किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज-3: संत रामपाल जी महाराज द्वारा भिवानी के गांव सैय में 10 छोटे किसानों तक पहुंची निशुल्क खाद और कृषि दवाइयां

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हरियाणा के भिवानी जिले के गांव सैय में इन दिनों खेती-किसानी से जुड़ी एक ऐसी पहल देखने को मिली, जिसने छोटे किसानों के चेहरे पर राहत की उम्मीद दिखाई। किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण के अंतर्गत गांव में पंजीकृत पात्र किसानों को निशुल्क खाद और कृषि उपयोगी दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। अभियान से जुड़े आयोजकों के अनुसार, यह सहायता उन किसानों के लिए है जो सीमित कृषि भूमि पर स्वयं खेती करते हैं और जिनके लिए खेती की लागत जुटाना एक बड़ी चुनौती होती है।

गांव में सहायता सामग्री पहुंचने के दौरान सेवादारों ने पहले मंगलाचरण किया। इसके बाद पंजीकृत किसानों की सूची के अनुसार एक-एक किसान को बुलाकर उसकी फसल और भूमि के अनुसार सामग्री दी गई। इस दौरान गांव के किसानों ने बताया कि खेती में खाद और दवाइयों की जरूरत तो हर मौसम में पड़ती है, लेकिन सीमित आमदनी वाले परिवारों के लिए समय पर इनका इंतजाम करना आसान नहीं होता।

अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार, गांव सई में कुल 10 पंजीकृत पात्र किसानों के लिए 46 बैग यूरिया, 8 बैग डीएपी तथा कीटनाशक और अन्य कृषि उपयोगी दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। किसानों का कहना था कि इस सहायता से उन्हें तत्काल आर्थिक राहत मिली है और खेती के जरूरी खर्च का कुछ बोझ कम हुआ है।

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सीमित जमीन और बढ़ती लागत के बीच छोटे किसानों की सबसे बड़ी चिंता खेती का खर्च

गांव सैय में खेती करने वाले छोटे किसानों के लिए जमीन भले ही सीमित हो, लेकिन खेती की लागत लगातार कई हिस्सों में जुड़ती जाती है। खेत की तैयारी से लेकर खाद, बीज, कीटनाशक, सिंचाई और फसल की देखभाल तक किसान को अलग-अलग स्तर पर खर्च करना पड़ता है। ऐसे में जिन परिवारों की आमदनी मुख्य रूप से खेती पर निर्भर होती है, उनके लिए फसल के समय अतिरिक्त खर्च जुटाना मुश्किल हो सकता है।

कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने बताया कि पहले खाद और दवाइयां खरीदने के लिए उन्हें बाजार जाना पड़ता था। कई बार समय पर सामग्री नहीं मिलती थी और कभी पैसों की कमी के कारण खरीदारी टालनी पड़ती थी। कुछ किसानों ने यह भी बताया कि जरूरत के समय खाद की उपलब्धता को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था।

यही वजह रही कि जब अभियान के माध्यम से गांव में ही कृषि सामग्री पहुंची तो किसानों ने इसे अपने लिए बड़ी राहत बताया। किसानों के मुताबिक, सामग्री घर या गांव तक पहुंचने से बाजार जाने की परेशानी और तत्काल भुगतान का दबाव दोनों कम हुए।

मंगलाचरण के बाद सूची के अनुसार किसानों को दी गई कृषि सामग्री

गांव सैय में सहायता वितरण की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से की गई। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। इसके बाद पंजीकृत किसानों के नाम सूची के अनुसार पुकारे गए और प्रत्येक किसान को उसकी पात्रता तथा फसल की आवश्यकता के अनुसार सामग्री सौंपी गई।

आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस चरण में 10 किसानों को कुल 46 बैग यूरिया और 8 बैग डीएपी के साथ कीटनाशक तथा अन्य कृषि उपयोगी दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। वितरण के दौरान यह भी बताया गया कि अभियान के अंतर्गत सहायता प्राप्त करने के लिए किसानों का पंजीकरण और पात्रता से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाती है। अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, छोटे और स्वयं खेती करने वाले किसानों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था रखी गई है।

