संत रामपाल जी महाराज ने पंघाल गांव में पहुंचाई लाखों की राहत सामग्री, तीन दिन में बदली बाढ़ग्रस्त क्षेत्र की तस्वीर

Published on

spot_img

हरियाणा के हिसार जिले की तहसील बरवाला के अंतर्गत आने वाला ग्राम पंघाल हाल ही में आई बाढ़ से गहराई तक प्रभावित हुआ था। लगातार बारिश और नालों के उफान से गांव का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पानी में डूब गया, जिससे खेत, घर, स्कूल और सार्वजनिक संस्थान सभी प्रभावित हुए।

गांव के प्रमुख इलाकों स्कूल परिसर, पीएचसी, पशु चिकित्सालय, कबीर कॉलोनी और श्मशान घाट में लंबे समय तक पानी भरा रहा। खेती-बाड़ी और पशुपालन पर निर्भर ग्रामीणों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया। सरकारी सहायता समय पर न मिल पाने से गांववासी बेहद निराश थे।

ग्राम पंचायत की पहल और सहायता की अपील

स्थिति बिगड़ती देख ग्राम पंचायत ने गांव की ओर से संत रामपाल जी महाराज को एक प्रार्थना पत्र भेजा गया।

पंचायत ने पत्र में गांव के जलभराव की स्थिति का उल्लेख करते हुए उच्च क्षमता वाली मोटरों, पाइपलाइन और अन्य उपकरणों की मांग की। पत्र के साथ पंचायत ने गांव का नक्शा और जलभराव वाले क्षेत्रों का विवरण भी संलग्न किया था। सरपंच प्रतिनिधि मोनू पंघाल ने बताया कि गांव के अधिकांश हिस्से में पानी जमा था और मोटरों की उपलब्धता न होने से निकासी संभव नहीं थी।

संत रामपाल जी महाराज का त्वरित संज्ञान

ग्राम पंचायत की यह अपील जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज तक पहुंचाई गई। उन्होंने तुरंत अपने अनुयायियों को राहत कार्य प्रारंभ करने का निर्देश दिया। केवल तीन दिनों के भीतर ट्रकों और ट्रैक्टरों से भरे कई वाहन पंघाल गांव पहुंचे, जिनमें भारी मात्रा में राहत सामग्री और उपकरण शामिल थे।

सेवादारों के अनुसार, इस सामग्री में 

  • 6 मोटरें (प्रत्येक 20 हॉर्स पावर),
  • 12,000 फीट पाइपलाइन,
  • 6 स्टार्टर सेट,
  • 6 सक्शन यूनिट,
  • तथा कनेक्शन और इंस्टॉलेशन के सभी उपकरण — शामिल थे ।

कुल सामग्री का अनुमानित मूल्य 20 से 22 लाख रुपये के बीच था।

राहत कार्यों की त्वरित शुरुआत

सामग्री गांव पहुंचते ही ग्राम पंचायत ने राहत कार्यों की रूपरेखा तैयार की। सेवादारों और ग्रामीणों ने मिलकर मोटरें स्थापित कीं और प्रमुख जलभराव क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाई। पहले चरण में स्कूल परिसर और पीएचसी क्षेत्र से पानी निकाला गया। इसके बाद कबीर कॉलोनी और खेतों की ओर कार्य शुरू हुआ। राहत कार्यों की शुरुआत के कुछ ही दिनों में गांव के कई हिस्सों से पानी निकाल लिया गया। गांव के एक वरिष्ठ नागरिक श्री रामदयाल पंघाल ने कहा, “तीन दिन पहले तक यहां सिर्फ पानी और निराशा थी। अब जहां मोटरें चल रही हैं, वहां उम्मीद दिख रही है। संत रामपाल जी महाराज ने जो किया, वह किसी सरकारी व्यवस्था से कहीं तेज़ और प्रभावी रहा।”

ग्रामीणों में उमड़ा आभार और विश्वास

राहत सामग्री पहुंचने के बाद गांव में उत्सव जैसा माहौल देखा गया। बच्चे और महिलाएं मोटरें और पाइपलाइनें देखकर उत्साहित थीं। गांव की महिलाओं ने इस सहयोग को “ईश्वर की कृपा” बताया। सरपंच प्रतिनिधि मोनू जी ने कहा कि, “जब कहीं से मदद नहीं मिल रही थी, तब यह सहायता हमारे लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। इतने कम समय में इतनी बड़ी राहत सामग्री मिलना अपने आप में चमत्कार है।”

ग्राम पंचायत ने राहत सामग्री को पंचायत संपत्ति के रूप में दर्ज किया है ताकि भविष्य में भी इसका उपयोग आपदाओं से निपटने में किया जा सके।

