सांगवान गांव में बड़े पैमाने पर संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिए गए पंपिंग उपकरणों से गांव में हुई बिजाई 

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हरियाणा के भिवानी जिले के तोशाम तहसील स्थित सांगवान गांव वर्ष 2025 में भीषण बाढ़ की त्रासदी का केंद्र बन गया, जब पूरा गांव पानी में डूब गया। लगभग 1,500 घरों और करीब 6,000–7,000 लोगों की आबादी वाला यह गांव पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीणों को पलायन करना पड़ा। घर, स्कूल, खेत, मंदिर और सार्वजनिक स्थान सभी पानी में डूब गए, जिससे गांव लगभग वीरान हो गया। बाद में लंबी पाइपलाइन और उच्च क्षमता वाली मोटरों सहित राहत उपकरण क्षेत्र में पहुंचने पर धीरे-धीरे पानी निकाला गया। आज गांव में स्थिति सुधरनी शुरू हो गई है, लोग वापस लौट आए हैं और खेती-बाड़ी की गतिविधियां भी दोबारा शुरू हो चुकी हैं।

ग्रामीणों के अनुसार जब स्थिति और गंभीर हो गई और स्थानीय प्रयास असफल रहे, तब गांव के प्रतिनिधियों ने प्रार्थना पत्र देकर सहायता की मांग की।

मुख्य बिंदु: सांगवान गांव बाढ़ संकट और पुनर्बहाली

  • भिवानी जिले के तोशाम क्षेत्र का सांगवान गांव वर्ष 2025 की बाढ़ में पूरी तरह डूब गया
  • करीब 1,500 घर और लगभग 7,000 लोग प्रभावित हुए
  • घरों और खेतों में पानी भरने के बाद 80–90% ग्रामीणों को पलायन करना पड़ा
  • कई स्थानों पर पानी की गहराई 10 से 15 फीट, जबकि ऊंचे खेतों में लगभग 5 फीट पानी था
  • पानी रोकने के लिए ग्रामीणों ने लगभग 87 लाख रुपये खर्च कर बांध बनाने का प्रयास किया
  • राहत कार्य में 20,000 फीट लंबी पाइपलाइन और 20 हॉर्सपावर के 10 मोटर लगाए गए
  • पंपिंग उपकरणों की मदद से पानी निकाला गया और खेती की गतिविधियां फिर शुरू हुईं
  • अब कई ग्रामीण वापस लौट आए हैं, स्कूल खुल चुके हैं और खेतों में दोबारा बुवाई हो गई है

भीषण बाढ़ से जलमग्न हुआ सांगवान गांव

भिवानी जिले के तोशाम तहसील का सांगवान गांव वर्ष 2025 में हरियाणा की सबसे गंभीर बाढ़ स्थितियों में से एक का सामना कर रहा था। जो गांव पहले एक सक्रिय ग्रामीण बस्ती के रूप में जाना जाता था, वह अचानक पूरी तरह पानी में डूब गया जब बाढ़ का पानी घरों, खेतों और सार्वजनिक भवनों में घुस गया।

इस गांव में करीब 1,500 घर और 6,000 से 7,000 लोगों की आबादी है। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ का पानी पूरे गांव में फैल गया और कई जगहों पर मकानों की छतों तक पहुंच गया। स्थानीय स्कूल भवन, मंदिर और श्मशान घाट भी पानी में डूब गए।

ग्रामीणों ने इस स्थिति को बेहद कठिन बताया। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां, ऊंचे खेतों में बने अस्थायी टेंटों में, तोशाम में किराए के कमरों में या आसपास के आश्रयों में रहना पड़ा। जीवित रहने के संघर्ष के बीच लोगों को अपना पशुधन भी कम कीमत पर बेचना पड़ा।

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ग्रामीणों के अनुसार हालात बिगड़ने तक लगभग 80% से 90% आबादी गांव छोड़ चुकी थी, जिससे गांव लगभग वीरान हो गया।

पानी रोकने के लिए ग्रामीणों के प्रयास

बाहरी सहायता मांगने से पहले ग्रामीणों ने स्वयं ही बाढ़ के पानी को रोकने का प्रयास किया।

समुदाय के लोगों ने धन एकत्र किया और गांव के चारों ओर बांध बनाकर पानी रोकने की कोशिश की। ग्रामीणों के अनुसार इन प्रयासों में गांव ने लगभग 87 लाख रुपये खर्च किए और लगभग एक महीने तक लगातार काम करते हुए अवरोध बनाए।

इसके बावजूद पानी को रोका नहीं जा सका। बाढ़ का पानी धीरे-धीरे आवासीय क्षेत्रों और खेतों में फैलता गया।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों से भी सहायता की मांग की थी और ट्रैक्टरों के लिए ईंधन जैसी व्यवस्थाओं की अपील की थी। हालांकि उनका दावा है कि तत्काल राहत नहीं मिल सकी। पानी लंबे समय तक जमा रहने से कई घर ढह गए, बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया और दैनिक जीवन बेहद कठिन हो गया।

