हरियाणा के झज्जर जिले की बहादुरगढ़ तहसील के गांव दहकोरा में मानसून के दौरान भारी जलभराव से किसानों की सैकड़ों एकड़ फसलें, खासकर बाजरा और धान, प्रभावित होती थीं। जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था न होने पर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, संबंधित मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मदद मांगी, लेकिन कोई प्रभावी सहायता नहीं मिली। इस समस्या के समाधान के लिए ग्राम पंचायत और किसानों ने संत रामपाल जी महाराज से सहायता की अपील की। किसान मजदूर बचाओ अभियान के तहत पहले चरण में गांव के उत्तरी क्षेत्र के लिए 14,000 फीट 8 इंची पाइपलाइन और 10 एचपी की 3 मोटरें उपलब्ध कराई गई थीं। इनमें से एक मोटर पेयजल आपूर्ति के लिए दी गई थी।
दूसरे चरण में दक्षिणी क्षेत्र के लिए सहायता
दक्षिणी क्षेत्र में जलभराव की समस्या बनी रहने पर ग्राम पंचायत दहकोरा के नंबरदार एवं ब्लॉक समिति प्रतिनिधि मंजीत, ग्राम सरपंच और ग्रामीणों ने दोबारा सहायता मांगी। इसके बाद संत रामपाल जी महाराज ने किसान मजदूर बचाओ अभियान चरण 2 के तहत दूसरी बार सहायता स्वीकृत की।
प्रार्थना के अगले ही दिन सर्वेक्षण टीम ने ड्रोन और ग्राउंड सर्वे के माध्यम से दक्षिणी क्षेत्र के 5 प्रमुख बिंदुओं का निरीक्षण किया। सर्वेक्षण का उद्देश्य जलमग्न खेतों से बहादुरगढ़ ड्रेन, जिसे पाक ड्रेन भी कहा जाता है, तक पानी पहुंचाने के लिए आवश्यक पाइपलाइन और मोटरों की क्षमता निर्धारित करना था। रिपोर्ट के अनुसार 12,650 फीट 8 इंची पाइपलाइन और 10 एचपी की 5 मोटरों की आवश्यकता बताई गई, जिसे संत रामपाल जी महाराज ने स्वीकृति दे दी।
19 जून को गांव पहुंची राहत सामग्री
आदेश के अनुसार 19 जून को 12,650 फीट 8 इंची पीवीसी पाइपों से भरे ट्रक दहकोरा पहुंचे। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने शिव मंदिर के सामने मंगलाचरण, ढोल-नगाड़ों, लाउडस्पीकर और पुष्प वर्षा के साथ राहत सामग्री का स्वागत किया।
पाइपलाइन के साथ उसे भूमिगत बिछाने के लिए एयर वाल्व, बैंड प्लेट, फेविकोल, नट-बोल्ट, क्लिप, जॉइंट्स और अन्य कनेक्टिंग पार्ट्स भी उपलब्ध कराए गए।
पाइपलाइन बिछाने के बाद मिलेंगी 5 मोटरें
ग्राम पंचायत को पाइपलाइन भूमिगत बिछाने के निर्देश दिए गए हैं। काम के दौरान पाइपों में पानी छोड़कर लीकेज की जांच करना और निर्धारित स्थानों पर एयर वाल्व लगाना अनिवार्य किया गया है।
पाइपलाइन पूरी होने के बाद सर्वेक्षण टीम दोबारा भौतिक सत्यापन करेगी। पाइपलाइन सही पाए जाने पर 10 एचपी की 5 मोटरें, ग्राम पंचायत को हस्तांतरित की जाएंगी। ग्राम सरपंच के अनुसार फिलहाल 2 से 3 मशीनें पाइपलाइन बिछाने में लगी हैं और लगभग एक महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य है।
1,238 एकड़ कृषि भूमि और सार्वजनिक ढांचे को लाभ
दूसरे चरण की सहायता से दहकोरा की जल निकासी व्यवस्था मजबूत होने और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद है। इससे गांव की करीब 1,238 एकड़ कृषि भूमि को जलमग्न होने से बचाने में मदद मिलेगी। जलभराव से प्रभावित 4 प्रमुख मंदिरों, जिनमें समाधि वाला मंदिर और शिव मंदिर शामिल हैं, तथा करोड़ों रुपये की लागत से बने सरकारी स्कूल भवन को भी सुरक्षा मिलेगी।
भूमिगत पाइपलाइन का उपयोग दो तरह से किया जा सकेगा। बारिश के मौसम में इससे खेतों का अतिरिक्त पानी ड्रेन में निकाला जाएगा, जबकि सूखे मौसम में ड्रेन या नहर से पानी लेकर सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।
संत रामपाल जी महाराज के अनुसार किसान मजदूर बचाओ अभियान चरण 2, शुद्ध पेयजल सेवा अभियान और पशुधन बचाओ शुद्ध जल पिलाओ अभियान के तहत देशभर के 100 से अधिक जल संकटग्रस्त और बाढ़ प्रभावित गांवों में इसी तरह की राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी है।
दहकोरा में दूसरे चरण की सहायता का विवरण
| विवरण | आंकड़े / जानकारी |
| सहायता | द्वितीय चरण, दूसरी बार सेवा |
| पाइपलाइन | 12,650 फीट, 8 इंच |
| स्वीकृत मोटरें | 10 एचपी की 5 मोटरें |
| सर्वेक्षण | दक्षिणी क्षेत्र के 5 स्थान |
| सहायक सामग्री | एयर वाल्व, बैंड प्लेट, फेविकोल, नट-बोल्ट, क्लिप, जॉइंट्स व अन्य पीवीसी पार्ट्स |
| जल निकासी का गंतव्य | बहादुरगढ़ ड्रेन / पाक ड्रेन |
| सुरक्षित कृषि भूमि | 1,238 एकड़ |
| सुरक्षित सार्वजनिक संरचनाएं | 4 मंदिर और सरकारी स्कूल भवन |
| मोटरों का हस्तांतरण | पाइपलाइन पूर्ण होने के बाद सत्यापन के पश्चात |
| अनुमानित मोटर लागत | लगभग ₹2 लाख प्रति मोटर |
दहकोरा में दूसरे चरण के तहत 12,650 फीट पाइपलाइन और 5 मोटरों की स्वीकृति से लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या के समाधान का रास्ता तैयार हुआ है। इससे किसानों की फसलें, कृषि भूमि, धार्मिक स्थल और सरकारी स्कूल भवन जलभराव के खतरे से बच सकेंगे और गांव में कृषि व्यवस्था को अधिक स्थिरता मिलने की उम्मीद है।



