Baisakhi Festival 2021 [Hindi]: वैशाख माह में आने वाला एक महत्वपूर्ण त्यौहार है बैसाखी। इस वर्ष यह त्यौहार 14 अप्रैल, 2021 को मनाया जाएगा। बैसाखी का आगमन प्रकृत्ति के परिवर्तन को दर्शाता है । सूर्य का मेष राशि में प्रवेश बैसाखी का आगमन है। बैसाखी पर्व विशेष रुप से किसानो का पर्व है। भारत के उत्तरी प्रदेशों विशेष कर पंजाब में बैसाखी पर्व के दौरान किसानों की गेहूँ की फसल पक कर तैयार हो जाती है और इस दिन गेहूं, तिलहन, गन्ने आदि की फसल की कटाई शुरू होती है। अपने खेतों में गेहूँ की भरी बालियां देख कर किसान फूले नहीं समाते, और भगवान को अपना धन्यवाद प्रकट करते हैैं कि हमारी मेहनत आपकी कृपा से ही रंग लाई किंतु सतलोक में हमेशा बैसाखी रहती है हम पूर्णगुरु अर्थात सतगुरु से सतनाम लेकर सत भक्ति करके ही सतलोक जा सकते हैं । इस बैसाखी पर हम जानेंगे कि कौन है पूर्ण गुरु और कौन है पूर्ण परमात्मा?

Baisakhi Festival 2021 के मुख्य बिंदु

  • कब, कैसे, और क्यों मनाते हैं वैशाखी, कैसे हुई इसकी शुरुआत?
  • कौन है पूर्ण गुरु, उसकी पहचान क्या है?  कौन है पूर्ण परमात्मा?
  • सतलोक में हमेशा रहती है बैसाखी, हम भी सतलोक में ही मनाएंगे वैशाखी
  • सुख, शांति, समृद्धि, मोक्ष चाहने वाली प्रभु प्रेमी सभी आत्माओं को महत्वपूर्ण संदेश

कब, कैसे, और क्यों मनाते हैं बैसाखी? कैसे हुई इसकी शुरुआत?

बैसाखी पर्व को खासतौर पर पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है. बैसाखी का पर्व कई मायनों में खास है, ऐसा माना जाता है कि बैसाखी के दिन ही गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्‍थापना की थी, सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह ने साल 1699 में बैसाखी के दिन ही आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की नींव रखी थी ।

लोकज्ञान के अनुसार इस दिन गंगा स्नान का बहुत महत्व है। हरिद्वार और ऋषिकेश में बैसाखी पर्व पर भारी मेला लगता है। बैसाखी के दिन सूर्य मेष राशि में संक्रमण करता है । इस कारण इस दिन को मेष संक्रान्ति भी कहते है। इसी पर्व को विषुवत संक्रांति भी कहा जाता है। बैसाखी पारम्परिक रूप से हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है। यह त्योहार हिन्दुओं, बौद्ध और सिखों के लिए महत्वपूर्ण है।

Baisakhi Festival 2021: क्यों अप्रैल माह के इस विशेष दिन को बैसाखी कहते हैं?

भारत में महीनों के नाम नक्षत्रों पर रखे गए हैं। बैसाखी के समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। विशाखा युवा पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को बैसाखी कहते हैं। इस प्रकार वैशाख मास के प्रथम दिन को बैसाखी कहा गया और पर्व के रूप में स्वीकार किया गया। बैसाखी के दिन ही सूर्य मेष राशि में संक्रमण करता है अतः इसे मेष संक्रांति भी कहते हैं।

सतलोक में मना सकते हैं सदा रहने वाली बैसाखी

देश भर में 13 -14 अप्रैल को बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार इस दिन हमारे सौर नव वर्ष की शुरुआत के रूप में भी जाना जाता है, धरती पर पर्व लोकवेद के अनुसार मनाए जाते हैं जिनका समय क्षणिक और सुख क्षणभंगुर होता है किंतु सतलोक में बैसाखी से असंख्य गुना ज़्यादा खुशी के पर्व हमेशा बने रहते हैं और सतगुरु के माध्यम से ही हम सब लोग वहां जा सकते हैं ।

कौन है पूर्ण गुरु, उसकी पहचान और कौन है पूर्ण परमात्मा? 