प्रशासनिक सहयोग की कमी और सामाजिक संगठन की भूमिका

स्थानीय प्रशासन द्वारा भेजी गई सीमित मोटरें और साधन इस जलभराव की गंभीरता के सामने नाकाफी साबित हुए। गांव के लोगों ने बताया कि सरकारी सहायता के लिए कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं मिला। ऐसे में संत रामपाल जी महाराज का त्वरित हस्तक्षेप एक उदाहरणीय जनसेवा के रूप में सामने आया।

Also Read: संत रामपाल जी महाराज ने 24 घंटे में मदद पहुंचाकर बाढ़ग्रस्त सागवान गाँव को किया पुनर्जीवित

संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी न केवल उपकरण लेकर पहुंचे, बल्कि स्थापना, संचालन और प्रशिक्षण में भी ग्रामीणों की सहायता की।

कृषि और जनजीवन में सुधार की दिशा

पानी निकलने के बाद किसानों ने खेतों की मरम्मत का कार्य प्रारंभ कर दिया है। खेतों में अब बुवाई की तैयारी चल रही है। कई किसान मानते हैं कि यदि यह सहायता समय पर नहीं मिलती, तो इस वर्ष की पूरी फसल बर्बाद हो जाती।

किसान रमेश पंघाल ने कहा, “20 हॉर्स पावर की एक मोटर लाखों रुपये की होती है। छह मोटरें और पाइपलाइन खरीदना हमारे लिए असंभव था। इस सहयोग से अब हम खेत बचा पाए हैं। ये केवल मदद नहीं, बल्कि जीवनदान है।”

सेवा और मानवता का सशक्त संदेश

संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों द्वारा हरियाणा के कई बाढ़ प्रभावित गांवों में इसी प्रकार की सहायता की जा रही है। गुराना, बदावड़ और ढाणी खान बहादुर जैसे गांवों में भी संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा राहत सामग्री भेजी गई है। हर स्थान पर ग्रामीणों की ओर से संगठन की पारदर्शी और तत्पर व्यवस्था की सराहना की जा रही है। 

सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज का स्पष्ट संदेश है कि- “मानवता की सेवा ही सच्चा धर्म है। जब कोई संकट में हो, तो बिना भेदभाव उसकी सहायता करना ही सच्चे साधक का कर्तव्य है।”

सकारात्मक परिवर्तन और सामाजिक उदाहरण

पंघाल गांव में इस राहत कार्य ने केवल बाढ़ से मुक्ति नहीं दिलाई, बल्कि समाज में सहयोग और संवेदना की भावना को भी मजबूत किया। गांव के युवा अब स्वयंसेवा समूह बनाने की तैयारी में हैं ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति का सामूहिक रूप से सामना किया जा सके। गांव में स्थिति सामान्य होने के बाद स्कूल खोलने और पंचायत भवन की मरम्मत का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। गांववासी इस सहायता को “नई शुरुआत” के रूप में देख रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज ने इसके अतिरिक्त भी अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से अनेकों निर्धन, बेसहारा और असहाय लोगों को निशुल्क भोजन और उच्च स्तरीय आवास की व्यवस्था करवाई है। 

निष्कर्ष

पंघाल गांव में संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई राहत सामग्री ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची सेवा केवल उपदेशों से नहीं, बल्कि कार्य और संवेदना के सम्मिलन से होती है। जहां सरकारी तंत्र असहाय था, वहां संत रामपाल जी महाराज की तत्परता ने उम्मीद की ज्योति जलाई। इस पूरे अभियान ने बाढ़ से जूझते हजारों ग्रामीणों को न केवल राहत दी, बल्कि यह विश्वास भी दिलाया कि संत रामपाल जी महाराज एकमात्र ऐसे संत हैं जो लेते नहीं बल्कि दोनों हाथों से लुटाते हैं। वे इतिहास से अब तक अकेले ऐसे संत हैं जो जानता के लिए चाहे उनकी अनुयायी हो या नहीं यह बिना देखे मदद के लिए आगे आए हैं।

Latest articles

सड़े हुए पानी से लहलहाती फसल तक: संत रामपाल जी महाराज ने कैसे बदली बांस खुर्द बिजान की तकदीर?

जहां कुछ महीनों पहले तक सिर्फ सड़ा हुआ पानी और किसानों की सिसकियां थीं,...

World Population Day 2026: The best time for world’s Population to Attain Salvation

Last Updated 04 July 2026, 1:16 PM IST | World Population Day 2026: Today...
spot_img

More like this