मान और मर्यादा की रक्षा का उत्सव “श्री रामनवमी”

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हिन्दुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है “श्री रामनवमी“।
इसी दिन चैत्र नवरात्र भी समाप्त होते हैं।
जब कभी भी रामनवमी की बात होती है मन में सबसे पहला प्रश्न उठता है कि इस वर्ष की “रामनवमी कब है?
भारतवर्ष में हिंदू संप्रदाय रामनवमी पर्व को दशरथ पुत्र राम के जन्मदिन अर्थात “रामनवमी” के रुप में मनाता है। रामनवमी हिंदुओं के प्रसिद्ध त्यौहारों में से एक है और यह त्यौहार हर साल चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अप्रैल माह (महीने) में मनाया जाता है। इस वर्ष “2019 में रामनवमी” पर्व 14 अप्रैल को मनाया जा रहा है।
यह त्यौहार लगभग पिछले 1000 सालों से मनाया जा रहा है।
साधकों की आस्थानुसार इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीराम जी का जन्म हुआ था। श्रद्धालु इस उत्सव को श्रेष्ठ साधना जान कर बहुत ही श्रद्धा के साथ मनाते हुए व्रत-उपवास, पूजा, साधना, करके पुण्य के भागीदार होने की कल्पना करते हैं।

क्या रामनवमी मनाने से दुखों का नाश व पूर्ण मोक्ष हो सकता है?

रामनवमी मनाकर की गई भक्तिरूपी क्रियाओं को पूरा करके मनुष्य अगर खुद को पूर्ण मोक्ष का अधिकारी मानता है या इस दिन व्रत-उपवास करके समझता है कि जीवन में आने वाले दुखों से हमें छुटकारा मिलेगा तो यह भक्तों का भ्रम मात्र है, क्योंकि मोक्षदायक व पूर्ण सुखदायक भगवान उसे कहते हैं जिसका सामर्थ्य और शक्तियां असीमित हों और इसीलिए मनुष्य आपत्ति-विपत्ति में भगवान को याद करता है क्योंकि उसे मालूम होता है कि भगवान न सिर्फ संकटों में साथ देता है बल्कि पाप को क्षमा करके बड़े से बड़े प्रारब्ध को भी भोगने से बचा सकता है अर्थात जीवन में आने वाले दुखों से निजात दिला सकता है और यही वह पूरा भगवान अर्थात पूर्ण परमात्मा होता है जिसे आत्मा का दयालु परमपिता कहा जाता है।

लेकिन अगर दशरथ पुत्र श्री राम जी के जीवन चरित्र पर नजर दौड़ाई जाए तो उनका पूरा जीवनकाल दुख और संकटों से जूझने में निकल गया।
श्री राम जी विष्णु जी के 7 वे अवतार होने के बावजूद अपने प्रारब्ध के संकटों को नहीं टाल पाए। श्री राम जी ने अपना आधा जीवन वन में बिता दिया। फिर असुर रावण श्री राम जी की पत्नी सीता को उठाकर ले गया। अनेकों समस्याओं से संघर्ष करके अपनी पत्नी सीता को रावण की कैद से छुड़ाया। फिर एक धोबी के व्यंग से आहत होकर अपनी गर्भवती पत्नी सीता को बेसहारा वन में छोड़ दिया जिसके वियोग में श्री राम जी पल-पल, तिल-तिल मरते रहे और अंत मे सरयू नदी में आत्महत्या करके जीवित समाधि लेनी पड़ी। क्या यही था भगवान जिसने पूरा जीवन अपनी पत्नी और बच्चों के बिछोह में बिता दिया।
क्या श्री राम जी में इतना सामर्थ्य भी नहीं था कि वह अपने ऊपर आये कष्टों से खुद को बचा सकें।

विष्णु जी के 7 वें अवतार होकर भी श्री राम जी समर्थ क्यों नहीं?

त्रेतायुग में श्री राम जी, श्री विष्णु के अवतार जन्मे थे और श्री विष्णु जी ही नहीं बल्कि ब्रह्मा, विष्णु, महेश यह तीनों देवता ही नाशवान भगवान हैं। अजर-अमर नहीं हैं। इनकी जन्म तथा मृत्यु होती है। प्रमाण के लिए देखें, श्री देवी महापुराण, अध्याय 5, स्कंद 3 तथा पृष्ठ संख्या 123 पर। इसलिए हम यह कह रहे हैं कि उन्हें सर्वशक्तिमान ईश्वर कहना वृथा (गलत) है।

कौन है समर्थ व शक्तिशाली पूर्ण परमात्मा?

एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट-घट में बैठा।
एक राम का सकल पसारा, एक राम जग से न्यारा।।
जिस असली और सच्चे समर्थ “राम” की महिमा वेद-शास्त्र भी गाते है उस असली राम का नाम है “कबीर”।
यही वो कबीर राम है जो असंख्य ब्रह्मांडों का स्वामी है जिसने छः दिन में सृष्टि रची और सातवें दिन तख्त पर जा विराजा।
जब दशरथ पुत्र श्री राम का नामकरण हुआ था उससे पहले भी शैशव काल से कई और राम भी थे और आज भी हैं जिस वजह से राम का यह नाम प्रचलित होने से दशरथ पुत्र का नाम भी “राम” ही रखा गया।

कबीर- राम राम सब जगत बखाने।
आदि राम कोई बिरला जाने।।

जिस असली राम की महिमा असंख्य ब्रह्मांडों में गुंजायमान होती चली गई वह असली राम कोई और नहीं बल्कि वह कबीर साहेब हैं जिसने एक धाणक जुलाहे की भूमिका अदा करके समाज को सतभक्ति करने की विधि बताई। वर्तमान में राजा दशरथ के पुत्र श्री रामचंद्र जी को पूरी दुनिया जानती है लेकिन आदि राम अर्थात सबसे पहले पुरुष (परमेश्वर) को कोई नहीं जानता।
यही वह कबीर राम है जो सतलोक से गति करके चारो युगों में सशरीर आता है और सशरीर वापस चला जाता है। कलयुग में यह अपने असली नाम “कबीर” नाम से आये थे तथा त्रेतायुग में मुनीन्द्र ऋषि के नाम से विख्यात हुए थे जिन्होंने श्री राम जी के कई काज संवारे थे।

श्री राम को पूर्ण परमात्मा कबीर जी ने कब और कैसे दिया सहारा?

श्री राम ने लंका में प्रवेश करने के लिए समुद्रराज से रास्ता मांगा लेकिन समुद्र ने रास्ता नहीं दिया तो श्री राम जी क्रोधवश समुद्र को नष्ट करने पर उतारू हो गए लेकिन असफल रहे, फिर यह तय हुआ कि नल-नील को एक वरदान प्राप्त है कि उनके हाथ से कोई भी वस्तु पानी में नही डूबेगी। अतः नल-नील को पत्थर की शिलाओं द्वारा समुद्र पर सेतु बनाने का कार्य सौंपा गया लेकिन नल-नील का प्रयास विफल रहा, हर पत्थर पानी में तैरने की बजाय डूबने लगता। क्योंकि उन्होंने गुरु को याद नहीं किया अपितु अपनी महिमा याद रही। फिर मुनीन्द्र, ऋषि रूप में आये कबीर परमात्मा ने एक सीमित स्थान को रेखांकित करके घेरा बनाया और कहा कि इस घेरे के भीतर के पत्थर पानी में फेंको, नही डूबेंगे और ऐसा ही हुआ तथा सेतु निर्माण सम्पन्न हुआ। अगर दशरथ पुत्र श्री राम जी समर्थ और शक्तिशाली परमात्मा होते तो समुद्र पर सेतु निर्माण कोई बहुत बड़ा कार्य नहीं था, अगस्त्य ऋषि ने एक ही घूंट में सातों समंदर एक साथ पी लिए थे।
तो फिर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि ऋषि अगस्त्य जितने समर्थ भी श्री राम जी नहीं थे।

श्री राम ने रावण को मारने के लिए चौदह दिन लगातार युद्ध किया और रावण की नाभि पर अपने बाण का निशाना लगाता रहा लेकिन रावण को नहीं मार पाया, जब श्री राम जी थक गए तो पूर्ण परमात्मा को याद किया और पूर्ण परमात्मा कबीर जी की शक्ति से श्री राम का निशाना सही जगह पर लगा और रावण का वध हुआ।

जरा विचार करे:- श्री राम जी पर आई विपत्तियों में स्वयं विष्णु जी मदद नहीं कर सके क्योंकि ब्रह्मा, विष्णु, महेश खुद विधि के विधान से बंधे हुए हैं जो कर्मफल भोगकर ही प्रारब्ध को काट सकते हैं, लेकिन पूर्ण परमात्मा कबीर जी की सतभक्ति पूरी विधि से करके मनुष्य ना सिर्फ जीवन में सुखी होगा बल्कि पूर्ण मोक्ष भी प्राप्त करेगा।
संत रामपालजी महाराज कोई और नहीं बल्कि कबीर परमात्मा के स्वरूप हैं उनकी शरण ग्रहण करो और अपना कल्याण कराओ।

वर्तमान में संत रामपालजी महाराज जेल में क्यों हैं?

संत रामपालजी महाराज का उपरोक्त प्रमाणित ज्ञान व उद्देश्य नकली संत-महंत और नकली गुरुओं को रास नहीं आया और संत रामपालजी महाराज को एक सोची समझी साजिश के तहत झूठे केसों में फंसाकर जेल में डाल दिया गया।
लेकिन संत रामपालजी महाराज कोई साधारण पुरुष नहीं बल्कि पूर्ण परमात्मा कबीर जी के अवतार हैं, नियती ने उन्हें भारत को आध्यात्मिक विश्व गुरु बनाने के लिए चुना है। जिनका उद्देश्य समाज को सत्यमार्ग और सतभक्ति प्रदान करके अपने वास्तविक निज घर सतलोक ले जाना है, जिसके लिए संत जी आज भी इन भ्रष्टाचारियों से प्रताड़ित होने के बावजूद अपने उद्देश्य पर अडिग हैं, कायम हैं।

संत रामपालजी महाराज द्वारा प्रमाणित आध्यात्मिक ज्ञान को समझने के लिए पढें पवित्र पुस्तक “ज्ञान गंगा” व “जीने की राह”।
अगर संत रामपालजी महाराज व उनके अनुयायियों पर हुए अत्याचारों की सही जानकारी चाहिए तो Youtube पर search करें “बरवाला कांड की सच्चाई”
अधिक जानकारी के लिए इस वेबसाइट jagatgururampalji.org पर जाएं।

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