रोहतक के खेरड़ी गांव की यह दास्तां उस दौर की है, जब पूरा इलाका जलमग्न हो चुका था और चारों ओर सिर्फ पानी का पहरा था। प्रलयंकारी बाढ़ ने गांव की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ खेती को तहस-नहस कर दिया था। धान और गन्ने की खड़ी फसलें पानी में गलकर नष्ट हो गईं, जिससे आगामी सीजन में गेहूं बोने की बची-खुची उम्मीद भी पूरी तरह टूट चुकी थी। हताशा का सबसे बड़ा कारण यह था कि ग्रामीण राहत की आस में हर मुमकिन चौखट पर गुहार लगा चुके थे। गांव के मुखिया और पंचों के मुताबिक, वे अपनी फरियाद लेकर रोहतक के जिला उपायुक्त (डीसी) के पास भी पहुंचे, मगर वहां से उन्हें जवाब मिला कि सरकारी कोष और संसाधन पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। इस प्रकार, सरकारी तंत्र ने ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़ दिया था।
खेरड़ी गांव के लोग संत रामपाल जी महाराज के परोपकारी कार्यों से पहले से ही अच्छी तरह वाकिफ थे। उनके अन्नपूर्णा अभियान के माध्यम से गांव के 20 जरूरतमंद परिवारों को हर माह राशन उपलब्ध कराया जा रहा था, और दो निराश्रित परिवारों को पक्के घर भी बनाकर दिए जा चुके थे। यही वजह थी कि जब प्रशासन की तरफ से ग्रामीणों को पूरी तरह निराशा हाथ लगी, तो 10-12 पंचायत सदस्य अपनी अंतिम आस लेकर संत रामपाल जी महाराज के पास पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़े; महज एक बार गुहार लगाते ही उनकी बात सुन ली गई। संत रामपाल जी महाराज तक प्रार्थना पहुंचने के मात्र 5 से 6 दिनों के भीतर ही राहत सामग्रियों से लबालब गाड़ियां खेरड़ी गांव पहुंच चुकी थीं।
संत रामपाल जी महाराज जी ने कई एकड़ जलमग्न भूमि से पानी निकालने के लिए भारी-भरकम उपकरण भेजे हैं:
- 11,000 फुट (8 इंची) पाइप
- तीन 15-HP (हॉर्सपावर) की मोटरें
मदद इतनी व्यापक थी कि राहत सामग्री के साथ नट-बोल्ट, पेच, क्लिप, फिक्स वॉल, बैंड, डोरी और यहां तक कि पाइप को चिपकाने के लिए फेविकोल भी भेजा गया था ताकि काम में कोई बाधा न आए।
इन उपकरणों ने डेढ़ महीने तक दिन-रात काम करके खेतों के अथाह पानी को गांव की सीमाओं से बाहर खदेड़ दिया। जिन खेतों में कुछ हफ्ते पहले मौत का सन्नाटा और कर्ज का खौफ तैर रहा था, आज वहां का नजारा किसी उत्सव जैसा है।
खेरड़ी गांव का कायाकल्प: पहले और बाद की स्थिति
संत रामपाल जी महाराज द्वारा भेजी गई मशीनों और त्वरित सहायता से गांव में जो अभूतपूर्व बदलाव आया, उसे नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है:
| विवरण | संत रामपाल जी महाराज की सहायता से पूर्व | संत रामपाल जी महाराज की सहायता के बाद |
| जल स्तर और फैलाव | खेतों में 3 से 5 फुट तक गहरा पानी भरा था, स्कूल का ग्राउंड और गलियां जलमग्न थीं। | डेढ़ महीने की निरंतर निकासी के बाद सैकड़ों एकड़ खेतों से पानी का सफाया हो गया। |
| कृषि भूमि की स्थिति | सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि जलभराव के कारण पूरी तरह बेकार पड़ी थी। | लगभग सारी जमीन से पानी निकल चुका है और 80% से अधिक भूमि पर बिजाई पूरी हो चुकी है। |
| खेतों का माहौल | खेतों में फसलों की जगह मौत का सन्नाटा और बर्बादी का मंजर था। | चारों तरफ ट्रैक्टरों की गूंज है और गेहूं की बिजाई की धूल उड़ रही है। |
| ग्रामीणों की मानसिक स्थिति | फसलें डूबने और अगली बिजाई न होने की आशंका से किसान आत्महत्या की कगार पर थे। | किसानों के चेहरे पर खोई हुई मुस्कान लौट आई है और भविष्य के प्रति उम्मीद जगी है। |
