हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के विभिन्न ग्रामीण अंचलों से आए जनप्रतिनिधियों, खेल प्रशिक्षकों, किसान नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधियों ने हाल ही में बुनियादी समस्याओं तथा सामाजिक विषयों को लेकर संत रामपाल जी महाराज से मुलाकात की।
इस दौरान संत रामपाल जी महाराज और अन्य प्रमुख ग्रामीण हस्तियों ने गांवों में फैली जलभराव की गंभीर समस्या, फसलों की सिंचाई के संकट, खेल सुविधाओं के अभाव तथा गौशालाओं के दैनिक संचालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की। हिसार, सोनीपत, रोहतक, भिवानी, संगरूर, भरतपुर, डीग, फतेहाबाद और चूरू जिलों से आए सरपंचों, खिलाड़ियों, गौशाला प्रभारियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी चुनौतियों को सार्वजनिक मंच पर रखा।
भरतपुर और डीग में बाढ़ राहत तथा 100 मीटर की पगड़ी से सम्मान
राजस्थान के भरतपुर और डीग जिले पिछले कई वर्षों से लगातार भीषण जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों का सामना कर रहे हैं। भरतपुर स्थित प्रसिद्ध लोहागढ़ स्टेडियम से आए पहलवान दलवीर उर्फ हाथी पहलवान, जो 17 बार राजस्थान केसरी का खिताब अपने नाम कर चुके हैं और नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं, उन्होंने अपने दल के साथ भरतपुर क्षेत्र की दुखद स्थिति को बयां किया। दलवीर उर्फ हाथी पहलवान ने बताया कि भरतपुर के कोडे, कासोट और अजान जैसे दर्जनों गांवों के खेतों में पिछले 5 सालों से भारी मात्रा में पानी भरा हुआ था। इस लंबे जलभराव के कारण स्थानीय किसान अपनी फसलों की बुवाई भी नहीं कर पा रहे थे और उनकी आजीविका पूरी तरह ठप हो चुकी थी।
पहलवान दलवीर ने बताया कि राहत अभियानों के तहत प्रभावित क्षेत्रों में संत रामपाल जी महाराज द्वारा बड़े-बड़े ड्रेनेज पाइप, बिजली जनरेटर और डीजल ईंधन की आपूर्ति कराई गई, जिससे खेतों का पानी निकाला जा सका। इसके अतिरिक्त बेघर हो चुके गरीब परिवारों के लिए पक्के मकानों का निर्माण भी करवाया गया।
इस विशाल राहत कार्य से खुश होकर और आभार प्रकट करने के लिए पहलवान दलवीर उर्फ हाथी पहलवान तथा उनके साथी पहलवानों ने संत रामपाल जी महाराज को 100 मीटर लंबी और 20 किलोग्राम वजनी पारंपरिक पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया।
इसी दौरान डीग जिले से आए सरपंच प्रतिनिधि ने जानकारी दी कि हाल की भारी बारिश के चलते गांव के पोखर और तालाब ओवरफ्लो होकर आबादी क्षेत्र में भर गए हैं। उन्होंने जल निकासी के लिए अतिरिक्त पंपिंग सेट और पाइपलाइन तुरंत उपलब्ध कराने की लिखित मांग सौंपी, जिस पर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
संगरूर और हिसार के कृषि क्षेत्रों में सिंचाई तथा जल निकासी की रणनीति
पंजाब के संगरूर जिले के गांव कोहरिया से आए ग्राम सरपंच और चार पंचों के नेतृत्व में 80 गरीब परिवारों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल अपनी गंभीर समस्या लेकर पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल मुख्य रूप से रामदासिया सिख और मजहबी सिख समुदाय के उन गरीब परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहा था, जिनके पास जीविकोपार्जन के बहुत सीमित साधन हैं। ग्राम सरपंच ने बताया कि अन्नपूर्णा मुहिम के तहत गांव के कई जरूरतमंद परिवारों को राशन और रोजगार का साधन मिला है। साथ ही, बारिश के मौसम में टपकने वाली कच्ची छतों वाले गरीब परिवारों के लिए पक्के मकानों का निर्माण भी करवाया गया है, जिससे अब उन्हें बरसात में बेघर होने का डर नहीं सताता।
