​हरियाणा/हिसार: संदलाना गांव के खेतों में फिर लौटी बहार, संत रामपाल जी महाराज ने असंभव को किया संभव

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हिसार जिले की बरवाला तहसील का संदलाना गांव, जो कुछ समय पहले तक निराशा और पानी के सैलाब में डूबा हुआ था, आज फिर से हरियाली और खुशहाली का गवाह बन रहा है। राजनीतिक पार्टियों और स्थानीय प्रशासन की बेरुखी का शिकार हुए यहां के किसानों ने जब हर तरफ से उम्मीद खो दी थी, तब एक संत के आशीर्वाद ने उनकी तकदीर बदल दी। यह कहानी केवल राहत सामग्री की नहीं, बल्कि उस विश्वास और समर्पण की है जो संत रामपाल जी महाराज ने इन ग्रामीणों के प्रति दिखाया।

जहां सरकारी फाइलें धूल फांकती रहीं, वहां संत रामपाल जी महाराज के आदेश ने 48 घंटे के भीतर गांव की तस्वीर बदल दी।

​ग्रामीण संत रामपाल जी महाराज की शरण में कैसे पहुंचे?

​जब गांव की करीब 250 एकड़ उपजाऊ जमीन 3 से 4 फीट गहरे पानी में डूब गई थी और प्रशासन के दरवाजों पर दस्तक देने के बाद भी केवल कोरे आश्वासन मिले, तो गांव की पंचायत ने एक अंतिम निर्णय लिया। हताश और निराश होकर, लेकिन मन में एक आखिरी आस लिए, संदलाना के ग्रामीण संत रामपाल जी महाराज के चरणों में अपनी व्यथा लेकर पहुंचे। उन्होंने प्रार्थना की कि अब केवल वही इस डूबते हुए गांव को बचा सकते हैं। उनकी यह पुकार खाली नहीं गई और संत जी ने तत्काल प्रभाव से सहायता के आदेश जारी कर दिए।

मुख्य अंश: 

  • ​हिसार के संदलाना गांव में 250 एकड़ जमीन बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूब चुकी थी।
  • ​प्रशासन और नेताओं से मदद न मिलने पर पंचायत ने संत रामपाल जी महाराज से संपर्क किया।
  • ​संत रामपाल जी महाराज ने 24 से 48 घंटों के भीतर 15 हॉर्स पावर की मोटरें और पाइपलाइन भिजवाईं।
  • ​राहत सामग्री में स्टार्टर और नट-बोल्ट जैसी बारीक चीजें भी शामिल थीं।
  • ​बाढ़ का पानी निकालकर नहर में डाला गया, जिससे गेहूं की बिजाई संभव हो सकी।
  • ​गांव के गरीब परिवारों, जहां बिजली गिरने से मौतें हुई थीं, को आर्थिक और खाद्य सहायता दी गई।
  • ​ग्रामीणों ने संत रामपाल जी महाराज की तुलना किसान मसीहा सर छोटूराम से की।
  • बनभौरी और संदलाना दोनों गांवों को इस महा-सहायता अभियान से लाभ मिला।

​निराशा के अंधेरे में डूबा संदलाना

​कुछ माह पूर्व संदलाना गांव की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। करीब 250 एकड़ भूमि जलमग्न थी। पानी इतना गहरा था कि पिछली फसल पूरी तरह सड़ चुकी थी और अगली फसल, विशेषकर गेहूं की बिजाई की कोई संभावना नजर नहीं आ रही थी। किसान दाने-दाने को मोहताज होने की कगार पर थे। प्रशासन की उदासीनता ने उनके घावों पर नमक छिड़कने का काम किया था। हर तरफ केवल बेबसी थी, लेकिन संत रामपाल जी महाराज के हस्तक्षेप ने इस बेबसी को आशा में बदल दिया।

