उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले की गोवर्धन तहसील का गांव नगलाकंजा पिछले तीन-चार सालों से एक ऐसी बेबसी झेल रहा था जिसने किसानों को खून के आंसू रुला दिया था। ब्रज की इस पावन भूमि के उपजाऊ खेत एक विशाल और गंदी झील में बदल चुके थे। लेकिन जब सरकारी तंत्र और प्रशासन ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया, तब तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ इन किसानों के लिए साक्षात भाग्य विधाता बनकर आई। संत जी के सेवादारों ने गांव में आकर एक ऐसा अभूतपूर्व कार्य किया जिसने गांव वालों की डूबती हुई दुनिया को फिर से आबाद कर दिया।
प्रशासन ने दिए सिर्फ ‘लॉलीपॉप’, 200 बीघा जमीन थी जलमग्न
नगलाकंजा गांव की स्थिति बेहद लाचार और दर्दनाक थी। गांव की करीब 150 से 200 बीघा उपजाऊ जमीन पिछले 3 से 4 सालों से गहरे बाढ़ के पानी में डूबी हुई थी। किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थीं और वहां पक्षी अटखेलियां कर रहे थे। हालात इतने खराब थे कि फसल और चारा न होने के कारण किसानों को अपने पशु तक 3-3 महीनों के लिए रिश्तेदारों के घर भेजने पड़ते थे।
गांव वालों ने बताया कि उन्होंने प्रशासन और नेताओं के चक्कर काट कर अपनी पीढ़ियां हार दीं। लेकिन उन्हें सिर्फ ‘लॉलीपॉप’ यानी खोखले आश्वासन मिले, धरातल पर पानी निकालने का एक भी काम नहीं हुआ। खेती न होने से किसान आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुके थे।
मुंडका आश्रम में अर्जी और 3 दिन में पहुंचा राहत काफिला
सरकार से पूरी तरह निराश होकर गांव की सरदारी ने एक आखिरी उम्मीद के साथ दिल्ली के मुंडका आश्रम में संत रामपाल जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई। गांव वालों ने हैरानी जताते हुए बताया कि संत जी के यहां मदद की रफ्तार किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं है। अर्जी लगाने के बाद अगले ही दिन ड्रोन से सर्वे हुआ, और तीसरे दिन राहत का एक विशाल काफिला नगलाकंजा की गलियों में खड़ा था।
राहत सामग्री में मिली 15 HP की मोटर और पूरा सेटअप
संत जी ने गांव को इस प्रलय से निकालने के लिए संसाधनों का ढेर लगा दिया। गांव वालों को दी गई मुफ्त सामग्री में शामिल था:
- 700 फुट लंबा 8 इंची मजबूत पाइप।
- पानी निकालने के लिए 15 हॉर्स पावर (HP) की एक विशाल और शक्तिशाली मोटर।
- मोटर तक कनेक्शन के लिए 660 फुट लंबा कॉपर वायर (बिजली की तार)।
- मोटर चलाने के लिए ऑटोमेटिक स्टार्टर, 20 फुट फ्लेक्सिबल पाइप, और सुंडिया।
- पाइप जोड़ने के लिए फेविकोल (SR), हर छोटा-बड़ा स्टील का नट-बोल्ट और फुट वाल्व।
सेवादारों ने स्पष्ट कर दिया कि यह करोड़ों का सामान अब हमेशा के लिए गांव की साझा अमानत (परमानेंट धरोहर) है और इसके लिए पंचायत को एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ेगा।
कथावाचकों पर कसा तंज, संत जी को बताया साक्षात भगवान
राहत सामग्री पहुंचने पर गांव वालों की आंखों में खुशी के आंसू थे। गांव वालों ने ढोल-नगाड़ों के साथ सेवादारों का स्वागत किया और ग्राम पंचायत ने पगड़ी पहनाकर उन्हें सम्मानित किया।
एक प्रबुद्ध नागरिक ने ब्रज भूमि के बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय कथावाचकों (जैसे देवकीनंदन, प्रेमानंद, अनिरुद्धाचार्य) पर खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि ये लोग कथा करने के 5 से 10 लाख रुपये लेते हैं, पर मुसीबत में किसानों को एक पाइप तक नहीं देते। ये सिर्फ अपना बिजनेस चला रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, संत रामपाल जी महाराज बिना किसी स्वार्थ और चंदे के हरियाणा से आकर यूपी के किसानों को जीवनदान दे रहे हैं। किसानों ने भावुक होकर उन्हें साक्षात नारायण और भगवान का अवतार बताया।
इंसानियत की सच्ची मिसाल और नया जीवनदान
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई इन शक्तिशाली मशीनों ने उस पानी को बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया है। अब नगलाकंजा के खेतों में सन्नाटा नहीं, बल्कि जल्द ही खुशहाली की नई फसल लहलहाएगी। किसानों ने बताया कि यह मदद न सिर्फ खेत वालों की, बल्कि पूरी 36 बिरादरी की मदद है जो इस अन्न पर निर्भर है। संत रामपाल जी महाराज की यह निस्वार्थ ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ समाज के लिए सच्ची इंसानियत की मिसाल बन चुकी है, जिसने लाचार किसानों को मौत के मुंह से निकाल कर नया जीवनदान दिया है।
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