कोहरिया गांव के सरपंच और पंचों ने अपनी मुख्य मांग रखते हुए बताया कि गांव के 80 गरीब परिवारों के पास केवल 1 से 2 बीघा रेतीली जमीन (टब्बा रेतला) मौजूद है। इस जमीन पर सिंचाई का कोई भी साधन न होने के कारण ग्रामीण फसलों की पैदावार नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने पंचायत की ओर से 2 नए कृषि ट्यूबवेल लगवाने की लिखित प्रार्थना की। संत रामपाल जी महाराज ने इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए तत्काल प्रभाव से दोनों ट्यूबवेल लगवाने के निर्देश जारी कर दिए गए।
दूसरी ओर, हरियाणा के हिसार जिले के सिंघवा खास गांव से आए साधु राम तथा नीरज के परिवार ने गांव में जल निकासी के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा पाइपों की आपूर्ति करने पर संतोष व्यक्त किया। इसके अलावा, हिसार जिले के ही राजली गांव से आए वार्ड पार्षद तथा सरपंच ने बताया कि पूर्व में मिली त्वरित सहायता के कारण इस साल उनकी फसलें जलमग्न होने से बच सकीं। उन्होंने गांव को भविष्य में हमेशा के लिए जलभराव से मुक्त रखने के लिए स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था बनाने की अपील की।
सोनीपत और पानीपत में तालाब पाइपलाइन, आंबेडकर भवन और मूलभूत सुविधाएं
हरियाणा के सोनीपत और पानीपत जिलों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने गांवों के बुनियादी ढांचे से जुड़ी प्रमुख प्रशासनिक और विकास संबंधी मांगें सामने रखीं। सोनीपत जिले के मिर्जापुर खेड़ी गांव से आए सरपंच ने गांव के मुख्य तालाब को नहर से जोड़ने वाली पुरानी पाइपलाइन की समस्या उठाई। सरपंच ने बताया कि नहर से तालाब में पानी न पहुंचने के कारण गांव के मवेशियों और दैनिक जरूरतों के लिए पानी का संकट पैदा हो रहा था। सरपंच द्वारा औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंपे जाने के बाद संत रामपाल जी महाराज द्वारा केवल 3 दिनों के भीतर पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कराने की समय-सीमा तय की गई।
इसी क्रम में सोनीपत जिले के ही नूरन खेड़ा गांव से आए पूर्व सरपंच के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने गांव की 2-3 प्राथमिक मूलभूत सुविधाओं से संबंधित मांग पत्र सौंपा, जिस पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य करने का भरोसा दिया गया। वहीं, पानीपत जिले के राजाखेड़ी गांव से आई आंबेडकर समाज सुधार कमेटी के प्रधान ने पिछड़े वर्ग की बस्तियों में गहराए जल संकट की जानकारी दी।
प्रधान ने बताया कि आंबेडकर भवन के पास स्थित बोरवेल और ट्यूबवेल पूरी तरह सूख चुके हैं, जिसके कारण स्थानीय 4-5 गरीब परिवारों को रोजाना पीने के पानी की भारी किल्लत सहनी पड़ रही है। इस समस्या पर तुरंत संज्ञान लेते हुए पानी की स्थायी व्यवस्था करने का निर्णय लिया गया और स्थानीय कमेटी सदस्यों को अपना निजी पैसा खर्च न करने की सलाह दी गई।
धनाना में इंडोर कबड्डी हॉल और कलोई के शिव कुमार स्टेडियम का कायाकल्प
खेल और युवा विकास के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसलों की घोषणा की गई। सोनीपत जिले के धनाना गांव से आए प्रसिद्ध कबड्डी कोच सुनील अपनी पूरी युवा कबड्डी टीम के साथ उपस्थित हुए। कोच सुनील जाटन ने बड़े गर्व के साथ जानकारी दी कि उनकी अकादमी के 6 प्रतिभावान खिलाड़ियों—जिनमें 3 लड़कियां और 3 लड़के शामिल हैं—का चयन हरियाणा स्टेट कबड्डी चैंपियनशिप (अंडर-14 और अंडर-17 वर्ग) के लिए हुआ है। इससे पहले इन खिलाड़ियों ने सोनीपत जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
