जनसेवा देखकर बदली सोच: देशभर से पहुंचे लोगों ने संत रामपाल जी महाराज के कार्यों को सराहा

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किसी को अन्नपूर्णा मुहिम ने प्रभावित किया, किसी ने गांवों में पानी की समस्या के समाधान की पहल को सराहा, तो किसी ने नशे की गिरफ्त से बाहर आए अपने परिचित का उदाहरण सामने रखा। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, जयपुर और आगरा सहित अलग-अलग क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की बातचीत में संत रामपाल जी महाराज से जुड़े जनकल्याण कार्यों की चर्चा प्रमुख रही।

ग्रामीण प्रतिनिधियों ने पानी जैसी बुनियादी जरूरतों की बात रखी, वहीं गरीब परिवारों के लिए मकान, भोजन और सहायता की जरूरतों पर भी चर्चा हुई। कुछ लोगों ने नशामुक्ति को समाज के लिए जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ ने शिक्षा, चिकित्सा और अन्य जनसेवा कार्यों की सराहना की।

कई लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए आगे स्वयं सेवा करने और अपने गांव-क्षेत्र के अन्य लोगों को भी साथ लाने की इच्छा जताई।

Table of Contents

उत्तर प्रदेश से आए जिला पार्षद: व्यवस्था देखकर बोले—“बहुत अच्छा लगा”

उत्तर प्रदेश से पहुंचे जिला पार्षद ने यहां की व्यवस्थाओं को देखकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने खाने-पीने और आने वाले लोगों के लिए किए गए इंतजामों को अच्छा बताया।

मुलाकात के दौरान उनका स्वागत किया गया और उन्होंने भी यहां आकर प्रसन्नता व्यक्त की। उनके लिए यह अनुभव विशेष रहा कि सेवा और व्यवस्था दोनों को करीब से देखने का अवसर मिला।

उनकी प्रतिक्रिया में यहां आने वाले लोगों के लिए की गई व्यवस्था की सराहना प्रमुख रही। उन्होंने इसे देखकर अपनी खुशी व्यक्त की और कहा कि उन्हें यहां आकर बहुत अच्छा लगा।

मध्य प्रदेश से पहुंचे पूर्व सरपंच: अन्नपूर्णा मुहिम ने खींचा ध्यान

मध्य प्रदेश से आए पूर्व सरपंच ने बताया कि उन्होंने जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री और सहायता मिलने के बारे में पहले टीवी पर देखा था। पंजाब में बाढ़ के दौरान किए गए राहत कार्यों की जानकारी ने भी उनका ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने बताया कि इन्हीं कार्यों के बारे में जानकारी मिलने के बाद उनके मन में यहां आने की इच्छा हुई। पहली बार यहां पहुंचने पर उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के दर्शन किए और अपनी खुशी व्यक्त की। उनके लिए अन्नपूर्णा मुहिम और आपदा के समय जरूरतमंदों की सहायता ऐसे कार्य रहे, जिन्होंने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।

हरियाणा से आए पत्रकार: नशामुक्ति और जनसेवा की पहल को सराहा

हरियाणा से आए पत्रकार ने नशामुक्ति, जाति-पाति से ऊपर उठकर समाज सुधार और जरूरतमंदों के लिए खाद-बीज जैसी सहायता से जुड़े कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि जिन कामों को लेकर लंबे समय से बातें होती हैं, उन्हें जमीन पर होते देखना अपने आप में बड़ी बात है। उनके अनुसार जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने और समाज में सुधार की दिशा में किए जा रहे कार्यों को देखकर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मुलाकात के बाद उन्होंने सेवा कार्यों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया और अपनी ओर से भी अधिक सेवा करने की इच्छा जताई।

जुलाना-शादीपुर क्षेत्र से किसान नेता: “जमीनी स्तर पर करके दिखाया”

हरियाणा के जुलाना-शादीपुर क्षेत्र से आए किसान नेता ने संत रामपाल जी महाराज से जुड़े सेवा कार्यों की खुलकर सराहना की। उन्होंने पानी निकालने, पीने का पानी पहुंचाने, बच्चों के लिए शिक्षा, चिकित्सा और परिवहन जैसी सुविधाओं का उल्लेख किया। 

