आपदा के समय जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं, तब कोई ईश्वरीय शक्ति ही सहारा बनती है। हिसार के पातन गांव के लिए वह शक्ति ‘संत रामपाल जी महाराज’ के रूप में प्रकट हुई। जहाँ ड्रेन टूटने से गांव का वजूद खतरे में था, वहां आज जीत की हरियाली मुस्कुरा रही है।
जब पातन बना ‘आंसुओं का समंदर’
पातन गांव में आई बाढ़ सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों का आर्थिक कत्ल था।
- खौफनाक मंजर: 5000 एकड़ (कृषि योग्य 3700 एकड़) जमीन 5 फीट पानी में डूब गई। 70% मकानों में दरारें आ गईं।
- मजबूर पलायन: छोटे-छोटे बच्चों और पशुओं को लेकर लोग गांव छोड़ने पर मजबूर हो गए। बिजाई की उम्मीद 0% रह गई थी।
- बड़ा नुकसान: अगर पानी न निकलता, तो गांव को करीब ₹20 करोड़ की रबी की फसल का सीधा नुकसान होता।
उम्मीद की आखिरी किरण: एक प्रार्थना पत्र
जब प्रशासन के प्रयास नाकाफी रहे, तब सरपंच पृथ्वी सिंह और ग्रामीणों ने बरवाला जाकर संत रामपाल जी महाराज से गुहार लगाई। संत जी ने बिना एक पल की देरी किए मानवता का हाथ थामा और गांव को जलमुक्त करने के लिए युद्धस्तर पर राहत सामग्री भेजी:
- 5 हाई-पॉवर मोटरें (15 हॉर्स पावर की)
- 2000 फुट मजबूत पाइपलाइन
- पूरी तरह निशुल्क: ग्रामीणों से इसके बदले एक पैसा भी नहीं लिया गया
असंभव का अंत और बिजाई का आगाज
संत जी द्वारा भेजी गई मोटरों ने दिन-रात काम किया। जो पानी महीनों से जमा था, उसे सीमाओं से बाहर खदेड़ दिया गया।
- खुशहाली की वापसी: दिसंबर के मध्य तक 3700 एकड़ में गेहूं और सरसों की 100% बिजाई पूरी हो गई।
- घर वापसी: जो परिवार दर-दर भटक रहे थे, वे वापस अपने घरों में लौटे और खेतों में काम शुरू किया।
ग्रामीणों का भावुक संदेश
गांव के बुजुर्ग बताते हैं, “हम भूखे मरने की कगार पर थे। कई तथाकथित बड़े लोग आए और देखकर चले गए, लेकिन मदद सिर्फ संत रामपाल जी ने की।” सरपंच पृथ्वी सिंह का कहना है कि उन्होंने अपने 53 साल के जीवन में ऐसी सेवा और ऐसा परोपकार पहले कभी नहीं देखा।
मानवता का सर्वोच्च उदाहरण
आज के दौर में जहाँ धर्म के नाम पर दुकानें चल रही हैं, वहां संत रामपाल जी महाराज ने उस संदेश को जीवंत किया है कि “जीना तो है उसी का, जिसने ये राज जाना… औरों के काम आना।” पातन गांव की लहलहाती फसलें इस बात का प्रमाण हैं कि जब नेक नियत और आध्यात्मिक शक्ति साथ मिलती है, तो प्रकृति की तबाही को भी खुशहाली में बदला जा सकता है।



