Rajasthan Police Recruitment Exam Date: राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के हुए केंद्र जारी, जिन्हें आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है। अभ्यर्थी एसओएस आईडी लॉगिन करके अपना केंद्र जाँच सकते हैं।

Rajasthan Police Recruitment Exam Date के मुख्य बिंदु

  • राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा के केंद्र जारी हो चुके हैं। परीक्षा के प्रवेश पत्र भी जल्द ही जारी होने की संभावना है।
  • कांस्टेबल, जीडी और ड्राइवर पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 6, 7 और 8 नवम्बर से अलग अलग पारियों (शिफ्टों) में किया जाना है।
  • परीक्षा के अलावा भी है जीवन का उद्देश्य। जो डूबा सो तर गया और जो बच गया सो हार गया, जानें गूढ़ रहस्य।

राजस्थान में पुलिस कांस्टेबल परीक्षा केंद्र निर्धारण

राजस्थान में पुलिस कांस्टेबल के लिए कुल 5438 पदों के लिए 17.5 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किये गए थे। सर्वप्रथम यह परीक्षा मई में आयोजित होने वाली थी जोकि महामारी के चलते आयोजित नहीं हो पाई। तत्पश्चात यह परीक्षा जुलाई में होने की संभावना थी किन्तु अंततः अब नवम्बर के प्रथम सप्ताह में ही आयोजित की जा रही है। परीक्षा के केंद्र प्रत्येक जिले में निर्धारित कर दिए गए हैं।

कोरोना का रखा जाएगा विशेष ख्याल

नवम्बर में होने वाली परीक्षा को लेकर सारा पुलिस मुख्यालय सचेत हो गया है। कोरोना के कारण परीक्षाओं का आयोजन अलग अलग तिथियों पर कई शिफ्टों में होना है। इस परीक्षा के लिए योग्यता 8वीं व 10वीं मांगी गई थी जिसके कारण इसे भरने वाले लोगों की संख्या अधिक है। इसके लिए पुलिस विभाग तैयारियों में जुट गया है।

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लिखित परीक्षा के लिए केंद्र सूची आनलाइन जारी

राजस्थान पुलिस कांस्टेबल लिखित परीक्षा 2020 के लिए परीक्षा केंद्र के जिले के बारे में जानकारी 25 अक्टूबर 2020 को दे दी गई है। अभ्यर्थी इसे अपनी SSO ID को लॉगिन करके देख सकते हैं। एक साथ लाखों लोगों के माध्यम से वेबसाइट खोलने के कारण वेबसाइट का सर्वर डाउन हो गया है एवं तकनीकी परेशानियों के कारण वेबसाइट खुलने में दिक्कत आ रही है ऐसे में अभ्यर्थियों से अनुरोध है कि वे बार बार वेबसाइट खोलते रहें।

Rajasthan Police Recruitment Exam Date: परीक्षा केंद्र की जानकारी ऐसे करें चेक

सबसे पहले राजस्थान की आधिकारिक वेबसाइट police.rajasthan.gov. in पर जाएँ। होम पेज पर आपको राजस्थान पुलिस कांस्टेबल की भर्ती का डायरेक्ट लिंक मिलेगा यहां अपने जिले की लोकेशन चुनें एवं इसके बाद आपके सामने परीक्षा केंद्रों की जानकारी स्वतः ही आ जायेगी।

रोजगार की परीक्षाओं से इतर कौन सी परीक्षा है मानव का उद्देश्य

मानव का जन्म मुश्किल से प्राप्त होता है। किंतु आमतौर पर जन्म लेने, शिक्षा प्राप्त कर रोजगार पाने की होड़ में जुट जाने और उसमें जगह बनाकर मात्र विवाह, प्रजनन और धन जोड़कर मर जाने को ही जीवन का उद्देश्य कहा जाता है। धन जोड़ने की अंधी दौड़ में मानव लगा रहता है। कबीर परमेश्वर कहते हैं-

कबीर, काया तेरी है नहीं, माया कहाँ से होय |
भक्ति कर दिल पाक से, जीवन है दिन दोय ||

बिन उपदेश अचम्भ है, क्यों जिवत हैं प्राण |
भक्ति बिना कहाँ ठौर है, ये नर नाहीं पाषाण ||

वास्तव में जो जीवन का उद्देश्य है वो आज की पीढ़ी के लिए मज़ाक और मात्र बुढ़ापे की वस्तु कह दिया जाता है। उन्हें लगता है कि भक्ति उनके लिए नहीं है और जीवन का आनंद लेने की कोशिश में आयु कब निकल जाती है और इस काल लोक में आयु का पता भी नहीं चलता है और जीवन का आनन्द भी नहीं ले पाते अंततः कुछ समझ नहीं आता। कुछ तो अपनी जवानी में ही अकाल मौत गुज़र जाते हैं और रहे सहे भक्ति न करने के अभाव में कष्ट भोगते हैं और यदि भक्ति करते हैं तो वे तत्वदर्शी सन्त की शरण नहीं पाते और तीर्थ, व्रत-उपवास, मंदिर जाने को ही भक्ति समझ कर गलत साधना करते रहते हैं। जबकि गीता अध्याय 16 के श्लोक 23 के अनुसार शास्त्रविरुद्ध साधना करने वाले न सुख को प्राप्त होते हैं और न ही परम गति को।

क्या है शास्त्रानुकूल भक्ति?

सर्वप्रथम यह ध्यान रहे कि भक्ति ही मानव का मूल उद्देश्य है तथा भक्ति करने की कोई आयु नहीं होती। भक्ति के संस्कार तो बाल्यकाल से ही पड़ जाने चाहिए। बुढ़ापा भक्ति के लिये नहीं है बल्कि बुढ़ापे तक तो भक्तिधन जुड़ जाना चाहिए। तत्वदर्शी सन्त की शरण में जाकर उसकी बताई भक्ति साधना वास्तविक भक्ति है। इसलिए ही गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 में तत्वदर्शी सन्त की खोज करने के लिए कहा गया है। तत्वदर्शी सन्त की पहचान भी हमारे शास्त्रों में दी हुई है और ऐसे सन्त से नामदीक्षा लेकर भक्ति करना अकाल मृत्यु, बड़ी और लाइलाज बीमारियों, वृहत विपत्तियों से बचाता है।

इससे इस लोक में सुख होता ही है साथ ही मृत्यु के मोक्ष प्राप्ति होती है और जीवात्मा सतलोक गमन करती है जो आदि अमर स्थान है, जहां दुख, तकलीफ, चिंता, दर्द, डर, विपत्ति, रोग, मृत्यु, बुढ़ापे का नामोनिशान तक नहीं है और ना ही कर्म का खेल है। अतः तत्वदर्शी सन्त द्वारा बताई गई शास्त्रानुकूल भक्ति से इस लोक में और परलोक दोनो लोको में सुख और गति होती है। वर्तमान में पूरे विश्व मे एकमात्र तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज हैं, उनकी शरण में आएं और नामदीक्षा लेकर अपना कल्याण करवाएं। अधिक जानकारी के लिए सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर सत्संग श्रवण करें ।