Stephen Hawking Google Doodle गूगल ने डूडल से स्टीफन हॉकिंग को किया याद

Stephen Hawking Google Doodle: गूगल ने डूडल बनाकर दिग्गज वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को किया याद

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Stephen Hawking Google Doodle: महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग (scientist stephen hawking) गूगल ने डूडल बनाकर दिग्गज वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को उनकी 80वीं जयंती पर एक एनिमेटेड वीडियो के जरिए श्रद्धांजलि दी है। Google ने हॉकिंग को “इतिहास के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिक के रूप में दिखाने की कोशिश की। स्टीफन हॉकिंग इस पीढ़ी के सबसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में से एक हैं, जिनके ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी पर अभूतपूर्व विचार हैं। हॉकिंग एक लेखक भी थे, जिनकी सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तकों ने आधुनिक विज्ञान को दुनिया भर के लाखों पाठकों तक पहुँचाया।

Stephen Hawking Google Doodle: स्टीफन हॉकिंग से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारी

  • स्टीफन हॉकिंग (Scientist Stephen Hawking) के दिमाग को छोड़कर उनके शरीर का कोई भी भाग काम नहीं करता था। मोटर न्यूरॉन बीमारी से पीड़ित थे स्टीफन हॉकिंग।
  • शारीरिक अक्षमता के बावजूद वे दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में थे।
  • बोलने की क्षमता खोने के बाद, उन्हें संवाद करने के लिए भाषण देने वाले गैजेट पर निर्भर रहना पड़ा।
  • हॉकिंग एक प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्होंने फिज़िक्स (physics) और उससे आगे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। 
  • उनके अद्भुत योगदान में ब्रह्मांड विज्ञान, गुरुत्वाकर्षण (gravity), ब्लैक होल (Black Hole) पर आधारित क्वांटम सिद्धांत, थर्मोडायनामिक्स और सूचना सिद्धांत शामिल हैं। 
  • स्टीफन हॉकिंग नास्तिक थे।

Stephen Hawking Google Doodle से जुड़े मुख्य बिंदु

  • अंग्रेजी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी, ब्रह्मांड विज्ञानी, स्टीफन विलियम हॉकिंग की 80वीं जयंती पर, Google ने अपने अद्वितीय एनिमेटेड डूडल का अनावरण किया।
  • पीले-नारंगी ब्रह्मांड के चित्रण के साथ वैज्ञानिक की कार्टून छवि को डूडल प्रदर्शित कर रहा था।
  • ढाई मिनट के एनिमेशन वीडियो के साथ गूगल ने हॉकिंग को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी।
  • जब कोई स्टीफन हॉकिंग के डूडल पर उसके होम पेज पर क्लिक करता है, तो वह एनिमेटेड वीडियो के साथ खुलता है, जिसे हॉकिंग की विशेष कंप्यूटर जनित आवाज में वर्णित किया गया है ।
  • यह डूडल उनकी खोजों, योगदान और ब्रह्मांड में उपलब्धियों पर प्रकाश डालता है। 
  • वह न्यूरोलॉजिकल बीमारी के साथ उनकी जीवन भर की लड़ाई को भी दर्शाता है।

गूगल पर बनने वाला डूडल क्या है? 

गूगल डूडल एक विशेष अस्थायी परिवर्तन है जो गूगल के होमपेज पर विशेष शख्सियतों, घटनाओं, और उपलब्धियों को प्रदर्शित करता है।

Stephen Hawking Google Doodle: स्टीफन हॉकिंग पर बनाए गए गूगल डूडल पर गूगल ने क्या कहा?

डूडल (doodle) के बारे में अपने विवरण में, Google ने लिखा है कि “आज का वीडियो डूडल इतिहास के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिक दिमागों में से एक, अंग्रेजी ब्रह्मांड विज्ञानी, लेखक और सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग के जंयती पर है। ब्लैक होल (Black Hole) के टकराने से लेकर बिग बैंग तक, ब्रह्मांड की उत्पत्ति और यांत्रिकी पर उनके सिद्धांतों ने आधुनिक भौतिकी में बदलाव लाया था। जबकि उनकी सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तकों ने दुनिया भर में लाखों पाठकों के लिए इस क्षेत्र को आसान बनाया है।

वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का जीवन परिचय

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग (Scientist Stephen Hawking) का जन्म 8 जनवरी, 1942 को एक शोध जीवविज्ञानी और चिकित्सा शोधकर्ता के परिवार में हुआ था। स्टीफन हॉकिंग ने 1962 में यूनिवर्सिटी कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में भौतिकी में स्नातक की डिग्री ली थी। फिर उन्होंने 1966 में ट्रिनिटी हॉल, कैम्ब्रिज से पीएचडी की पढ़ाई की, जहां उन्हें कैंब्रिज में गोनविले और कैयस कॉलेज में एक रिसर्च फेलो के रूप में चुना गया था। 

उन्होंने “ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम” नामक एक पुस्तक भी लिखी जो 1988 में प्रकाशित हुई थी। वह रॉयल सोसाइटी के फेलो के रूप में भी जाने जाते थे और यूएस नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज और पोंटिफिकल एकेडमी ऑफ साइंसेज के सदस्य के रूप में भी शामिल थे। प्रोफेसर स्टीफन हॉकिंग के पास 13 ओनरेरी (honorary) डिग्रियां थीं। 18 मार्च, 2018 को उनका देहांत हो गया था।

Stephen Hawking Google Doodle: स्टीफन हॉकिंग ने कौन-कौन सी किताबें लिखी हैं? 

स्टीफन हॉकिंग (Scientist Stephen Hawking) ने ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम, द ग्रैंड डिजाइन, माय ब्रीफ हिस्ट्री, यूनिवर्स इन नटशेल, द थ्योरी ऑफ एवरीथिंग नामक कई रोचक किताबें लिखी हैं।

स्टीफन हॉकिंग किस बीमारी से पीड़ित थे?

21 साल की उम्र में एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद वह ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों को जानने और इसकी जानकारी लोगों तक पहुंचाने के उत्सुक थे। उन्हें मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी थी। इस बीमारी से मनुष्य का नर्वस सिस्टम धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और शरीर के मूवमेंट करने और कम्यूनिकेशन पावर समाप्त हो जाती है।  डॉक्टरों ने यह भी कहा था कि वो दो साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे। लेकिन 50 से ज्यादा साल जीने के दौरान हॉकिंग ने अपने डॉक्टरों की भविष्यवाणी को गलत साबित कर दिया था। स्टीफन हॉकिंग के दिमाग को छोड़कर उनके शरीर का कोई भी भाग काम नहीं करता था। 

नास्तिक स्टीफन हॉकिंग ईश्वर की बनाई प्रकृति के सामने हार गए थे? 

स्टीफन हॉकिंग (Scientist Stephen Hawking) ईश्वर को नहीं मानते थे। वह नहीं मानते थे कि परमात्मा नाम की कोई चीज है, किंतु परमेश्वर की बनाई हुई सृष्टि प्रकृति के सामने वह हार चुके थे क्योंकि कोई भी वैज्ञानिक उनकी बीमारी को ठीक नहीं कर पाया था और आजीवन उन्होंने बीमारी से ग्रसित होकर कष्ट उठाया। यदि समय रहते वे तत्वदर्शी संत की शरण में आ जाते और वह तत्वदर्शी संत पूर्ण परमेश्वर द्वारा दिए गए सत मंत्र, सत भक्ति करते तो उनकी बीमारी ठीक हो सकती थी। 

पवित्र हिंदू , मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्म के सदग्रंथों में यह प्रमाण है कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है और वह हर तरह की बीमारी को खत्म करने की शक्ति रखता है। किंतु स्टीफन हॉकिंग नास्तिक थे जिस कारण उन्होंने पृथ्वी पर भगवान की उपस्थिति को महसूस नहीं किया और न ही तत्वदर्शी संत की खोज की और न ही शरण ग्रहण की जिस कारण उन्हें आजीवन अपनी बीमारी से संघर्ष करना पड़ा।

ईश्वर के द्वारा बनाई हुई प्रकृति के सामने हार चुके हैं वैज्ञानिक

आज तक कोई भी वैज्ञानिक खून नहीं बना सका है, न ही कोई वैज्ञानिक यह बता सका है कि मृत्यु के बाद इंसान की आत्मा आखिर कहां जाती है, इसे क्यों नहीं पकड़ा जा सकता? सभी वैज्ञानिक ईश्वर केे द्वारा बनाई हुई चीजों के सही जवाब न मिलने से हार चुके हैं। 

ईश्वर ने पृथ्वी जैसे कई ग्रह बना कर छोड़ दिए उसकी शक्ति से यह लगातार घूम रहे हैं। वैज्ञानिक ज्यादा से ज्यादा यह देख सकते हैं कि यह कितना घूम रहे हैं, कैसे घूम रहे हैं लेकिन पूर्ण परमेश्वर ना जाने कितने ग्रह बना चुके हैं और न जाने कितनी पृथ्वी इस ब्रह्मांण्ड में घूम रही हैं। वैज्ञानिक नहीं जानते कि गंगा का जल कभी खराब क्यों नहीं होता, सूरज और चांद किसके इशारे पर निकलते हैं और छिपते हैं? परंतु इस सब की जानकारी एक ही वैज्ञानिक जानता है जिसे आध्यात्मिक वैज्ञानिक या तत्वदर्शी संत कहते हैं।

क्या अध्यात्म और विज्ञान में कोई विरोध है?

