Rosa Bonheur Google Doodle: कौन थी रोजा बोनहेउर, जिन्हें गूगल ने डूडल बनाकर किया याद

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Rosa Bonheur Google Doodle in Hindi: Google प्रत्येक प्रसिद्ध शख्शियत, घटनाओं को Doodle बनाकर याद करता है। Rosa Bonheur (रोजा बोनहेउर) की 200वीं जयंती पर, 16 मार्च को Google ने डूडल के माध्यम से फ्रांस की प्रसिद्ध कलाकार Rosa Bonheur को याद किया। जिन्होंने अपने पशु चित्रों और मूर्तियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त की।

Rosa Bonheur Google Doodle: मुख्य बिंदु

  • Rosa Bonheur की जयंती हर साल 16 मार्च के दिन आती है। इस साल यह उनकी 200वीं जयंती है।
  • उनकी 200वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर किया उन्हें याद।
  • प्रसिद्ध चित्रकार थीं Bonheur जिनको उनके बनाए गए चित्रों के लिए जाना जाता है।
  • उनकी कला के कारण उनको काफी बार सम्मानित भी किया गया था जिसमें से एक फ्रांस की महारानी के द्वारा था।
  • उनकी पेंटिंग “द हॉर्स फेयर” से पाई उन्होंने ख्याति और बनी विश्व प्रसिद्ध कुछ ही समय में।
  • कलयुग के इस दौर में जीने की असल राह संत रामपाल जी महाराज ने अपने तत्वज्ञान से पेश की है। 
  • एक ऐसी जीने की राह जिन्होंने करोड़ों लोगों को दी जीने की एक दिशा।

Rosa Bonheur Google Doodle: Rosa Bonheur कौन थी ?

  • Rosa Bonheur, फ्रेंच की एक प्रसिद्ध महिला पशु चित्रकार, मूर्तिकार थी।
  • पशु चित्रों और मूर्तियों के लिए Rosa Bonheur को विश्व स्तर पर ख्याति मिली।
  • 1853 में Rosa Bonheur को पेंटिंग “द हॉर्स फेयर” से दुनियाभर में पहचान मिली। इस पेंटिंग में पेरिस के घोड़ों के मार्केट को दर्शाया गया था। Rosa Bonheur (रोजा बोनहेउर) की यह पेंटिंग आज भी न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट में प्रदर्शित है।
  • पेंटिंग “द हॉर्स फेयर” के लिये फ्रांसीसी महारानी यूजनी ने साल 1865 में Rosa Bonheur को देश के प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया।

Rosa Bonheur का जीवन परिचय (Life of Rosa Bonheur in Hindi)

Rosa Bonheur का जन्म 16 मार्च, 1822 को फ्रांस के बोर्डो में हुआ था। उनके पिता Raymond Bonheur भी एक पेंटर थे, प्रारंभिक आर्ट्स की शिक्षा उन्हें उनके पिता से प्राप्त हुई थी। Bonheur (बोनहेउर) को कला (आर्ट) के क्षेत्र में करियर को तलाशना बिल्कुल नया था, क्योंकि उस समय तक आर्ट के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी ना के बराबर थी। मगर Rosa ने कलात्मक अध्ययन वर्षों तक बारीकी से किया और अनेकों प्रसिद्ध पेंटिंग तैयार की। 77 वर्ष की उम्र में, 25 मई 1899 को फ्रांस के थोमेरी में Rosa Bonheur की मृत्यु हो गई थी।

Rosa Bonheur Google Doodle: Rosa Bonheur को गूगल ने किया याद

Rosa Bonheur in Hindi: गूगल, डूडल के माध्यम से समय समय विश्व प्रसिद्ध शख्सियत, घटनाओं, वैज्ञानिकों आदि को याद करता है। इसी कड़ी में फ्रांसीसी कलाकार Rosa Bonheur की 200वीं जयंती को Google Doodle बनाकर मना रहा है। जिन्होंने अपने पशु चित्रों और मूर्तियों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्धि प्राप्त की। गूगल ने अपने डूडल में भेड़ो के झुंड को कैनवास पर चित्रित करते हुए Rosa Bonheur की एनिमेटेड तस्वीर को दिखाया है।