बाढ़ के दौरान हुई व्यक्तिगत त्रासदियां

इस आपदा ने कई परिवारों के लिए व्यक्तिगत दुखद घटनाएं भी लेकर आईं।

  • ग्रामीणों के अनुसार पास के बलियारी गांव से एक व्यक्ति का शव बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मिला। वहीं लगभग 55–56 वर्ष के रोहतास नामक व्यक्ति की बाढ़ की स्थिति से उत्पन्न सदमे के कारण मृत्यु हो गई।

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  • एक अन्य घटना में एक ग्रामीण ने बताया कि बाढ़ के दौरान उसकी मां का निधन हो गया। उस समय श्मशान घाट पानी में डूबा हुआ था, इसलिए अंतिम संस्कार खेतों में करना पड़ा।
  • ग्रामीणों ने यह भी बताया कि लंबे समय तक पानी भरे रहने से पशुधन, वाहन, घरेलू सामान और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ।

सहायता की अपील और उपकरणों का आगमन

जब बाढ़ की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो गांव के नेतृत्व ने सहायता की पहल की। गांव की सात सदस्यीय समिति ने सुबह-सुबह जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मुनिंदर धर्मार्थ ट्रस्ट आश्रम कार्यालय जाकर लिखित आवेदन दिया। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिनिधिमंडल लगभग सुबह 5 बजे पहुंचा और करीब 8 बजे आवेदन प्रस्तुत किया

उसी दिन शाम लगभग 5:15 बजे सहायता को स्वीकृति मिली और सांगवान गांव को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए गए। लगभग 24 घंटे के भीतर राहत उपकरण गांव पहुंच गए।

उपलब्ध कराए गए उपकरण

पाइपलाइन: लगभग 20,000 फीट लंबी

ग्रामीणों के अनुसार इतनी जल्दी और इतने बड़े स्तर पर उपकरण पहुंचना उनके लिए आश्चर्यजनक था, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि इसमें कई दिन लग सकते हैं। यह सहायता तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज द्वारा अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत प्रदान की गई।

लगातार पंपिंग से निकला बाढ़ का पानी

उपकरण पहुंचने के बाद मोटरों को स्थापित कर बाढ़ का पानी निकालने का कार्य शुरू किया गया।

ग्रामीणों के अनुसार मशीनें दिन-रात लगातार चलती रहीं ताकि गांव और आसपास के खेतों से जमा पानी निकाला जा सके। कई स्थानों पर पानी की गहराई लगभग 15 फीट थी, जिससे निकासी कार्य बेहद कठिन था।

धीरे-धीरे पंपिंग प्रक्रिया के माध्यम से आवासीय क्षेत्रों और कृषि भूमि से पानी हटना शुरू हुआ।

यह भी देखें:  https://youtu.be/X3CpjUkXo9Y?si=FDH85EpeYIW2uARu

गांव का सरकारी स्कूल, जो पहले पूरी तरह पानी में डूब गया था, पानी घटने के बाद दोबारा खुल गया और बच्चों ने वहां पढ़ाई फिर शुरू कर दी।

खेती की गतिविधियां फिर शुरू

खेतों से पानी निकलने के बाद किसानों ने दोबारा अपनी जमीन तैयार करना शुरू किया।

कुछ क्षेत्रों में मिट्टी अधिक गीली होने के कारण ट्रैक्टर फंस जाते थे, फिर भी ग्रामीणों ने खेतों को पुनः तैयार करने के प्रयास जारी रखे। किसानों के अनुसार अब लगभग 80% से 90% कृषि भूमि में दोबारा बुवाई हो चुकी है, हालांकि कुछ खेतों में अभी भी पानी जमा है।

बाढ़ के दौरान लगभग 70% कृषि भूमि डूब गई थी, और ऊंचे क्षेत्रों में भी करीब पांच फीट पानी भर गया था। पानी निकालने की प्रक्रिया कई महीनों तक चली, तब जाकर खेती दोबारा शुरू हो सकी। आज गांव के अधिकांश खेतों में गेहूं की बुवाई पूरी हो चुकी है और हरे-भरे खेत उस भूमि पर दिखाई दे रहे हैं जो कभी पूरी तरह पानी में डूबी हुई थी।

ग्रामीणों की वापसी और सामान्य जीवन की शुरुआत

पानी कम होने के बाद ग्रामीण धीरे-धीरे सांगवान गांव लौटने लगे।

लंबे समय तक पानी में रहने के कारण कई घरों में दरारें आ गईं और कुछ मकान गिर भी गए। इस कारण कुछ परिवार अभी भी वापस नहीं आ पाए हैं। फिर भी ग्रामीणों के अनुसार अब लगभग 70% लोग गांव लौट चुके हैं और सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं।

गांव की गलियों में आवाजाही बढ़ गई है, खेतों में ट्रैक्टर चलने लगे हैं और पुनर्निर्माण का काम जारी है। स्कूल परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थानों को भी फिर से व्यवस्थित किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि जो गांव बाढ़ के दौरान पूरी तरह सुनसान और खामोश हो गया था, वह अब धीरे-धीरे अपने पुराने जीवन की ओर लौट रहा है।अधिक जानकारी के लिए देखें:
Website:
www.jagatgururampalji.org
YouTube: Sant Rampal Ji Maharaj
Facebook: Spiritual Leader Saint Rampal Ji
X Handle: @SaintRampalJiM

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