वर्तमान में पृथ्वी पर एकमात्र पूर्ण संत तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं जो सतनाम अर्थात सत मंत्रों को देने के अधिकारी हैं। गीता अध्याय 15 श्लोक 4, अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता ज्ञानदाता कहता है कि उस परमेश्वर की शरण में जा जिसकी कृपा से ही तू परम शान्ति तथा सनातन परम धाम सतलोक चला जाएगा। जहाँ जाने के पश्चात् साधक का जन्म-मृत्यु का चक्र सदा के लिए छूट जाता है।

जैसे हम वैशाखी को अपभ्रंश तरीके से बैसाखी बोलते हैं ऐसे ही कवीर साहेब को हम कबीर साहब बोलते हैं। कबीर साहेब जी को कुछ अन्य नामों से भी जाना जाता है जो निम्न हैं, (कबीर साहब, कबीर देव, अल्लाह कबीर, हक्का कबीर, ऑलमाइटी कबीर, संत कबीर, परमात्मा कबीर, सतपुरुष, अगम पुरुष, अलख पुरुष, अनामी पुरुष, जिंदा महात्मा, अल खिज्र) ।

नानक साहेब को भी परमेश्वर कबीर जी सतलोक लेकर गए थे और उनको तत्वज्ञान बताया था जिसे देखने के बाद उन्होंने कहा था:-

फाही सुरत मलूकी वेस, उह ठगवाड़ा ठगी देस।।

खरा सिआणां बहुता भार, धाणक रूप रहा करतार।।

मैं कीता न जाता हरामखोर, उह किआ मुह देसा दुष्ट चोर।

नानक नीच कह बिचार, धाणक रूप रहा करतार।।

प्रमाण:- गुरु ग्रन्थ साहिब के राग ‘‘सिरी‘‘ महला 1 पृष्ठ नं. 24 पर शब्द नं. 29

संखों लहर मैहर की उपजें कहर नहीं जहां कोई।

दास गरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोही। 

मन तू चल रे सुख के सागर, जहां शब्द सिंधु रत्नागर।।

परम संत गरीबदास जी महाराज जी ने अपनी अमृतवाणी में कहा है, इस काल के लोक में क्या खुशी मनाएं,  कभी भी कोई भी कहर टूट जाता है, परिवार के परिवार नष्ट हो जाते हैं , खड़ी और पकी फसल बर्बाद हो जाती है असमय आने वाली प्राकृतिक आपदायें हर समय चिंता का कारण बनी रहती हैं किंतु सतलोक के अंदर वैशाखी से भी असंख्य गुना सुंदर पर्व, माहौल, वातावरण हमेशा बना रहता है, हर समय परमात्मा के दर्शन सुलभ हैं,  सभी लोग आनंदित और सुखी रहते हैं । इसलिए सतलोक को सुख का सागर कहा जाता है अर्थात जैसे सागर का जल कभी समाप्त नहीं होता, वैसे ही सतलोक का सुख कभी समाप्त नहीं होता हमेशा बना रहता है।

सुख, शांति, समृद्धि, निरोगी काया और पूर्ण मोक्ष चाहने वालों के लिए महत्वपूर्ण संदेश 

हम सभी का सौभाग्य है कि वर्तमान में पूर्ण संत धरती पर मौजूद हैं अर्थात हम उनसे नाम दीक्षा लेकर सतनाम प्राप्ति करके अपना उद्धार करवा सकते हैं वर्तमान में वे जगतगुरु तत्वदर्शी संत कोई और नहीं, संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं जिन्होंने सभी सदग्रन्थों से प्रमाणित करके सच्चा आध्यात्मिक ज्ञान शिक्षित समाज के सामने रख दिया है। आप सभी से प्रार्थना है कि पूर्ण गुरु की वास्तविक जानकारी के लिए यूट्यूब पर “सतलोक आश्रमके माध्यम से आप सत्संग सुनें और नाम दीक्षा लेकर भक्ति करें और सतलोक चलें।