कोच सुनील जाटन ने कहा कि सर्दियों के कोहरे और मानसून की बारिश के दौरान खुले मैदान में अभ्यास करने में भारी बाधा आती है। इसलिए उन्होंने पूर्व में मांगी गई टीन शेड की मांग में संशोधन करते हुए एक आधुनिक ‘इंडोर कबड्डी हॉल’ के निर्माण की अपील की, ताकि बच्चे मौसम की परवाह किए बिना पूरे साल अभ्यास जारी रख सकें और देश का नाम रोशन कर सकें। इस मांग को सहर्ष स्वीकृति प्रदान की गई।
इसी तरह, रोहतक जिले के कलोई गांव से आए शिव कुमार स्टेडियम प्रबंध समिति के प्रतिनिधियों ने स्टेडियम की दयनीय हालत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस स्टेडियम में आसपास के गांवों के लगभग 300 युवा खिलाड़ी प्रतिदिन प्रशिक्षण प्राप्त करने आते हैं।
लेकिन स्टेडियम के दो मुख्य भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, अभ्यास क्षेत्र पर शेड नहीं है और मुख्य प्रवेश द्वार टूटकर बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। समिति ने स्टेडियम के मुख्य द्वार के नए सिरे से निर्माण, शेड लगाने और जर्जर इमारतों की मरम्मत का विस्तृत खाका पेश किया, जिसे तुरंत मंजूरी दे दी गई।
भिवानी, रोहतक, चूरू और दादरी में गौशालाओं को चारा तथा जलभराव का समाधान
ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों की सुरक्षा, गौसेवा और जलभराव से बचाव के लिए कई आपातकालीन कदम उठाए गए। भिवानी जिले के बड़ेसरा गांव के सरपंच ने बताया कि कुछ समय पहले जब उन्होंने जलभराव की समस्या उठाई थी, तो महज 2 से 3 दिनों के भीतर गांव में बड़े ड्रेनेज पाइप पहुंचा दिए गए थे। सरपंच ने गांव के बाकी बचे निचले हिस्सों से पानी निकालने के लिए अतिरिक्त पाइप की मांग रखी, जिसके बाद 1-2 दिनों के अंदर सर्वे टीम भेजकर पाइप आपूर्ति करने का निर्णय लिया गया।
रोहतक जिले के नांदल गांव की ग्राम पंचायत तथा सरपंच ने गांव के समग्र विकास से जुड़ी अपनी मांगों की सूची सौंपी। इसके अलावा, राजस्थान के चूरू जिले की तारानगर तहसील के बरानी (शुष्क) क्षेत्र से आया 35 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अपनी गौशाला की व्यथा लेकर पहुंचा। गौशाला प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अत्यंत कठिन परिस्थितियों में 750 गोवंश की निस्वार्थ देखभाल कर रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में पड़े भीषण सूखे के कारण चारे और पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए संत रामपाल जी महाराज द्वारा तुरंत 1 महीने के चारे की पूर्ण व्यवस्था का आदेश जारी किया गया।
इसी प्रकार, फतेहाबाद जिले के नाढोडी गांव की गौशाला समिति और चरखी दादरी की हरे कृष्णा गौशाला के प्रतिनिधियों ने भी चारे की कमी का मुद्दा संत रामपाल जी महाराज के समक्ष उठाया। चरखी दादरी गौशाला प्रबंधन ने बताया कि उनके पास गौवंश के लिए केवल 3 दिन का चारा शेष बचा है। इस आपात स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अगले ही दिन संत रामपाल जी महाराज द्वारा चारे की नई खेप भिजवाने की व्यवस्था की गई।
सामाजिक परंपराएं: कोथली और भात प्रथा पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन
आयोजन के दौरान ग्रामीण समाज में प्रचलित सदियों पुरानी सामाजिक परंपराओं, लेन-देन की प्रथाओं और व्यावहारिक नियमों पर भी गहन चर्चा हुई। बुजुर्ग ग्रामीण ने एक बेहद व्यावहारिक और महत्वपूर्ण सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि क्या कोई भाई अपनी शादीशुदा बहन या बेटी को सीधे ‘कोथली’ (त्योहारों पर भेजा जाने वाला उपहार) अथवा ‘भात’ (विवाह के अवसर पर दी जाने वाली आर्थिक मदद) दे सकता है या इस पर कोई आध्यात्मिक पाबंदी है?
