राम नवमी (Ram Navami) 2022: कौन है आदि राम तथा कैसे मिलेगा पूर्ण मोक्ष?

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Last Updated on 6 April 2022, 10:47 PM IST: राम नवमी 2022: भारत एक धार्मिक देश है जहां महत्वपूर्ण संतों, महापुरूषों, नेताओं और भगवानों के जन्मदिन भी हर्षोल्लास और त्योहार के रूप में मनाए जाते हैं। ऐसे ही एक त्रिदेव भगवान हैं विष्णु जी, जिनका जन्म त्रेतायुग में राम के रूप में हुआ था। राम का जन्म जिस दिन हुआ उसे लोग रामनवमी (Ram Navami in Hindi) के रूप में मनाते हैं। तो आइए आपको प्रभु राम जी और रामनवमी के बारे में विस्तार से बताते हैं।

कब मनाया जाएगा रामनवमी का त्योहार (Ram Navami in Hindi)? 

हिंदू पंचांग (Panchang) के अनुसार चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हर साल रामनवमी (Ramnavmi) का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्योहार 10 अप्रैल, 2022 के दिन मनाया जाएगा। मान्यता है कि यह त्योहार भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम जी के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। 

रामनवमी का इतिहास (History of Ram Navami in Hindi)

अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां थीं लेकिन किसी को संतान नहीं थी। राजा दशरथ ने ऋषियों के कहने से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। उसके बाद राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या ने भगवान राम को, कैकेयी ने भरत को, सुमित्रा ने जुड़वा बच्चों लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। भगवान विष्णु अवतार राम जी ने लंका के राजा रावण का वध किया था। 

यह भी पढ़ें: Chaitra Navratri [Hindi]: चैत्र नवरात्रि पर जानिए माँ दुर्गा किस भगवान की पूजा करने को कहा है? कौन है पूर्ण परमात्मा?

क्या दशरथ पुत्र राम पूर्ण परमेश्वर हैं? 

दशरथ पुत्र राम जी ने कई ऐसे चमत्कार किए जिसके कारण लोग उन्हें भगवान कहने लगे लेकिन वास्तव में वे चमत्कार उन्होंने पूर्ण परमात्मा की शक्ति से पूरे किए। जब सीता जी को रावण की कैद से आजाद कराने के लिए समुद्र पर पुल बनाना था तब वह काम भी पूर्ण परमेश्वर ने ही अपना आशीर्वाद देकर पूरा कराया। जानें कैसे बना समुद्र पर पुल?

रामनवमी (Ram Navami in Hindi) | यदि ये बात मान भी ली जाए कि समुद्र पर पुल दशरथ पुत्र राम ने अपने पराक्रम से बनाया तो भी इससे उन्हें भगवान नहीं माना जा सकता क्योंकि सातों समुद्रों को अगस्त ऋषि ने एक ही घूंट में पी लिया था जिससे यह साबित होता है कि वह श्रीराम से अधिक सामर्थ्य और सिद्धियां रखते थे।

कबीर, समुद्र पाटि लंका गये, सीता को भरतार।

ताहि अगस्त मुनि पीय गयो, इनमें कौन करतार।।

रामनवमी (Ram Navami in Hindi): क्या सच में भगवान माँ के पेट से जन्म लेता है? 

अब आप सोच रहे होंगे कि क्या परमात्मा का जन्म आम इंसानों की तरह माँ के पेट से होता है? तो अब चलिए जान लेते हैं परमात्मा के जन्म के बारे में। पूर्ण परमात्मा के अवतार तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ने बताया है कि परमात्मा तीन प्रकार की स्थिति में रहता है। पहली स्थिति में वो ऊपर सतलोक में सिंहासन पर विराजमान रहता है, दूसरी स्थिति में वो जिंदा महात्मा के रूप में अपने भक्तों को आकर मिलता है और तीसरी स्थिति में वे शिशु रूप में एक तालाब में कमल के पुष्प पर प्रकट होकर धरती पर अवतरित होता है और उनका पोषण कुंवारी गाय के दूध से होता है। जबकि अयोध्या पति राम का जन्म मां के गर्भ से हुआ और वह ऊपर बताई गई तीनों अवस्थाओं में नहीं आते।

Read in English: Ram Navami: Let Us Recognize the Aadi Ram on This Ram Navami 

वो प्रभु कोई और नहीं बल्कि कबीर साहेब हैं जो चारो युगों में आते हैं प्रमाण के लिए देखें ये वाणी – 

सतयुग में सतसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनिन्द्र मेरा।

द्वापर में करूणामय कहलाया, कलियुग नाम कबीर धराया।।

कौन है वो आदि राम जिसका जन्म मां से नहीं होता?

रामनवमी (Ram Navami in Hindi) | यह तो हम सभी जानते हैं कि जो जन्म लेता है वो मृत्यु को भी प्राप्त होता है लेकिन पूर्ण परमात्मा / आदि राम जन्म – मृत्यु से रहित है वे माँ के पेट से जन्म नहीं लेता। कबीर साहेब ही वे परमात्मा हैं जिनका जन्म मां से नहीं होता लेकिन यह कैसे संभव है? यह प्रश्न आपके मन में उठ रहा होगा कि इसका प्रमाण कहां है? हम कैसे यकीन करें? तो आगे जानते हैं प्रमाण सहित। 

  1. अविनाशी और अजन्मे परमात्मा के विषय में गुरु नानक देव जी ने अपनी वाणी में स्पष्ट किया है कि वो पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब हैं। नानक साहेब जी ने अपनी वाणी में बताया है कि कबीर परमेश्वर कोई और नहीं बल्कि वही कबीर साहेब हैं जो धानक रूप में काशी में रहते थे।

एक सुआन दुई सुआनी नाल, भलके भौंकही सदा बिआल।

कुड़ छुरा मुठा मुरदार, धाणक रूप रहा करतार।।

इसका प्रमाण श्री गुरु ग्रन्थ साहिब के राग ‘‘सिरी‘‘ महला 1 पृष्ठ नं. 24 पर शब्द नं. 29.

