‘जल समाधि’ से उबरता मुजादपुर: संत रामपाल जी महाराज की पहल से बदली तस्वीर

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हरियाणा के हिसार जिले की हांसी तहसील का मुजादपुर गाँव पिछले दो महीनों से एक त्रासदी का गवाह बना हुआ था। जहाँ कभी लहलहाती फसलें थीं, वहाँ केवल सिसकियाँ और गहरा पानी था। लेकिन जब सरकारी तंत्र की फाइलें सुस्त पड़ी थीं, तब एक आध्यात्मिक पहल ने ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद जगाई।

पिछले दो महीनों से मुजादपुर के खेत ही नहीं, बल्कि घर भी बाढ़ की चपेट में थे। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी थी कि ग्रामीण अपने ही घरों में जाने के लिए तरस रहे थे और दूसरों के यहां शरण लेने को मजबूर थे।

जब प्रशासनिक जटिलताओं और फाइलों के बीच मुजादपुर की उम्मीदें दम तोड़ रही थीं, तब संत रामपाल जी महाराज ने एक रक्षक की भूमिका निभाते हुए गांव का हाथ थामा। संत रामपाल जी महाराज ने बिना विलंब किए गांव की पुकार सुनी और पानी निकालने के लिए शक्तिशाली मोटरें तथा पाइप उपलब्ध कराए।

मुजादपुर के आवासीय क्षेत्रों और कृषि भूमि पर जल का आधिपत्य

गाँव की हालत बेहद पीड़ादायक और संवेदनशील बनी हुई थी। बीते दो महीनों से मुजादपुर पूरी तरह जलमग्न अवस्था में फँसा हुआ था। गाँव के हालात इतने भयावह थे कि किसी एक व्यक्ति की पीड़ा सुनकर ही आँखें नम हो जाएँ।

गाँव निवासी राजबीर जी ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे पिछले दो महीनों से अपने ही घर में प्रवेश नहीं कर पाए हैं। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “मैं अपने ही घर में चोरों की तरह बाहर से झांकता हूं, अंदर जाने का रास्ता तक नहीं बचा।”  

बाढ़ का प्रकोप इतना अधिक था कि अनेक परिवारों को अपने ही घर छोड़ने पड़े। खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह पानी में डूब चुकी थी और आने वाले समय की बुवाई भी पूरी तरह ठप हो गई थी। पूरे गाँव में जीवन जैसे थम-सा गया था।

जहाँ उम्मीदें टूट रही थीं, वहाँ एक अन्तिम किरण ने सहारा दिया

जब प्रशासनिक स्तर से ग्रामीणों को कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी, तब सरपंच प्रतिनिधि सहित गाँव के कुछ जागरूक लोग सतलोक आश्रम, श्री धनाना धाम पहुँचे। वहाँ उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों को गाँव की अत्यंत दयनीय परिस्थितियों से अवगत कराया।

इसके पश्चात उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के चरणों में पहुँचकर सहायता की विनम्र प्रार्थना की। कई एकड़ भूमि में भरे पानी को बाहर निकालने के लिए तत्काल उच्च क्षमता वाले संसाधनों की आवश्यकता थी। ग्रामीणों की प्रमुख माँगों में शामिल थे: 

  • दो 20-हॉर्सपावर (HP) की मोटरें 
  • 2 हजार फीट 8 इंची पाइप 

यह भी पढ़े: हरियाणा/हिसार: संदलाना गांव के खेतों में फिर लौटी बहार, संत रामपाल जी महाराज ने असंभव को किया संभव

एक अर्जी और स्थायी समाधान का महा-काफिला

संत रामपाल जी महाराज ने ग्रामीणों की विनती को बिना किसी विलंब के स्वीकार कर लिया। उन्होंने तुरंत सेवादारों को निर्देश दिए कि बाढ़ राहत सेवा को यथाशीघ्र गाँव तक पहुँचाया जाए, ताकि संकट की घड़ी में पीड़ितों को तत्काल सहायता मिल सके।

संत रामपाल जी महाराज ने गांव को इस भीषण आपदा से निकालने के लिए वह सब कुछ उपलब्ध कराया जिसकी मांग पंचायत ने की थी। 

प्राप्त राहत सामग्री का विवरण:

रोहतक के हांसी के मुजादपुर गाँव में दो महीने से 400 एकड़ जलभराव: संत रामपाल जी द्वारा स्थायी समाधान
सामग्रीविवरण
पाइप12,000 फीट (8 इंची)
मोटर15 HP की दो विशाल मोटरें + स्टार्टर
तकनीकी सामानकेबल, नट-बोल्ट, फेविकोल और अन्य आवश्यक उपकरण

मुजादपुर की आपबीती: संत की करुणा से मिला जीवनदान

मुजादपुर के स्वागत द्वार पर जब राहत सामग्री से लदे ट्रक पहुंचे, तो पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल हो गया। ग्रामीणों ने अपने मन की भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा

  • “संत रामपाल जी महाराज जी अत्यंत सराहनीय और निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। वे चुनावी राजनीति और किसी भी निजी स्वार्थ से परे हैं।”
  • ग्रामीणों ने कहा कि “सरकार की मदद के लिए तो कागज काले करने पड़ते हैं। लेकिन यहां संत जी से एक प्रार्थना पर लाखों का सामान आ गया।”
  • बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा कि “यह काम इंसान के बस का नहीं है। यह तो भगवान वाला काम है।”
  • ग्रामीण ने भावुक होकर बताया कि “संत जी पूरे प्रदेश में किसान मसीहा के नाम से जाने जा रहे हैं। उनका हृदय के गहराई से धन्यवाद करते हैं।”
  • सरपंच ने तहे दिल से स्वागत करते हुए कहा कि, “हमने दो बार बरवाला आश्रम में प्रार्थना की और महाराज जी ने हमारी सुध ली। आज हमारे सामने समाधान खड़ा है।”

ग्रामीणों ने इस मदद को “एक करिश्मा” बताया है।

ग्रामीणों को सौंपा गया उत्तरदायित्व

संत रामपाल जी महाराज ने सहायता के साथ-साथ ग्रामीणों को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी है। उनके द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए:

  1. समय पर जल निकासी: ग्रामीणों को एकजुट होकर निर्धारित समय में पानी निकालना होगा ताकि अगली फसल (गेहूं) की बिजाई हो सके।
  2. निगरानी और प्रलेखन: गांव की वर्तमान स्थिति की ड्रोन वीडियो बनाई गई है। दूसरी वीडियो पानी निकलने के बाद और तीसरी वीडियो लहलहाती फसल के समय बनाई जाएगी, और यह सभी सतलोक आश्रमों में चलाई जाएगी।
  3. स्पष्ट निर्देश: बाढ़ का पानी निकालने हेतु आवश्यकतानुसार और भी समान बिना हिचकिचाए प्रार्थना करके प्राप्त कर सकते हैं। संत जी ने स्पष्ट कहा कि “समान चाहे जितना भी लगे, लेकिन बाढ़ का पानी निकलना चाहिए़।”

संत रामपाल जी महाराज स्वयं किसान परिवार से हैं, इसलिए वे भली-भांति समझते हैं कि यह आपदा किसानों के साथ-साथ 36 बिरादरी के जीवन और संपत्ति पर भी संकट है।

दीन-दुखियों के रक्षक: लोक-कल्याण हेतु प्रभु का स्वरूप

मुजादपुर कोई अकेला गाँव नहीं है। संत रामपाल जी महाराज की ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ के अंतर्गत अब तक अनेकों गाँवों में बाढ़ राहत सेवाएँ सफलतापूर्वक पूर्ण की जा चुकी हैं। किसानों की पीड़ा को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने आश्रमों के निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोककर अपने समस्त संसाधन और धन जनसेवा में समर्पित कर दिए।

अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज ने जरूरतमंद और गरीब परिवारों को रोटी, कपड़ा, शिक्षा, चिकित्सा एवं आवास जैसी मूल आवश्यकताएँ उपलब्ध कराकर उनके जीवन की मूल समस्याओं का समाधान किया है। 

सभी राहत प्रयासों का सम्पूर्ण कवरेज SA NEWS CHANNEL द्वारा निरंतर उनके सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर व्यवस्थित रूप से दर्ज कर प्रकाशित किया जा रहा है।बाढ़ से प्रभावित विभिन्न ग्रामों की विस्तृत और ज़मीनी रिपोर्टिंग देखने के लिए अवलोकन करें: बाढ़ राहत | SA News Channel

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