इस पूरी प्रक्रिया में किसानों को बुलाकर उनका नाम बताया गया और फिर उनके हिस्से की सामग्री उपलब्ध कराई गई। मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य इसलिए भी खास था क्योंकि सहायता किसी एक परिवार तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई छोटे किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार सामग्री देने की कोशिश की गई।

चंद्रपाल परमार ने बताया, जरूरत के समय मिली सहायता से बढ़ी उम्मीद

कार्यक्रम में किसान चंद्रपाल परमार ने अभियान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने बताया कि गांव और आसपास के स्तर पर पहले भी उन्हें विभिन्न प्रकार की सहायता मिली है। उनके अनुसार, किसानों की जरूरतों को देखते हुए उन्हें अपेक्षा से अधिक सामग्री उपलब्ध कराई गई।

चंद्रपाल ने बताया कि खाद की आवश्यकता के लिए संपर्क करने के बाद कम समय में गांव तक सामग्री पहुंच गई। उन्होंने इसे छोटे किसानों के लिए उपयोगी सहायता बताया और कहा कि जिन किसानों के पास खेती के खर्च के लिए पर्याप्त पैसा नहीं होता, उनके लिए इस तरह की मदद काफी मायने रखती है।

उनके अनुसार, छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति कई बार इतनी कमजोर होती है कि खाद डालने के लिए भी पैसे जुटाना चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में निशुल्क कृषि सामग्री मिलना उनके लिए तत्काल राहत का कारण बन सकता है।

किसी किसान को मिली यूरिया, किसी को डीएपी और दवाइयां, फसल के हिसाब से हुआ वितरण

वितरण के दौरान अलग-अलग किसानों को अलग मात्रा में सामग्री दी गई। एक किसान ने बताया कि उसे यूरिया के साथ डीएपी और कैल्शियम की सामग्री तथा कृषि दवाइयां मिलीं। किसान के अनुसार, पहले उसे यह सब बाजार से खरीदना पड़ता था और इसके लिए पैसे की व्यवस्था करनी पड़ती थी।

एक अन्य किसान ने बताया कि वह कपास की खेती करता है और उसे यूरिया तथा दवा उपलब्ध कराई गई। उसने कहा कि निशुल्क सामग्री मिलने से उसका खेती का खर्च कम हुआ है। धान की खेती करने वाले किसान सुरेश ने भी बताया कि उसे डीएपी, यूरिया और कृषि दवाइयां मिलीं। उसने बताया कि पहले खाद की व्यवस्था करते समय कभी उपलब्धता और कभी पैसे की समस्या सामने आती थी।

किसानों की प्रतिक्रियाओं से एक बात साफ दिखाई दी कि उनके लिए सहायता का सबसे बड़ा महत्व समय पर कृषि सामग्री उपलब्ध होना है। फसल के मौसम में खाद और दवाइयां देर से मिलने पर किसान को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ सकती है।

किसानों ने बताया, पहले खाद खरीदने में पैसे और उपलब्धता दोनों की चिंता रहती थी

गांव में मौजूद किसानों ने बातचीत के दौरान बताया कि पहले खाद और दवाइयों की व्यवस्था करने में उन्हें बाजार का रुख करना पड़ता था। कई बार पैसे की कमी होने पर उधार लेना पड़ता था या दूसरी जरूरतों में कटौती करनी पड़ती थी।

एक किसान ने अनुमान जताया कि उसकी जमीन और फसल के हिसाब से इस तरह की सामग्री खरीदने में हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं। दूसरे किसान ने भी बताया कि खाद, डीएपी और दवाइयों की लागत उसके लिए महत्वपूर्ण आर्थिक बोझ बनती है। एक किसान ने कहा कि पहले कभी-कभी दुकान पर जाने के बाद भी मनचाही मात्रा में सामग्री नहीं मिलती थी। उसके मुताबिक, अब गांव तक सामग्री पहुंचने से उसे बाजार के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ी।

इन किसानों की बातें किसी बड़े आंकड़े से ज्यादा उस रोजमर्रा की परेशानी को सामने रखती हैं, जिससे सीमित संसाधनों वाले किसान गुजरते हैं। खेती से मिलने वाली आमदनी फसल और मौसम पर निर्भर होती है, जबकि खर्च कई बार फसल आने से पहले ही करना पड़ता है।