उन्होंने अपने आसपास के ऐसे लोगों का उदाहरण भी दिया जिन्होंने नाम-ज्ञान लेने के बाद शराब छोड़ दी और गरीबों के काम में निःशुल्क सहयोग करने लगे। गरीब किसान और मजदूरों के लिए भोजन, पानी और आवास जैसी बुनियादी जरूरतों में सहायता को उन्होंने विशेष रूप से सराहा। उन्होंने बताया कि उनके आसपास सेवा और नशामुक्ति से जुड़े बदलाव देखने को मिले हैं। उनकी बातों में सेवा कार्यों के जमीनी स्तर पर दिखाई देने वाले प्रभाव की विशेष चर्चा रही।

चरखी दादरी से गौशाला प्रधान: यूट्यूब पर देखकर बनी थी मिलने की इच्छा

चरखी दादरी से पहुंचे गौशाला प्रधान ने बताया कि उन्होंने यूट्यूब और मोबाइल के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के कार्यों को काफी समय से देखा और सत्संग सुना था।

वीडियो और सत्संग से प्रभावित होकर उनके मन में प्रत्यक्ष दर्शन की इच्छा बनी। इसी इच्छा के साथ वे यहां पहुंचे। यहां आकर उन्होंने जनकल्याण के कार्यों की प्रशंसा की और आगे भी अधिक सेवा करने की इच्छा व्यक्त की।

उनके लिए पहले मोबाइल और यूट्यूब के माध्यम से दिखाई देने वाले कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने सेवा कार्यों से प्रभावित होने की बात कही।

मोसर ग्राम पंचायत: “मातृशक्ति को भी साथ लेकर आएंगे”

मोसर ग्राम पंचायत से पहुंचे प्रतिनिधि ने गांव में चल रहे विशेष कार्यों की सराहना की। उन्होंने बताया कि गांव की कई माताएं भी संत रामपाल जी महाराज से मिलने की इच्छा रखती हैं।

उन्होंने उन्हें साथ लेकर आने की बात कही। इस प्रकार आने वाली मुलाकात को केवल एक व्यक्ति तक सीमित न रखते हुए गांव की मातृशक्ति को भी इसमें शामिल करने की इच्छा व्यक्त की।

बातचीत में गांव की पानी संबंधी समस्या भी सामने रखी गई और उसके समाधान की उम्मीद जताई गई। इस दौरान गांव की जरूरतों के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की मिलने की इच्छा भी सामने आई।

मोरखाना गांव का अनुभव: दो साल से परेशान व्यक्ति के ठीक होने की बात

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मोरखाना गांव से आए परिवार ने एक व्यक्ति की परेशानी का अनुभव साझा किया। बताया गया कि वह करीब दो साल से एक गंभीर स्थिति में था और परिवार इस कारण काफी परेशान था।

परिवार के अनुसार, नाम लेने के बाद उसकी स्थिति में अचानक सुधार हुआ। इस अनुभव से प्रभावित होकर परिवार के अन्य लोगों ने भी नाम लेने की इच्छा व्यक्त की।

परिवार ने इस घटना को अपने लिए महत्वपूर्ण अनुभव के रूप में साझा किया। उनके अनुसार, करीब दो साल से चली आ रही परेशानी के बाद स्थिति में बदलाव देखने को मिला।

जमुई, बिहार से कबीर पंथी: अन्नपूर्णा मुहिम देखकर सेवा से जुड़ने की इच्छा

बिहार के जमुई से आए एक कबीर पंथी ने बताया कि वे लंबे समय से संत रामपाल जी महाराज से जुड़े कार्यक्रम देखते रहे हैं। अपने क्षेत्र में अन्नपूर्णा मुहिम के कार्यों को देखकर उनके मन में इसे करीब से देखने की इच्छा बनी। इसी उद्देश्य से वे यहां पहुंचे। यहां आने के बाद उन्होंने सेवा से जुड़ने और नाम-ज्ञान लेने की इच्छा व्यक्त की। अन्नपूर्णा मुहिम से प्रभावित होकर बिहार के जमुई से पहुंचे इस व्यक्ति ने जनसेवा के कार्यों के प्रति अपनी रुचि और आगे जुड़ने की इच्छा सामने रखी।

ढुलाना गांव से सरपंच सहित सात लोग: एक साथ नाम-ज्ञान लेने का फैसला

ढुलाना गांव से सरपंच सहित सात लोग पहुंचे। बातचीत में बताया गया कि सभी एक साथ नाम-ज्ञान लेने का निर्णय लेकर आए हैं। इसी दौरान गांव के एक गरीब परिवार के मकान की समस्या भी सामने रखी गई। मकान गिर जाने के बाद परिवार के सामने दोबारा घर बनाने की चुनौती थी।