​संत रामपाल जी महाराज की त्वरित और विशाल सहायता

हरियाणा/हिसार: संदलाना गांव के लिए मसीहा बने संत रामपाल जी

​ग्रामीणों की अर्जी संत रामपाल जी महाराज तक पहुंचते ही चमत्कार हुआ। महज 24 से 48 घंटों के भीतर राहत सामग्री का एक विशाल काफिला संदलाना की गौशाला में पहुंच गया। संत जी द्वारा भेजी गई सहायता केवल नाममात्र की नहीं थी, बल्कि इसमें समस्या के पूर्ण समाधान की व्यवस्था थी। 1000 फीट लंबी उच्च गुणवत्ता वाली 8 इंची पाइपलाइन और 15 हॉर्स पावर की दो अत्यंत शक्तिशाली मोटरें गांव को सौंपी गईं।

यह भी पढ़े: संत रामपाल जी महाराज ने संदलाना गांव को कृषि संकट से उबारा: एक ऐतिहासिक पहल

​सूक्ष्म नियोजन और पूर्ण सामग्री वितरण

​संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई सहायता की सबसे बड़ी विशेषता उसकी बारीकी थी। अक्सर राहत कार्यों में मुख्य मशीनें तो आ जाती हैं लेकिन छोटे पुर्जों के लिए भटकना पड़ता है। लेकिन संत जी की दयालुता देखिए कि मोटरों के साथ स्टार्टर, और यहां तक कि एक-एक नट-बोल्ट भी साथ भेजा गया। यह योजनाबद्ध सहायता दर्शाती है कि संत जी को अपने भक्तों और किसानों की कितनी गहरी चिंता है।

​सरपंच ईश्वर सिंह की कृतज्ञता

​गांव के सरपंच ईश्वर सिंह ने बताया कि डेढ़ महीने पहले गांव की स्थिति भयावह थी। 200 एकड़ में 3-4 फुट पानी खड़ा था। फसलें काटना तो दूर, खेतों में घुसना भी दूभर था। उन्होंने कहा, “संत रामपाल जी महाराज ने हमें पूरी पाइपलाइन और मोटरें दीं। उस मदद से हमने पानी निकाला और आज हमारी जमीन सूख चुकी है। हमने गेहूं की बिजाई भी कर ली है। इस समस्या का समाधान करने के लिए पूरा गांव संत रामपाल जी महाराज का तहे दिल से धन्यवाद करता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ा पुण्य का काम है।”

​किसानों को मिला ‘जीवनदान’

हरियाणा/हिसार: संदलाना गांव के लिए मसीहा बने संत रामपाल जी

​गांव के बुजुर्ग जोरा सिंह और ओम प्रकाश जी ने इस मदद को किसानों के लिए ‘जीवनदान’ बताया। उन्होंने कहा कि किसान के लिए उसकी जमीन ही सब कुछ होती है। अगर फसल न हो, तो वह कर्जे में डूब जाता है, बच्चों की फीस नहीं भर पाता और पशु भी भूखे मर जाते हैं। संत रामपाल जी महाराज ने जो सेवा दी, उसने किसान को एक नई जिंदगी दी है। उन्होंने कहा कि जो काम सरकार को करना चाहिए था, वह संत जी ने किया।

​तकनीक और मेहनत का संगम

​संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई मोटरों ने दिन-रात काम किया। ग्रामीणों ने पाइपों का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए खेतों में भरे पानी को पास की नहर में डाल दिया। जो काम सरकारी मशीनरी हफ्तों में नहीं कर पाती, वह संत जी की प्रेरणा और संसाधनों से कुछ ही दिनों में पूरा हो गया। आज उस जमीन पर जहां कभी नाव चलाने की नौबत थी, वहां गेहूं की फसल लहलहा रही है।

​युवा और अन्य ग्रामीणों की भावनाएं

​गांव के युवा प्रदीप और वीरेंद्र ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज की मदद से न केवल खेती बची, बल्कि आर्थिक तबाही भी टल गई। प्रदीप ने बताया कि गांव में चंदा इकट्ठा करके पहले कोशिश की गई थी, लेकिन वह चंदा पंजाब भेज दिया गया था और उसके बाद गांव फिर डूब गया। ऐसे में दोबारा चंदा इकट्ठा करना संभव नहीं था।