चार-पांच दिन के भीतर सहायता मिली, किसानों ने बताया आसान रहा पंजीकरण

एक किसान ने बताया कि उसने सहायता के लिए संपर्क और पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की और करीब चार-पांच दिन के भीतर सामग्री मिलने की जानकारी दी। उसके अनुसार, उसे बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ी और सहायता सीधे गांव तक पहुंच गई। उन्होंने बताया पहले उसे खाद और दूसरी कृषि सामग्री बाजार से स्वयं लानी पड़ती थी। इसके विपरीत इस बार पंजीकरण के बाद सामग्री उपलब्ध कराए जाने से उसका समय और खर्च दोनों बचने की उम्मीद बनी।

हालांकि, इस प्रकार की सहायता के वास्तविक दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन फसल की पैदावार और किसानों की आर्थिक स्थिति में होने वाले बदलाव के आधार पर ही किया जा सकेगा। फिलहाल किसानों के लिए तत्काल राहत का पहलू सबसे महत्वपूर्ण दिखाई देता है।

किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण में छोटे किसानों पर फोकस

अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण में सीमित कृषि भूमि पर स्वयं खेती करने वाले छोटे किसानों तक निशुल्क कृषि सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। ढाई एकड़ या उससे कम भूमि पर स्वयं खेती करने वाले पात्र किसानों को उनकी जमीन और फसल की आवश्यकता के अनुसार यूरिया, डीएपी, बीज और कृषि उपयोगी दवाइयां उपलब्ध कराने की बात कही गई है। पात्रता से संबंधित अंतिम निर्णय पंजीकरण और सर्वे की प्रक्रिया के आधार पर होने की बात भी बताई गई है।

किसानों का समय और मानसिक दबाव भी कम होने की उम्मीद

किसानों के अनुसार, इस सहायता का लाभ केवल खाद की कीमत बचने तक सीमित नहीं है। समय पर खाद और दवाइयां उपलब्ध होने से बाजार के चक्कर, आने-जाने का खर्च और खरीदारी के लिए पैसे की तत्काल व्यवस्था करने का दबाव भी कम हो सकता है। छोटे किसान के लिए कुछ हजार रुपये भी महत्वपूर्ण होते हैं। यदि फसल के मौसम में यही रकम खाद और दवाइयों पर खर्च हो जाए तो परिवार की दूसरी जरूरतें प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में निशुल्क कृषि सामग्री मिलने से किसान उस रकम को किसी अन्य जरूरी काम में लगा सकता है।

छोटे खेतों में बड़ी उम्मीद, सैय के किसानों के लिए राहत की एक नई तस्वीर

भिवानी जिले के गांव सैय में किसान मजदूर बचाओ अभियान फेज-3 के तहत 10 पंजीकृत किसानों को 46 बैग यूरिया, 8 बैग डीएपी तथा कृषि उपयोगी दवाइयां निशुल्क उपलब्ध कराई गईं। किसानों ने इसे अपने लिए आर्थिक राहत बताया और कहा कि इससे खेती के जरूरी खर्च को कम करने में मदद मिलेगी। किसानों की बातचीत में बार-बार एक ही चिंता सामने आई—खेती करना आसान नहीं है, खासकर तब जब जमीन कम हो और आमदनी सीमित हो। ऐसे में खाद और दवाइयों जैसी बुनियादी कृषि सामग्री समय पर मिल जाना उनके लिए बड़ी राहत बन सकता है।

जब छोटे किसान के खेत तक पहुंची मदद, तो चेहरे पर लौटी उम्मीद

गांव सैय की यह तस्वीर केवल खाद और दवाइयों के वितरण की तस्वीर नहीं है। यह उन छोटे किसानों की उम्मीद की तस्वीर भी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी जमीन से परिवार का भविष्य जोड़कर बैठे हैं। सहायता पाने वाले किसानों ने जिस राहत और आभार के साथ अपनी बात रखी, उससे यह समझ आता है कि समय पर मिलने वाली मदद ग्रामीण परिवार के लिए बड़ा सहारा बन सकती है। संत रामपाल जी महाराज के किसान मजदूर बचाओ अभियान के तीसरे चरण के माध्यम से दी गई यह सहायता बड़ा आर्थिक बदलाव ला रही है। अधिक जानकारी के लिए आप Sant Rampal Ji Maharaj App डाउनलोड करें।

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