव और विवाद समाप्त हो गए हैं।
संत रामपाल जी महाराज: समाज के सच्चे उद्धारक और मसीहा
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज आज के युग में मानवता की सच्ची सेवा की मिसाल बनकर उभरे हैं। आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ वे समाज के उत्थान और दीन-दुखियों के कल्याण के लिए निरंतर ऐतिहासिक सेवा कार्य कर रहे हैं।
चाहे भीषण जल संकट वाले क्षेत्रों में ‘शुद्ध पेयजल सेवा अभियान’ चलाकर मीठे पानी के बोरवेल लगवाना हो, खेतों से जलभराव की निकासी करवाना हो, किसानों को बिना किसी परेशानी खाद-बीज उपलब्ध करवाना ही, गरीब परिवारों के लिए अन्नपूर्णा मुहिम चलाना हो, या जरूरतमंदों को छत उपलब्ध कराना हो—संत रामपाल जी महाराज की करुणा हर पीड़ित तक बिना किसी भेदभाव के पहुँच रही है।
उनकी यह निष्काम सेवा भावना दर्शाती है कि सच्चा संत वही है जो समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के आंसुओं को पोंछकर उसके जीवन में खुशहाली लाए। उनके इस पावन परोपकार के कारण आज जन-जन उनके प्रति नतमस्तक है ।
गाँव चांदी की यह कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जहाँ सरकारी तंत्र और दशकों की उम्मीदें थक जाती हैं, वहाँ संत रामपाल जी महाराज का परोपकारी संकल्प और सेवा भाव संजीवनी बनकर काम करता है। 25–30 साल पुरानी जल त्रासदी को मात्र कुछ दिनों में समाप्त करके चांदी गाँव को ‘चांदी’ बना दिया गया है।