| आर्थिक संकट | ठेके (किराए) की जमीन के पैसे डूबने और बच्चों के पालन-पोषण का गंभीर संकट था। | समय पर बिजाई होने से आर्थिक भरपाई की राह खुली और कंगाली का डर दूर हुआ। |
आंखों देखा हाल: ग्रामीणों की जुबानी, संत की कहानी
खेरड़ी गांव के किसानों और ग्रामीणों ने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी आपबीती और संत रामपाल जी महाराज के प्रति अपना आभार व्यक्त किया:
सतीश (स्थानीय किसान):
“पूरे खेरडी गांव की सैकड़ों एकड़ जमीन 4-5 फुट पानी में डूबी थी। सरकार से कोई मदद नहीं मिली। तब हम संत रामपाल जी महाराज के पास गए। उन्होंने हमारी जरूरत के अनुसार पाइप और मोटर दी। लगभग डेढ़ महीने की मेहनत से पानी निकाला गया। सैकड़ों एकड़ में थोड़ा बहुत ही जमीन से पानी निकालना शेष रह सकता है, बाकी सारा पानी संत जी की दया से निकल जाएगा। बस सारा संत रामपाल जी की सहायता से ही हुआ है जी। आज ट्रैक्टर चल रहे हैं और खेतों में बिजाई हो रही है। अगर महाराज जी सहायता न करते, तो ठेके पर जमीन लेने वाले कर्जदार किसान बड़ी मुश्किल में आ जाते।”
मुकेश (ग्रामीण):
“हालत इतने बुरे थे कि बाइक भी खेत में नहीं जा पा रही थी, जिससे पशुओं के लिए हरा चारा लाने में बहुत दिक्कत हुई और पशु बेहाल हो गए। स्कूल का ग्राउंड और गलियाँ पानी से फुल थीं, जिससे बच्चों को परेशानी हुई। दो-तीन मकान बंद हैं, लोग गाँव से चले गए। अधिकारियों से मदद नहीं मिली, तब संत रामपाल जी की मदद से पानी निकला और बिजाई हो सकी।”
मनीष (युवा किसान):
“उस टाइम 10-12 किल्लों में कम से कम तीन-चार फीट बहुत ज्यादा पानी भरा था। सरकार ने कुछ नहीं दिया और पानी निकालने का कोई रास्ता नहीं था। एक फसल खराब हो चुकी थी, दूसरी भी हो जाती तो बहुत बुरे हालात हो जाते। किसी ने ₹50,000 तो किसी ने ₹500 ठेके पर जमीन ली है, उसका ठेका कैसे देते ? महाराज जी की मोटर-पाइप से पानी निकला, नहीं तो बिजाई की कोई उम्मीद नहीं थी। अब कुछ नुकसान कम हो जाएगा।”
अन्य ग्रामीणों के उद्गार:
- “हमारे 10 किले थे और दसों में पानी था। हालात इतने खराब थे कि फसल पानी ने मार दी थी और हमारे बस मरने वाले काम हो रहे थे। अगर संत रामपाल जी महाराज मोटर-पाइप न देते, तो बिजाई नहीं होनी थी। अब बच गए, तो हमें रामपाल महाराज ने ही बचाया है।।”
- “रोड से लेकर खेतों तक हर तरफ सिर्फ पानी फुल भरा हुआ था, यहाँ तक कि खड़े होने का भी कोई आसार नहीं था। कहीं से कोई सपोर्ट या सहायता नहीं मिल रही थी, जिससे पानी निकलने की कोई उम्मीद नहीं लग रही थी। हालात इतने बुरे थे कि आगे भूखे मरने की नौबत आ रही थी और लोग बातें करने लगे थे कि किसान मर गया, अब आगे बिजाई कभी नहीं होगी।”
कलयुग में मानवता की मिसाल
खेरड़ी गांव की मिट्टी और वहां उड़ रही ट्रैक्टरों की धूल आज इस बात की गवाह है कि जब संकट के समय सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब सच्ची करुणा और अध्यात्म ही इंसान का सहारा बनता है। संत रामपाल जी महाराज ने संकट की इस घड़ी में खेरड़ी गांव के किसानों का हाथ थामकर उन्हें कंगाली और आत्महत्या के खौफ से बाहर निकाला है। आज गांव का प्रत्येक परिवार इस अद्वितीय और निस्वार्थ सहायता के लिए नतमस्तक है। उनके इस व्यावहारिक कदम ने यह साबित कर दिया है कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, जो किसी उजड़े हुए जीवन को फिर से खुशहाली के रास्ते पर ला खड़ा करता है।