एक अन्य गरीब महिला के परिवार के लिए भी मकान की जरूरत बताई गई और सहायता की उम्मीद रखी गई। इस मुलाकात में एक तरफ सरपंच सहित सात लोगों का एक साथ नाम-ज्ञान लेने का निर्णय सामने आया, वहीं दूसरी तरफ गांव के जरूरतमंद परिवारों के लिए मकान की आवश्यकता भी रखी गई।

भीलवाड़ा, राजस्थान से पहुंचे परिवार: जनकल्याण कार्यों से प्रभावित होकर आए

भीलवाड़ा से पहुंचे परिवार ने बताया कि उन्होंने टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के कार्यों को देखा था। समाज सुधार और जनकल्याण से जुड़े कार्यों से प्रभावित होकर उनके मन में प्रत्यक्ष दर्शन की इच्छा बनी और वे यहां पहुंचे।

उन्होंने जनकल्याण के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया और आगे भी सेवा कार्यों को जारी रखने की उम्मीद जताई। उनके यहां आने का प्रमुख कारण उन कार्यों को करीब से देखना रहा, जिनकी जानकारी उन्हें पहले टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली थी।

जयपुर से परिवार का अनुभव: घर में नशामुक्ति का बड़ा बदलाव

जयपुर से आए व्यक्ति ने अपने पिता के बारे में बताया कि वे पहले शराब का अत्यधिक सेवन करते थे। परिवार में सत्संग और नाम-ज्ञान का वातावरण बनने के बाद उन्होंने शराब पूरी तरह छोड़ दी। परिवार के सदस्य के अनुसार, अब वे शराब को हाथ तक नहीं लगाते।

उन्होंने इस बदलाव को अपने परिवार के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार पहले शराब का सेवन परिवार के लिए चिंता का विषय था, लेकिन बाद में इसमें बदलाव आया। यह अनुभव परिवार के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि नशे से जुड़ी आदत में बदलाव सीधे घर के वातावरण में दिखाई दिया।

आगरा से पहुंचे व्यक्ति: “ऐसी व्यवस्था पहली बार देखी”

आगरा से पहुंचे व्यक्ति ने बताया कि वे एक परिचित के साथ पहली बार यहां आए थे। उन्होंने पहले कई धार्मिक स्थानों और आयोजनों को देखा था, लेकिन यहां की व्यवस्था उन्हें अलग लगी। उन्होंने यहां आकर खुशी व्यक्त की और संत रामपाल जी महाराज की शरण में नाम लेने की इच्छा जताई।

पहली बार यहां आने वाले इस व्यक्ति ने विशेष रूप से व्यवस्था को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, पहले देखे गए अन्य स्थानों और आयोजनों की तुलना में यहां की व्यवस्था उन्हें अलग महसूस हुई।

“किसी को अन्न में दिखी सेवा, किसी को छत में उम्मीद—हर कहानी ने छुआ दिल”

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार और राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। किसी ने अन्नपूर्णा मुहिम का उल्लेख किया, किसी ने नशामुक्ति में आए बदलाव की बात कही, तो किसी ने पानी, आवास, शिक्षा, चिकित्सा और गरीब परिवारों की सहायता से जुड़े कार्यों की सराहना की।

कहीं गांव की पानी संबंधी समस्या सामने आई, तो कहीं गरीब परिवार के लिए मकान की आवश्यकता बताई गई। एक ओर पांच गांवों के बच्चों को निःशुल्क पढ़ाने और उन्हें कॉपी-किताब, जूते व वर्दी उपलब्ध कराने की बात सामने आई, वहीं दूसरी ओर गौशालाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपनी आवश्यकताओं को रखा।

चरखी दादरी और जमुई से आए लोगों ने पहले देखे-सुने कार्यों से प्रभावित होकर यहां पहुंचने की बात कही। भीलवाड़ा से आए परिवार ने टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यों को देखने की बात बताई। जयपुर से आए व्यक्ति ने अपने परिवार में शराब छोड़ने के अनुभव को साझा किया, जबकि आगरा से आए व्यक्ति ने यहां की व्यवस्था को पहली बार देखने पर अपनी खुशी व्यक्त की।

इस तरह अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों की बातचीत में अलग-अलग अनुभव सामने आए, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति ने अपनी देखी, सुनी या अनुभव की गई बात के आधार पर अपनी प्रतिक्रिया दी। पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर किसान नेता, पत्रकार, गौशाला प्रधान, शिक्षक, ग्रामीण परिवार और अन्य लोग अपनी-अपनी बात लेकर पहुंचे और आगे भी सेवा से जुड़े रहने या अपने क्षेत्र के लोगों को साथ लाने की इच्छा व्यक्त करते दिखाई दिए।

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