Rosa Bonheur की कुछ प्रमुख पेंटिंग

आइए जानते है रोजा बोनहेउर की प्रमुख 10 पेंटिंग के नाम:

  1. Ploughing in the Nivernais
  2. The Horse Fair (द हॉर्स फेयर)
  3. Haymaking in the Auvergne
  4. The Highland Shepherd (द हाइलैंड शैफर्ड)
  5. A Family of Deer 
  6. Changing meadows (Changement de pâturages) 
  7. Weaning the Calves
  8. Portrait of William F. Cody
  9. Monarchs of the Forest (मोनार्क्स ऑफ द फॉरेस्ट)

Rosa Bonheur की ख्याति

पशु चित्रकार और मूर्तिकार के रूप में Rosa Bonheur की पेंटिंग्स को 1841 – 1853 के बीच प्रतिष्ठित पेरिस सैलून में प्रदर्शित किया गया और यहीं से उन्हें प्रतिष्ठा मिलना प्रारंभ हुई।

■ यह भी पढ़ें: Stephen Hawking Google Doodle: गूगल ने डूडल बनाकर दिग्गज वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को किया याद

Rosa Bonheur की 1853 में आई पेंटिंग “The Horse Fair”, जिसमें पेरिस में आयोजित घोड़ा बाजार को प्रदर्शित किया गया था, इससे Bonheur को विश्व स्तर पर चित्रकार के रूप में ख्याति मिली। उनकी यह प्रसिद्ध पेंटिंग आज भी न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट में प्रदर्शित है। Bonheur की इस प्रसिद्ध पेंटिंग का सम्मान करने के लिये, उन्हें फ्रांसीसी महारानी यूजनी ने 1865 में देश के सबसे प्रतिष्ठित पुरुस्कारों में से एक ‘लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया। Rosa Bonheur की एक अन्य पेंटिंग “Monarchs of the Forest” को साल 2008 में नीलामी के दौरान 2 लाख डॉलर से अधिक में बेंचा गया था।

जीवन भी एक चित्र जैसा है

हम जो भी अपने जीवन में अच्छा, बुरा करते हैं। वह सब एक चित्र की भाँति रिकॉर्ड होता रहता है। हमारे धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि चित्रगुप्त नाम से एक देव दूत हैं जो हमारे प्रत्येक अच्छे, बुरे कर्म को चित्र की भाँति रिकॉर्ड करते हैं। जिसके फलस्वरूप ही हमें अच्छे कर्मों के कारण सुख प्राप्त होता है और बुरे कर्मों के कारण दुःख प्राप्त होता है।

जीवन जीने के लिए एक मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है

प्रत्येक कार्य में कदम रखने से पूर्व एक मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है। इसी तरह जीवन के इस सफर में भी एक मार्गदर्शक की जरूरत पड़ती है जिसे धर्म शास्त्रों में गुरु या सतगुरु कहा गया है। अध्यात्मिक गुरु ही वह मार्गदर्शक होता है जो हमें इस अनमोल जीवन को जीने की राह देता है। बुरे कर्म जैसे नशा, चोरी, जारी, ठगी, लूट खसोट, मिलावट, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार आदि से होने वाली हानि से परिचित करवाने के बाद भगवान के संविधान को बताता है जिससे मनुष्य इन बुरे कर्मों को त्याग देता है।

साथ ही सतगुरु हमें पूर्ण परमात्मा की सतभक्ति देकर जन्म-मृत्यु से छुटकारा दिलाता है जोकि मनुष्य के लिए सबसे बड़ा दुःख होता है। इसलिए गुरु/सतगुरु को भगवान से भी बड़ा कहा गया है। कबीर परमेश्वर ने कहा है: 

कबीर, गुरु बड़े गोविन्द से, मन में देख विचार। 

हरि सुमरे सो वारि हैं, गुरु सुमरे होय पार।।

आज सतगुरु रूप में इस पृथ्वी पर संत रामपाल जी महाराज जी विद्यमान हैं। जिनसे नाम उपदेश लेकर लोग सभी बुराइयाँ त्याग रहें है और सुखी जीवन जी रहे है। संत रामपाल जी महाराज के मंगल प्रवचन देखिये प्रतिदिन साधना टीवी चैनल पर रात्रि 7:30 – 8:30 PM.

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