  1. पूर्ण परमात्मा कविर्देव विशेष बालक के रूप में प्रकट होता है। उस परमात्मा का जन्म माँ के गर्भ से नहीं होता। वह बालक रूप में आया परमात्मा कुंवारी गाय का दूध पीता है l वह अपनी वाणी को सरल भाषा में अपने मुख कमल से लोगों को बताता है। 

प्रमाण-: ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 1 

  1. गुरु नानक देव ने अपनी अमृत वाणी में कबीर साहेब जी के बारे में स्पष्ट रूप से बताया है। नानक साहेब ने लिखा है जो उन्हें जो जिंदा महात्मा रूप में मिले थे वे कोई और नहीं, बल्कि काशी वाले कबीर साहेब थे। नानक साहेब की वाणी में बहुत जगह यह प्रमाण है कि कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा हैं, वे ही इस सृष्टि के रचनहार हैं।

हक्का कबीर करीम तू, बेएब परवरदीगार।

नानक बुगोयद जनु तुरा, तेरे चाकरां पाखाक।।

इसी का प्रमाण गुरु गुरुग्रन्थ साहेब पृष्ठ 721 पर अपनी अमृतवाणी महला 1 में लिखा है। 

  1. कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा हैं, इसका प्रमाण पवित्र कुरान शरीफ में भी मिलता है। 

प्रमाण:- पवित्र कुरान शरीफ के सुरत फुर्कानि 25 आयत 52 से 59 में लिखा है कि कबीर परमात्मा ने छः दिन में सृष्टि की रचना की तथा सातवें दिन तख्त पर जा विराजा। जिससे यह सिद्ध होता है कि परमात्मा सृष्टि व हमारा जनक है और परमात्मा स्वयंभू भी है ।

  1. पवित्र बाईबल में भी यही प्रमाण है कि उस परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार बनाया। इससे सिद्ध है कि प्रभु भी मनुष्य जैसे शरीर युक्त वाला है तथा उसका नाम कबीर है।

6. आदरणीय दादू साहेब की वाणी में भी यह प्रमाण है कि जब दादू जी सात वर्ष के थे तो परमात्मा कबीर साहेब उन्हें जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिले थे। कबीर जी उन्हें सतलोक लेकर गए, ज्ञान समझाया और वापिस पृथ्वी पर छोड़ा। 

जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार। 

दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार।।

  1. आदरणीय गरीबदास जी की वाणी में भी कबीर परमेश्वर से मिलने का प्रमाण है। गरीबदास जी महाराज जी ने बताया कि मुझे और दादू को जो आकर मिला और सतज्ञान दिया वह कोई और नहीं बल्कि काशी वाला जुलाहा कबीर परमेश्वर ही है।

हम सुल्तानी नानक तारे, दादू कूं उपदेश दिया। 

जाति जुलाहा भेद न पाया, काशी माहे कबीर हुआ।।

सच्चे गुरु की क्या पहचान है? 

सिर्फ सच्चा संत ही हमें पूर्ण परमात्मा से मिलवा सकता है क्योंकि गुरु परमात्मा और आत्मा के बीच कड़ी का काम करता है। लेकिन उससे पहले सच्चे गुरु के बारे में जानना जरूरी है, तो चलिए जानते हैं सच्चे गुरु की पहचान क्या है? श्रीमदभगवत गीता के अध्याय 15 के श्लोक 1 से 4 तथा श्लोक 16 व 17 में प्रमाण है कि जो संत उल्टे लटके संसार रूपी वृक्ष के सभी हिस्सों को समझा देगा, वही पूर्ण संत है। कबीर साहेब ने धर्मदास जी को बताया था कि मेरा संत सतभक्ति बताएगा लेकिन सभी संत व महंत उसके साथ झगड़ा करेंगे। यह सच्चे संत की पहचान होगी। 

जो मम संत सत उपदेश दृढ़ावै (बतावै), वाके संग सभि राड़ बढ़ावै।

या सब संत महंतन की करणी, धर्मदास मैं तो से वर्णी।।

पूर्ण संत का वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ नं. 265 बोध सागर में मिलता है व गीता जी के अध्याय नं. 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या नं. 822 में मिलता है। पूर्ण संत तीन स्थिति में नाम प्रदान करता है। यही उस सच्चे संत की पहचान है। सतगुरु गरीबदास जी ने भी अपनी वाणी में कहा कि वो सच्चा संत चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा अर्थात् उनका सार निकाल कर बताएगा।

सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद। 

चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।

वर्तमान में कौन है पूर्ण संत?

वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण संत है। उन्होंने सतमार्ग को उजागर किया है। उनके द्वारा दिए जा रहे सतज्ञान को जानने के लिए Satlok Ashram YouTube Channel Visit करे। उन्होंने विश्वभर में 500 से भी अधिक नामदान केंद्र खोले है। आप अपने नजदीकी नामदान केंद्र का पता करके निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

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