अध्यात्म और विज्ञान में कोई विरोध नहीं है परमेश्वर ने हमें इसलिए शिक्षित किया ताकि हम अपना भला और बुरा समझ सकें लेकिन वह नादान और मूर्ख प्राणी होते हैं जो शिक्षा प्राप्त कर लेने के बाद परमेश्वर को भूल जाते हैं उसके विधान को भूल जाते हैं परमात्मा के द्वारा दी हुई बुद्धि से इंसान ने मोबाइल, टीवी, फ्रिज, कूलर, एसी, पंखे, बम ,नयूक्यिर पावर, सौर ऊर्जा, वाहन, औजार इत्यादि सुख सुविधा की चीजें बनाई किंतु इन चीजों को पाकर हमें ईश्वर को नहीं भूलना चाहिए बल्कि ईश्वर का धन्यवाद अदा करना चाहिए।

पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी हमें समझाते हुए कहते हैं, अगर हम बड़े डॉक्टर, राजनेता या वैज्ञानिक बन कर बिना सतभक्ति किए संसार छोड़ कर चले जाते हैं तो हो सकता है हमारे जन्मदिन वाले दिन लोग हमारी मूर्ति पर फूल माला चढ़ा दें यह इसी तरह भी हो सकता है जैसे कोई गूगल पर डूडल बनाकर हमें याद कर ले किंतु वास्तविकता में हम कहीं पशु पक्षी बनकर कष्ट उठा रहे होंगे और दुनिया वाले हमारी फालतू की महिमा गा रहे होंगे जिसका हमें कोई लाभ नहीं मिल रहा होगा अर्थात बिना सत भक्ति किए हम अपना जीवन नाश कर चुके होंगे इसलिए हमें चाहिए कि हम जो भी डॉक्टर, इंजीनियर, नेता, राजनेता या अन्य कुछ भी हों हमें सत भक्ति करते हुए अपने पदों पर ईश्वर के डर से ईमानदारी से कार्य करना चाहिए इससे हमारा वर्तमान जीवन भी अच्छे से गुजरेगा और भविष्य में परमेश्वर और मोक्ष की प्राप्ति होगी।

नास्तिक लोग राक्षस समान होते हैं: श्रीमद्भगवद्गीता 

गीता अध्याय 16 के श्लोक 8 में कहा है कि वे राक्षस स्वभाव वाले कहा करते हैं कि संसार निराधार है। असत्य तथा बिना भगवान के है अपने आप (नर-मादा के संयोग से) उत्पन्न है। केवल काम (सैक्स) ही इसका कारण है। गीता अध्याय 16 के श्लोक 9 में कहा है कि राक्षस वृति के व्यक्ति मिथ्या ज्ञान का अनुसरण करके ये नष्ट आत्मा (गिरी हुई आत्मा) मंद बुद्धि हैं। वे अपकार (बुरा) करने वाले क्रूरकर्मी (भयंकर कर्म करने वाले) जगत के नाश के लिए ही उत्पन्न होते हैं। गीता अध्याय 16 का श्लोक 10 – राक्षस वृति के व्यक्ति पाखण्ड, मान, मद्य युक्त, मुश्किल से पूर्ण होने वाली इच्छाओं का आश्रय लेकर मोह (अज्ञान) वश मिथ्या सिद्धांतों को ग्रहण करके भ्रष्ट आचरणों को धारण किए हुए घूमा करते हैं।

कैसा है ईश्वर का स्वरूप?

सभी विद्वान पाठकों से निवेदन है कि ईश्वर साकार है उसी ने मानव को अपने जैसा रुप दिया और पृथ्वी और आसमान के बीच सबकुछ छः दिन में बनाया और सातवें दिन तख्त पर विश्राम किया। आप सभी पृथ्वी और आसमान के मालिक के बारे में जानने के लिए एक बार ज्ञान गंगा नामक पुस्तक अवश्य पढ़ें और ब्रह्मांड से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए अपने मोबाइल फोन के प्लेस्टोर से Sant Rampalji Maharaj एप्प डाउनलोड करें।


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