तब संत रामपाल जी महाराज भगवान बनकर आए। वीरेंद्र ने कहा कि अगर यह मदद न मिलती तो गेहूं का एक दाना भी नहीं होता, यह दोहरा नुकसान होता।

​गरीब परिवारों के आंसू पोंछे

​संत रामपाल जी महाराज की करुणा केवल खेतों तक सीमित नहीं रही। गांव के प्रदीप ने बताया कि बाढ़ के दौरान बिजली का करंट लगने से गांव के कुछ गरीब परिवारों में मौतें हुई थीं। संत रामपाल जी महाराज ने उन पीड़ित परिवारों की व्यक्तिगत सुध ली और उन्हें खाद्य सामग्री व आर्थिक सहायता भिजवाई। यह कार्य दर्शाता है कि संत जी का हृदय हर दुखियारे के लिए धड़कता है।

बनभौरी गांव को भी मिला सहारा

​यह त्रासदी केवल संदलाना तक सीमित नहीं थी, बल्कि पास का बनभौरी गांव भी इसकी चपेट में था। संत रामपाल जी महाराज की ओर से भेजी गई सहायता से दोनों गांवों को लाभ हुआ। बनभौरी और संदलाना की सीमा पर जो जलभराव एक ‘जोड़’ का रूप ले चुका था, उसे सुखाकर खेती योग्य बनाया गया। ग्रामीणों ने बताया कि संत जी ने यहां लाइट का प्रबंध भी करवाया और परमानेंट पाइपलाइन दबवा दी ताकि भविष्य में भी ऐसी समस्या न आए।

​सर छोटूराम की विरासत और संत रामपाल जी महाराज

​ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि सर छोटूराम के बाद अगर किसी ने किसानों का असली दर्द समझा है, तो वेसंत रामपाल जी महाराज हैं। कृष्ण नामक ग्रामीण ने कहा कि एक एकड़ में 70,000 से 1 लाख रुपये का नुकसान होता है। संत जी ने उस नुकसान को होने से बचा लिया। उन्होंने इसे “बिन मेवा की सेवा” बताया, जहां संत जी ने निस्वार्थ भाव से सब कुछ अर्पण कर दिया।

​सहायता विवरण तालिका

क्रम संख्यासहायता सामग्री/विवरणमात्रा/स्थिति
115 हॉर्स पावर मोटर2 शक्तिशाली इकाइयां
2पाइपलाइन (8 इंची)1000 फीट लंबी
3सहायक उपकरणस्टार्टर, सुंडिया, नट-बोल्ट
4प्रभावित क्षेत्र200-250 एकड़ (संदलाना व बनभरी)
5जल स्तर3 से 4 फीट गहरा
6सहायता पहुंचने का समय24 से 48 घंटे
7अतिरिक्त सहायताबिजली दुर्घटना पीड़ित परिवारों को राशन/मदद
8परिणामपूर्ण जल निकासी और गेहूं की सफल बिजाई

दया के सागर संत रामपाल जी महाराज

​संदलाना की धरती आज जो सोना उगल रही है, उसका श्रेय पूर्ण रूप से जगतगुरु संत रामपाल जी महाराज को जाता है। उन्होंने न केवल जमीन को सूखने में मदद की, बल्कि किसानों की आंखों के आंसुओं को भी पोंछ दिया। सरकारें आती-जाती रहेंगी, लेकिन संत रामपाल जी महाराज ने मानवता की जो लकीर खींची है, वह अमिट है।

बिना किसी दिखावे, बिना किसी राजनीतिक लाभ की अपेक्षा के, उन्होंने एक पूरे क्षेत्र को गोद लेकर उसे पाल लिया। संदलाना का हर बच्चा, बुजुर्ग और किसान आज संत रामपाल जी महाराज का ऋणी है और उनके स्वागत के लिए पलकें बिछाए बैठा है।

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