इस प्रश्न का उत्तर देते हुए संत रामपाल जी महाराज द्वारा स्पष्ट किया गया कि सामाजिक रीति-रिवाजों और भक्ति मार्ग के सिद्धांतों में बहुत सूक्ष्म अंतर होता है। यदि बहन या बेटी ने आध्यात्मिक दीक्षा (नाम दीक्षा) नहीं ली है, तो परिवार का कोई भी सदस्य अपनी क्षमता अनुसार भात, कोथली दे सकता है। ऐसी स्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाने पर कोई रोक नहीं है।
इसके विपरीत, यदि देने वाले भाई और लेने वाली बहन दोनों ने ही आध्यात्मिक दीक्षा ग्रहण कर रखी है, तो फिर सामाजिक आडंबरों और अनावश्यक वित्तीय लेन-देन से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसे मामलों में दिखावे के बजाय केवल वास्तविक जरूरत के समय ही सीधी भौतिक या व्यावहारिक मदद की जानी चाहिए, ताकि निर्धन परिवारों पर रीति-रिवाजों के नाम पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
प्रमुख हस्तियों के बयान
| हस्ती | पद/परिचय | बयान | वीडियो स्रोत |
| दलवीर उर्फ हाथी पहलवान | 17 बार राजस्थान केसरी व नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट, लोहागढ़ स्टेडियम भरतपुर | जलभराव की 5 साल पुरानी समस्या हल होने और मकान निर्माण पर 100 मीटर की पगड़ी भेंट कर आभार जताया। | वीडियो देखे |
| सुनील | कबड्डी कोच, धनाना (सोनीपत) | स्टेट चैंपियनशिप में चयनित 6 खिलाड़ियों के बारहमासी अभ्यास के लिए इंडोर कबड्डी हॉल बनाने की मांग रखी। | वीडियो देखे |
| साधु राम | ग्रामीण प्रतिनिधि, सिंघवा खास (हिसार) | गांव में जल निकासी के लिए पाइपों की समय पर आपूर्ति और सहायता के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। | वीडियो देखे |
| चाचा बलीरा | वरिष्ठ ग्रामीण प्रतिनिधि | बहन-बेटी को कोथली और भात देने से जुड़े सामाजिक नियमों और परंपराओं पर स्पष्टीकरण मांगा। | वीडियो देखे |
| सरपंच, कोहरिया | ग्राम सरपंच, कोहरिया (संगरूर, पंजाब) | 80 गरीब रामदासिया व मजहबी सिख परिवारों की रेतीली जमीन की सिंचाई के लिए 2 ट्यूबवेल लगवाने की मांग की। | वीडियो देखे |
| प्रधान, आंबेडकर समिति | अध्यक्ष, आंबेडकर समाज सुधार कमेटी, राजाखेड़ी (पानीपत) | सूखे ट्यूबवेल के कारण पिछड़े वर्ग के 4-5 गरीब परिवारों को हो रही पीने के पानी की समस्या सामने रखी। | वीडियो देखे |
| प्रतिनिधि, तारानगर गौशाला | गौशाला प्रबंधक, तारानगर (चूरू, राजस्थान) | बरानी क्षेत्र में पल रहे 750 गोवंश के लिए भीषण सूखे के बीच 1 महीने के चारे की आपातकालीन सहायता मांगी। | वीडियो देखे |
| प्रबंधक, शिव कुमार स्टेडियम | स्टेडियम समिति प्रतिनिधि, कलोई (रोहतक) | 300 युवा खिलाड़ियों के लिए जर्जर इमारतों, शेड और नए सुरक्षा प्रवेश द्वार के निर्माण का प्रस्ताव रखा। | वीडियो देखे |
| पूर्व सरपंच, नूरन खेड़ा | पूर्व ग्राम प्रधान, नूरन खेड़ा (सोनीपत) | गांव की 2-3 प्रमुख बुनियादी सुविधाओं के समाधान और विकास कार्यों के लिए ज्ञापन सौंपा। | वीडियो देखे |
ग्रामीण स्वावलंबन और बुनियादी ढांचा सुधार की नई दिशा
हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के दर्जनों ग्रामीण इलाकों से सामने आई ये तस्वीरें यह साफ दर्शाती हैं कि जब प्रशासनिक ढिलाई या प्राकृतिक आपदाओं के कारण गांव पिछड़ने लगते हैं, तब तत्वदर्शी संत किस प्रकार संकटमोचक बनकर उभरते है।
भरतपुर के 5 साल पुराने जलभराव से मुक्ति दिलाना हो, संगरूर के रेतीले खेतों में सिंचाई ट्यूबवेल की स्थापना हो, धनाना के युवा कबड्डी खिलाड़ियों के लिए इंडोर हॉल का निर्माण हो या फिर चूरू के बरानी क्षेत्र में 750 गोवंश को भुखमरी से बचाना हो—संत रामपाल जी महाराज ने असंभव को संभव करके दिखाया है। इन तमाम स्वीकृत परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से न केवल हजारों ग्रामीणों को जल संकट से राहत मिलेगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए खेल और विकास के नए रास्ते खुलेंगे।



